LATEST ARTICLES

मंत्री ने

मंत्री ने चांटे का निशाना बनाया अकोला अस्पताल के कुक को

कोरोना मरीजों के भोजन ढंग के नहीं मिलने की शिकायत का किया किचन में मुआयना  अकोला : महाराष्ट्र के उद्धव ठाकरे सरकार के मंत्री बच्चू कडू ने इस बार अपनी नाराजगी शासकीय अस्पताल के कुक पर उतारा है. कुक को चांटा लगाते हुए वे कैमरे में कैद हो चुके हैं और यह वीडियो इंटरनेट में वायरल हो गया है.   काल शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय, अकोला येथे कोविड रुग्णालयात रुग्णांना दिल्या जाणाऱ्या अन्नाची तपासणीकेली व रुग्णांच्या भेटी घेऊन विचारपूस करण्यात आली. pic.twitter.com/a7WQqAFX7f—BACCHU KADU (@RealBacchuKadu) April6, 2021 मंत्री ने कुक को चांटा लगाने की अपनी कार्रवाई को उचित बताया है. उन्होंने पत्रकारों से कहा कि उन्हें शिकायत मिली थी कि शासकीय अस्पताल, अकोला के मरीजों को ढंग का भोजन नहीं मिल रहा है. इस पर उन्होंने अस्पताल जाकर किचन का मुआयना किया. कडू ने देखा कि अस्पताल के किचन में बनीं रोटियों और सब्जियां घटिया दर्जे की थीं. अस्पताल में भर्ती  मरीजों ने भी मंत्री से शिकायत की. बच्चू कडू  सभी मरीजों का हाल भी जाना. उन्होंने पाया कि कुक सुनील मोरे किचन इंचार्ज साहेबराव कालमेथे के निर्देशों का पालन नहीं कर रहा है. कालमेथे ने बताया कि अस्पताल में भर्ती 500 कोरोना मरीजों के लिए प्रतिदिन 5 किलोग्राम गेहूं का आटा दिया जाता है. लेकिन कुक इसे मात्र 3 किलोग्राम ही बताता है. जबकि कुक सुनील मोरे ने मंत्री को बताया कि वह प्रतिदिन 6 किलोग्राम आटे की रोटियां पका रहा है. उसके जवाब से नाराज मंत्री ने चांटा रसीद कर दिया.   चांटा मारने की इस घटना के बाद मंत्री बच्चू कडू ने शिकायत की जांच के आदेश दिए हैं. इसकी जांच अब एसडीएम नीलेश अपर कर रहे हैं. इधर अस्पताल की डीन डॉ. मीनाक्षी गजभिए ने माना कि वेंडर से किचन के लिए खरीदे जा रहे भोजन सामग्री और सब्जियों का रिकार्ड अनेक वर्षों से नहीं रखा जा रहा है. उन्होंने बताया कि अस्पताल को मिलने वाले 60 लाख रुपए की सालाना बजट राशि में से 25 लाख रुपए किचन पर खर्च किया जाता है. 
अनिल

अनिल देशमुख के बचाव में अब भी उद्धव सरकार

CBI जांच के हाईकोर्ट के फैसले को SC में दी चुनौती, न्यायिक जांच के भी आदेश महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने गृहमंत्री के पद से भले ही अनिल देशमुख से इस्तीफा ले लिया है, लेकिन उनके बचाव में वह CBI जांच के फैसले का विरोध करने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है.   बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से CBI को अनिल देशमुख के खिलाफ प्राथमिक जांच करने का आदेश दिया गया था. इसी फैसले को उद्धव सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. इधर इस्तीफे के बाद नई दिल्ली पहुंचे पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने भी अपने खिलाफ पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की CBI से प्रारंभिक जांच कराने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दे दी है. रिटायर्ड जज से जांच कराने की घोषणा भी   इससे पूर्व एंटीलिया-सचिन वाझे केस में महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्ननर के सनसनीखेज आरोपों की सच्चाई का पता लगाने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ने बड़ा फैसला ले लिया था. देशमुख के खिलाफ परमबीर सिंह के आरोपों की न्यायिक जांच हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से कराने की घोषणा भी की जा चुकी है. शरद पवार बचाव में लगे रहे पूर्व गृह मंत्री देशमुख के बचाव में महा विकास आघाड़ी सरकार के प्रमुख घटक NCP के मुखिया शरद पवार तो शुरू से ही रहे. उनके कारण ही देशमुख को पद से न तो हटाया जा सका था और न उन्हें पद छोड़ने को ही कहा गया था. हालांकि बीच का रास्ता अपनाने पर सीएम ठाकरे भी सहमत हो चुके थे. बीच के रास्ते के रूप में NCP चाहती थी कि देशमुख का मंत्रालय बदल दिया जाए. लेकिन इसी बीच बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला आ जाने के बाद शरद पवार के लिए भी अनिल देशमुख को इस्तीफा दिलाने से रोकने का कोई रास्ता ही नहीं बचा था. देशमुख ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह की ओर से अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपए की वसूली कराने के आरोप में उच्च न्यायालय ने यह फैसला दिया था. इस बीच अनिल देशमुख पर वसूली का आरोप लगाने वाले मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और कैविएट दाखिल की है. उन्होंने अपनी अर्जी में महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर कोई आदेश न देने की मांग की है. महाराष्ट्र सरकार के अलावा अनिल देशमुख ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. दिलीप वलसे पाटिल को सौंपा गृह मंत्रालय इस फैसले के बाद ही अनिल देशमुख ने अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. सीएम उद्धव ठाकरे को भेजे अपने इस्तीफे में अनिल देशमुख ने साफ बताया था कि उन पर लगे यह आरोप गलत हैं, लेकिन अदालत के फैसले के बाद वह नैतिक आधार पर पद से इस्तीफा दे रहे हैं. इस बीच अनिल देशमुख की जगह पर गृहमंत्री बनाए गए दिलीप वलसे पाटिल ने पदभार संभाल लिया है. मंगलवार को वह अपने दफ्तर पहुंचे और कार्यभार संभाला. वलसे पाटिल ने भी बचाव का ऐलान किया पदभार संभालते ही उन्होंने...
पेंशनरों

पेंशनरों के प्रति क्रूर है केंद्र की भाजपा सरकार

संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत को लिखे दूसरे पत्र में झोड़े ने उठाया भाजपा नेताओं के चेहरों का नकाब  नागपुर : केंद्र में वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार देश के लाखों बुजुर्ग पेंशनरों के प्रति बेहद असंवेदनशील और क्रूर है. इससे पहले केंद्र में इतनी असंवेदनशील सरकार कभी नहीं रही. यह शिकायत ईपीएस-95 पेंशनर एवं वयोवृद्ध एक्टिविस्ट दादा झोड़े ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत से की है. उन्होंने इससे पूर्व 6 फरवरी को भी उन्हें पत्र भेज कर समस्त स्थिति से अवगत कराया था.  सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान और पालन नहीं करती उन्होंने यह भी कहा है कि यह सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान और पालन नहीं करती है. इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने 4-10-2016 को, आरसी गुप्ता के मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने पेंशनरों के पक्ष में फैसला सुनाए गए फैसले से अवगत कराया और बताया कि लेकिन भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और केंद्र सरकार ने चार साल बाद भी आदेश को पूरी तरह से लागू नहीं किया है. इन चार वर्षों में, लगभग दो लाख वरिष्ठ पेंशनरों की मृत्यु उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुसार न्याय पाने के बिना हुई है और यह संख्या हर दिन बढ़ रही है. लेकिन क्रूर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लागू करने के लिए असंवेदनशीता की हद तक अनिच्छुक है. दादा झोड़े ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1-04-2019 को पेंशनरों के पक्ष में एक और फैसला दिया, लेकिन केंद्र सरकार उस फैसले को भी स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. देश के लोगों को सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलता है, लेकिन सरकार इसकी अनुमति वृद्ध पेंशनरों के लिए नहीं दे रही. स्पष्ट है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं मानती. उन्होंने संघ प्रमुख से कहा है कि यह कहना दुखद है कि देश में ऐसी विकट स्थिति पैदा हुई है और यह सब केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद हुआ है. बुजुर्ग सेवानिवृत्त पेंशनरों को धोखा दिया झोड़े ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने, न केवल देश के बुजुर्ग सेवानिवृत्त पेंशनरों को धोखा दिया है, बल्कि उनके साथ एक बड़ा जोखिम भी लिया है और अब एक बहुत ही शातिराना रवैया दिखा रहे हैं. संघ प्रमुख को दादा झोड़े ने पृष्ठभूमि की फिर से जानकारी दी है. उन्होंने बताया है कि 2014 से पहले, जब भारतीय जनता पार्टी केंद्र में विपक्ष में थी, इसके नेताओं ने वयोवृद्ध पेंशनरों के लिए पेंशन वृद्धि के लिए आंदोलन किया था. उनके द्वारा राज्यसभा में दायर एक याचिका दायर कर समिति गतह्ण की मांग की गई. केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तत्कालीन राज्यसभा सांसद भगत सिंह कोशियारी (फिलहाल माननीय राज्यपाल, महाराष्ट्र शासन) समिति का गठनकिया. कोशियारी समिति ने जो सिफारिशें दीं, उन्हें लागू करने की मांग भी भाजपा के तत्कालीन सांसद प्रकाश जावड़ेकर ने उठाई. लेकिन जब 2014 में लोकसभा चुनाव घोषित हुए और सिफारिश लागू नहीं हुई तो चुनाव अभियान में, भाजपा नेताओं (अब केंद्रीय मंत्रीगण) ने वादा किया कि अगर हम निर्वाचित हुए और केंद्र में सत्ता में आए तो हम 90...
सचिन

सचिन कोरोना पॉजिटिव, महाराष्ट्र में लॉकडाउन जैसे कड़े नियम लागू

मुंबई : क्रिकेट के भगवान के नाम से मशहूर पूर्व भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) कोरोना पॉजिटिव (Corona Positive) पाए गए हैं. सचिन ने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. हालांकि, सचिन के परिवार के अन्य सदस्यों की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई है. कोरोना संक्रमित होने के बाद 47 साल के सचिन तेंदुलकर ने कहा, "हल्के लक्षण के बाद मैं कोरोना पॉजिटिव पाया गया हूं. मैंने खुद को होम क्वारनटीन कर लिया है. इसके अलावा मैं इस महामारी से संबंधित सभी जरूरी प्रोटोकॉल को फॉलो कर रहा हूं. मैं सभी हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को धन्यवाद देता हूं." pic.twitter.com/dOlq7KkM3G— Sachin Tendulkar (@sachin_rt) March 27, 2021 28 मार्च से नाइट कर्फ्यू लगाने का फैसला महाराष्ट्र में कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते स्थिति गंभीर है और राज्य सरकार ने प्रांत में 28 मार्च से नाइट कर्फ्यू लगाने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि कोरोना के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए हमें ये एक्शन लेना पड़ा है. वहीं, कोविड-19 से संबंधित नए नियम भी लागू किए हैं. कड़े नियम लागू   नए नियमों (गाइडलाइन्स) के अनुसार, राज्य के सभी मॉल्स रात 8 बजे से लेकर सुबह 7 बजे तक बंद रहेंगे. मूवी थिएटर्स में 50 फीसदी लोग ही जा पाएंगे. साथ ही साथ शादी समारोह में 50 से ज्यादा लोग शामिल नहीं होंगे. अंतिम संस्कार में भी ज्यादा से ज्यादा 20 लोग ही शामिल हो सकेंगे. कोरोना के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों में 50 फीसदी बेड्स को रिजर्व रखा गया है. आगामी होली त्योहार को ध्यान में रखते हुए भी गाइडलाइन्स जारी किए गए हैं. इसके अनुसार, होली खेलने के लिए भीड़ लगाने पर पूर्ण रूप से पाबंदी रहेगी. साथ ही सार्वजनिक जगह पर होली खेलने की परमिशन नहीं दी गई है. सीएम उद्धव ठाकरे ने लोगों से की खास अपील इस बारे में जानकारी देते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा, "हम दोबारा लॉकडाउन लगाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए हमें ये एक्शन लेने पड़ा है. मैं राज्य के लोगों से अपील करता हूं कि वह जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें." सीएम ने आगे कहा, "हम हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी तेजी से काम कर रहे हैं. सभी जिलों के अधिकारियों को हेल्थ सुविधाएं जारी रखने के निर्देश दिए हैं." उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में एक बार फिर कोरोना ने अपना पैर पसार लिया है, ऐसे में यहां के लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है. साथ ही यदि आगे भी स्थिति ऐसी ही बनी रही तो राज्य में पूर्ण रूप से लॉकडाउन लगाया जा सकता है. महाराष्ट्र के इन जिलों में लगा लॉकडाउन बता दें कि राज्य सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए लॉकडाउन और नाईट कर्फ्यू जैसे कड़े नियम लागू किए हैं. पुणे में जिला प्रशासन ने 31 मार्च तक सभी स्कूलों और कॉलेजों को बंद रखने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा रेस्त्रां को खुला रखने के समय में बदलाव किए हैं. वहीं, नागपुर में भी एक सप्ताह का लॉकडाउन चल रहा है. इसके अलावा बीड और नांदेड़...
सरकार को,

सरकार को बताए बिना संपत्ति खरीद नहीं सकते कर्मचारी

बिहार सरकार ने जारी किए दिशा निर्देश, पालन अनिवार्य, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को मिली छूट *सीमा सिन्हा- पटना (बिहार) : बिहार में कोई भी कर्मचारी सरकार को जानकारी दिए बगैर किसी अचल संपत्ति की खरीदारी नहीं कर सकेगा. इस आशय की अधिसूचना राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया है.  इसके साथ ही संपत्ति का ब्योरा देने वाले वाले कर्मचारियों और पदाधिकारियों को अपनी या अर्जित या विरासत या फिर परिवार के किसी सदस्य के नाम से जारी संपत्ति के बारे में भी पूरी जानकारी देनी होगी. इसके अलावा किसी अन्य व्यक्ति के नाम पट्टे या बंधक पर उसके द्वारा ली गई जमीन जायदाद के बारे में भी जानकारी स्पष्ट करनी होगी. देखा गया है कि पदाधिकारियों द्वारा संपत्ति का जो विवरण दिया जाता है, उसमें बड़ी संख्या में यह जानकारी आधी-अधूरी दी जाती है. इससे संपत्ति की वास्तविक जानकारी सही तरीके से सामने नहीं आ पाती है. इसको लेकर सामान्य प्रशासन विभाग ने इस बारे में कई बातों का पालन करना अनिवार्य बना दिया है.   चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को छूट  बिहार सरकार ने चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को इस आदेश से अलग रखा है. इसके साथ सरकारी लोक सेवकों को अपनी संपत्ति का ब्योरा देने में चार महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी हर हाल में देना अनिवार्य कर दिया है. सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी दिशा निर्देश का पालन करना प्रथम से लेकर तृतीय वर्ग के कर्मियों के लिए अनिवार्य है. शेयर, डिबेंचर, निक्षेप पत्र समेत बैंक में निवेश की भी...   संपत्ति में परिवार के किसी सदस्य अपने नाम पर लिए गए शेयर डिबेंचर, निक्षेप पत्र समेत बैंक में निवेश को भी शामिल किया गया है, जिनके बारे में भी पूरी जानकारी देनी होगी. यही नहीं इन कर्मचारियों को  विरासत या स्वयं द्वारा अर्जित की गई संपत्ति के बारे में भी जानकारी देनी होगी. साथ ही अगर इन कर्मचारियों पर  किसी भी तरह का कर्ज है, चाहे वह प्रत्यक्ष कर हो या फिर अप्रत्यक्ष कर, तो उसकी जानकारी भी स्पष्ट रूप से देनी होगी. रखना होगा इन बातों का ध्यान संपत्ति की जानकारी देते समय कर्मचारियों को अहम बातों का भी ध्यान रखना होगा. कर्मचारियों को 30 हजार से कम से कम मूल्य की चल संपत्ति को जोड़कर एक साथ दिखाना होगा. इसमें कपड़े से लेकर उनके बर्तन, पुस्तक समेत दैनिक इस्तेमाल की वस्तुओं का मूल्य शामिल करना आवश्यक नहीं होगा. सभी सरकारी सेवकों को अपने कार्यकाल की शुरुआत से लेकर मौजूदा समय के दौरान अर्जित सभी संपत्ति का ब्यौरा देना होगा. यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी कर्मचारी सरकार को जानकारी दिए बगैर किसी अचल संपत्ति की खरीदारी नहीं कर सकेगा.
पीके

पीके का अस्तित्व जुड़ा प.बंगाल में ममता, टीएमसी के भविष्य से

राज्य विधानसभा चुनाव के मतदान का पहला चरण शनिवार, 27 मार्च को पीके ने दो महीने पहले ट्वीट कर कहा था, "मीडिया का एक वर्ग भाजपा के समर्थन में माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन असल में भाजपा दहाई के आंकड़े को पार करने के लिए संघर्ष करेगी. इस ट्वीट को सुरक्षित कर लीजिएगा, अगर बंगाल में भाजपा कुछ बेहतर कर लेती है, मुझे जरूर यह स्पेस छोड़ देनी चाहिए." पीके के इसी विश्वास से जुड़ी ममता बनर्जी भी चुनावी रैलियों में कहती हैं, "भाजपा सिर्फ टीवी चैनलों और पोस्टरों में ही दिखती है." *जीवंत के. शरण- विश्लेषण : पश्चिम बंगाल में टीएमसी (तृण मूल कांग्रेस) की प्रतिष्ठा के साथ विधानसभा चुनाव हालांकि ममता बनर्जी के लिए भी अस्तित्व की लड़ाई है. लेकिन, इसे जीत में बदलने का सारा दामोदार धुरंधर चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ ' पीके ' के कन्धों पर है. राज्य में पहले चरण का मतदान शनिवार, 27 मार्च को होगा. अतः पीके अब टीएमसी के लिए अपनी टीम के साथ युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं. परिणाम भी नजर आ रहा है. भाजपा के तूफानी प्रचार के बीच टीएमसी अभी तक मजबूती के साथ टक्कर देती नजर आ रही है. पीके को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी ने टीएमसी का चुनाव राजनीतिकार बनाया है. टीएमसी की प्रतिष्ठा के साथ भाजपा ने इस चुनाव को ममता बनर्जी के लिए जीवन-मरण की लड़ाई बना कर रख दी है. पीके की फर्म 'इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी' (IPAC) ने टीएमसी की चुनावी बागडोर तकरीबन अपने एक हजार स्टाफ के साथ संभाल रही है. युद्ध स्तर पर उन्होंने काम शुरू कर दिया है. पार्टी के शीर्ष नेताओं से हरी झंडी मिलने के बाद उनकी चुनावी रणनीति लागू हो गई है और इसके तहत टीएमसी में बड़े पैमाने पर सांगठनिक बदलाव भी कर दिए गए. लेकिन, यहीं से पीके के खिलाफ पार्टी में माहौल भी बनना आरंभ हो गया. चूंकि पीके को शीर्ष नेताओं का समर्थन है, लिहाजा पार्टी उनकी रणनीति की राह पर आगे चलती जा रही है. दूसरी ओर जमीनी सत्य यह भी है कि कुछ वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी के साथ पार्टी में बाहर से आए व्यक्ति की रणनीति को लागू करना सरल नहीं होता. उनकी रणनीतिक सफलता इस रूप में भी देखा जा रहा है कि मुकाबले में कांग्रेस और सीपीएम मुकाबले में दूर-दूर तक नहीं हैं. लेकिन, वोटों के ध्रूवीकरण में भारतीय जनता पार्टी का बड़े हिस्से पर प्रभाव बढ़ाना, पीके के लिए चिता का विषय बन गया है. शुभेंदु अधिकारी ने दिया पहला गहरा आघात शुभेंदु अधिकारी के भाजपा में चले जाने से पीके के विजय अभियान के सुनहरे सपने को पहला गहरा आघात पहुंचा है. इसके बाद यह सिलसिला जारी ही है और इसके साथ पार्टी में विरोध के दबे स्वर भी. उनका ऐसा आंतरिक विरोध सिर्फ टीएमसी में ही नहीं हो रहा. इससे पूर्व भाजपा के लिए 2014 के लोकसभा चुनाव और 2015 में बिहार के महागठबंधन के विधानसभा चुनाव में भी विरोध के स्वर उठे थे. लेकिन विगत दोनों चुनावों में उन्हें सफलता मिली और वे हीरो बन कर उभरे....
बचाव में

बचाव में परमबीर को लपेटने की कोशिशें शुरू

पत्नी सविता सिंह का पांच कंपनियों से जुड़ा होना बनेगा हथियार मुंबई : मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह और गृहमंत्री अनिल देशमुख के विवाद में सत्तारूढ़ पक्ष सक्रीय हो गया है. सरकार और गृहमंत्री देशमुख के बचाव में अब परमबीर सिंह की बखिया भी उधेड़ी जाने लगी है. बचाव में रोज नई और दिलचस्प परतें खोली जाने लगी हैं. ताजी खबर है कि बचाव में परमबीर सिंह को उनकी पत्नी सविता सिंह को लेकर लपेटा गया है. सविता सिंह का 5 कंपनियों में डायरेक्टर होना इसमें शामिल है. जबकि LIC हाउसिंग ने पिछले साल TRP मामले में परमबीर सिंह की कार्रवाई के बाद उनसे बोर्ड से इस्तीफा ले लिया था. बताया गया कि सविता सिंह इंडियाबुल्स ग्रुप की 2 कंपनियों में डायरेक्टर हैं. वे एडवोकेट फर्म खेतान एंड कंपनी में पार्टनर भी हैं. सविता सिंह कॉम्प्लेक्स रियल एस्टेट ट्रांजेक्शन और विवादों के लिए अपने ग्राहकों को सलाह देती हैं. वे ट्रस्ट डीड, रिलीज डीड और गिफ्ट डीड पर भी सलाह देती हैं. उनके ग्राहकों में ओनर, खरीदार, डेवलपर्स, कॉर्पोरेट हाउसेस, घरेलू निवेशक और विदेशी निवेशक शामिल हैं. हरियाणा से PG और मुंबई से लॉ किया सविता सिंह ने हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री हासिल की है. इसके बाद उन्होंने मुंबई से लॉ में ग्रेजुएशन किया है. वे 28 मार्च 2018 को इंडिया बुल्स प्रॉपर्टी की डायरेक्टर बनी थीं. यस ट्रस्टी में भी 17 अक्टूबर 2017 को डायरेक्टर बनीं. वे इंडियाबुल्स असेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी में भी डायरेक्टर हैं. सोरिल इंफ्रा में भी डायरेक्टर थीं. सोरिल इंडिया बुल्स की ही कंपनी है. बताया गया है कि उनकी खेतान से सालाना 2 करोड़ रुपए से ज्यादा आय होती है. भाजपा नेता से है समधियाना परमबीर सिंह के बेटे रोहन की शादी पूर्व सांसद और भाजपा नेता दत्ता मेघे की पोती राधिका से हुई है. इसे लेकर उनका पॉलिटिकल कनेक्शन भी जोड़ा जा रहा है. एक समय दत्ता मेघे NCP Supremo शरद पवार के काफी निकट थे. बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया. वे विदर्भ अलग राज्य आंदोलन में भी सक्रिय थे. राधिका के पिता सागर मेघे नागपुर में मेघे द्वारा स्थापित शिक्षण संस्थानों के संचालकों में से हैं. चाचा समीर मेघे भाजपा विधायक हैं. दिल्ली कनेक्शन पर नवाब मलिक करने वाले हैं बड़ा खुलासा NCP के प्रवक्ता नवाब मलिक ने पिछले दिनों कहा था कि वे समय आने पर बहुत बड़ा धमाका करेंगे. उन्होंने कहा था कि परमबीर सिंह दिल्ली में किससे मिले और क्या बात हुई, इसका खुलासा वे समय आने पर करेंगे.
बुद्धिस्ट

बुद्धिस्ट वेलफेयर ट्रस्ट के नाम पर धोखाधड़ी

पति-पत्नी और बेटी की करोड़ों की संपत्ति ईडी ने की जब्त *सीमा सिन्हा- पटना (बिहार): बुद्धिस्ट वेलफेयर ट्रस्ट के नाम पर धोखाधड़ी करनेवाले पति-पत्नी और उनकी बेटी की संपत्ति को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जब्त कर लिया है. इनपर मेडिकल कॉलेज की सदस्यता दिलाने के नाम पर ठगी का है आरोप है. इन लोगों के पटना में फ्लैट के अलावा सासाराम स्थित 13 प्लॉट को जब्त किया गया है. इसकी कीमत एक करोड़ रुपए से अधिक है. इससे पूर्व धोखाधड़ी से संबंधित एक केस पति-पत्नी के खिलाफ पटना के शास्त्रीनगर थाना में दर्ज की गई थी. बाद में मनी लाउंड्रिंग की बात सामने आई. मनी लाउंड्रिंग का केस दर्ज करने के बाद ईडी ने इसकी जांच शुरू की. इस दौरान पति-पत्नी के अलावा उनकी बेटी लिप्सा कुमार के नाम पर कई संपित्तयों का पता चला. पटना के विंध्य अंबिका अपार्टमेंट में इनका एक फ्लैट भी है. इसके अलावा सासाराम में 13 प्लॉट और बेटी के नाम पर बैंक खातों जमा रकम को जब्त कर लिया है. इसमें सीता देवी के नाम पर पटना में 74.4 लाख रुपए का एक फ्लैट और 23.71 लाख रुपए के 13 भूखंड सासाराम में हैं. इसके अलावा 13 बैंक खाते में कुल 56,785 रुपए तथा 5 एलआईसी बीमा पॉलिसी भी हैं. किनका सरेंडर वैल्यू 2.87 लाख रुपए हैं. ईडी के मुताबिक बुद्धिस्ट वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार और सचिव सीता कुमारी (दोनों पति-पत्नी) पर मेडिकल कॉलेज की सदस्यता दिलाने का लालच देकर निवेशकों के साथ ठगी करने का आरोप लगाया गया है. ट्रस्ट के द्वारा मेडिकल कॉलेज की स्थापना कर और उसमें आजीवन सदस्य बनाने के नाम पर ठगी की गई. लोगों से इस नाम पर जो रुपए लिए गए उससे कई संपत्ति खरीदी गई. ईडी के मुताबिक बुद्धिस्ट वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार, उनकी पत्नी सीता कुमारी और बेटी लिप्सा कुमार से संबंधित हैं. बयान के मुताबिक जांच में पाया गया कि आरोपियों ने ट्रस्ट के अन्य सदस्यों को झूठा आश्वासन दिया कि ट्रस्ट एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने जा रहा है और दान देने वालों को इसमें आजीवन सदस्यता दी जाएगी. इसके मुताबिक, लालच देकर आरोपियों ने सदस्यों से भारी राशि एकत्र की और बाद में ट्रस्ट के बैंक खाते से रकम को निजी खातों में स्थानांतरित किया गया.
उद्धव

उद्धव सरकार संकट में : फड़णवीस ने सौंपा 6 जीबी का डेटा  

पुलिस महकमे में तबादले और पोस्टिंग में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार     मुंबई : महाराष्ट्र में परमबीर सिंह के पत्र के बाद उद्धव सरकार पर संकट बढ़ता जा रहा है. वरिष्ठ भाजपा नेता देवेंद्र फड़णवीस ने गृह मंत्रालय को 6 जीबी से ज्यादा का डेटा सौंपा है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में पुलिस महकमे में तबादले और पोस्टिंग में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है. यह जानकारी एक न्यूज एजेंसी ANI ने ट्विटर के माध्यम से दी है.  ANI के अनुसार फड़णवीस का आरोप है कि खुफिया विभाग की रिपोर्ट पर महा विकास आघाड़ी (एमवीए) की उद्धव सरकार ने कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद उन्होंने मामले की सीबीआई जांच की मांग की. पूर्व मुख्यमंत्री फड़णवीस ने दावा किया कि तत्कालीन खुफिया आयुक्त रश्मि शुक्ला द्वारा इजाजत लेकर फोन रिकॉर्ड किए गए थे और कॉल पर की गई बातचीत का 6.3 जीबी डेटा उनके पास है, जिसमें कई अहम पुलिस अधिकारियों के नामों पर चर्चा की गई थी. Delhi: BJP leader Devendra Fadnavis arrives at MHA.He had sought time from Union Home Secretary to meet him and hand him over 6.3 GB of data of call recordings and some documents pertaining to alleged transfer posting racket of IPS and non-IPS officers of Maharashtra Police. pic.twitter.com/SvdPl4J9Gd— ANI (@ANI) March 23, 2021 ANI ने ट्वीट कर बताया है कि गृह सचिव से मुलाकात करने के बाद देवेंद्र फड़णवीस ने कहा कि मैंने सभी सबूत सील बंद लिफाफे में दे दिए हैं. उन्होंने मुझे भरोसा दिलाया है कि वह इस मामले को देखेंगे और सरकार उचित कार्रवाई करेगी. इससे पहले, भाजपा नेता ने कहा कि इन सभी फोन कॉल को राज्य सरकार से उचित अनुमति लेकर शुक्ला ने रिकॉर्ड किया था, लेकिन अगस्त 2020 में मुख्यमंत्री (उद्धव ठाकरे) को रिपोर्ट सौंपने के बावजूद रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है. उन्होंने कहा, "मैं इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग कर रहा हूं." I gave all evidence to Union Home Secy, in a sealed envelope. I've demanded CBI inquiry. He assured me he'll look into it & govt will take appropriate action. Why was the matter brushed under carpet? Why did state govt do nothing? Whom did they want to protect?: Devendra Fadnavis pic.twitter.com/2AgiAhwF7h— ANI (@ANI) March 23, 2021 दूसरी ओर फड़णवीस पर पलटवार करते हुए सत्तारूढ़ आघाड़ी की सहयोगी पार्टी एनसीपी (NCP) ने कहा कि भाजपा लोगों को गुमराह कर रही है. फड़णवीस ने पत्रकारों से कहा था कि तत्कालीन खुफिया आयुक्त रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, आईपीएस अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं समेत अन्य के नामों का उल्लेख किया गया है. यह बहुत संवेदनशील सूचना है, इसलिए मैं फिलहाल इसका खुलासा नहीं कर रहा हूं. विपक्ष के नेता ने यह भी कहा कि जब वह राज्य के मुख्यमंत्री थे, तब उन्हें 2017 में गुप्त सूचना मिली थी कि पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण के संबंध में पुलिस के कुछ अफसर एक होटल में बैठक कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "यह एक गिरोह का हिस्सा था और पूरी तरह से अवैध था। इसलिए छापा मारा गया और गिरफ्तारियां की गईं." फड़णवीस जब...
देशमुख

देशमुख, परमबीर के खिलाफ आरोपों की स्वतंत्र जांच कराई जाए

बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका मुंबई : महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के आलोक में सीबीआई, ईडी या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच की मांग वाली याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर की गई है. याचिका में मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर और वर्तमान में होमगार्ड और सिविल डिफेंस के कमांडेंट जनरल परमबीर सिंह की भूमिका पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की गई है. हाईकोर्ट की अधिवक्ता डॉ. जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल ने याचिका दायर की है. पृष्ठभूमि : परमबीर सिंह ने हाल ही में आरोप लगाया था   आईपीएस कैडर के अधिकारी परमबीर सिंह ने हाल ही में आरोप लगाया था कि महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख नियमित रूप में अधिकारियों को बुलाते थे और अधिकारियों से उनके आधिकारिक कर्तव्यों के पालन करने के संबंध में इस तरह के काम करने का निर्देश देते थे. परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के सीएम को सौंपी गई एक रिपोर्ट में यह आरोप लगाया गया था कि गृह मंत्री अनिल देशमुख अधिकारियों को बिना उनकी जानकारी के अपने निवास पर बुलाते थे. इस दौरान वे उन्हें ऑफिशियल असाइनमेंट और फाइनेंशियल ट्रांजेक्शंस से रिलेटेड आदेश दिया करते थे, जिसमें फंड कलेक्शन भी शामिल है. परमबीर सिंह ने आगे आरोप में कहा था कि पिछले कुछ महीनों में गृहमंत्री अनिल देशमुख ने मुंबई पुलिस के क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट के प्रमुख सचिन वाजे को कई बार फोन किया और उन्हें फंड कलेक्शन में सहायता करने का निर्देश दिया था. गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सचिन वाजे को हर महीने 100 करोड़ रुपए जमा करने का टारगेट दिया था. गृहमंत्री ने उपरोक्त टारगेट को प्राप्त करने के लिए वाजे से कहा था कि मुंबई के 1750 बार रेस्टोरेंट और अन्य प्रतिष्ठान से हर महीने प्रत्येक से 2-3 लाख रुपए कलेक्ट करने होंगे. इसके साथ ही गृहमंत्री ने कहा था ऐसा करके 40-50 करोड़ रुपए हर महीने आसानी से एकत्र किए जा सकते हैं. गृहमंत्री ने आगे कहा था कि बाकी का कलेक्शन दूसरे चीजों से किया जाएगा. परमबीर सिंह ने आरोप में लिखा था कि सचिन वाजे उसी दिन मेरे पास आए और यह चौंकाने वाला खुलासा किया. यह सुनकर मैं स्तब्ध हो गया था और इस स्थिति से निपटने के बारे में सोचने लगा.   कोर्ट से वर्तमान याचिकाकर्ता ने इस पृष्ठभूमि में इस मामले में जांच का निर्देश देने का आग्रह किया है. याचिकाकर्ता ने कहा कि परमबीर सिंह के खिलाफ भी जांच होनी चाहिए, क्योंकि उनकी रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि वह खुद एक साल तक मुंबई पुलिस के प्रमुख के रूप में कार्य किए, लेकिन इस दौरान उन्होंने कानून के समक्ष ऐसे जघन्य अपराध को नहीं लाया सिर्फ चुपचाप बैठे रहे.