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'वंदे मातरम'

‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान का दर्जा के लिए याचिका, सुनवाई आज

नई दिल्ली : बंगाल के महान साहित्यकार बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय रचित 'वंदे मातरम' (राष्ट्रगीत) को ' जन गण मन' (राष्ट्रगान) के बराबर का दर्जा दिलाने की मांग अदालत पहुंच गई है. इसको लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है. सोमवार, 22 जुलाई को दाखिल की गई याचिका में वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने की मांग की गई है. इस याचिका पर कल मंगलवार, 23 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हो सकती है. यह याचिका भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है. याचिका में कहा गया है कि 'वंदे मातरम' को आज तक राष्ट्रगान के समान दर्जा नहीं मिला. ऐसे में हाईकोर्ट को इस मामले में दखल देना चाहिए. याचिका में उपाध्याय ने मांग की है कि सभी स्कूलों में वंदे मातरम को राष्ट्रगान के तौर पर बजाया जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने इसके संबंध में एक दिशा निर्देश बनाने की भी मांग की है. वंदे मातरम का इतिहास स्व. बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने सुविख्यात उपन्यास 'आनंदमठ' में वंदे मातरम् का समावेश किया था. लेकिन इस गीत को 'आनंदमठ' उपन्यास लिखने के पहले ही उन्होंने रच दिया था. अपने देश को मातृभूमि मानने की भावना को प्रज्वलित करने वाले कई गीतों में यह गीत सबसे पहला है. 'वंदे मातरम्' के दो शब्दों ने देशवासियों में देशभक्ति के प्राण फूंक दिए थे और आज भी इसी भावना से 'वंदे मातरम्' गाया जाता है. हम यों भी कह सकते हैं कि देश के लिए सर्वोच्च त्याग करने की प्रेरणा देशभक्तों को इस गीत से ही मिली. 'बंग भंग आंदोलन' और 'असहयोग आंदोलन' में 'वंदे मातरम्' की थी प्रभावी भूमिका पीढ़ियों बाद भी 'वंदे मातरम्' का प्रभाव अब भी कायम है. 'आनंदमठ' उपन्यास के माध्यम से यह गीत प्रचलित हुआ. उन दिनों बंगाल में ‘बंग-भंग’ का आंदोलन उफान पर था. 'बंग भंग आंदोलन' और महात्मा गांधी के 'असहयोग आंदोलन' दोनों में 'वंदे मातरम्' ने प्रभावी भूमिका निभाई. स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए यह गीत पवित्र मंत्र बन गया था. 'आनंदमंठ' 5 वर्ष पहले लिखा गया था 'वंदे मातरम्' बंकिम बाबू ने 'आनंदमठ' उपन्यास सन् 1880 में लिखा. कलकत्ता की 'बंग दर्शन' मासिक पत्रिका में उसे क्रमशः प्रकाशित किया गया. अनुमान है कि 'आनंदमंठ' लिखने के करीब 5 वर्ष पहले बंकिम बाबू ने 'वंदे मातरम्' को लिख दिया था. गीत लिखने के बाद यह यों ही पड़ा रहा. पर 'आनंदमठ' उपन्यास प्रकाशित होने के बाद लोगों को उसका पता चला. ऐसे रचा गया था वंदे मातरम इस संबंध में एक दिलचस्प किस्सा है. बंकिम बाबू 'बंग दर्शन' के संपादक थे. एक बार पत्रिका का साहित्य कम्पोज हो रहा था. तब कुछ साहित्य कम पड़ गया, इसलिए बंकिम बाबू के सहायक संपादक रामचंद्र बंदोपाध्याय बंकिम बाबू के घर पर गए और उनकी निगाह 'वंदे मातरम्' लिखे हुए कागज पर गई. कागज उठाकर श्री बंदोपाध्याय ने कहा, फिलहाल तो मैं इससे ही काम चला लेता हूं. पर बंकिम बाबू तब गीत प्रकाशित करने को तैयार नहीं थे. यह बात सन् 1872 से 1876 के बीच की होगी. बंकिम बाबू ने बंदोपाध्याय से कहा...
चंद्रयान-2

चांद को चूमने चला चंद्रयान-2, पृथ्वी की कक्षा में हुआ स्थापित

समाचार माध्यम, श्रीहरिकोटा (आंध्रप्रदेश) : चंद्रयान-2 सोमवार को यहां के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) से शान के साथ रवाना हो गया. 'बाहुबली' नाम के सबसे ताकतवर रॉकेट जीएसएलवी-मार्क ।।। एम 1 ने प्रक्षेपण के करीब 16 मिनट बाद यान को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया. ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत चंद्रयान-2 ने अपराह्न दो बजकर 43 मिनट पर चांद की ओर उड़ान भरी. इसरो के प्रमुख के. सिवन ने मिशन के सफल होने की घोषणा की और कहा कि यह चंद्रमा की ओर यह भारत की ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत है. कुल 3,850 किलोग्राम वजनी यह अंतरिक्ष यान ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर के साथ गया है। पहले चंद्र मिशन की सफलता के 11 साल बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भू-स्थैतिक प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-मार्क ।।। के जरिए 978 करोड़ रुपए की लागत से बने 'चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण किया है. रविवार की शाम छह बजकर 43 मिनट पर प्रक्षेपण के लिए 20 घंटे की उल्टी गिनती शुरू हुई थी. रुतबा बढ़ाएगा देश का आज का यह प्रक्षेपण अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत रुतबा बढ़ाएगा और साथ ही चांद के बारे में दुनिया को नई जानकारी उपलबध कराएगा. इसरो ने 18 जुलाई को यान के प्रक्षेपण की नई तारीख की घोषणा करते हुए कहा था "चंद्रयान-2 अनगिनत सपनों को चांद पर ले जाने के लिए तैयार है. 22 जुलाई 2019 को अपराह्न दो बजकर 43 मिनट पर प्रक्षेपण के लिए हमारे साथ जुड़िए." 10 खास बातें, जो चंद्रयान-2 से जुड़ी हैं 1- तीन चरणों वाले 43.43 मीटर लंबे जीएसएलवी मार्क ।।। एम-1 ने आसमान में छाए बादलों को चीरते हुए प्रक्षेपण के करीब 16 मिनट बाद 3,850 किलोग्राम वजनी चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया. पृथ्वी की कक्षा में स्थापित होने के साथ ही इसने भारत के महत्वाकांक्षी मिशन के पहले चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया. 2- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कहा कि ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर के साथ गया चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरने से पहले 15 महत्वपूर्ण अभियान चरणों से गुजरेगा. यान के सितंबर के पहले सप्ताह में चांद पर उतरने की उम्मीद है. 3- प्रक्षेपण के बाद इसरो के प्रमुख के. सिवन ने मिशन के सफल होने की घोषणा की और 15 जुलाई को आई तकनीकी खामी को लेकर कहा कि हम फिर से अपने रास्ते पर आ गए. उन्होंने कहा कि यह चंद्रमा की ओर यह भारत की ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत है. 4- सिवन ने कहा कि यान को चंद्रमा के पास पहुंचने से पहले, अगले डेढ़ महीने में 15 बेहद महत्वपूर्ण अभियान चरणों से गुजरना होगा. उन्होंने कहा कि उसके बाद वह दिन आएगा, जब चंद्रमा पर दक्षिणी ध्रुव के नजदीक सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए हमें 15 मिनट के ''भय का सामना करना होगा. 5- 15 जुलाई को रॉकेट में तकनीकी खामी का पता चलने के बाद चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण टाल दिया गया था. उस दिन इसका प्रक्षेपण तड़के दो बजकर 51 मिनट पर होना था, लेकिन प्रक्षेपण से 56 मिनट 24 सेकंड पहले रॉकेट में तकनीकी खामी का...
धोनी

संन्यास नहीं लेंगे, फिर भी धोनी पर बढ़ रहा है दवाब

समीक्षक- वक्त-वक्त की बात है. क्रिकेट में महानता की ऊंचाई को छू चुके पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अब अपने ऊपर भी वही दवाब झेल रहे हैं, जैसा कि अपनी कप्तानी के शुरुआती दिनों में दिग्गजों को दिया था. आज एक ओर वही दिग्गज हैं, जो उनकी तरफदारी करते हुए उन्हें संन्यास नहीं लेने की सलाह दे रहे हैं तो दूसरी ओर अनेक पूर्व खिलाड़ी उन्हें उनके पुराने फैसलों की याद दिलाते हुए उन्हें नए उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए मैदान छोड़ने की सलाह भी दे रहे हैं. हालांकि संन्यास नहीं ले रहे धोनी बीसीसीआई के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, "धोनी ने वेस्टइंडीज दौरे के लिए खुद को अनुपलब्ध बताया, क्योंकि वह अगले दो महीने अपने अर्धसैनिक रेजिमेंट के साथ बिताएंगे." अधिकारी ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि धोनी अभी क्रिकेट से संन्यास नहीं ले रहे हैं. वेस्टइंडीज दौरे पर नहीं जाएंगे शीर्ष अधिकारी ने कहा, "हम तीन चीजें कहना चाहते हैं. वह अभी क्रिकेट से संन्यास नहीं ले रहे हैं. वह अपने अर्धसैनिक रेजिमेंट की सेवा के लिए दो महीने का विश्राम ले रहे हैं, जो उन्होंने बहुत पहले तय किया था. हमने कप्तान विराट कोहली और चयन समिति के प्रमुख एम.एस.के. प्रसाद को उनके फैसले से अवगत करा दिया है." भूतकाल के फैसले बन रहे फांस लेकिन अपने शुरुआती दौर में बतौर भारतीय कप्तान उन्होंने कड़े फैसले लेते हुए कई स्टार सीनियर खिलाड़ियों को हटाया था- और अब खुद उम्र और उनका खेल उनके साथ नहीं रहा. उसी का हवाला देते हुए सलाह दी जा रही है कि अब वक्त है कि वह खुद पर और भारतीय क्रिकेट के भविष्य पर कोई फैसला करें. बताया जाता है कि अपने करियर में दो बार- 2008 और 2012 में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने सीनियर खिलाड़ियों को लेकर कड़े और असहज करने वाले फैसले किए. इनमें देश के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में शामिल, सौरभ गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीरेंदर सहवाग भी शामिल थे. तब धोनी के दिमाग में आने वाला विश्व कप शामिल था. अब ऐसा नहीं लगता कि महान विकेटकीपर बल्लेबाज धोनी 2023 के विश्व कप का हिस्सा रह सकेंगे. ऐसे में वक्त आ गया है कि वह भी अब दूसरों के लिए रास्ता बनाएं? गौतम गंभीर दिला रहे हैं उन दिनों की याद! भारतीय टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर उन लोगों में से हैं, जो ऐसी राय रखते हैं. गंभीर का कहना है कि धोनी जब कप्तान थे, तब उन्होंने भविष्य की योजनाओं का हवाला देते हुए युवा खिलाड़ियों को तैयार किया था. अब समय आ गया है कि भारतीय चयनकर्ता धोनी को लेकर 'व्यावहारिक फैसला' लें. एक बार फिर युवा खिलाड़ी इंतजार में हैं. जब गौतम से धोनी ने की थी बात गंभीर ने बताया, 'भविष्य के बारे में विचार करना जरूरी है, और जब धोनी कप्तान थे तो उन्होंने भविष्य में निवेश किया. मुझे याद है कि ऑस्ट्रेलिया में धोनी ने मुझसे कहा था कि मैं, सचिन और सहवाग एक साथ सीबी सीरीज में नहीं खेल सकते, क्योंकि यहां मैदान बहुत बड़े हैं.' धोनी को व्यावहारिक होने जरूरत गंभीर ने कहा, 'वर्ल्ड कप...
शीला दीक्षित

नहीं रहीं दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित

नई दिल्ली : दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित का शनिवार दोपहर को दिल्ली में निधन हो गया. वह 81 वर्ष की थीं और लंबे समय से बीमार चल रही थीं. शनिवार को एस्कॉर्ट अस्पताल में शीला दीक्षित ने अंतिम सांस ली. शीला अभी दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष थीं. शीला दीक्षित के जाने से कांग्रेस को गहरा सदमा लगा है. वह लंबे समय दिल्ली की मुख्यमंत्री रही हैं. दिल्ली में मेट्रो और तमाम विकास का श्रेय शीला का ही जाता है. मौजूदा समय में वह दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष थीं. उनका का जन्म 31 मार्च 1938 को हुआ था. वे 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं. उनका जन्म पंजाब के कपूरथला में हुआ था. उन्होंने दिल्ली के जीसस एंड मेरी कॉन्वेंट स्कूल में शिक्षा पाई और दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस से इतिहास में एमए किया था. उन्होंने लोकसभा चुनाव 2019 में दिल्ली के उत्तर पूर्वी सीट से चुनाव लड़ा था. हालांकि, इस सीट पर भाजपा नेता मनोज तिवारी ने उन्हें शिकस्त दी थी. उनका राजनीतिक सफर 1984 से 89 तक कन्नौज (उप्र) से सांसद के रूप में शुरू हुआ था. इस दौरान वह संयुक्त राष्ट्र में महिलाओं के आयोग में भारत की प्रतिनिधि रहने के साथ लोकसभा की समितियों में भी शामिल रहीं. शीला दीक्षित राजीव गांधी सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी रहीं थीं. वे 1998 से 2013 तक लगातार 3 बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं. इसके बाद वह 2014 में केरल की राज्यपाल भी रहीं. उनकी शादी यूपी के उन्नाव के आईएएस अधिकारी स्वर्गीय विनोद दीक्षित से हुई थी. बता दें कि विनोद दीक्षित बंगाल के पूर्व राज्यपाल और कांग्रेस के बड़े नेता स्वर्गीय उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे. शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित भी दिल्ली के पूर्व सांसद रहे हैं. दिल्ली की 3 बार मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित को कांग्रेस पार्टी में राजीव गांधी के बाद सोनिया गांधी ने भी खासा महत्व दिया था.
वेतन आयोग

केंद्र सरकार के पेंशनरों को मिलेगा 7वें वेतन आयोग का लाभ

नई दिल्ली : मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों को तोहफा दिया है. रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन के लिए सरकार ने सातवें वेतन आयोग के तहत बदलावों को मंजूरी देदी है. केंद्रीय कर्मचारियों को अब 7वें वेतन आयोग के तहत पेंशन का लाभ दिया जाएगा. साथ ही इसमें अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्य और केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी भी शामिल होंगे. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों सहित सभी केंद्रीय कर्मचारी, 7वें वेतन आयोग के अनुसार पेंशन का लाभ उठा सकेंगे. (जिनकी सेवानिवृत्ति की तारीख 1 जनवरी 2016 से पहले थी). 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के चलते न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी की कर्मचारियों की उम्मीदें भी जल्द ही पूरी हो सकती हैं. क्योंकि रेलवे ट्रेड यूनियन ने इसे चुनावी मुद्दा बनाने का फैसला किया है. ट्रेड यूनियन चुनावों में 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों से परे मांगें चुनाव का मुख्य एजेंडा और सभी उम्मीदवारों की प्राथमिकता सूची में शामिल होगा. फिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों के न्यूनतम मूल वेतन 7,000 से बढ़कर 18,000 रुपए प्रति माह हो गया है, जबकि पेंशन में 2.57 गुना की बढ़ोतरी हुई है. लेकिन कर्मचारी काफी लंबे समय से अपने न्यूनतम वेतन में 8,000 रुपए की बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं. इसके साथ ही 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों से पार 3.68 गुना तक फिटमेंट फैक्टर में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं. वर्तमान में केंद्र सरकार के कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 18,000 रुपए है और उन्होंने 8,000 रुपए वेतन वृद्धि की मांग की है, जिसके बाद यह बढ़कर 26,000 रुपए हो जाएगा. 7वें वेतन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने बताया कि 5वें वेतन आयोग के बाद जारी किए गए आदेशों के अनुसार, सरकार में न्यूनतम पेंशन 1,275 रुपए थी. रिपोर्ट के अनुसार, 2006 के पूर्व पेंशनर की सामान्य संशोधित समेकित पेंशन पूर्व-संशोधित मूल पेंशन का 2.26 है. साथ ही 3,500 रुपए की संशोधित न्यूनतम पेंशन 1,275 रुपए की पूर्व-संशोधित पेंशन के 2.26 गुना से बहुत अधिक है.
खनन मित्र

“खनन मित्र” एप्प : सेफ्टी के प्रति कामगारों को बनाएगा जागरूक

"डिजिटल इनिसिएटिव फॉर माइनिंग सेक्टर" पर सेमिनार नागपुर : नई डिजिटल पहल के तहत "खनन मित्र" नामक एक मोबाइल एप्प शुरू किया गया. इस एप्प को डीजीएमएस पश्चिम जोन, नागपुर तथा दक्षिण पूर्व जोन रायगढ़ ने विकसित किया है. इस एप्प के माध्यम से इन क्षेत्रों की विभिन्न कोयला एवं गैर कोयला खदानों में कार्यरत करीब एक लाख डिजिटली कनेक्टेड कामगारों के बीच सेफ्टी के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी. इसी के साथ, सेमिनार की ई-प्रोसीडिंग्स का भी विमोचन किया गया. समारोह में, "डिजिटल इनिसिएटिव फॉर माइनिंग सेक्टर" विषय पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया. इसका आयोजन खान सुरक्षा महानिदेशालय पश्चिम अंचल के तत्वावधान में, श्रम एवं नियोजन मंत्रालय के अधीन विभिन्न विभागों के सहयोग से किया गया. सेमीनार का उद्देश्य, खदानों में व्यवस्थागत सुधार के लिए डिजिटल प्रवेश पर ध्यान देना है, जिससे सेफ्टी, उत्पादकता और अन्य महत्वपूर्ण पैरामीटर को क्रियान्वित किया जा सके. विविध खनन संस्थानों एवं श्रम तथा नियोजन मंत्रालय के ईपीएफओ, ईएसआईसी एवं सीएलसी विभागों द्वारा तकनीकी प्रेजेंटेशन भी किए गए. उद्घाटन सत्र की मुख्य अतिथि संयुक्त सचिव श्रम एवं नियोजन मंत्रालय (भारत सरकार), सुश्री कल्पना राजसिंघोट थीं. उप महानिदेशक खान सुरक्षा (पश्चिम अंचल नागपुर) आर. सुब्रमनियन ने सेमीनार के उदघाटन सत्र की अध्यक्षता की. वेकोलि के सीएमडी आर.आर. मिश्र, मॉयल के सीएमडी एम.पी. चौधरी, मनोज कुमार एवं अजीत कुमार चौधरी (दोनों निदेशक तकनीकी, वेकोलि), गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक विनोद पिल्लई, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे. निदेशक खान सुरक्षा (पश्चिम अंचल, नागपुर) आर.टी. मंडेकर ने स्वागत भाषण किया. कल्पना राजसिंघोट ने भारत सरकार के 'डिजिटल इंडिया' के तहत "खनन मित्र" नामक एप्प के इस पहल के महत्व का उल्लेख किया. उन्होंने खदानों में शून्य-दुर्घटना लक्ष्य की प्राप्ति में इसके महत्व को निरुपित किया. सुश्री राजसिंघोट ने वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड द्वारा इस क्षेत्र में की जा रही पहल की सराहना की. सुब्रमनियन ने प्रारम्भ में सेमिनार के आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला. मिश्र ने अपने सम्वेबोधन में वेकोलि की खदानों में प्रारम्भ डिजिटल पहल का उल्लेख किया. समारोह को मनोज कुमार, अजीत कुमार चौधरी एवं विनोद पिल्लई ने भी सम्बोधित किया.
इसरो

‘चंद्रयान-2’ चांद पर उतरेगा 7 सितंबर को, तैयारी पूरी

इसरो के सौजन्य से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भारत के महत्वाकांक्षी स्पेश 'मिशन चंद्रयान-2' को लांच करने की तैयारी पूरी कर ली है. सोमवार, 15 जुलाई को तड़के 2.51 बजे 'मिशन चंद्रयान-2' को लांच कर दिया जाएगा. इसरो के चेयरमैन डॉक्टर के. सिवन ने बताया, 'यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास छह या सात सितंबर को उतरेगा. चंद्रमा के इस हिस्से के बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं हासिल है.' चंद्रयान-2 के जरिए चंद्रमा की सतह पर खनिजों के अध्ययन और वैज्ञानिक प्रयोग किया जाएगा. भारत का यह दूसरा चंद्र अभियान होगा. डॉक्टर सिवन के अनुसार जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा. सफल लॉन्चिंग के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव पर 'चंद्रयान-2' के लैंड करने में करीब 2 महीने का वक्त लगेगा. यह 6 या 7 सितंबर को चांद की सतह पर उतर जाएगा. चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा, जहां उम्मीद है कि बहुतायत में पानी मौजूद हो सकता है. कुल 978 करोड़ रुपए चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से होगा. अंतरिक्ष यान का कुल वजन 3.8 टन है. इसमें तीन मॉड्यूल हैं- आर्बिटर, लैंडर(विक्रम) और रोवर(प्रज्ञान). सिवन ने कहा कि ‘आर्बिटर’ में आठ पेलोड, तीन लैंडर और दो रोवर होंगे. उन्होंने बताया कि चंद्रयान-2 अभियान में उपग्रह से जुड़ी लागत 603 करोड़ रुपए है. वहीं, जीएसएलवी मार्क-3 की लागत 375 करेाड़ रुपए है. कुल 978 करोड़ रुपए की लागत आई है. इसरो के मुताबिक, ऑर्बिटर, पेलोड के साथ चंद्रमा की परिक्रमा करेगा. लैंडर चंद्रमा के पूर्व निर्धारित स्थल पर उतरेगा और वहां एक रोवर तैनात करेगा. ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर पर लगे वैज्ञानिक पेलोड चंद्रमा की सतह पर खनिज और तत्वों का अध्ययन करेंगे. उल्लेखनीय है कि चंद्रयान-2 अपने पूर्ववर्ती चंद्रयान-1 का उन्नत संस्करण है. चंद्रयान-1 को करीब 10 साल पहले भेजा गया था. इस बार चांद की सतह पर उतरेगा चंद्रयान 'चंद्रयान-2' मिशन की खास बात यह है कि इस बार यह चांद की सतह पर उतरेगा. 2008 में लॉन्च हुआ चंद्रयान-1 चंद्रमा की कक्षा में गया जरूर था, लेकिन वह चंद्रमा पर उतरा नहीं था. उसे चांद की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित कक्षा में स्थापित किया गया था.
धोनी

धोनी को लेकर सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर भी परेशान

मुंबई : वन-डे वर्ल्ड कप मुकाबले में सेमीफाइनल में भारत की न्यूजीलैंड के हाथों हुई हार के बाद महेंद्र सिंह धोनी के इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट की खबरों ने खलबली मचा दी है. एम.एस. धोनी को लेकर सोशल मीडिया से लेकर हर जगह चर्चा गर्म है. पूर्व कप्तान धोनी के संन्यास की खबरों के बीच सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने भी अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है. लता मंगेशकर ने ट्विटर पर लिखा, "नमस्कार एमएस धोनीजी. आजकल मैं सुन रही हूं कि आप रिटायर होना चाहते हैं. कृपया आप ऐसा मत सोचिए. देश को आपके खेल की जरूरत है और ये मेरी भी गुजारिश है कि रिटायरमेंट का विचार भी आप मन में मत लाइए." Lata Mangeshkar‏Verified account @mangeshkarlata @mangeshkarlata Namaskar M S Dhoni ji.Aaj kal main sun rahi hun ke Aap retire hona chahte hain.Kripaya aap aisa mat sochiye.Desh ko aap ke khel ki zaroorat hai aur ye meri bhi request hai ki Retirement ka vichar bhi aap mann mein mat laayiye.@msdhoni 1:23 AM - 11 Jul 2019 इसके साथ ही लता ने एक और ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने 1994 में गाया हुआ अपना टीम इंडिया को समर्पित किया है. इस गाने के बोल हैं, 'आकाश के उस पार भी' लता ने लिखा, "कल भले ही हम जीत न पाए हों, लेकिन हम हारे नहीं हैं. गुलजार साहब का क्रिकेट के लिए लिखा हुआ ये गीत मैं हमारे टीम को डेडिकेट करती हूं." https://youtu.be/it5R3SZj52Y Lata Mangeshkar✔@mangeshkarlata Kal bhalehi hum jeet na paaye ho lekin hum haare nahi hain.Gulzar sahab ka cricket ke liye likha hua ye geet main hamari team ko dedicate karti hun. 9,766 2:02 PM - Jul 11, 2019 उल्लेखनीय है कि संवाददाता सम्मेलन के दौरान कप्तान विराट कोहली से भी न्यूजीलैंड से मिली हार के बाद रिटायरमेंट को लेकर सवाल पूछा गया. जवाब में कप्तान विराट कोहली ने कहा, 'नहीं, उन्होंने अभी तक हमें इस बारे में नहीं बताया है.'
दिव्यांगों

दिव्यांगों के चेहरे पर लौटी वेकोलि के सौजन्य से खुशी

नागपुर : वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) एवं आधार अपंग सामाजिक बहुद्देशीय विकास संस्था के संयुक्त तत्वावधान में विगत 9 जुलाई को निदेशक (कार्मिक) डॉ. संजय कुमार एवं क्लिक टू क्लाउड के अशोक मिश्रा के हाथों दिव्यांगों को हाइटेक स्टिलटेक्चर प्रोस्थेसिस कृत्रिम पैर का वितरण किया गया. मुख्यालय स्थित कोल क्लब में हुए इस कार्यक्रम में 25 दिव्यांग लाभान्वित हुए. इन सभी दिव्यांग जनों का चयन आधार अपंग सामाजिक बहुद्देशीय विकास संस्था की ओर से किया गया था. वेकोलि ने सभी 25 चयनित दिव्यांगों के हाइटेक स्टिलटेक्चर प्रोस्थेसिस कृत्रिम पैरों के लिए अपने कारपोरेट सामाजिक दायित्व के तहत पूर्ण आर्थिक सहयोग प्रदान किया. लाभान्वित होने वाले दिव्यांग जनों में युवा, वृद्ध और महिलाएं भी शामिल हैं. अपने पैरों पर खड़े होते देख दिव्यांगों के बुझे चेहरे खुशी से खिल गए. कृत्रिम पैर लगा कर तुरंत बुलेट मोटरसाइकिल चला रहे वाजिदअली ने बताया कि उनके जीवन में आ रही दिक्कतें दूर होगी. दिव्यांगता किसी के जीवन का अभिशाप न बन जाए, वेकोलि की ओर से आधार अपंग सामाजिक बहुद्देशीय विकास संस्था द्वारा उनके पुनर्वास के ककर्य में सहयोग किया गया. सभी दिव्यांग जनों को कृत्रिम पैर मिलने से अब उनके जीवन में छाया अन्धकार दूर हो सकेगा. वे सभी अपनी अब रोजी-रोटी कमा सकेंगे और अपने दम पर सपने पूरे कर सकेंगे. उन्हें परनिर्भर नहीं रहना पड़ेगा. वेकोलि के निदेशक (कार्मिक) डॉ. संजय कुमार ने इस अवसर पर सभी दिव्यांग जनों को वेकोलि की ओर से शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि दिव्यांगता को अब अपने जीवन के सौभाग्य में बदलने का अवसर आपके सामने है. अब आप अपने बल-बूते पर अपनी जिंदगी संवारने में सक्षम होंगे. दिव्यांगों को हाइटेक स्टिलटेक्चर प्रोस्थेसिस कृत्रिम पैर के वितरण के अवसर पर आधार अपंग सामाजिक बहुद्देशीय विकास संस्था के अध्यक्ष सुमित गुलाबराव ताटे तथा वेकोलि की विभागाध्यक्ष कल्याण (सीएसआर) श्रीमती संध्या सिन्हा प्रमुखता से उपस्थित थीं. कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ प्रबंधक (कार्मिक) समीर बारला ने किया. संयोजन में सर्वश्री श्रीराम चतुर्वेदला, संजय कोटा एवं श्रीमती आर रेश्मी तथा टीम ने सहयोग किया.
पत संस्था

मेधावी विद्यार्थियों एवं जेष्ठ नागरिक का पत संस्था ने किया सत्कार

*विपेन्द्र कुमार सिंह, नागपुर : सहकार क्षेत्र में अग्रणी उत्तर नागपुर के वांजरी ले आऊट विनोबा भावे नगर स्थित 'सेवा श्री साई सहकारी पत संस्था' की 23वीं वार्षिक आमसभा बिनाकी नई मंगलवारी मेहंदीबाग रोड के राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज स्मृति सभागृह में सम्पन्न हुई. आमसभा की अध्यक्षता संस्था अध्यक्ष रविंद्र सातपुते ने की तथा रिपोर्ट वाचन एवं सूत्र संचालन संस्था के उपाध्यक्ष मंगेश सातपुते ने किया. आभार संस्था व्यवस्थापक शेखर निमजे ने माना. कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में पूर्व नागपुर के विधायक कृष्णाजी खोपड़े, नागपुर महानगर पालिका परिवहन मंडल के सभापति बंटीजी कुकड़े नागपुर जिला पत संस्था फेडरेशन के अध्यक्ष राजेंद्र घाटे, नागपुर शहर तेली समाज सभा के अध्यक्ष बाबूराव वंजारी, भाजपा ओबीसी के विदर्भ अध्यक्ष सुभाष घाटे, संत तुकड़ो जी महाराज अर्बन क्रेडिट सो. के अध्यक्ष हरिभाऊ किरपाने, गांधीबाग अर्बन क्रेडिट बैंक के संचालक अरुण टिकले और युवक कांग्रेस नेता शेख शाहनवाज प्रमुख़ रूप से उपस्थित थे. विधायक कृष्णा जी खोपड़े के हाथों हर्षिता सिंह को cbsc बोर्ड में merit लिस्ट में आने के लिए सेवा श्री साई सहकारी पत संस्‍था नागपुर द्वारा सम्मानित किया गया. आमसभा के कार्यक्रम में प्रमुख अथिति ने 20 मेधावी विद्यर्थियों का नगद राशि, स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र देकर सत्कार किया गया. साथ ही जेष्ठ नागरिक, दैनिक प्रतिनिधि का सत्कार व गरीब विद्यर्थियों एवं दिवंगत सभासद के वारिस को मदद धनादेश दिया गया. कार्यक्रम में प्रमुखता से मंच पर संचालक मंडल के सुरेश कोहाड़, खोरबारा साहू, पंचराम पराते, राजेंद्र झाडे, डॉ. शिवराज देशमुख, सीताराम भेंडे, विजय चौहान, संचालिका वंदना सातपुते, देवकीबाई भोंगाड़े, मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा सातपुते, तलजोड़ समिति अध्यक्ष सोहनलाल बनपाल, सदस्य मोहन सातपुते और प्रकाश कांबले प्रमुखता से उपस्थित थे. कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संस्था व्यवस्थापक शेखर निमज़े, लेखापाल रामभाऊ मेश्राम, कर्मचारी गणेश नंदनवार, योगेश सातपुते, प्रवीण कोल्हे, वासुदेव बोकडे, महेंद्र सातपुते, सिद्धार्थ रामटेके, प्रशांत पंदरे, आशा मुंढरीकर, वंदना नाकाड़े, नंदा चांदेकर, अंजली मेश्राम, आशा निमजे, सुशीलाबाई बुरडे एवं दैनिक प्रतिनिधि ने अथक प्रयास किया.