रद्द

रद्द होंगी CBSE की 10 और 12 की परीक्षाएं

अब Exams रद्द करने की राह पर CISCE भी   नई दिल्ली : सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने COVID-19 महामारी के मद्देनजर 1 से 15 जुलाई तक होने वाली कक्षा 10 और 12 की परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है. सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी गुरुवार को सॉलिसिटर जनरल (एस.जी.) तुषार मेहता ने दी. जस्टिस ए.एम. खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ को एस.जी. मेहता ने बताया कि CBSE परीक्षाएं तब आयोजित करेगा, जब स्थिति अनुकूल होगी. एस.जी. ने कहा कि एक योजना बनाई गई है, जहां कक्षा 12 के छात्र का अंतिम 3 परीक्षाओं के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा. बाद में आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए छात्र के पास विकल्प चुनने की सुविधा होगी. CISCE की परीक्षा भी रद्द की जाएगी   CISCE के लिए पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने कहा कि CBSE के सूट के बाद CISCE की परीक्षा भी रद्द कर दी जाएगी. पीठ ने CBSE को आंतरिक मूल्यांकन और परीक्षा के बीच विकल्प के मुद्दों को निर्दिष्ट करने और परिणामों की तिथि को स्पष्ट करने के लिए एक ताजा नोटिफिकेशन के निर्देश देने के बाद सुनवाई कल तक के लिए स्थगित कर दी. उल्लेखनीय है कि गत 23 जून को इस मुद्दे पर हुई पिछली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और CBSE की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल मेहता के अनुरोध पर टाली दी थी. मेहता ने जस्टिस ए.एम. खानविलकर की पीठ को बताया था कि "ये चर्चा एक अंतिम स्तर पर है. जल्द ही निर्णय को अंतिम रूप दिया जाएगा." उन्होंने कहा कि वो छात्रों की चिंता को समझते हैं. इसलिए अदालत फैसले के लिए एक दिन का ओर समय दें. अभिभावकों की ओर से दायर की गई याचिका  बता दें कि अभिभावकों ने आगामी एक जुलाई से बोर्ड (बारहवीं) की शेष परीक्षा आयोजित करने के CBSE के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है और अदालत से यह निर्देश देने का अनुरोध किया था कि COVID-19 महामारी को देखते हुए छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अंक दिए जाएं. उन्होंने आशंका प्रकट की थी कि उनके बच्चों सहित अन्य छात्रों को देश भर के 15,000 केंद्रों पर आयोजित की जाने वाली परीक्षा में शामिल होने के लिए अपने घरों से बाहर आने पर महामारी का सामना करना पड़ेगा. अतः अभिभावकों ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था. वकील ऋषि मल्होत्रा द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय और आईआईटी सहित कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों ने किसी भी परीक्षा का आयोजन नहीं करने का फैसला किया है और CBSE को भी निर्देश दिया गया कि वह शेष विषयों के लिए परीक्षा का आयोजन न करे. उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ सहित कुछ राज्य बोर्डों ने छात्रों को घातक वायरस के संपर्क में आने से बचाने के लिए कोई भी परीक्षा आयोजित नहीं करने का फैसला किया है. याचिका में मांग की गई थी कि CBSE बोर्ड को 10 वीं और 12 वीं की परीक्षा रद्द करनी चाहिए और आंतरिक मूल्यांकन या आंतरिक...
याचिका

राष्ट्रीय हितों से समझौता मामले में फंसे सोनिया, राहुल   

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चायना के साथ 2008 में समझौते का मामला    नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ ही कांग्रेस पार्टी भी एक बार फिर गंभीर अदालती विवाद में घिरती नजर आ रही है. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC), सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (SC) के समक्ष एक याचिका दायर की गई है. इस याचिका (Writ) में आईएनसी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चायना के बीच वर्ष 2008 में हुए एक समझौते का विवरण मांगा गया है.  अनलॉफुल एक्टिविटी(प्रिवेंशन) एक्ट 1967 के तहत के तहत जांच हो   समझौता उच्च-स्तरीय जानकारी का आदान-प्रदान करने और आपसी सहयोग स्थापित करने के लिए किया गया था. याचिका में मांग की गई है कि इस समझौते की जांच अनलॉफुल एक्टिविटी(प्रिवेंशन) एक्ट 1967 के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से करवाई जाए या एक विकल्प के रूप में इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो(CBI) से करवाई जाए.  याचिका अधिवक्ता शशांक शेखर झा व संपादक सवियो रोड्रिगेज की तरफ से दायर   याचिका अधिवक्ता शशांक शेखर झा व गोवा क्रॉनिकल के संस्थापक और मुख्य संपादक सवियो रोड्रिगेज की तरफ से दायर की गई है. याचिका में कहा गया है कि "याचिकाकर्ताओं के परिजनों का मानना है कि किसी के द्वारा भी राष्ट्र की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाना चाहिए, इसलिए, इस रिट याचिका को भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर किया गया है. साथ ही मांग की गई कि प्रतिवादी नंबर एक और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के बीच किए गए समझौते के बारे में पारदर्शिता और स्पष्टता लाई जानी चाहिए, जो वास्तव में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चायना (चायना) की सरकार भी है."   समझौता 7 अगस्त 2008 को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के शासनकाल के दौरान व सीपीसी के बीच किया गया था, जिसमें एक समझौता ज्ञापन (MoU) भी तैयार किया गया था. यह समझौता "उच्च स्तरीय सूचनाओं का आदान-प्रदान करने व आपसी सहयोग बनाने के लिए किया गया था."  "इस MoU के तहत दोनों पक्षों को 'महत्वपूर्ण द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विकास पर एक-दूसरे से परामर्श करने का अवसर' भी प्रदान किया गया था." याचिका में एक न्यूज रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है, जिसमें बताया गया था कि जब वर्ष 2008 से 2013 के बीच यूपीए सत्ता में थी, उस दौरान चीन ने कई बार घुसपैठ को बढ़ावा दिया था. हालाँकि 18 जून, 2020 के संपादकीय में याचिकाकर्ता नंबर 2 ने मांग की थी कि MoU को सार्वजनिक कर दिया जाए, परंतु ऐसा नहीं किया गया है. चीन के साथ शत्रुतापूर्ण संबंध होने के बावजूद...  याचिका में यह भी कहा गया है कि चीन के साथ शत्रुतापूर्ण संबंध होने के बावजूद भी आईएनसी ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए और देश के नागरिकों से उसी के तथ्य और विवरण को छिपाया. इसके अलावा आईएनसी ने खुद अपने शासनकाल के दौरान सूचना के अधिकार कानून को बनाया था, परंतु वह "राष्ट्रीय महत्व के इस मामले में पारदर्शी होने में विफल रही है." याचिका में कहा गया है कि "स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की सच्ची भावना को पारदर्शिता और उचित जांच व केवल फैसले के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है. यह तभी संभव है, जब...
LAC

पूर्वी लद्दाख में LAC से पीछे लौटेंगी भारत-चीन सेनाएं

कॉर्प्स कमांडर स्तर की बैठक में हुआ फैसला, सेनाध्यक्ष लद्दाख पहुंचे नई दिल्ली : चीन की ओर मोल्डो में सोमवार को हुई भारत-चीन के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत सकारात्मक रही है. यह बातचीत पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पार हुई. अधिकृत सैन्य सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों की सेनाओं ने पूर्वी लद्दाख से पीछे हटने पर सहमति जताई है. भारतीय सेना ने आज मंगलवार को कहा, 'कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ता भारत-चीन के बीच सोमवार को सौहार्दपूर्ण, सकारात्मक और रचनात्मक माहौल संपन्न हुई. दोनों देशों की सेनाओं ने सहमति जताई है कि वे LAC से पीछे हटेंगी.' सेना प्रमुख जनरल नरवणे लद्दाख पहुंचे   वहीं, सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे मंगलवार को लद्दाख पहुंच हुए हैं. वह 14 कोर अधिकारियों के साथ जमीनी स्तर पर स्थिति और चीनी सेना के साथ वार्ता में प्रगति की समीक्षा करेंगे. बातचीत से पहले सेना प्रमुख लेह के उस अस्पताल पहुंचे जहां चीन के साथ झड़प में घायल सैनिकों को भर्ती किया गया है. सेना प्रमुख ने जवानों से बातचीत की और उनका हालचाल जाना. सेना प्रमुख मंगलवार और बुधवार को दोनों दिन लद्दाख में चीनी सेना के साथ चल रहे छह हफ्ते के गतिरोध पर वहां तैनात भारतीय सैन्य कमांडरों के साथ चर्चा करेंगे. भारत और चीन के बीच सोमवार को कॉर्प्स कमांडर स्तर की मैराथन बातचीत हुई थी. दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तकरीबन 12 घंटे तक चली इस बैठक में LAC पर जारी तनाव को कम करने को लेकर बात की गई थी. भारत ने चीनी सैनिकों से उसी स्थान पर वापस जाने को कहा, जहां पर वे अप्रैल महीने की शुरुआत में थे. इस बैठक के परिणाम से वाकिफ दो अधिकारियों ने बताया कि भारत ने चीनी पक्ष से LAC पर चल रहे तनाव को खत्म करने को लेकर आश्वासन की मांग की है. उन्होंने कहा था कि इस बातचीत का उद्देश्य फिंगर एरिया, गोगरा पोस्ट-हॉट स्प्रिंग्स और गलवान घाटी में पहले की यथास्थिति को बहाल करना था. हिंसक झड़प के बाद और बढ़ गया था तनाव लद्दाख की गलवान घाटी में पिछले हफ्ते के सोमवार को भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक टकराव हो गया था, जिसके बाद सीमा पर तनाव में बढ़ोतरी हुई थी. इस झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे और चीन के 40 से अधिक जवान मारे गए थे. इसमें चीन का कमांडर भी शामिल था. इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच लगातार तनाव कम करने को लेकर LAC पर बातचीत का दौर शुरू हुआ.
ट्रोलिंग

ट्रोलिंग : फड़णवीस की छवि बिगाड़ने के पीछे शिवसेना, एनसीपी?

नागपुर : सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना अब भाजपा नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के लिए भारी पड़ने लगा है. सोशल मीडिया पर अपने कमेंट्स पर आए दिन उनका ट्रोल होना उनके साथ-साथ पार्टी के लिए भी घातक साबित होने लगा है. जनसामान्य की नज़रों में अब वे हलके पड़ने लगे हैं. वैसे स्वयं फड़णवीस और उनके नजदीकी सूत्रों का मानना है कि यह सब शिवसेना और एनसीपी द्वारा फर्जी एकाउंट्स के माध्यम से किया जा रहा है. ऐसी ट्रोलिंग के कारण उनकी यह दशा उनके समर्थकों के लिए तो शर्मिंदगी पैदा कर ही रही है, पार्टी के अनेक नेतागण भी परेशान हैं. अपने मुख्यमंत्रित्व काल में सबसे योग्य और डायनामिक माने जाने वाले फड़णवीस के लिए यह स्थिति उन्हें दिन ब दिन दयनीय बनाती जा रही है. फड़णवीस के नजदीकी सूत्रों ने इस स्थिति को स्वीकार करते हुए माना है कि स्थिति बहुत ही बिगड़ती जा रही है. उन्होंने बताया कि इसके पीछे शिवसेना और एनसीपी का हाथ है. उन्होंने आरोप लगाया कि ये इन दोनों पार्टियों ने सोशल मीडिया का दुरुपयोग करते हुए भाजपा नेताओं के नाम पर अनेक फर्जी एकाउंट्स बना रखे हैं. फड़णवीस जब कभी सरकार की खामियों को लेकर कमेंट्स करते हैं, वे फर्जी एकाउंट के माध्यम से कमेंट्स डालते हैं और ट्रोल करना शुरू कर देते हैं. यू-ट्यूब चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में किया खुलासा उन्होंने बताया कि फड़णवीस ने हाल ही में एक पॉपुलर यू-ट्यूब चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया है. उन्होंने चैनल को बताया है कि देश में सबसे ज्यादा सोशल मीडिया पर भाजपा नेताओं के नाम से फेक एकाउंट्स कांग्रेस ने बना रखे हैं कांग्रेस के नक़्शे-कदम पर चलते हुए राज्य में सत्तारूढ़ महाविकास आघाड़ी की सरकार में कांग्रेस के साथ शामिल शिवसेना और एनसीपी ने भी अब फर्जी एकाउंट्स के माध्यम से ट्रोलिंग की यह ओछी राजनीति शुरू कर दी है. इसमें शिवसेना से अधिक एनसीपी ने फर्जी एकाउंट्स बनाए हैं. और वह उनके विरुद्ध बहुत अधिक सक्रिय है. वह बहुत ही विद्वेषात्मक कमेंट्स प्रस्तुत कर उस पर ट्रोल करना शुरू कर देता है. चैनल द्वारा यह पूछे जाने पर कि उनके ऐसे आक्रामक और विध्वंसकारी ट्रोलिंग का काउंटर वे किस प्रकार कर रहे हैं, जवाब में फड़णवीस ने कहा कि धीरे-धीरे लोगों को पता चलने लगा है कि शिवसेना और एनसीपी कैसी घिनौनी राजनीति कर रहे हैं. उन्होंने कहाकि अब पार्टी के लोग और उनके समर्थकों को भी एनसीपी और शिवसेना के इस खेल का पता चल रहा है. इसलिए उन्हें काउंटर करने की जरूरत अब मुझे नहीं नजर आती.
CBSE

CBSE बोर्ड की परीक्षाओं पर फैसला अंतिम चरण में

बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट को किया आश्वस्त, अब सुनवाई 25 को   नई दिल्ली : CBSE के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट एक जुलाई से बोर्ड (बारहवीं) की शेष परीक्षा आयोजित करने पर 25 जून को सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनवाई केंद्र और CBSE की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर टाली. तुषार मेहता ने जस्टिस ए.एम. खानविलकर की पीठ को बताया कि "ये चर्चा एक अंतिम चरण पर है. कल शाम तक, निर्णय को अंतिम रूप दिया जाएगा." उन्होंने कहा कि वे छात्रों की चिंता को समझते हैं. इसलिए अदालत फैसले के लिए एक दिन का और समय दे. याचिकाकर्ताओं के लिए वकील ऋषि मल्होत्रा उपस्थित हुए. मल्होत्रा ने इस मामले को जल्द से जल्द सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया. पीठ ने कहा कि 25 जून को 2 बजे सुनवाई होगी. पिछली सुनवाई में पीठ ने CBSE और केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. दरअसल अभिभावकों ने एक जुलाई से बोर्ड (बारहवीं) की शेष परीक्षा आयोजित करने के CBSE के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है और अदालत से यह निर्देश देने का अनुरोध किया कि COVID-19 महामारी को देखते हुए छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अंक दिए जाएं.   अभिभावकों ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए कहा है कि उनके बच्चों सहित अन्य छात्रों को परीक्षा में शामिल होने के लिए अपने घरों से बाहर आने पर महामारी का सामना करना पड़ेगा. यह परीक्षाएं  देश भर के 15,000 केंद्रों पर आयोजित की जाने वाली है. वकील ऋषि मल्होत्रा द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय और आईआईटी सहित कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों ने किसी भी परीक्षा का आयोजन नहीं करने का फैसला किया है और CBSE को भी निर्देश दिया गया है कि वह शेष विषयों के लिए परीक्षा का आयोजन न करे.   उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ सहित कुछ राज्य बोर्डों ने छात्रों को घातक वायरस के संपर्क में आने से बचाने के लिए कोई भी परीक्षा आयोजित ना करने का फैसला किया है. याचिका में मांग की गई है कि CBSE बोर्ड को 10 वीं और 12 वीं की परीक्षा रद्द करनी चाहिए और आंतरिक मूल्यांकन या आंतरिक अंकों के आधार पर उत्तीर्ण होना चाहिए. "शेष परीक्षा आयोजित करने के लिए CBSE की अधिसूचना भेदभावपूर्ण और मनमानी है और वह भी जुलाई के महीने में, जिसमें एम्स के आंकड़ों के अनुसार, कहा गया है कि COVID -19 महामारी अपने चरम पर होगी .. याचिका में कहा गया है कि "विदेश में 250 स्कूलों और विभिन्न राज्य बोर्डों ने जुलाई में आयोजित होने वाली परीक्षा को रद्द कर दिया है और आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर अंक आवंटित किए जा सकते हैं." CBSE ने अपने 250 विद्यालयों के लिए दसवीं और बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं को रद्द कर दिया है, जो विदेशों में स्थित हैं और व्यावहारिक परीक्षा या आंतरिक मूल्यांकन के अंकों के आधार पर अंक देने में मानदंड अपनाया है. याचिकाकर्ताओं के मुताबिक यह बेहद अफसोस की बात है कि उत्तरदाताओं को भारत में...
साहित्य

संतों के साहित्य और उनकी वाणी शाश्वत एवं सनातन हैं : प्रो. शुक्ल

भारतीय विचार मंच एवं अक्षरवार्ता का संत साहित्य पर राष्ट्रीय वेबिनार नागपुर : संतों के साहित्य एवं उनकी वाणी शाश्वत एवं सनातन हैं, इसे सिर्फ किसी विशेष कालखंड से जोड़कर नहीं देखा जा सकता. उक्त प्रतिपादन महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने किया. वे भारतीय विचार मंच, नागपुर एवं अक्षरवार्ता (अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिका), उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार "वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संत साहित्य की प्रासंगिकता" का उदघाटन अपने बीज भाषण से किया. उदघाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय विचार मंच के विदर्भ प्रांत संयोजक सुभाष लोहे ने की. आयोजन समिति प्रमुख और कार्यक्रम संयोजक डॉ. कमलकिशोर गुप्ता, सहसंयोजक नवीन महेशकुमार अग्रवाल, संरक्षक सुनील किटकरू एवं अक्षरवार्ता के सम्पादक डॉ. मोहन बैरागी के कुशल प्रयासों से आयोजित तीन दिवसीय वेबिनार के पहले दिन प्रथम सत्र "कबीर आज के सन्दर्भ में" के वक्ता डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा, द्वितीय सत्र "नामदेव के काव्य में जीवन मूल्य" वक्ता डॉ. रामगोविंद आर्वीकर, दूसरे दिन "तुलसी काव्य में जीवन दर्शन" वक्ता डॉ. वन्दना खुशलानी, "तुकाराम के काव्य का में उपादेयता" वक्ता श्रीमती अंजली ठोम्बरे, तृतीय दिवस "राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज के काव्य में जीवन मूल्य" वक्ता डॉ. अविनाश मोहरील ने ओजस्वी वाणी में संत साहित्य की महत्ता को समझाया. समापन कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि स्वरूप श्रीमती चित्रा जोशी ने मार्गदर्शन करते हुए कहा कि जो षड्विकार धो दे, वह साधु और जो भगवान से विभक्त नहीं होता, वह भक्त कहलाता है, एवं किसी को भक्त बनाने एवं आत्मस्वरूप का दर्शन कराने की विधा केवल संतों के पास होती है. समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र नाईकवाड़े ने की. 2,500 पंजीयन, फेसबुक के माध्यम से 21,000 से अधिक लोगों ने कार्यक्रम देखे   वेबिनार में भारत के लगभग सभी राज्यों से एवं विदेश से कुल 2,500 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीयन किया. जूम एप्लीकेशन के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम का सीधा प्रसारण फेसबुक पर किया गया, फेसबुक पर पहले दिन 7,000 से अधिक लोगों ने कार्यक्रम को देखा एवं 5,000 से अधिक टिप्पणी, दूसरे दिन 7,000 से अधिक लोगों ने कार्यक्रम को देखा एवं 5,000 से अधिक टिप्पणी एवं तीसरे दिन 7,000 से अधिक लोगों ने कार्यक्रम को देखा एवं 7,000 से अधिक टिप्पणी प्राप्त हुई. अर्थात ही फेसबुक के माध्यम से तीन दिन में 21,000 से भी अधिक लोगों ने कार्यक्रम को देखकर लाभ प्राप्त किया. कार्यक्रम का संचालन डॉ. कमलकिशोर गुप्ता एवं डॉ. नेहा कल्याणी ने, प्रास्ताविक सुनील किटकरू ने एवं आभार प्रदर्शन डॉ. मोहन बैरागी एवं डॉ. तीर्थराज राय ने किया. तकनीकी संयोजन की बागडोर नवीन अग्रवाल ने संभाली. आयोजन की सफलता के लिए आर्ट ऑफ़ लिविंग के नीरज अग्रवाल, सिंधु महाविद्यालय के डॉ. मुकेश कौशिक ने विशेष सहयोग प्रदान किया.
राष्ट्रविरोधी

राष्ट्रविरोधी का आरोपी संस्था को वैधता : फड़णवीस ने उठाए सवाल

मुंबई : 'जिस पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) संगठन के विरुद्ध कई राज्यों ने राष्ट्रविरोधी और समाज विरोधी कार्रवाई के कारण उसे प्रतिबंधित करने की कार्रवाई शुरू की है, उसी पीएफआई को मुंबई महापालिका ने कोरोना संक्रमित मृतकों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी सौंप कर सरकार ने ऐसी राष्ट्रविरोधी संस्था को वैधता प्रदान किया है.' यह आरोप आज यहां पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने लगाया. मुंबई महानगर पालिका पीएफआई को मुंबई के कोरोना संक्रमित मृतकों को दफनाने की अनुमति दी है. महानगपालिका ने इस आशय का एक परिपत्र गत 18 मई को जारी किया है. इसी परिपत्र के साथ ट्वीट के जरिए पूर्व मुख्यमंत्री ने यह सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि जिस संथा पर राष्ट्रविरोधी और समाजविरोधी होने का ठप्पा लग चुका है, उसे इस प्रकार शासकीय वैधता कैसे दी जा सकती है. उल्लेखनीय है की पीएफआई के विरुद्ध केरल, झारखंड, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश राज्य सरकारों ने प्रतिबंध लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी है. पीएफआई पर पिछले दिनों नई दिल्ली के शाहीन बाग सहित देश के अन्य राज्यों में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में धरना प्रदर्शन करने वालों की आर्थिक मदद करने और परोक्ष रूप से उस आंदोलन को चलाने का आरोप है. यह भी आरोप है कि इस संस्था ने फरवरी में दिल्ली में दंगा करने वालों की भी मदद की थी. बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने पीएफआई के बैंक खातों की जांच कर संथा की राष्ट्रविरोधी कार्रवाइयों का पर्दाफास किया है. इसी आधार पर पीएफआई के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया जा रहा है. देवेंद्र फड़णवीस ने सवाल किया है कि ऐसी देश विरोधी संस्था को वैधता प्रदान करने में क्या राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की भी सहमति है?
टिक

टिक टोक मोबाइल ऐप्प को नियंत्रित करें : उड़ीसा हाईकोर्ट

पत्नी के कुकृत्य पर पति ने कर ली थी आत्महत्या  कटक : उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा है कि टिक टोक मोबाइल एप्लिकेशन को अच्छी तरह से नियंत्रित करने की जरूरत है. न्यायमूर्ति एस.के. पाणिग्रही ने एक जमानत आवेदन पर विचार करते हुए कहा कि एप्लिकेशन अक्सर अपमानजन और अश्लील कल्चर को प्रदर्शित करता है और स्पष्ट रूप से परेशान करने वाली सामग्री के अलावा पोर्नोग्राफी को बढ़ावा देता है. इस तरह के एप्लिकेशन को नियंत्रित करने की आवश्यकता है, जिससे किशोरों को इसके नकारात्मक प्रभाव से बचाया जा सके.  इस मामले में आरोपी मृतक की पत्नी है. आरोपी पत्नी ने एक अन्य सह आरोपी के साथ मिलकर मृतक के और आरोपी के कुछ अंतरंग और निजी वीडियो टिक टोक पोस्ट कर दिए थे, जिसके बाद मृतक ने आत्महत्या कर ली थी. दोनों आरोपियों पर आईपीसी की धारा 306 के तहत आरोप लगाए गए थे. हालांकि अदालत ने आरोपियों को जमानत दे दी, लेकिन युवाओं पर टिक टोक ऐप के नेगेटिव प्रभाव का उल्लेख किया.  न्यायाधीश ने कहा, "ऐसा प्रतीत होता है कि तत्काल मामले में टिक टोक वीडियो एक निर्दोष जीवन के दुखद अंत का कारण बन गया है, हालांकि टिक टोक वीडियो की सामग्री को अपडेट की गई केस डायरी द्वारा छुआ नहीं जा सकता था. इस तरह के टिक टोक को प्रसारित करना, पीड़ितों को प्रताड़ित करने के लिए आपत्तिजनक सामग्री का दुरुपयोग धीरे-धीरे बढ़ रहा है. मद्रास उच्च न्यायालय ने टिकटोक मोबाइल एप्लिकेशन के बारे में इसी तरह की टिप्पणियां की थीं और यहां तक कि इस ऐप के डाउनलोड को प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया था. बाद में इस आदेश को टिक टोक प्रबंधन को चेतावनी के साथ वापस ले लिया गया कि यदि यह नकारात्मक और अनुचित या अश्लील सामग्री को फ़िल्टर करने के अपने उपक्रमों का उल्लंघन करता है, तो यह अदालत की अवमानना के दायरे में आ सकता है.
जलसा घर

‘जलसा घर’ : कथानक,  कला और पूंजीवाद के अंतरद्वंद्व का

महान फिल्मकार सत्यजीत रे की एक क्लासिक रचना   *-धर्मेंद्र सिंह  जलसा घर (1958) सत्यजीत रे की चौथी फ़िल्म थी. 1955 में उन्होंने 'पथेर पंचाली' बनाई. यह फ़िल्म विभूति भूषण बंदोपाध्याय के इसी नाम के प्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित थी. 1956 में 'अपराजितो' के निर्माण के साथ वह विश्व सिनेमा के क्षितिज पर अपनी गंभीर आमद दर्ज करा चुके थे. अक्टूबर 1958 के दूसरे सप्ताह में रिलीज हुई 'जलसा घर' असाधारण रूप से पहली दोनों फ़िल्मों से अलग थी. इस असाधारणता की बुनियाद में सत्यजीत रे का वह विमर्श था, जिसमें यह चिंता शामिल थी कि उभरती हुई आधुनिकता की नव-मशीनी और पूंजीवादी संरचना के भीतर कला और संस्कृति की क्या हैसियत होगी? क्या आधुनिकता संस्कृति और उसकी आभिव्यक्तिक कलाओं, जैसे संगीत, नृत्य इत्यादि के साथ ठीक वैसा ही व्यवहार करेगी जैसा वह एक कमॉडिटी मसलन टूथपेस्ट या बिस्किट के साथ करती है. क्या संस्कृति की क्लासिकल परम्पराएं भी बाज़ार में हासिल होने वाली एक कॉमोडिटी बन कर रह जाएंगी? क्या व्यवसायीकरण की आंधी लोगों के कलात्मक आस्वादन की क्षमताओं को बदल डालेगी? इन प्रश्नों के सवाल ढूंढ़ने के लिए रे को जो कथात्मक विन्यास चाहिए था, वह उन्हें एक बांग्ला कहानीकार ताराशंकर बनर्जी (बंद्योपाध्याय, पद्मभूषण पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्य पुरस्कारों से सम्मानित) की कहानी में मिल गया और इसी कहानी ने जलसाघर की उस पटकथा का काम किया, जिसमें कैमरे के जरिए रे ने राजों-रजवाड़ों के यहां चली आ रही वैचारिक जड़ता के बाबजूद वहां पनपने वाली संगीत की प्रश्रयवादी परंपराओं को आधुनिकता के मूल्यों के बरक़्स खड़ा करके एक तनावग्रस्त विमर्श का निर्माण किया. फ़िल्म की कहानी बीसवीं सदी के तीसरे अथवा चौथे दशक के ग्रामीण बंगाल की कहानी है. जमीदारियां ज़मींदोज होने लगी हैं, लेकिन जलसाघर का नायक, ज़मींदार विशंभर रॉय अपनी हवेली के भीतर बने हुए एक हॉल- जिसे वह गीत-संगीत की गोष्ठियों के आयोजनस्थल होने कारण जलसा घर कहता है- के सहारे जीवित है. जलसा घर वस्तुतः जलसा घर से नहीं, ज़मींदार की दरकती हुई हवेली की जर्जर छत से शुरू होती है जहां रे का कैमरा वृद्ध और चिंताग्रस्त ज़मींदार और उसके सामने उजाड़ पड़े हुए नदी के खादर मैदान को एक साथ पकड़ता है. ज़मींदार का घरेलू सेवक अनंत ‘हुज़ूर’ के लिए हुक्का लगाकर छत पर लाता है. ज़मींदर का पहला संवाद अनंत से है- ‘कौन सा महीना है?’‘ फागुन हुज़ूर’- हुक्का लगाकर अनंत जवाब देता है. ‘बसंत काल’‘ हां हुज़ूर’ कहीं से आती हुई शहनाई की स्वर लहरियां विशंभर रॉय की समयसंज्ञता के बोध को विक्षुब्ध कर देती हैं. शहनाई के सुर ज़मींदार के इलाक़े के गांगुली बाबू के घर से आ रहे हैं. बजती हुई शहनाई के बीच में ही विशंभर रॉय अपनी बची खुची जमींदारी के मामले देखने वाले अपने नायब को छत पर तलब करते हैं -   ‘माहिम के घर शहनाई क्यों बज रही है? ‘उसके बेटे का उपनयन है हुज़ूर’‘क्या ये बंदे अली की शहनाई है.’ जमींदार दूर से शहनाई के सुर पहचान लिए.‘हां हुज़ूर’ ‘क्या निमंत्रण आया था?’ ‘आया था हुज़ूर.’ ‘क्या वह निमंत्रण लेकर खुद आया था?’ ‘नहीं हुज़ूर, चिट्ठी पत्री आई थी.’ क्या आप जाएंगे? नायब ने पूछा. क्या मैं कहीं जाता हूं. ना हुज़ूर, तो फिर? नायब नीचे चला जाता है, ज़मींदार बंदे अली की शहनाई के साथ...
बांद्रा

बांद्रा स्टेशन और बस स्टैंड पर गांव जाने के लिए उमड़ पड़ी भीड़

लॉकडाउन बढ़ाए जाने की खबर और अफवाह ने कामगारों की बढ़ाई बेचैनी मुंबई : दूसरे चरण का लॉकडाउन शुरू होने से पहले ही आज यहां बांद्रा पश्चिम के एसटी बस डेपो और रेलवे स्टेशन पर हजारों की संख्या में मुंबई से बाहर के और परप्रांतीय कामगारों की भीड़ जमा हो गई. लॉकडाउन बढ़ाने और अफवाह से हुए लोग परेशान अभी मिली खबरों के अनुसार बांद्रा में परप्रांतीय और बाहरगांव के कामगारों की उमड़ी भीड़ पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे रात आठ बजे एक प्रेस कांफ्रेंस में मुखातिब होंगे. वे परप्रांतीय और बाहरगांव के लोगों के लिए घोषणाएं भी कर सकते हैं.  पहले मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा 30 अप्रैल तक और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 3 मई तक लॉकडाउन जारी रखने की घोषणा ने इन लोगों के सब्र का बांध तोड़ डाला. सभी अपने-अपने गांव जाने को उतावले नजर आए. बताया जा रहा है कि यह स्थिति एक अफवाह के कारण पैदा हुई, जिसमें कहा गया था कि बाहरी लोगों को ट्रेन और बसों से सरकार ने बाहर भेजने का इंतजाम किया है. Mumbai: A large group of migrant labourers gathered in Bandra, demanding for permission to return to their native states. They later dispersed after police and local leaders intervened and asked them to vacate. pic.twitter.com/uKdyUXzmnJ— ANI (@ANI) April 14, 2020 गृहमंत्री देशमुख आए सामने राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने पुलिस को बांद्रा में एकत्र भीड़ के प्रति सहानुभूति के सात उनको समझाने-बुझाने का आदेश दिया है. उन्होंने कहा है की सभी बाहरी कामगारों के लिए सरकार की ओर से हर संभव मदद की जाएगी.देशमुख ने कहा कि मजदूर परेशान हैं और अपने राज्य में वापस जाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार इन मजदूरों के खाने का इंतजाम करेगी. हम मजदूरों को समझा रहे हैं कि उनकी परिस्थितियों को सुधारने की पूरी कोशिश करेंगे. CM Uddhav Balasaheb Thackeray will address the State at 8:00 pm on 14th April, 2020#WarAgainstVirus— CMO Maharashtra (@CMOMaharashtra) April 14, 2020 समझाने पर बात न बनी तो सख्ती पर उतरी पुलिस इधर लोगों की बांद्रा में उमड़ी ऐसी भीड़ से पुलिस एवं प्रशासन के होश उड़ गए. भारी संख्या में एसटी बस स्टैंड में पुलिस बंदोबस्त कर दिया गया है. पुलिस अधिकारी भीड़ को समझाते नजर आए. कुछ स्थानीय नेता भी लोगों को समझाते नजर आए. उन्होंने उन्हें वापस अपने-अपने ठिकानों पर जाने कहा. समझाने का कोई असर नहीं होने पर बाद में पुलिस सख्ती पर उतर आई. डंडे भांजते ही भीड़ तीतर-बितर हो गई. हालांकि पुलिस की सख्ती के कारण लोग बस स्टैंड से हटाने को विवश हो गए. लेकिन इतने समय फिर देशव्यापी बंद में फंसे रहने से घबरा चुके लोग अपने घरों तक पहुंचने को व्यग्र हो उठे हैं. लॉकडाउन के कारण उनकी रोजी-रोटी बुरी तरह प्रभावित हुई है. निजी प्रतिष्ठानों और दुकानों में काम बंद हो जाने से उनके लिए कठिनाई पैदा हो गई है. उनके पास के जमा पैसे ख़त्म होने को हैं सभी को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है. अनेक लोग ऐसे हैं, जिनके पास एक दिन के राशन के लिए भी पैसा नहीं बचा है. काहगार वहां पुलिस अधिकारियों और नेताओं से अपनी मुश्किलें सुनाते रहे....