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शिवसेना

महाराष्ट्र : भाजपा ने छोड़ी नहीं उम्मीदें, सेना को लग रहा खतरा

मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद किनारे पड़ चुकी भाजपा ने अब तक उम्मीदें नहीं छोड़ी हैं. शुक्रवार को भाजपा ने कहा कि हमारे पास सबसे ज्यादा विधायक हैं, हम राज्य को एक स्थिर सरकार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. दूसरी ओर अपने प्रयासों में सफल शिवसेना को अब घोड़ा-बाजार (विधायकों की खरीद-फरोख्त) का खतरा नजर आ रहा है.  महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि बिना भाजपा के महाराष्ट्र में कोई सरकार नहीं बन सकती. चंद्रकांत पाटिल ने भाजपा के पास 119 विधायकों के समर्थन का दावा किया, इसमें 105 भाजपा के विधायक हैं, जबकि 14 निर्दलीय के समर्थन का दावा उन्होंने किया है. सरकार गठन के लिए 145 विधायक जरूरी महाराष्ट्र की विधानसभा में 288 विधायक हैं. यहां सरकार बनाने के लिए 145 विधायकों का समर्थन चाहिए. विधानसभा चुनाव में भाजपा को 105 सीटें आई हैं. जबकि शिवसेना के 56 विधायक जीते हैं, एनसीपी के विधायकों की संख्या 54 है तो कांग्रेस के 44 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है. अन्य विधायकों की संख्या 29 है. शिवसेना की जल्दबाजी पर पवार ने फेरा पानी इधर, हालांकि महाराष्ट्र में सरकार बनाने की शिवसेना की कोशिशें सफल होती तो दिख रही है और सरकार बनने की स्थिति में उसका मुख्यमंत्री भी बनता दिखाई दे रहा है, बावजूद इसके यह इतना सरल भी नहीं दिखाई दे रहा. कल तक ऐसा लग रहा था कि 17 नवंबर को यानी बालासाहेब ठाकरे के स्मृति दिवस पर सरकार आ जाएगी, लेकिन जोड़तोड़ के गठबंधन के सबसे बड़े नेता शरद पवार ने उसकी जल्दबाजी पर पानी फेर दिया है पवार ने नागपुर में शुक्रवार को ही कह दिया कि सरकार बनने में वक्त लगेगा. चूंकि शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस का मिलन आसान नहीं रहा है, इसलिए पवार का इतना कहना भी कई सस्पेंस की नई शुरूआत है. घोड़ा बाजार के भूत से शिवसेना परेशान दूसरी ओर उसे अपने और अपने दोनों मित्र दलों के विधायकों का छिटकने का खतरा भी परेशान कर रहा है. उसने "घोड़ा बाजार" अर्थात हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप भी लगाना शुरू कर दिया है. उसके मुखपत्र "सामना" ने आज शनिवार के अंक में इस घोड़ा बाजार पर भाजपा पर हमला भी बोल दिया है. शिवसैनिक बने सीएम : बाला साहेब का यह सपना पूरा करना है ज्ञातव्य है कि राज्य में अपने घटते जनाधार से चिंतित शिवसेना "बाला साहेब ठाकरे का सपना" पूरे करने के लिए इस बार किसी भी तरह से बहुमत जुटाकर महाराष्ट्र में अपना मुख्यमंत्री बनाने के लिए सारी कवायद में जुटा है. उसका कहना है कि बाला साहेब का यह सपना था कि कि एक दिन एक शिवसैनिक महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बने. उद्धव ठाकरे कहते रहे हैं हैं कि उन्होंने बाला साहेब से वादा किया है कि एक दिन शिवसेना का सीएम होगा. इस वादे का हवाला देकर शिवसेना भाजपा पर दबाव बना रही थी. हालांकि, भाजपा साथ उसकी डील नाकाम हो गई, तब शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी की ओर रुख किया. रविवार को फिर होगी सोनिया-शरद की मुलाकात महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की सरकार बनाने के लिए तीनों दलों के बीच कई बार...
आरटीआई

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ‘सूचना का अधिकार’ कानून और मजबूत होगा

नागपुर : सूचना का अधिकार (आरटीआई) संबंधी मामले में एक अहम फैसला लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को भी एक सार्वजनिक प्राधिकरण माना, जिसके तहत अब भारत के मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय भी सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के दायरे में आ गया है. उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस ऐतिहासिक निर्णय में स्पष्ट कहा है कि मुख्य न्यायधीश यानी चीफ जस्टिस का कार्यालय भी अब सूचना के अधिकार के तहत आएगा. इस निर्णय को लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कई टिप्पणियां कीं, जिनमें से एक ये भी रही कि कानून से ऊपर कोई भी नहीं है, सुप्रीम कोर्ट के जज भी नहीं. सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए इस निर्णय का स्वागत करते हुए दादा रामचंद बाखरू सिंधु महाविद्यालय के रजिस्ट्रार एवं सूचना अधिकार केंद्र, यशदा, पुणे के अतिथि व्याख्याता नवीन महेशकुमार अग्रवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से सूचना का अधिकार कानून को और मजबूती मिलेगी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि कानून से ऊपर कोई भी नहीं हैं, स्वयं सुप्रीम कोर्ट भी नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के तहत निम्न लिखित टिप्पणियां भी की हैं, जिससे सूचना के अधिकार दायरा भी साफ हो गया है. ये टिप्पणियां इस तरह की हैं- - सुप्रीम कोर्ट के आरटीआई के तहत आने से पारदर्शिता बढ़ेगी. - इससे न्यायिक स्वायत्तता अधिक मजबूत होगी. - इससे ये भाव मजबूत होगा कि कानून से ऊपर कोई नहीं, सुप्रीम कोर्ट के जज भी नहीं. - चीफ जस्टिस का कार्यालय पब्लिक अथॉरिटी, इसलिए आरटीआई के तहत आना चाहिए. - आरटीआई का इस्तेमाल जासूसी के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता है. - पारदर्शिता न्यायिक स्वतंत्रता को कमजोर नहीं करती. - कोलेजियम की जानकारी अब सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर डाली जाएगी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का सुप्रीम कोर्ट में आज शनिवार, 16 नवंबर को आखिरी दिन है. उनका कार्यकाल करीब साढ़े 13 महीने का रहा. इस दौरान उन्होंने कुल 47 फैसले सुनाए, जिनमें से यह ऐतिहासिक फैसला भी शामिल है.
महाशिवआघाड़ी

‘महाशिवआघाड़ी’ का मुख्यमंत्री सेना का, भाजपा भी नहीं हटेगी पीछे

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर स्थितियां धुंधली  मुंबई : महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर स्थितियां अब भी धुंधली हैं. कांग्रेस-राकांपा-शिवसेना को मिलाकर बना "महाशिवआघाड़ी" अपनी सरकार बनाने को लेकर आशान्वित है. लेकिन भाजपा का भी कहना है कि राज्य में भाजपा के अलावा और किसी की सरकार नहीं बन सकती. उसने 119 विधायकों के साथ होने का दावा किया है. अपनी मजबूत स्थिति से समझौता नहीं : भाजपा उल्लेखनीय है कि भाजपा को विधानसभा चुनाव में 105 सीटें मिली हैं और 14 निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है. प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के बाद महाराष्ट्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा के बिना किसी सरकार का गठन संभव नहीं है. बैठक में भाजपा नेताओं ने कहा कि राज्य भाजपा एक करोड़, 42 लाख मतों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है. वह 164 सीटों पर लड़कर 105 पर जीती है और हारी हुई 59 सीटों में से 55 पर नंबर दो की स्थिति में है. अन्य दलों से भाजपा में आए 26 उम्मीदवारों में से 16 को जीत हासिल हुई है. उनका कहना है कि वे चुनाव के बाद अपनी मजबूत स्थिति में हैं और सरकार बनाने के अपने दावे से कोई समझौता नहीं कर सकते. भाजपा इन आंकड़ों के साथ अपने कार्यकर्ताओं में भविष्य के लिए उनका मनोबल भी ऊंचा रखना चाहती है.   महाशिवआघाड़ी का मुख्यमंत्री होगा शिवसेना का इधर शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस की महाशिवआघाड़ी ने दावा किया है कि राज्य में सरकार गठन और सीट सेयरिंग को लेकर उनके बीच आरंभिक शर्तों पर समझौता हो गया है. इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री शिवसेना का ही पूरे पांच वर्षों के लिए होगा. जबकि राकांपा और कांग्रेस के एक-एक उपमुख्यमंत्री होंगे. इसके साथ ही मंत्रिमंडल में शिवसेना 14, राकांपा 14 और कांग्रेस के 12 मंत्री होंगे. सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू : पवार   महाशिवआघाड़ी के सबसे वरिष्ठ नेता शरद पवार ने भी शुक्रवार को नागपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. पवार के अनुसार कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना की यह सरकार न सिर्फ बनेगी, बल्कि अपना कार्यकाल भी पूरा करेगी. पवार ने मध्यावधि चुनाव की संभावना से साफ इन्कार करते हुए कहा कि हम सब राज्य में स्थिर सरकार बनाना चाहते हैं. उससे पहले तीनों दलों के न्यूनतम साझा कार्यक्रम एवं अन्य शर्तों पर चर्चा चालू है. मुख्यमंत्री किसका होगा, इस सवाल पर हालांकि पवार ने शिवसेना का नाम लिए बिना कहा कि जिसकी मुख्यमंत्री पद की मांग होगी, उस पर विचार किया जाएगा. लेकिन पवार की ही पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नवाब मलिक स्पष्ट कर चुके हैं कि महाशिवआघाड़ी की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री पद शिवसेना को दिया जाएगा. शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने भी फिर मुख्यमंत्री शिवसेना का ही बनने की बात न सिर्फ दोहराई है, बल्कि अगले 25 साल तक शिवसेना का ही मुख्यमंत्री रहने का दावा किया है.   किसानों की हमदर्दी बटोर रहे उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में सरकार के गठन को लेकर फंसे पेंच के बीच एकाएक सारे नेताओं को किसानों की याद आ गई है....
बाल दिवस

थैलसीमिया पीड़ित बच्चों को पुरस्कृत कर मनाया बाल दिवस

नागपुर : बाल दिवस के उपलक्ष्य में जरीपटका में डॉ. विंकी रुघवानी थैलेसीमिया व सिकल सेल सेंटर के बच्चों के साथ बाल दिवस मनाया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रुघवानी ने की. समारोह में  थैलेसीमिया सोसाइटी ऑफ सेंट्रल इंडिया के उपाध्यक्ष प्रताप मोटवानी विशेष रूप से उपस्तिथ थे. अन्य अतिथियों में घनश्यामदास कुकरेजा, हरीश बाखरू, नानकराम आहूजा, सुरेश जगयासी, डॉ. जी.टी. रुघवानी, पी.टी  दारा, दादा विजय केवलरमानी, ईश्वर केसवानी, शोभा भागिया, विजय विधानी,जवाहर चुग, मधु रुघवानी, डॉ जयप्रकाश दीपानी, डॉ संगीता रुघवानी उपस्तिथ थे. बच्चों ने अतिथियों का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया. थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों ने बाल दिवस के उपलक्ष्य में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम कर सभी को मंत्रमुग्ध किया. इस अवसर पर चाचा नेहरू को स्मरण कर डॉ. रुघवानी की तुलना उनसे कर बच्चों ने कहा- हम थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए उन्होंने सभी प्रकार के सहयोग और नि:शुल्क सेवा दी है, वह बहुमूल्य है. उपाध्यक्ष प्रताप मोटवानी ने थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को बाल दिवस की बधाई देते हुए डॉ. रुघवानी द्वारा थैलेसीमिया बच्चों के लिए किए गए निस्वार्थ सेवा की सराहना की. दादा घनश्याम दास कुकरेजा, हरीश बाखरु, सुरेश जगयासी, मधु रुघवानी, पी.टी. दारा ने भी बाल दिवस पर विचार रखे. कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ विंकी रुघवानी ने विचार प्रकट कर कहा कि थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे मेरे परिवार का हिस्सा हैं. उनके लिए कोई भी सेवा कार्य करने से मुझे आत्मिक खुशी होती है. बच्चों के चेहरों पर खुशी और मुस्कान लाना मेरा ध्येय है. अंत में अतिथियों द्वारा थैलेसीमिया बच्चों को पुरस्कार वितरण किया गया. कार्यकम का संचालन विजय विधानी ने और आभार प्रदर्शन डॉ. संगीता रुघवानी ने किया. कार्यक्रम में बच्चों के साथ उनके परिवार और अनेक संघटनो के पदाधिकारी गणमान्य उपस्तिथ थे. कार्यक्रम में प्रमुखता से उपस्तिथ लोगों में श्रीमती नीलू रुघवानी, पंकज रुघवानी, विनोद मसंद, मोहन जोतवानी, किशोर लालवानी, डॉ. राजू चावला, राकेश मोटवानी, बंटी दुदानी, दिव्या गुरबानी, जयश्री विधानी, नवीन अग्रवाल,लक्ष्मी शर्मा, श्रीमती बजाज, गुरमुख मोटवानी शामिल थे.
शिव-सत्ता

‘शिव-सत्ता’ के लिए कांग्रेस-एनसीपी से जुड़ेगी शिवसेना?

नए सहयोगियों के कदमों में डालनी होगी 'शिव-तलवार' शिव-सत्ता हासिल करने के लिए महाराष्ट्र में अड़ी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना (56) के पाले में अब गेंद आ गई है. राज्यपाल की ओर से अब उसे सरकार बनाने का न्यौता दिया है. इस तरह अपने स्वर्गीय पिता बाला साहेब ठाकरे को राज्य में शिवसेना का मुख्यमंत्री बनाने के दिए अपने वचन निभाने का उद्धव ठाकरे को यह एक स्वर्णिम मौका मिला है. राज्य में सबसे बड़े दल के रूप में विधानसभा चुनाव में चुन कर आई भाजपा (105) ने भी सरकार बनाने से इंकार कर शिवसेना को अपनी यह महत्वाकांक्षा पूरी करने का अवसर दे दिया है. कीमत भी चुकानी है सरकार बनाने के लिए लेकिन महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए शिवसेना को अब कीमत भी चुकानी है. अपनी सरकार बनाने के लिए बहुमत हेतु उसे जिन कांग्रेस (44) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी, 54) के सहारे की जरूरत है, वे भी 'शिव-सत्ता' कार्यकाल में 50-50 फार्मूले की शर्त रखने वाले हैं. हालांकि शिवसेना का अभी दोनों दलों से औपचारिक रूप से समर्थन मांगना बाकी है, लेकिन एनसीपी ने समर्थन मांगने से पूर्व ही अपनी शर्तों में से एक- "राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से सारे संबंध तोड़ने और केंद्र सरकार में शामिल शिवसेना के मंत्री के इस्तीफे" की शर्त रख दी है. भाजपा-शिवसेना का गठबंधन टूटने की कगार पर   और इसके साथ ही भाजपा-शिवसेना का गठबंधन टूटने की कगार पर आ गई है. अब कांग्रेस और राकांपा की शर्तें पूरी कर दोनों दलों से समर्थन प्राप्त करने की सारी प्रक्रिया शिवसेना को आज शाम तक ही पूरी कर लेनी है. क्योंकि राज्यपाल ने सरकार बनाने का दावा करने का समय उसे आज सोमवार की शाम 7.30 बजे तक का समय दिया है. बैठकों का दौर शुरू इधर शिवसत्ता और मुख्यमंत्री पद पाने के लिए शिवसेना उत्साहित है. बैठकों का दौर शुरू हो चुका है. उद्धव ठाकरे ने आपात बैठक बुलाई है. उधर सत्ता में शामिल होने के लिए शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी भी कम उत्साहित नहीं है. उसने भी बैठक शुरू कर दी है. कांग्रेस नेताओं की गतिविधियां भी आरंभ हो चुकी हैं.  आदित्य को किनारे कर उद्धव सामने   महाराष्ट्र की सरकार का कार्यकाल 9 नवंबर को खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस इस्तीफा देकर अब कार्यकारी मुख्यमंत्री बने हुए हैं. अब अपने बेटे आदित्य ठाकरे को किनारे कर उद्धव ठाकरे के लिए महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना आसान हो गया है. बेटे आदित्य ठाकरे को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर बैठाने का उद्धव का सपना कांग्रेस उसे अनुभवहीन बताकर चकनाचूर कर चुकी है. अब शिवसेना के लिए एक ही विकल्प 'शिव-सत्ता' और मुख्यमंत्री पद के लिए अड़ी शिवसेना के सामने इसके लिए एक ओर भाजपा थी और दूसरी ओर कांग्रेस-एनसीपी का गठबंधन. शिवसेना से पूरी 49 सीटें अधिक जीतने वाली भाजपा को यह स्वीकार नहीं था कि मात्र 56 सीटें पाने वाली शिवसेना को मुख्यमंत्री बनाने का वह समर्थन दे. बहुमत के लिए 145 का समर्थन पाने के लिए भी भाजपा को और 40 के समर्थन की जरूरत थी. हालांकि उसे अनेक निर्दलीयों का समर्थन मिल चुका था, लेकिन बहुमत के लिए संख्या...
स्थापना दिवस

वेकोलि के 45 वां स्थापना दिवस पर श्रमवीरों का सम्मान

नागपुर : टीम वेकोलि ने शुक्रवार, 8 नवंबर की संध्या 45 वां स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास से मनाया. इस अवसर पर उत्कृष्ट श्रमवीरों को सम्मानित किया गया.   कंपनी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक कैप्टन राजीव रंजन मिश्र की अध्यक्षता में संपन्न इस जलसे में सेवा निवृत्त निदेशकगण सर्वश्री सी.एच. खिस्ती, के.के. शरण, श्रीमती इरावती दाणी, ओ.पी. मिगलानी तथा वर्तमान निदेशक त्रय डॉ. संजय कुमार, मनोज कुमार, अजित कुमार चौधरी, सीवीओ अमित कुमार श्रीवास्तव एवं संचालन समिति के सदस्य एस.क्यू. ज़मा, एस.एच. बेग, सी.जे. जोसफ़, सौरभ दुबे, शिवकुमार यादव तथा शिवदयाल बिसन्दरे एवं कल्याण मंडल के सदस्यगण डॉ. नीलिमा अन्सिंगकर सर्वश्री बी.खंडाला, वी. के. सिंह, ए.पी. सिंह, बी. एन. सिंह, कामेश्वर राय तथा सभी क्षेत्रों के महाप्रबंधक प्रमुखता से उपस्थित थे. दीप प्रज्ज्वलन एवं कोल इंडिया गीत के साथ प्रारंभ इस भव्य समारोह में उत्कृष्ट श्रमवीरों को सम्मानित किया गया. इस अवसर पर सीएमडी मिश्र ने कहा कि हमारे लोग हमारी ताकत हैं, यह सम्मान श्रमवीरों का सम्मान है. उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण कोयले की आपूर्ति हमारी प्राथमिकता है. हालही में वेकोलि ने देश की ऊर्जा जरूरतों के मद्देनजर 11 खदानों को केवल पवार प्लांटों को कोयला देने के लिए चिह्नित किया है. इस अवसर पर सी.एच. खिस्ती ने टीम वेकोलि को कोल इंडिया की सर्वश्रेष्ठ टीम बताया, उन्होंने विजेताओं को शुभकामनाएं दीं. कार्यक्रम में स्वागत संबोधन निदेशक (कार्मिक) डॉ.संजय कुमार ने दिया. वेकोलि परिवार के सदस्यों ने अपने कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक संध्या एवं सेल्फ़ी पॉइंट का भरपूर आनंद लिया. कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रबंधक (जनसंपर्क) एस.पी. सिंह ने किया. कार्यक्रम का समापन राष्ट्र-गान से किया गया.
EPFO

Every other day, EPFO harassing the pensioners

Pravin Kohli, New Delhi : Every other day, EPFO brings out new theory and objections just to harass the pensioners. Most of such objections have already been negatived by the Hon’ble Supreme Court of India by upholding the decision of Kerala High Court (as being discussed below) : (a) That there are hundreds of judgments of various High Courts particularly Kerala High Court wherein it has been decided in all the cases (Single Bench as well as Division Bench) that there cannot be any cut-off date for submission of option under 11(3) of EPS, 1995 and fixation of 01.12.2004 as the cut-off date by EPFO is without legal jurisdiction. (b) That Supreme Court of India,  in the following 8 SLPs had also upheld the decisions of Kerala High Court terming the cut-off date 1.12.2004 as illegal and subsequently the same had been implemented by EPFO and the pensioners were allowed to opt for higher pension by submitting option under Para 11(3) and by returning the differential amount with interest as it was decided that fixing any cut-off date for submitting the option under Para 11(3) was arbitrary and illegal : i. SLP 7074/2014 (RPFC & ors Vs. Majeed Kunju & Ors.) ii. SLP 7075/2014 (RPFC & ors Vs. Abdul Hakeem Sheriff & Ors.) iii. SLP 7076/2014 (RPFC & ors Vs. M.Babu & Ors.) iv. SLP 7107/2014 (RPFC & ors Vs. A.K.Jayappan & Ors.) v. SLP 7108/2014 (RPFC & ors Vs. P.N.Pillai & Ors.) vi. SLP 7224/2014 (RPFC & ors Vs. S.Nizar & Ors.) vii. SLP 697 /2016 (RPFC   & ors Vs. KJ Verkey & Ors.) viii. SLP 19954/2015 (RPFC & ors Vs. Austin Joseph & Ors.) Sr. No. (i) to (vii) above had been decided on 31.3.2016 whereas Sr No. (viii) was decided on 12.07.2016. (c) For making EPFO offices understand regarding unnecessarily & illegally raking up the issues which have already attained finality upto the level of Apex Court and also implemented by EPFO, I am submitting brief history of one of the above cases i.e. SLP 19954/2015 (RPFC & others Vs. Austin Joseph & Others. as at (viii) above as this covers most of the grounds of EPFO : • Shri Austin Joseph and others (all retired employees) had filed a Writ Petition (C) No. 254/2014 against UOI, EPFO HQ & EPFO R.O. after their retirement from service which was decided in their favor on 4.3.2014 wherein following most important and substantial questions of law were considered by the Hon’ble Court under Article 136 of the Constitution of India and decided : A. Whether the Hon’ble High Court of Kerala has misinterpreted the statutory provisions of Para 11(3) of the Employees’ Pension Scheme, 1995? B. Whether a person, who has ceased to be the member of the Pension Fund and who has never, exercised the option of paying the contribution on salary exceeding statutory limit of Rs. 6500/- (Rs. Six thousand five hundred only), is entitled to pensionable salary on higher salary? C. Whether the Hon’ble High Court of...
महाराष्ट्र

कौन बनेगा महाराष्ट्र का सीएम : भाजपा-शिवसेना में पेंच कायम  

राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावना महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए 14 दिन बीत चुके हैं, राज्य में भाजपा-शिवसेना गठबंधन भारी बहुमत के बाद भी सरकार गठन में विफल हैं. दोनों दलों के बीच मुख्यमंत्री पद का पेंच फंस गया है. भाजपा सर्वाधिक 105 सीटें जीतकर सरकार बनाने के अपने दावे पर कायम है, वहीं मात्र 56 सीटें पाने वाली शिवसेना भी मुख्यमंत्री पद के लिए अड़ी हुई है. आज 8 नवंबर राज्य में सरकार गठन करने का आखिरी तारीख है. कल 9 नवंबर को राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने को बाध्य होंगे.   ज्ञातव्य है कि 2014 के चुनाव के बाद विधानसभा का गठन 10 नवंबर 2014 को हुआ था, अतः 9 नवंबर 2019 यानी शनिवार को विधानसभा भंग हो जाएगी. ऐसी स्थिति में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होना अवश्यम्भावी है. इस बीच भाजपा और मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री पद के दावेदार उद्धव ठाकरे आज आरोप-प्रत्यारोप के साथ दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना क्षीण नजर आने लगी है. चुनाव परिणाम आने के बाद से ही भाजपा और शिवसेना के बीच रिश्ते तल्ख होते गए हैं और बयानबाजी का दौर चलता रहा. सत्ता पर 50-50 के फॉर्मूले और मुख्यमंत्री के पद को लेकर दोनों दल आमने सामने हैं और इस बीच अन्य दलों के साथ मुलाकातों का दौर भी चला. गुरुवार को शिवसेना के विधायकों ने एक प्रस्ताव पारित कर, महाराष्ट्र में सरकार गठन पर अंतिम निर्णय लेने के लिए पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे को अधिकृत किया. तमाम अनिश्चितता और विधायकों के दल-बदल की आशंका के बीच शिवसेना ने अपने विधायकों को होटल में ठहराया दिया. वहीं गुरुवार को ही भाजपा नेताओं ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात भी की लेकिन सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया. दोनों दलों की तरफ से लगातार आ रहे बयानों के बीच अब शुक्रवार को सभी नज़रें राज्य की राजनीतिक हलचल पर टिकी हैं, क्योंकि सरकार के गठन के फैसले को लेकर यह अंतिम और निर्णायक दिन है.
अरविंद इनामदार

महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी अरविंद इनामदार नहीं रहे

मुंबई : महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरविंद इनामदार का आज शुक्रवार, 8 नवंबर को निधन हो गया. वे 79 वर्ष के थे. उन्होंने अक्टूबर 1997 से जनवरी 2000 के बीच महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक के रूप में कार्य किया. लम्बे समय से बीमार स्व. इनामदार का इलाज यहां के हरकिशनदास अस्पताल में चल रहा था. उन्होंने अस्पताल में ही शुक्रवार की रात 2.20 बजे अंतिम सांसें लीं. निधन के पश्चात उनका पार्थिव शरीर मंत्रालय के निकट शलाका स्थित उनके निवास स्थान पर लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है. पारिवारिक सूत्रों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार अपराह्न समय मरीन ड्राइव स्थित चंदनवाड़ी श्मशान भूमि में किया जाएगा. स्व. इनामदार की पहचान एक सक्षम, कुशल और कर्त्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में थी. उन्होंने नागपुर के पुलिस कमिश्नर के साथ ही राज्य के अनेक जिलों और अनेक पदों पर अपनी सेवाएं प्रदान की थीं. नासिक पुलिस प्रशिक्षण में अपनी लम्बी सेवाओं के दौरान उन्होंने पुलिस प्रशिक्षण को एक नई दिशा दी थी. उन्होंने वर्ष 1983 में शहर को अपराध से निजात दिलाने वाले मुठभेड़ विशेषज्ञ पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित किया था जिन्होंने संगठित अपराध को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई थी. इनामदार को जुलाई 1994 के सनसनीखेज जलगांव सेक्स प्रकरण और मानव तस्करी मामले में अपनी जांच के लिए जाना जाता है. उन्होंने अक्टूबर 1997 से जनवरी 2000 के बीच पुलिस महानिदेशक के रूप में कार्य किया. उन्होंने वर्ष 1983 में शहर को अपराध से निजात दिलाने वाले मुठभेड़ विशेषज्ञ पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित किया था, जिन्होंने संगठित अपराध को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई थी. अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ सालों से इनामदार अपने "अरविंद इनामदार फाउंडेशन" के माध्यम से सभी रैंकों के सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया करते थे. साहित्य के क्षेत्र में भी स्व.इमानदार ने अपनी पहचान बनाई थीं.
बिजली

बिजली निर्मिति : वेकोलि की 11 विशेष खदानों से भी मिलेगा कोयला

100 मिलियन टन से अधिक कोयला-उत्पादन का लक्ष्य    नागपुर : वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) से बिजली संयंत्रों को अधिक मात्रा में कोयले की सतत आपूर्ति के लिए कंपनी द्वारा 11 विशेष खदानों को भी खास तौर पर कंपनी से जुड़े विद्युत क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए चिह्नित किया गया है. विभिन्न योजनाओं के तहत वेकोलि से कोयला ले रहे, सभी बिजली संयंत्रों को इन खदानों से अधिकतम मात्रा में कोयला आपूर्ति हेतु यह विशेष पहल की गई है. वेकोलि ने अपनी 63 खदानों से उन 11 खदानों को चिह्नित किया है, जिनसे कंपनी से जुड़े बिजली उपभोक्ताओं को अधिक मात्रा में कोयला-आपूर्ति की जाएगी. इनमें से पिछले पांच वर्षों में खोली गई 8 ग्रीनफील्ड तथा 3 ब्राउन फील्ड खदानें हैं. सभी जुड़े बिजली उपभोक्ताओं को इन परियोजनाओं से विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत करीब-करीब पूरा कोयला दिया जा सकेगा.   रेल तथा सड़क-मार्ग से भेजने पर विशेष जोर यह जानकारी वेकोलि द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी गई. बताया गया कि इसके अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण कोयला, रेल तथा सड़क-मार्ग से भेजने पर विशेष जोर दिया जाएगा. यह आपूर्ति अन्य खदानों से निर्धारित मात्रा के अलावा होगी. इन विद्युत् संयंत्रों को इस बढ़ी हुई कोयला-आपूर्ति से न केवल उनकी आवश्यकता पूरी होगी, बल्कि राष्ट्र-हित में थर्मल कोयले के आयात में भी कमी आएगी.  बताया गया कि 2013-14 में इन बिजली-संयंत्रों को 62% कोयले की आपूर्ति की गई थी, जबकि 2018-19 में 81% कोयला इन्हें प्रेषित किया गया. 2018-19 में कम्पनी ने कुल 55.5 मिलियन टन कोयला प्रेषित किया, इनमें से 45 मिलियन टन कोयला विद्युत् संयंत्रों को प्रेषित किया गया. महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा राज्यों के बिजली संयंत्रों के साथ एनटीपीसी के आलावा निजी बिजली संयंत्र वेकोलि के प्रमुख उपभोक्ता हैं.  वेकोलि द्वारा प्रेषित कोयले का बड़ा हिस्स्सा महाराष्ट्र की बिजली कंपनी महाजेनको (50%) तथा मध्यप्रदेश (12%) द्वारा उपयोग किया जाता है. अन्य तीन संयंत्रों तथा एनटीपीसी 7% तथा निजी बिजली संयंत्र वेकोलि के 12% कोयले का उपयोग करते हैं. कम्पनी द्वारा वर्ष 2018-19 के दौरान स्पॉट ऑक्शन तथा नॉन-पावर लिंकेज  ऑक्शन के तहत प्रत्येक को करीब 5 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की गई.  2013-14 में उत्पादन में आई थी गिरावट    उल्लेखनीय है कि 2009-10 के 45.74 मिलियन टन कोयला-उत्पादन के मुकाबले वर्ष 2013-14 में वेकोलि का उत्पादन घटकर चिंताजनक स्तर 39.73 मिलियन टन पर आ गया था. परियोजनाओं के लिए जमीन की अनुपलब्धता तथा संभावित घाटे की भावी खदानों के कारण कम्पनी के भविष्य पर खतरे की स्थिति आ गई थी. मध्य, पश्चिमी तथा दक्षिणी क्षेत्र के उपभोक्ताओं  सहित महाजेनको भी पूर्वी भारत स्थित कोयला कम्पनियों पर कोयला-आपूर्ति के लिए निर्भर थे, जिनका कोयला अधिकतम रेल-भाडा के कारण उन तक पहुंचने में काफी महंगा पड़ता था. 20 नई परियोजनाएं शुरू करने में सफलता   वेकोलि ने कोयला-उत्पादन में तत्काल बढ़ोत्तरी के लिए भू-अर्जन हेतु सरल नियम तथा संभावित घाटे वाली भावी खदानों को लाभप्रद स्थिति में लाने के लिए गहन तकनीकी विश्लेषण जैसे अनेक प्रयास किए. इसका सकारात्मक फायदा 2015 के प्रारम्भ से ही नई परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के रूप में मिलने लगा. पिछले पांच वर्षों में वेकोलि को 8364 हेक्टेयर जमीन प्राप्त करने तथा 6543 करोड़ रुपए की लागत से  20 नई परियोजनाएं शुरू करने...