स्थापना दिवस

वेकोलि के 45 वां स्थापना दिवस पर श्रमवीरों का सम्मान

नागपुर : टीम वेकोलि ने शुक्रवार, 8 नवंबर की संध्या 45 वां स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास से मनाया. इस अवसर पर उत्कृष्ट श्रमवीरों को सम्मानित किया गया.   कंपनी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक कैप्टन राजीव रंजन मिश्र की अध्यक्षता में संपन्न इस जलसे में सेवा निवृत्त निदेशकगण सर्वश्री सी.एच. खिस्ती, के.के. शरण, श्रीमती इरावती दाणी, ओ.पी. मिगलानी तथा वर्तमान निदेशक त्रय डॉ. संजय कुमार, मनोज कुमार, अजित कुमार चौधरी, सीवीओ अमित कुमार श्रीवास्तव एवं संचालन समिति के सदस्य एस.क्यू. ज़मा, एस.एच. बेग, सी.जे. जोसफ़, सौरभ दुबे, शिवकुमार यादव तथा शिवदयाल बिसन्दरे एवं कल्याण मंडल के सदस्यगण डॉ. नीलिमा अन्सिंगकर सर्वश्री बी.खंडाला, वी. के. सिंह, ए.पी. सिंह, बी. एन. सिंह, कामेश्वर राय तथा सभी क्षेत्रों के महाप्रबंधक प्रमुखता से उपस्थित थे. दीप प्रज्ज्वलन एवं कोल इंडिया गीत के साथ प्रारंभ इस भव्य समारोह में उत्कृष्ट श्रमवीरों को सम्मानित किया गया. इस अवसर पर सीएमडी मिश्र ने कहा कि हमारे लोग हमारी ताकत हैं, यह सम्मान श्रमवीरों का सम्मान है. उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण कोयले की आपूर्ति हमारी प्राथमिकता है. हालही में वेकोलि ने देश की ऊर्जा जरूरतों के मद्देनजर 11 खदानों को केवल पवार प्लांटों को कोयला देने के लिए चिह्नित किया है. इस अवसर पर सी.एच. खिस्ती ने टीम वेकोलि को कोल इंडिया की सर्वश्रेष्ठ टीम बताया, उन्होंने विजेताओं को शुभकामनाएं दीं. कार्यक्रम में स्वागत संबोधन निदेशक (कार्मिक) डॉ.संजय कुमार ने दिया. वेकोलि परिवार के सदस्यों ने अपने कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक संध्या एवं सेल्फ़ी पॉइंट का भरपूर आनंद लिया. कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रबंधक (जनसंपर्क) एस.पी. सिंह ने किया. कार्यक्रम का समापन राष्ट्र-गान से किया गया.
EPFO

Every other day, EPFO harassing the pensioners

Pravin Kohli, New Delhi : Every other day, EPFO brings out new theory and objections just to harass the pensioners. Most of such objections have already been negatived by the Hon’ble Supreme Court of India by upholding the decision of Kerala High Court (as being discussed below) : (a) That there are hundreds of judgments of various High Courts particularly Kerala High Court wherein it has been decided in all the cases (Single Bench as well as Division Bench) that there cannot be any cut-off date for submission of option under 11(3) of EPS, 1995 and fixation of 01.12.2004 as the cut-off date by EPFO is without legal jurisdiction. (b) That Supreme Court of India,  in the following 8 SLPs had also upheld the decisions of Kerala High Court terming the cut-off date 1.12.2004 as illegal and subsequently the same had been implemented by EPFO and the pensioners were allowed to opt for higher pension by submitting option under Para 11(3) and by returning the differential amount with interest as it was decided that fixing any cut-off date for submitting the option under Para 11(3) was arbitrary and illegal : i. SLP 7074/2014 (RPFC & ors Vs. Majeed Kunju & Ors.) ii. SLP 7075/2014 (RPFC & ors Vs. Abdul Hakeem Sheriff & Ors.) iii. SLP 7076/2014 (RPFC & ors Vs. M.Babu & Ors.) iv. SLP 7107/2014 (RPFC & ors Vs. A.K.Jayappan & Ors.) v. SLP 7108/2014 (RPFC & ors Vs. P.N.Pillai & Ors.) vi. SLP 7224/2014 (RPFC & ors Vs. S.Nizar & Ors.) vii. SLP 697 /2016 (RPFC   & ors Vs. KJ Verkey & Ors.) viii. SLP 19954/2015 (RPFC & ors Vs. Austin Joseph & Ors.) Sr. No. (i) to (vii) above had been decided on 31.3.2016 whereas Sr No. (viii) was decided on 12.07.2016. (c) For making EPFO offices understand regarding unnecessarily & illegally raking up the issues which have already attained finality upto the level of Apex Court and also implemented by EPFO, I am submitting brief history of one of the above cases i.e. SLP 19954/2015 (RPFC & others Vs. Austin Joseph & Others. as at (viii) above as this covers most of the grounds of EPFO : • Shri Austin Joseph and others (all retired employees) had filed a Writ Petition (C) No. 254/2014 against UOI, EPFO HQ & EPFO R.O. after their retirement from service which was decided in their favor on 4.3.2014 wherein following most important and substantial questions of law were considered by the Hon’ble Court under Article 136 of the Constitution of India and decided : A. Whether the Hon’ble High Court of Kerala has misinterpreted the statutory provisions of Para 11(3) of the Employees’ Pension Scheme, 1995? B. Whether a person, who has ceased to be the member of the Pension Fund and who has never, exercised the option of paying the contribution on salary exceeding statutory limit of Rs. 6500/- (Rs. Six thousand five hundred only), is entitled to pensionable salary on higher salary? C. Whether the Hon’ble High Court of...
महाराष्ट्र

कौन बनेगा महाराष्ट्र का सीएम : भाजपा-शिवसेना में पेंच कायम  

राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावना महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए 14 दिन बीत चुके हैं, राज्य में भाजपा-शिवसेना गठबंधन भारी बहुमत के बाद भी सरकार गठन में विफल हैं. दोनों दलों के बीच मुख्यमंत्री पद का पेंच फंस गया है. भाजपा सर्वाधिक 105 सीटें जीतकर सरकार बनाने के अपने दावे पर कायम है, वहीं मात्र 56 सीटें पाने वाली शिवसेना भी मुख्यमंत्री पद के लिए अड़ी हुई है. आज 8 नवंबर राज्य में सरकार गठन करने का आखिरी तारीख है. कल 9 नवंबर को राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने को बाध्य होंगे.   ज्ञातव्य है कि 2014 के चुनाव के बाद विधानसभा का गठन 10 नवंबर 2014 को हुआ था, अतः 9 नवंबर 2019 यानी शनिवार को विधानसभा भंग हो जाएगी. ऐसी स्थिति में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होना अवश्यम्भावी है. इस बीच भाजपा और मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री पद के दावेदार उद्धव ठाकरे आज आरोप-प्रत्यारोप के साथ दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना क्षीण नजर आने लगी है. चुनाव परिणाम आने के बाद से ही भाजपा और शिवसेना के बीच रिश्ते तल्ख होते गए हैं और बयानबाजी का दौर चलता रहा. सत्ता पर 50-50 के फॉर्मूले और मुख्यमंत्री के पद को लेकर दोनों दल आमने सामने हैं और इस बीच अन्य दलों के साथ मुलाकातों का दौर भी चला. गुरुवार को शिवसेना के विधायकों ने एक प्रस्ताव पारित कर, महाराष्ट्र में सरकार गठन पर अंतिम निर्णय लेने के लिए पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे को अधिकृत किया. तमाम अनिश्चितता और विधायकों के दल-बदल की आशंका के बीच शिवसेना ने अपने विधायकों को होटल में ठहराया दिया. वहीं गुरुवार को ही भाजपा नेताओं ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात भी की लेकिन सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया. दोनों दलों की तरफ से लगातार आ रहे बयानों के बीच अब शुक्रवार को सभी नज़रें राज्य की राजनीतिक हलचल पर टिकी हैं, क्योंकि सरकार के गठन के फैसले को लेकर यह अंतिम और निर्णायक दिन है.
अरविंद इनामदार

महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी अरविंद इनामदार नहीं रहे

मुंबई : महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरविंद इनामदार का आज शुक्रवार, 8 नवंबर को निधन हो गया. वे 79 वर्ष के थे. उन्होंने अक्टूबर 1997 से जनवरी 2000 के बीच महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक के रूप में कार्य किया. लम्बे समय से बीमार स्व. इनामदार का इलाज यहां के हरकिशनदास अस्पताल में चल रहा था. उन्होंने अस्पताल में ही शुक्रवार की रात 2.20 बजे अंतिम सांसें लीं. निधन के पश्चात उनका पार्थिव शरीर मंत्रालय के निकट शलाका स्थित उनके निवास स्थान पर लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है. पारिवारिक सूत्रों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार अपराह्न समय मरीन ड्राइव स्थित चंदनवाड़ी श्मशान भूमि में किया जाएगा. स्व. इनामदार की पहचान एक सक्षम, कुशल और कर्त्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में थी. उन्होंने नागपुर के पुलिस कमिश्नर के साथ ही राज्य के अनेक जिलों और अनेक पदों पर अपनी सेवाएं प्रदान की थीं. नासिक पुलिस प्रशिक्षण में अपनी लम्बी सेवाओं के दौरान उन्होंने पुलिस प्रशिक्षण को एक नई दिशा दी थी. उन्होंने वर्ष 1983 में शहर को अपराध से निजात दिलाने वाले मुठभेड़ विशेषज्ञ पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित किया था जिन्होंने संगठित अपराध को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई थी. इनामदार को जुलाई 1994 के सनसनीखेज जलगांव सेक्स प्रकरण और मानव तस्करी मामले में अपनी जांच के लिए जाना जाता है. उन्होंने अक्टूबर 1997 से जनवरी 2000 के बीच पुलिस महानिदेशक के रूप में कार्य किया. उन्होंने वर्ष 1983 में शहर को अपराध से निजात दिलाने वाले मुठभेड़ विशेषज्ञ पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित किया था, जिन्होंने संगठित अपराध को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई थी. अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ सालों से इनामदार अपने "अरविंद इनामदार फाउंडेशन" के माध्यम से सभी रैंकों के सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया करते थे. साहित्य के क्षेत्र में भी स्व.इमानदार ने अपनी पहचान बनाई थीं.
बिजली

बिजली निर्मिति : वेकोलि की 11 विशेष खदानों से भी मिलेगा कोयला

100 मिलियन टन से अधिक कोयला-उत्पादन का लक्ष्य    नागपुर : वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) से बिजली संयंत्रों को अधिक मात्रा में कोयले की सतत आपूर्ति के लिए कंपनी द्वारा 11 विशेष खदानों को भी खास तौर पर कंपनी से जुड़े विद्युत क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए चिह्नित किया गया है. विभिन्न योजनाओं के तहत वेकोलि से कोयला ले रहे, सभी बिजली संयंत्रों को इन खदानों से अधिकतम मात्रा में कोयला आपूर्ति हेतु यह विशेष पहल की गई है. वेकोलि ने अपनी 63 खदानों से उन 11 खदानों को चिह्नित किया है, जिनसे कंपनी से जुड़े बिजली उपभोक्ताओं को अधिक मात्रा में कोयला-आपूर्ति की जाएगी. इनमें से पिछले पांच वर्षों में खोली गई 8 ग्रीनफील्ड तथा 3 ब्राउन फील्ड खदानें हैं. सभी जुड़े बिजली उपभोक्ताओं को इन परियोजनाओं से विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत करीब-करीब पूरा कोयला दिया जा सकेगा.   रेल तथा सड़क-मार्ग से भेजने पर विशेष जोर यह जानकारी वेकोलि द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी गई. बताया गया कि इसके अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण कोयला, रेल तथा सड़क-मार्ग से भेजने पर विशेष जोर दिया जाएगा. यह आपूर्ति अन्य खदानों से निर्धारित मात्रा के अलावा होगी. इन विद्युत् संयंत्रों को इस बढ़ी हुई कोयला-आपूर्ति से न केवल उनकी आवश्यकता पूरी होगी, बल्कि राष्ट्र-हित में थर्मल कोयले के आयात में भी कमी आएगी.  बताया गया कि 2013-14 में इन बिजली-संयंत्रों को 62% कोयले की आपूर्ति की गई थी, जबकि 2018-19 में 81% कोयला इन्हें प्रेषित किया गया. 2018-19 में कम्पनी ने कुल 55.5 मिलियन टन कोयला प्रेषित किया, इनमें से 45 मिलियन टन कोयला विद्युत् संयंत्रों को प्रेषित किया गया. महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा राज्यों के बिजली संयंत्रों के साथ एनटीपीसी के आलावा निजी बिजली संयंत्र वेकोलि के प्रमुख उपभोक्ता हैं.  वेकोलि द्वारा प्रेषित कोयले का बड़ा हिस्स्सा महाराष्ट्र की बिजली कंपनी महाजेनको (50%) तथा मध्यप्रदेश (12%) द्वारा उपयोग किया जाता है. अन्य तीन संयंत्रों तथा एनटीपीसी 7% तथा निजी बिजली संयंत्र वेकोलि के 12% कोयले का उपयोग करते हैं. कम्पनी द्वारा वर्ष 2018-19 के दौरान स्पॉट ऑक्शन तथा नॉन-पावर लिंकेज  ऑक्शन के तहत प्रत्येक को करीब 5 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की गई.  2013-14 में उत्पादन में आई थी गिरावट    उल्लेखनीय है कि 2009-10 के 45.74 मिलियन टन कोयला-उत्पादन के मुकाबले वर्ष 2013-14 में वेकोलि का उत्पादन घटकर चिंताजनक स्तर 39.73 मिलियन टन पर आ गया था. परियोजनाओं के लिए जमीन की अनुपलब्धता तथा संभावित घाटे की भावी खदानों के कारण कम्पनी के भविष्य पर खतरे की स्थिति आ गई थी. मध्य, पश्चिमी तथा दक्षिणी क्षेत्र के उपभोक्ताओं  सहित महाजेनको भी पूर्वी भारत स्थित कोयला कम्पनियों पर कोयला-आपूर्ति के लिए निर्भर थे, जिनका कोयला अधिकतम रेल-भाडा के कारण उन तक पहुंचने में काफी महंगा पड़ता था. 20 नई परियोजनाएं शुरू करने में सफलता   वेकोलि ने कोयला-उत्पादन में तत्काल बढ़ोत्तरी के लिए भू-अर्जन हेतु सरल नियम तथा संभावित घाटे वाली भावी खदानों को लाभप्रद स्थिति में लाने के लिए गहन तकनीकी विश्लेषण जैसे अनेक प्रयास किए. इसका सकारात्मक फायदा 2015 के प्रारम्भ से ही नई परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के रूप में मिलने लगा. पिछले पांच वर्षों में वेकोलि को 8364 हेक्टेयर जमीन प्राप्त करने तथा 6543 करोड़ रुपए की लागत से  20 नई परियोजनाएं शुरू करने...
कोयला

भारतीय ऊर्जा-जरूरतों की रीढ़ है कोयला : मिश्र

नागपुर : देश के विकास में कोयले की बहुत बड़ी भूमिका है. कोयला भारतीय ऊर्जा-जरूरतों की रीढ़ है. देश को विकसित देशों की श्रेणी में ले जाने में कोयले की महत्वपूर्ण भूमिका है. कोयला उत्खनन में लगे लोगों को एक मंच पर आकर आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए और आगे लेकर जाने का मार्ग तैयार करना है, ताकि देश की ऊर्जा पूर्ति कुशलतापूर्वक सुनिश्चित की जा सके. यह बात वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) के अध्यक्ष-सह-प्रबन्ध निदेशक (सीएमडी) राजीव रंजन मिश्र ने एक तीन दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस एंड एक्सपो में कही.  मिश्र ने बताया कि TEAM WCL ने कोयला उत्पादन के साथ-साथ ईको माइन पर्यटन, Over Burden से रेत अलग करने, कोल नीर (पेयजल) आदि तैयार करने के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं. सीएमडी मिश्र शनिवार, 19 अक्टूबर को Indian Mine Managers' Association -NAGPUR BRANCH, VNIT MINNING ALUMNI ASSOCIATION और SHRI RAMDEOBABA COLLEGE OF ENGINEERING AND MANAGEMENT द्वारा आयोजित तीन दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस एंड एक्सपो में मुख्य अतिथि के रूप में शुभारम्भ किया. कॉन्फ्रेंस की थीम थी - "Advances in Mining and Geotechnical Engineering" इस अवसर पर नागपुर के जाने माने शिक्षाविद गोविंद प्रसाद अग्रवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. MOIL के निदेशक तकनीकी दीपांकर सोम विशिष्ट अतिथि थे. IMMA  के अध्यक्ष आर.सी. सनोडिया ने स्वागत भाषण किया. प्रस्ताविक सम्बोधन आयोजन समिति के अध्यक्ष डी. एम. गोखले ने किया. कार्यक्रम में अतिथियों ने एक स्मारिका का भी विमोचन किया. धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव श्री मनोज एस तिवारी ने किया. समारोह में विभिन्न क्षेत्रों के जाने माने खनन अभियंता उपस्थित थे.

झंकार ने दिया बच्चों और घरेलू कर्मियों को दीपावली की सौगात

नागपुर : झंकार महिला मंडल ने अपनी परम्परा के अनुरूप दीपावली के अवसर पर पराश्रित बच्चों और घरेलू कर्मियों को दीपावली की सौगात देने के साथ उनके कार्यों का सम्मान भी किया. मंडल की अध्यक्षा श्रीमती अनिता मिश्र एवं उपाध्यक्ष श्रीमती अनिता अग्रवाल और श्रीमती राधा चौधरी ने काटोल रोड स्थित बाल सेवा सदन संस्था में दीपावली के निमित्त 30 बच्चों को मच्छरदानी, समान रखने की पेटी और नाश्ते के पैकेट्स का वितरण किया.   श्रीमती मिश्र ने बच्चों को दीपावली पर्व की अग्रिम शुभकामनाएं दी और बच्चों को खूब मेहनत से पढ़ने और जीवन में आगे बढ़ने का संदेश दिया.  बाल सेवा सदन के संयोजक प्रशान्त हाडके ने संस्था के बच्चों की खेल उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि झंकार महिला मंडल की भेंट बच्चों के लिए बहुत ही उपयोगी है. मच्छरदानी बच्चों को डेंगू आदि बीमारियों से बचाने में बहुत सहायक है. हाडके ने इस नेक कार्य के लिए झंकार महिला मंडल के प्रति आभार व्यक्त किया.  वहीं वेकोलि के कोल क्लब में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में झंकार महिला मंडल ने घरों में काम करने वाले लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं. झंकार महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती अनिता मिश्र ने अपने सम्बोधन में कहा कि आप सभी लोग सुरक्षित दीपावली मनायें। स्वस्थ रहें, प्रसन्न रहें और अपने परिवार की देखभाल करें. कार्यक्रम में अध्यक्ष श्रीमती अनिता मिश्र, उपाध्यक्ष श्रीमती अनिता अग्रवाल, श्रीमती राधा चौधरी ने 45 कामकाजी महिलाओं को मिठाई के पैकेट और घरेलू उपयोग की सामग्री भेंट की.  इस अवसर पर झंकार महिला मंडल की पदाधिकारी सर्वश्रीमती संगीता दास, लिपिका श्रीवास्तव, सुषमा गोखले, मौसमी सरकार और ज्योति रेवतकर  प्रमुखता से उपस्थित थीं.   उल्लेखनीय है कि इस प्रतिसाद के लाभार्थियों ने झंकार महिला मंडल के प्रति दिल से आभार प्रकट किया और कहा कि यह उनके जीवन का सुखद अनुभव है कि झंकार महिला मंडल ने घरों में काम करने वाली महिलाओं की  सुध ली और उनके जीवन में दीपावली के अवसर पर रोशनी बिखेरने की कोशिश की. 

महाराष्ट्र के चुनावी दंगल में चल पड़ा वंशवाद का घमासान

विधानसभा चुनाव-2019 : समीक्षा  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का इस बार का मैदान वंशवाद के दंगल का घमासान दिखाने वाला है. चुनाव में उतर चुके कई नए युवा चेहरे वंशवाद की झलक दिखला रहे हैं. इन युवा चेहरों में अनेक चेहरे किसी न किसी राजनीतिक परिवार से जुड़े हैं. दलों के नेता अपनी-अपनी अगली पीढ़ी के लिए चुनावी मैदान को लॉन्च पैड के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. लिहाजा, महाराष्ट्र भी अब वंशवाद की राजनीति से अछूता नहीं रहा. कांग्रेस, एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) और शिवसेना सहित वंशवाद विरोधी भारतीय जनता पार्टी भी इस बार की चुनावी गंगा में हाथ धोने का लोभ संवरण नहीं कर पाई हैं.  महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव-2019 में राज्य के दो सबसे ताक़तवर राजनीतिक परिवारों की तीसरी पीढ़ी के चुनावी मैदान में उतरने की गवाही दे रहा है- इनमें हैं पवार और ठाकरे परिवार. इन्हें महाराष्ट्र की राजनीति के शीर्ष परिवारों के रूप में देखा जाता है और यहां की राजनीति अक्सर इन्हीं दोनों परिवारों के ईर्द-गिर्द घूमती दिखती है. परम्परा तोड़ उतरे आदित्य ठाकरे   इधर आदित्य ठाकरे, जो शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के पोते हैं, ठाकरे परिवार की परम्परा तोड़ कर चुनावी मैदान में उतरने वाले पहले सदस्य हैं. वहीं पवार परिवार से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख और कद्दावर नेता शरद पवार के पोते रोहित पवार का भी यह पहला चुनाव है. शिवसेना राज्य की सत्ताधारी पार्टियों में से एक रही है और इसके संस्थापक बाल ठाकरे राज्य की राजनीति में हमेशा ही एक कद्दावर शख्सियत रहे. क्षेत्रीयता और विभाजनकारी हिंदुत्व की पहचान वाली शिवसेना ने एक बार साल 1995 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का पद हासिल किया. इसके साथ ही साल 2014 से वह केंद्र और राज्य में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार का हिस्सा भी रही है. लेकिन खुद को रिमोट कंट्रोल बताने वाले इसके संस्थापक बाल ठाकरे ने चुनावी मैदान में कभी अपना हाथ नहीं आजमाया. न तो वे और न ही उनके बेटे उद्धव कभी चुनाव लड़े. 2012 के बाद से शिवसेना की कमान उद्धव के हाथों में ही है. उद्धव के चचेरे भाई राज ठाकरे ने भी कभी चुनावी अखाड़े में आजमाइश नहीं की. बाला साहेब ठाकरे से प्रेरित राज ठाकरे ने शिवसेना से अलग महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) के नाम से पार्टी भी बनाई और 2014 में चुनाव लड़ने का मन भी बनाया और सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा तक की, लेकिन बाद में वो इससे पीछे हट गए. लेकिन इस चुनाव में ठाकरे परिवार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए तीसरी पीढ़ी के ठाकरे यानी आदित्य ठाकरे को मुंबई की वर्ली विधानसभा सीट से उतारा है. यानी चुनाव के मैदान में उतरने वाले वे अब पहले ठाकरे बन गए हैं. नई पीढ़ी को चुनाव में आजमा चुका है पवार परिवार दूसरी ओर पवार परिवार की तीसरी पीढ़ी के रोहित पवार भी करजात-जमखेद से चुनावी मैदान में उतरे हैं. ठाकरे के उलट पवार ने कभी ऐसा नहीं माना कि चुनाव में उनकी दिलचस्पी नहीं है. दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीतिक क्षितिज पर शरद पवार के वर्चस्व के बाद उनकी बेटी सुप्रिया सुले लोकसभा चुनाव जीत कर संसद पहुंची. इसके अलावा उनके भतीजे और राज्य में विपक्ष के नेता अजीत पवार उप-मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. 2019 के विधानसभा चुनाव...
नोबेल शांति

इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को नोबेल शांति पुरस्कार

नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है. इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को नोबेल शांति पुरस्कार मिला है. शत्रु देश इरिट्रिया के साथ शांति स्थापित कर अंतरराष्ट्रीय शांति और सहयोग में उनके प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री अबी अहमद अली का नाम नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है. नोबेल कमेटी ने इसकी जानकारी दी है. नोबेल पुरस्कार जूरी ने बताया अबी को "शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करने के प्रयासों के लिए और विशेष रूप से पड़ोसी इरिट्रिया के साथ सीमा संघर्ष को सुलझाने के निर्णायक पहल के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है."   2018 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उदारीकरण की शुरुआत की अबी अहमद ने इथियोपिया में बड़े पैमाने पर उदारीकरण की शुरुआत की. उन्होंने हज़ारों विपक्षी कार्यकर्ताओं को जेल से रिहा कराया और निर्वासित असंतुष्टों को देश में वापस लौटने की इजाज़त दी. सबसे अहम काम, जिसके लिए नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया, वह यहहै कि पड़ोसी देश इरिट्रिया के साथ दो दशक से भी अधिक समय से चले आ रहे संघर्ष को ख़त्म करते हुए उसके साथ शांति स्थापित की. हालांकि, उनके सुधारों ने इथियोपिया की नस्लीय तनाव पर से पर्दा उठा दिया, इसके बाद हुई हिंसा में 25 लाख लोगों को अपना घरबार छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. साहित्य के नोबेल पुरस्कार इससे पहले 10 अक्‍टूबर को वर्ष 2018 के लिए पोलिश लेखिका ओल्गा टोकार्कज़ुक (Olga Tokarczuk) को साहित्य के नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize in Literature) से सम्मानित किया गया. वर्ष 2019 के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize in Literature) ऑस्ट्रियाई लेखक पीटर हैंडके (Peter Handke) को दिया गया. स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में नोबेल फाउंडेशन (Nobel Foundation) ने नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize 2019) विजेताओं की घोषणा की. बुधवार, 9 अक्‍टूबर को कैमिस्ट्री के नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize 2019) की घोषणा की गई थी, और वह लिथियम-आयन बैटरी का विकास करने के लिए अमेरिका के जॉन बी. गुडइनफ (John Goodenough), इंग्लैंड के एम. स्टैनली विटिंघम (Stanley Whittingham) तथा जापान के अकीरा योशिनो (Akira Yoshino) को संयुक्त रूप से दिया गया था.    
गायन

‘विश्व का सबसे लम्बा गायन स्पर्द्धा’ का ऑडिशन अमरावती में 6 को

अमरावती के गायकों को भी मिलेगा विश्व रेकॉर्ड का हिस्सा होने का सुनहरा मौका अमरावती : राष्ट्रीय कर्तव्य पालन के लिए विभिन्न सामाजिक उपक्रमों के प्रचार और प्रसार के लिए समर्पित विराग मधुमालती एवं टीम द्वारा 'विश्व का सबसे लम्बा कराओके गायन स्पर्द्धा का विश्वविक्रमी मैराथन' - (“World’s Longest singing Marathon Guinness World Record”), करने का संकल्प किया गया है. इस के लिए रविवार, 6 अक्टूबर को विराग मधुमालती और टीम ऑडिशन लेने वाले हैं. यह ऑडिशन मिशन देशभक्त डिफेन्स पेरामेलट्री ॲकेडेमी, सिटी सेंटर काम्प्लेक्स, 202 दूसरा माला, पंचवटी चौक, अमरावती में भी संपन्न होगा. “विश्व का सबसे लम्बा गायकी का विश्वविक्रमी मैराथन स्पर्द्धा" अगले माह से 9 नवंबर से 21 दिसंबर तक नवी मुम्बई के खारघर स्थित 'लिटिल वर्ल्ड मॉल' में होने जा रहा है. यह मौका गायक कलाकारों के लिए एक सुनहरा अवसर हो सकता है. विराग मधुमालती व उनकी टीम राष्ट्रीय कर्तव्य पालन को समर्पित अवयवदान जनजागृति, बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ, स्टॉप ग्लोबल वार्मिंग, कैंपस विथ हेलमेट, सेव वॉटर-सेव ट्रीज, रक्तदान जैसे ज्वलंत सामाजिक उपक्रमों को बढ़ावा देने और लोगों में इन सभी विषयों के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.   अभी कराओके गायन के लिए दुनिया का सबसे बड़ा रिकॉर्ड (792 घंटों का) चीन के नाम है और विराग मधुमालती ने 1000 घंटों का नया विश्व रिकॉर्ड को बनाने का फैसला किया है. विराग का कहना है कि 42 दिनों के इस गायन कार्यक्रम में से प्रत्येक7 दिन उपरोक्त गतिविधियों में से हर एक उपक्रम के लिए समर्पित होंगे. देश के विभिन्न हिस्सों से गायकों को इस विश्व रिकॉर्ड के लिए चुना जा रहा है. इस स्पर्द्धा में 10 से 70 वर्ष की आयु के कोई भी गायक भाग ले सकते हैं. सभी गायक कलाकारों के लिए विश्व के इस सबसे बड़े संगीत महोत्सव में गाने का स्वर्ण अवसर है यह प्रतिपादन आयोजक एवं विश्वविक्रमी गायक विराग मधुमालती ने किया है. यह "अखंड संगीत यज्ञ" एक ऐतिहासिक संगीत उत्सव होगा, जिसमें लगभग 18,000 से 20,000 गाने गाए जाएंगे. गायकी के इस महाकुम्भ में विविधता में एकता का दर्शन होने जा रहा है. गायक विविध भाषाओं में गाने गा सकेंगे. उम्मीद है कि खारघर के लिटिल वर्ल्ड मॉल में लगभग 8 से 9 लाख लोगों का जनसमूह इस संगीत महाकुम्भ का आनंद लेने पहुंचेगा. आगामी माह के 9 नवंबर से 21 दिसंबर 42 दिनों के दौरान यह विश्व रिकॉर्ड बनाया जाएगा. इसके अलावा, इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान नेत्रदान और अवयव दान के लिए भी  लोगों से शपथ दिलवाई जाएगी. यह नया विश्व रिकॉर्ड निश्चित रूप से हमारे देश की संस्कृति को बढ़ावा देने और उपरोक्त ज्वलंत सामाजिक गतिविधियों के बारे में जागरूकता लाने में सफल होगा. विराग मधुमालती ने अब तक चार विश्व विक्रम स्थापित करके देश की एकता व नेत्रदान की जनजागृति के लिए समर्पित किए हैं. दिव्यांग मित्रों की पीड़ा को महसूस करने के लिए विराग ने अपनी जान जोखिम में डाल कर 100 दिनों तक अपनी आंखों पर पट्टी बांधी और इस दौरान, समाज में नेत्रदान जनजागृति के लिए कई कार्यक्रम किेए. सुप्रसिद्ध गायक सुरेश वाडकर, पार्श्वगायिका साधना सरगम, अभिनेत्री अलका कुबल तथा महाराष्ट्र के सांकृतिक मंत्री विनोद तावड़े ने इस नए...