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विज्ञान मेला

‘भोपाल विज्ञान मेला- 2019’ में वेकोलि के स्टॉल को प्रथम पुरस्कार

नागपुर : टीम वेकोलि को आज एक बार फ़िर गौरवान्वित होने का अवसर मिला, जब भोपाल में आयोजित 'भोपाल विज्ञान मेला - 2019' में कम्पनी के कोयला खनन प्रदर्शित करने वाले स्टॉल को 'इनोवेशन इन इंडस्ट्रियल केटेगरी' में प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया. भोपाल में 13 से 16 सितंबर तक चले इस विज्ञान मेला के अंतिम दिन मुख्य अतिथि, हरियाणा एवं त्रिपुरा के भूतपूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने उक्त पुरस्कार प्रदान किया. उल्लेखनीय है कि कम्पनी के स्टॉल में प्रदर्शित विभिन्न मॉडल्स को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और उसे सराहा. खासकर,युवाओं ने वेकोलि के मॉडल्स में गहरी रूचि दिखाई. प्रदर्शनी में संयोजन कर रहे टीम वेकोलि के सदस्यों ने स्टॉल में प्रदर्शित कोयला-खनन गतिविधियों के बारे में दर्शकों की जिज्ञासा को शांत किया. अंतिम दिन छात्र-छात्राओं के साथ-साथ स्कूली बच्चों की उपस्थित देखने को मिली. साथ ही विज्ञान प्रेमियों की भी बड़ी संख्या में सहभागिता दिखाई. युवा यहां लगाई गई प्रदर्शनियों के साथ सेल्फी लेने के साथ-साथ मॉडल्स के बारे में जानकारी लेते नजर आए. विज्ञान मेला में भारत शासन और मध्यप्रदेश शासन के कई प्रमुख विभागों, उपक्रमों सहित कई निजी संस्थान विभिन्न वैज्ञानिक उपलब्धियों और कार्यक्रमों को प्रदर्शित भी किया गया. इनके द्वारा विद्यार्थियों को शिक्षित करने के उद्देश्य से विभिन्न वैज्ञानिक मॉडलों को भी प्रस्तुत किया गया. इनमें वेकोलि सहित इसरो, ब्रह्मेस, एनटीपीसी, एनपीसीआईएल, एन्वायरनो टेक, डीएई, सेन्टर फॉर ग्राउण्ड वाटर, सीआईएई, आईआईएसएस, एमपीपीसीबी, एचईजी, बीएचईएल, वर्धमान, एनएचडीसी, जैव विविधता विभाग और बागवानी विभाग प्रमुख थे. यहां पर लगभग 110 से ज्यादा स्टॉल्स लगाए थे.   बाढ़ पीड़ितों के लिए झंकार महिला मंडल ने 1 लाख रुपए प्रदान किया महाराष्ट्र में आई भीषण बाढ़ की विभीषिका से पीड़ित लोगों की मदद के लिए झंकार महिला मंडल, नागपुर ने महाराष्ट्र राज्य मुख्यमंत्री राहत कोष में एक लाख रुपए की राशि का योगदान किया. झंकार महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती अनिता मिश्र की पहल और उनके निर्देशन में एकत्र की गई इस राशि में वेकोलि के क्षेत्रों में सक्रिय महिला मंडलों ने भी योगदान किया है. झंकार महिला मंडल की ओर से एक लाख रुपए का चेक आज सचिव श्रीमती संगीता दास, श्रीमती सिम्मी सिंह एवं श्रीमती संध्या सिंहा, महाप्रबंधक (कार्मिक/कल्याण) ने माननीय मुख्यमंत्री की विशेष कार्य अधिकारी श्रीमती आशा पठान को सौंपा. उन्होंने झंकार महिला मंडल की इस सदाशयता के लिए धन्यवाद व्यक्त किया. उल्लेखनीय है कि श्रीमती अनिता मिश्र के मार्गदर्शन में झंकार महिला मंडल जरूरतमन्दों की सेवा में सदैव तत्पर रहता है.
सेव मेरिट

‘सेव मेरिट, सेव नेशन’ : वोट बैंक प्रभावित करेगा महाराष्ट्र में…

'आरक्षण तुष्टिकरण नीति' भारी तो नहीं पड़ रही सत्तारूढ़ भाजपा के लिए   विश्लेषण : कल्याण कुमार सिन्हा महाराष्ट्र में 'सेव मेरिट, सेव नेशन' (मेरिट बचवा, देश बचवा) आंदोलन अपना प्रभाव पैदा करने में कामयाब होता नजर आ रहा है. आरक्षण के घोड़े पर सवारी कर सत्ता सुनिश्चित करने में सफल रही राज्य की भाजपा-शिवसेना सरकार को इस आंदोलन से मिल रही चुनौतियां भारी पड़ रही है. क्योंकि इस आंदोलन में भारतीय जनता पार्टी समर्थकों की संख्या ही सर्वाधिक नजर आई है. आंदोलन के अगुआ और आंदोलन से जुड़े 62 के करीब संगठन भी सत्तारूढ़ दल के बड़े समर्थकों में से हैं. जो जनसंख्या के 32 फीसदी समूह बताए जाते हैं. इसी वर्ष 2019 के मई-जून महीने में आरंभ हुए राज्यव्यापी 'मेरिट बचवा, देश बचवा' आंदोलन, पिछले दिनों के मराठा आरक्षण आंदोलन से कहीं अधिक प्रभावी रहा है. क्योंकि इसमें शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों के साथ ही अनेक वाणिज्यिक और सामान्य वर्ग के विभिन्न जातीय समूहों के संगठन भी शामिल हैं. नागपुर के साथ ही विदर्भ के अन्य जिलों में इस आंदोलन को व्यापक प्रतिसाद मिला है. इसके साथ ही पुणे, मुम्बई सहित कोंकण, पश्चिम महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और नासिक (खानदेश) में भी इस आंदोलन का प्रभावी स्वरूप नजर आया है. पडोसी राज्य मध्य्प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी इस आंदोलन के सुगबुगाहट दिखाई देने लगी है. भयावह बन गई है आरक्षण की राजनीति लोकसभा चुनाव से पूर्व केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सामान्य जाति वर्ग में आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू कर दिया है. इसके तहत सरकारी नौकरी और शिक्षा के क्षेत्र में 10 फीसदी आरक्षण दिया गया है. लेकिन इसके बाद से ही सामान्य वर्ग के लोगों में शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण के इस घुड़दौड़ के बीच 10 फीसदी आरक्षण के खोखलेपन का अहसास गहराया है. महाराष्ट्र में आरक्षण की राजनीति सामान्य वर्ग के लोगों की नजरों में भयावह बन गई है. शिक्षा और नौकरियों में प्रतिभा (मेरिट) की उपेक्षा कर जातिगत वोटबैंक के लिए आरक्षण कोटे को महाराष्ट्र में 74 प्रतिशत तक जा पहुंचा दिया गया है.   आत्मघाती मानते हैं अत्याधिक आरक्षण को 'मेरिट बचवा, देश बचवा' समर्थकों के अनुसार आरक्षण के कारण शिक्षा से लेकर वित्त, साइंटिफिक और सरकारी संस्थाओं में गिरावट आई है. यह केवल सामान्य वर्ग के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि आरक्षित वर्ग और देश के भविष्य के लिए भी सही नहीं है. आंदोलनकारियों को संवैधानिक आरक्षण स्वीकार्य है, लेकिन अत्याधिक आरक्षण को वे आत्मघाती मानते हैं. उनका स्पष्ट मत है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण के लिए तय 50 फीसदी मर्यादा का पालन होना चाहिए. तत्काल रद्द हो अतिरिक्त आरक्षण ‘सेव मेरिट सेव नेशन’ के समर्थकों का मानना है कि अतिरिक्त आरक्षण तत्काल रद्द होना चाहिए, ताकि उत्कृष्ट विद्यार्थियों को शिक्षा और नौकरी में समान अवसर मिल सके. उनका आरोप है कि राज्य सरकार के मराठा आरक्षण और केन्द्र सरकार के आर्थिक आरक्षण के कारण राज्य में आरक्षण 74 फीसदी तक पहुंच गया है. इससे उत्कृष्ट विद्यार्थियों के साथ अन्याय हो रहा है और शिक्षा एवं नौकरियों में सामान्य वर्ग के प्रतिभाशाली युवाओं के लिए जगह कम हो गई है. ऐसे में मेरिट...
EPS-95

सुप्रीम कोर्ट में झूल रही है EPFO की पुनर्विचार याचिका

बुजुर्ग पेंशनरों के धैर्य की ली जा रही है परीक्षा अवलोकन : EPS-95 के तहत पेंशन बढ़ोत्तरी और हायर पेंशनपर भुगतान करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर, EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) की ओर से दायर की गई पुनर्विचार याचिका पर पहले सुप्रीम कोर्ट का फैसला 2 मई 2019 को आना था, लेकिन इसकी सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह रखा गया. इसे फिर 16 जुलाई को लिस्टेड किया गया,लेकिन फिर 5 सितंबर के लिए लिस्टेड किया था. लेकिन सुनवाई की तारीख को अब फिर बढ़ाकर 19 सितंबर कर दी गई है. केंद्र सरकार की ओर से 2014 में EPS-95 (कर्मचारी पेंशन स्कीम-95) मे संसोधन कर कुछ बदलाव किए गए थे. जिसमें हायर वेजेस पर पेंशन का विकल्प भी कर्मचारियों से छीन लिया गया था. इसके बाद से ही EPS-95 (कर्मचारी पेंशन स्कीम) पेंशनर और EPFO के बीच हायर पेंशन देने को लेकर विवाद चल रहा है. कर्मचारियों ने केरल हाईकोर्ट में EPFO के इस फैसले को चुनौती दी थी. इस पर केरल हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए EPFO को हायर वेजेज (उच्च वेतन) और सेवानिवृति के आखिरी महीने के वेतन के हिसाब से पेंशन की गणना का आदेश दिया था. लेकिन EPS-95 धारकों को हायर वेजेस पर पेंशन देने के फैसले पर EPFO ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए EPFO की याचिका को खारिज कर दिया और 1 अप्रैल 2019 को पेंशनरों के हित मे फैसला सुनाया. इसके बावजूद EPFO की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी गई है. EPFO की दलील है कि उसके पास सुप्रीम कोर्ट और केरल हाईकोर्ट के फैसले के हिसाब से पेंशनरों को पेंशन देने के लिए पर्याप्त फंड नहीं है. EPFO की इसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से 2 मई 2019 को फैसला आना था, लेकिन इसकी सुनवाई की तिथि बढ़ाकर जुलाई के दूसरे सप्ताह 16 जुलाई को कर दी गई और फिर 5 सितंबर के लिए की ओर से लिस्टेड किया गया था. अब सुनवाई की तारीख को बढ़ाकर 19 सितंबर करने की खबर मिली है.
किसानों

किसानों के लिए ‘जीवन ऊर्जा’ बनी वेकोलि का जल व्यवस्थापन

उमरेड क्षेत्र के मोरपार खदान के पानी से ग्रामीणों एवं वन्य-जीवों को भी राहत विशेष फीचर : सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनी वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) ने अपने उमरेड क्षेत्र की मोरपार कोयला खनन परियोजना के पास के किसानों को 'जीवन ऊर्जा' उपलब्ध कराया है. आसपास के किसानों को खेती के लिए अब न केवल पर्याप्त पानी मिल रहा है, बल्कि पेयजल भी उनके कुंओं और चापानलों में इतना आने लगा है, जिसके लिए पहले उन्हें काफी मशक्क्त करनी पड़ती थी. अपनी खदान के पानी के जल-व्यवस्थापन से किसानों को यह ऊर्जा मिली है. इससे आसपास के ग्रामीणों को खेती-किसानी के लिए अब पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से उन्हें काफी सहूलियत हो गई है. कुछ वर्ष पहले की तुलना में, किसानों को धान और गेहूं की फसल उगाने में अब परेशानी नहीं होती और इस व्यवस्था से, जल-स्तर बढ़ जाने से आसपास के कुंओं और चापाकल (हैंडपम्प) में पर्याप्त पानी मिलने लगा है. नागपुर जिले की उमरेड तहसील से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित वेकोलि की मोरपार परियोजना में रूटीन कोयला-उत्पादन बदस्तूर जारी है. साथ ही, कारपोरेट सामाजिक दायित्व (C.S.R.) को बख़ूबी निभाते हुए वेकोलि द्वारा जल-संकट के मद्देनजर, मिंजरी-मोरपार गांव के पास मोरपार तालाब में, पाइप के जरिये खदान से निःशुल्क पानी छोड़ा जा रहा है. इस तालाब से करीब 149 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई तो सुगमतापूर्वक होती ही है. करीब 1000 आबादी वाले मिंजरी और मोरपार गांव के कुंओं और चापाकलों के जल-स्तर में संतोषजनक वृद्धि हुई है. इससे ग्रामीणों, खासकर महिलाओं को अब पेयजल की अच्छी सुविधा उपलब्ध हो रही है. इस व्यवस्था से अब महिलाओं को ही दूर से पानी लाना नहीं पड़ता. मोरपार ग्राम पंचायत के उप सरपंच नानाजी लहानु दोडके बताते हैं कि इस इलाके के काश्तकार वेकोलि के बहुत आभारी हैं कि कोयला कम्पनी ने काफी दूर खदान से लाकर पानी तालाब में छोड़ने की व्यवस्था की है. इससे खेती में अब बहुत सुविधा हो रही है और हमारे किसान धान, गेंहू तथा सब्जी-भाजी की अच्छी पैदावार ले पा रहे हैं. वेकोलि ने जनता विद्यालय, मोरपार में कंपाउंड वॉल, गेट और एक चबूतरा भी बनवा दिया, जिससे विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक भी खुश हैं. गांव के 70 वर्षीय बुजुर्ग चिन्दू पांडू दोडके ने वेकोलि प्रबंधन और कर्मियों को इस सहकार के लिए आशीष देते हुए कहा कि वेकोलि को इसका अन्दाज़ा भी नहीं होगा कि उनलोगों ने हम पर कितना बड़ा उपकार किया है. श्री दोडके ने बताया कि इंसानों को सहूलियत देने के आलावा कंपनी ने खदान के पानी को जंगल से गुजरते हुए करीब तीन किलोमीटर तक शेडेगांव तालाब तक पहुंचाया, जिसे बेजुबान वन्य-प्राणी और अन्य मवेशी भी पीकर रहे हैं. युवा कृषक विनोद बापू राव सेरकुरे ने भी कोयला- कम्पनी की इस उदारता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि पानी की इस सुविधा से हमारी ज़िंदगी अब आसान हो गई है. 68 वर्ष के दादाजी महादेव रामाजी तोडासे उपलब्ध जल-सुविधा पर प्रसन्न हैं और वेकोलि परिवार के सदस्यों को इसके लिए भरपूर दुआएं देने से भी नहीं चुके. इस बात की खुशी है कि वेकोलि का स्थानीय प्रबंधन सदैव हमारे...
सांसद

सांसद सुप्रिया सुले की कार समेत काफिले के 11 वाहनों पर जुर्माना

समाचार माध्यमों से, मुंबई : राकांपा सांसद सुप्रिया सुले की कार समेत काफिले के 11 वाहनों पर सोलापुर में जुर्माना किया गया है. उनके सभास्थल पर ये वाहन नो-पार्किंग क्षेत्र में खड़े पाए गए थे. शनिवार की शाम की इस घटना की पुष्टि आज रविवार को यहां पुलिस सूत्रों ने की. सांसद सुप्रिया सुले राकांपा अध्यक्ष शरद पवार की सुपुत्री हैं. हालांकि पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि 11 में से जिस एक कार का भी चालान किया गया, वह सांसद सुले की ही थी. सूत्रों ने बताया कि सांसद उसी वाहन पर सभास्थल पर अपने काफिले के साथ पहुंची थी. उनके उस वाहन पर राकांपा दर्ज था. विधानासभा चुनाव से पहले जनसंपर्क अभियान 'संवाद ताईंशी' में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की सांसद श्रीमती सुले ने मंगलवार को सोलापुर के डफरिन चौक पर आईएमए हॉल में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुई थीं. पुलिस ने बताया कि जब कार्यक्रम शुरू हुआ तो इलाके में यातायात जाम लग गया. उस पर पुलिस ने कार्यक्रम आयोजकों से आईएमए हॉल के बाहर नो पार्किंग क्षेत्र में खड़े वाहनों को हटाने को कहा. बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद इन वाहनों को नहीं हटाया गया. पुलिस सूत्रों ने बताया कि उसके बाद इन कुछ एसयूवी वाहन समेत आठ वाहनों पर मोटर वाहन अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत जुर्माना किया गया. अधिकारी ने कहा कि इन वाहनों में राकांपा के नाम पर दर्ज एक वाहन और एक अन्य वाहन शामिल थे, जिससे बारामती की लोकसभा सदस्य श्रीमती सुले इस कार्यक्रम के लिए पहुंची थीं. उन्होंने कहा, "हम पक्का नहीं बता सकते हैं कि उसमें से कोई वाहन सांसद के नाम से रजिस्टर्ड था या नहीं." इस बीच राकांपा की युवा शाखा के कुछ सदस्यों ने बताया कि सभास्थल के समीप वाहनों को खड़ा करने के लिए कोई और जगह नहीं थी, सभास्थल पर भीड़ के कारण वाहनों को वहां से हटाना भी संभव नहीं था. उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई पुलिस ने जानबूझकर की.
पूर्व सरपंच

पूर्व सरपंच वल्वीकर सहित सैकड़ों कांग्रेसी भाजपा में

नागपुर : पूर्व सरपंच सुरेश वल्वीकर अपने सैकड़ों समर्थक कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए. बुटीबोरी एमआईडीसी के उद्यमी वल्वीकर बोथली ग्रामपंचायत के पूर्व सरपंच और वर्तमान सदस्य हैं. उन्होंने यहां खामला के पांडे लेआऊट स्थित मेघे निवास में हिंगणा क्षेत्र के भाजपा विधायक समीर मेघे के समक्ष विगत 18 अगस्त को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. उनके साथ बोथली ग्रामपंचायत और बुटीबोरी नगरपरिषद क्षेत्र के सैकड़ों की संख्या में उनके समर्थकों ने भी भाजपा के सदस्यता ग्रहण किए. उनके साथ सदस्य्ता ग्रहण करने वाले प्रमुख समर्थकों में शंकर बालखंडे, गणेश श्रीवास, गणेश आंबोलकर, नीलेश भेंडे, विलास संभारे का समावेश है. इस अवसर पर बुटीबोरी के नगराध्यक्ष बबलू गौतम, जिला परिषद सदस्य रूपराव जी सिंघने, मंडल अध्यक्ष आकाश भाऊ वानखेड़े, अनिल ठाकरे और सुनील बाबू वाघ प्रमुखता से उपस्थित थे. विधायक समीर मेघे ने वल्वीकर और उनके समर्थकों के भाजपा मी सदस्यता ग्रहण करने पर प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने पार्टी के सिद्धांतों के अनुरूप क्षेत्र और जनता के हित में सभी से कार्य करने का आह्वान किया. उन्होंने वल्वीकर को आश्वस्त किया कि क्षेत्र के विकास कार्य में उनके प्रयासों का उनका भरपूर समर्थन रहेगा. खेत्र के विकास में वल्वीकर को अपने अनुभव का लाभ पहुंचाने की भी उनसे अपील की.
मुरालीलाल

व्यापारी प्रतिनिधि मुरारीलाल शर्मा ZRUCC सदस्य चुने गए

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की DRUCC सभा में हुआ चयन नागपुर : व्यापार जगत से जुड़े और समाजसेवी मुरारीलाल शर्मा को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की बुधवार को आयोजित DRUCC सभा में निर्विरोध ZRUCC सदस्य चुना गया. सभा में 28 विभिन्न क्षेत्रों से आए DRUCC सदस्य उपस्तिथ थे. सभा की अध्यक्षता मंडल प्रबंधक (DRM) श्रीमती शोभना बंदोपाध्याय और सचिव वरिष्ठ DCM रमन्ना उपस्तिथ थे. मुरारीलाल शर्माजी के ZRUCC सदस्य चुने जाने पर ZRUCC सदस्य विधायक गिरीश व्यास और ZRUCC सदस्य व्यापारी नेता प्रताप मोटवानी ने शॉल श्रीफल बुके देकर सत्कार किया. गिरीश व्यास और प्रताप मोटवानी ने उनकी नियुक्ति पर हर्ष प्रकट कर कहा कि वह यात्रियों के हितों के लिए कार्य करेंगे. इस अवसर पर DRUCC सदस्य संजय बारा पात्रे, आनंद कारिया सहित ZRUCC सदस्य, विवेक मंगतानी, राधेश्याम हटवार,सत्येन्द्रसिंग ठाकुर एवं रेलवे से जुड़े सुरेंद्र शुक्ला, नरेश जुम्मानी, महेंद्र भूटानी, नारायण अग्रवाल, नंदू दयानी, सदन यादव ने मुरारीलाल शर्माजी का सत्कार किया. दाधीच समाज की ओर से महेश तिवारी ने उनका स्वागत किया. मुरारीलाल शर्माजी ने अपने चयन के लिए DRM श्रीमती शोभना बंदोपाध्याय, ZRUCC सदस्य प्रताप मोटवानी, सभी DRUCC सदस्यों गोंदिया के रमण कुमार मेठी का विशेष आभार माना है. मोटवानी ने बताया कि शर्माजी इसके पूर्व पैसेंजर कमेटी, विशेष कार्यकारी अधिकारी, पुलिस शांतता कमेटी, ST महामंडल, कामठी नगर परिषद, नागपुर विद्यापीठ में अनेक वर्षो तक कार्य करते रहे हैं. शर्मा ने इसके पूर्व भी अपने क्षेत्र में यात्रियों के सुझाव पर रेलवे से जुड़े कार्य नि:स्वार्थ भाव से कर सभी की सराहना पाई है. मोटवानी के अनुसार उनकी नियुक्ति से व्यापार जगत में हर्ष व्याप्त है.
सांस्कृतिक

सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘सावन की फुहार’ का वेकोलि में आयोजन

नागपुर : वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) में बुधवार, 21 अगस्त को "सावन की फुहार" सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें वेकोलि की विभिन्न महिला मंडलों में झंकार महिला मंडल, संगिनी एवं स्मृति क्लब के वार्षिक समारोह संपन्न हुए. "सावन की फुहार" थीम के अंतर्गत झंकार, संगिनी और स्मृति क्लब की सदस्यों ने अत्यंत मनभावन सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए. एक प्रस्तुति में महिला कलाकारों ने "अगर सुरक्षित हो नारी, सुजलाम-सुफलाम् हो वसुंधरा सारी" का सुन्दर सन्देश दिया. कार्यक्रम में झंकार महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती अनिता मिश्र मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं. इस अवसर पर उपाध्यक्ष श्रीमती रीना कुमार, श्रीमती अनिता अग्रवाल, श्रीमती राधा चौधरी, श्रीमती संगीता शर्मा, श्रीमती इरावती दाणी भूतपूर्व निदेशक वित्त, श्रीमती गीता शरण प्रमुखता से उपस्थित थीं. समारोह में विशेष पत्रिका 'समर्पण' के 11वें अंक का विमोचन किया गया. श्रीमती अनिता मिश्र ने अपने संबोधन में महिला मंडलों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की तथा इसमें और तेजी लाने का आह्वान किया. प्रारंभ में स्वागत भाषण श्रीमती सिम्मी सिंह ने किया. कार्यक्रम का संचालन श्रीमती वीणा नायर ने तथा धन्यवाद ज्ञापन श्रीमती सिम्मी प्रसाद ने किया. कार्यक्रम में वेकोलि के सभी क्षेत्रों में सक्रिय महिला मंडल एवं संगिनी तथा स्मृति क्लब की सदस्यों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति से सब की वाहवाही लूटी.
एसटी

महाराष्ट्र : एसटी बसों में लगेंगे व्हेकिल ट्रैकिंग सिस्टम

6 महीनों में एसटी की सभी बसों को वीटीएस और पीआईएस से लैस किया जाएगा समाचार माध्यम मुंबई : महाराष्ट्र राज्य पथ परिवहन महामण्डल (एमएसआरटीसी) ने एसटी बसों के लिए एक लाइव ट्रैकिंग सिस्टम शुरू किया है, जिससे यात्रियों को अपने आवागमन के बारे में वास्तविक समय की जानकारी मिल जाएगी. वीटीएस (व्हेकिल ट्रैकिंग सिस्टम)- पीआईएस (पैसेंजर्स इन्फॉर्मेशन सिस्टम) के साथ, यात्री यह समझ पाएंगे कि राज्य की बस कहां पहुंच गई है. 34 करोड़ रुपए की लागत राज्य के परिवहन मंत्री दिवाकर रावते ने वीटीएस और पीआईएस का यहां एक समारोह में उदघाटन किया. रावते ने बताया कि बस के प्रस्थान का वास्तविक समय हर बस में एलसीडी टीवी सेट द्वारा निर्धारित किया जाएगा. उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र की बसों में अब यात्रियों को वीटीएस पीआइएस के साथ जीपीएस की सुविधा भी दी जाएगी, साथ ही इससे संबंधित एप भी जल्‍द लॉन्च किया जाएगा. इसमें 34 करोड़ रुपए की लागत आएगी. उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र स्टेट पथ परिवहन महामंडल के पास 18,000 से अधिक बसें हैं और रोजाना 67 लाख से अधिक यात्रियों इन बसों में सफर करते हैं. मुंबई नासिक रूट की सभी शिवनेरी बसों में जीपीएस मशीनें लगाई गई हैं और अगले 5 से 6 महीनों में एसटी (राज्य परिवहन) की सभी शिवनेरी, शिवशाही, जलद और सामान्य बसों को वीटीएस और पीआईएस से लैस किया जाएगा. महामंडल के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक रंजीत सिंह देओल ने बताया कि पहले चरण में मुंबई तक चलने वाली 3500 बसों में वीटीएस पीआइएस के साथ जीपीएस की सुविधा शुरू की जाएगी. इनमें उन 956 बसों में भी यह सुविधा आरंभ की जाएगी, इनमें मुंबई-पुणे चलने वाली शिवनेरी बसें हैं और वे बसें भी शामिल हैं, जो नासिक डिपो से चलाती हैं. परिवहन मंत्री ने कहा कि यात्रियों की सुविधा के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन बनाया गया है, जो जल्द ही उपलब्ध होगा. जिससे लोगों को बस की लोकेशन समझने में मदद मिलेगी. उद्घाटन समारोह में एसटी महामंडल के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक देओल, महाप्रबंधक राहुल टोरो, उप महाप्रबंधक सुहास जाधव भी उपस्थित थे.
ट्राई

आठ महीने टीवी दर्शकों की पॉकेटमारी कर ‘ट्राई चला अब हज करने’

विदर्भआपला न्यूज, नागपुर : टीवी दर्शकों की पॉकेटमारी के बाद अब टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ब्रॉडकास्ट टैरिफ सिस्टम की सुधार में जुटा है. आठ महीने पहले लोकसभा चुनाव के वक्त, जब ट्राई ने लोगों को "जितने चैनल देखो, उतने के ही पैसे दो" वाला सब्जबाग दिखाना शुरू किया था, तभी लोगों को अंदाजा हो गया था कि ट्राई ब्रॉडकास्टर्स, डीटीएच आपरेटरों और केबल आपरेटरों के साथ मिल कर आम जनता की जेबें काट कर चुनावी चन्दा जुटाने का खेल खेल रहा है. और बाद में फिर सारा टैरिफ सामान्य कर वाहवाही लूटेगा. लोगों की आशंका आज सच होने जा रही है. ट्राई अब चैनलों की कीमत घटाने के लिए 8 महीने पहले लागू किए गए ब्रॉडकास्ट टैरिफ सिस्टम की समीक्षा शुरू कर रहा है. लोकप्रिय चैनलों की कीमत 19 रुपए रखना अन्यायपूर्ण नागपुर के सपन जगमोहन पूछते हैं- "क्या ट्राई को यह बात तब समझ में नहीं आई थी कि लोकप्रिय चैनलों की कीमत 19 रुपए रखना अन्यायपूर्ण है? और क्या यह भी पता नहीं था कि लोकप्रिय चैनल वाले अपने दूसरे सड़े हुए चैनलों को अपने बुके में शामिल क्र रहे हैं? "जितने चैनल देखें, उतने की ही कीमत चुकाएं" की ट्राई की "लफ्फाजी" भी टीवी दर्शकों को खूब समझ में आ रही थी." ट्राई की इस भ्रष्ट कारगुजारी की जांच हो उनकी तो मांग है कि "ट्राई की इस भ्रष्ट कारगुजारी" की निष्पक्ष जांच किसी कैग जैसी संस्था से अथवा सुप्रीम कोर्ट के जज से करवाई जाए. इन आठ महीनों में ट्राई ने आम टीवी दर्शकों की जेबें कटवा कर किस-किस को फ़ायदा पहुंचाया है, यह जानने का हक़ हम सभी टीवी दर्शकों का है. हालांकि यह माना जा रहा है की समीक्षा का लक्ष्य चैनलों के चुनाव को आसान बनाने के साथ कीमत घटाना भी है. बताया जा रहा है कि ट्राई (रेग्युलेटर) ने रेवेन्यू बढ़ाने और कंज्यूमर्स के चॉइस को खत्म करने के लिए नए नियमों के मिसयूज को लेकर ब्रॉडकास्टर्स और केबल ऑपरेटर्स को फटकार भी लगाई है. जारी किया विस्तृत कंसल्टेशन पेपर, चर्चा होगी 30 सितंबर को ट्राई ने पिछले शुक्रवार को एक विस्तृत कंसल्टेशन पेपर जारी किया, जिसमें 30 सवाल पूछे गए हैं. इसमें पूछा गया है कि क्या चैनल बुके को अनुमति दी जाए? क्या उपभोक्ताओं को दिए जाने वाले बुके के भीतर छूट पर फिर से विचार किया जाना चाहिए? और क्या बुके में चैनल्स की सीलिंग प्राइस (अभी 19 रुपए) की समीक्षा की जानी चाहिए? कंसल्टेशन पेपर पर प्रतिक्रिया 16 सितंबर तक देनी है और उनपर बहस 30 सितंबर तक हो सकती है. गौरतलब है कि ट्राई ने केबल और डीटीएच ग्राहकों के लिए 8 महीने पहले नए सिस्टम की शुरुआत की थी. इसके तहत कहा गया था कि ग्राहक अब केवल उन्हीं चैनलों के पैसे देंगे, जिन्हें वे देखते हैं और इससे उनका बिल कम हो जाएगा. इसमें चैनलों की कीमत 0 से लेकर अधिकतम 19 रुपए तक है. इसके बाद अनेक ग्राहकों ने शिकायत की थी कि उनका बिल घटने की बजाय बढ़ गया है. फटकार लगाने का नाटक बुके के बाहर पॉप्युलर...