पेंशनरों के प्रति क्रूर है केंद्र की भाजपा सरकार

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संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत को लिखे दूसरे पत्र में झोड़े ने उठाया भाजपा नेताओं के चेहरों का नकाब

 
नागपुर : केंद्र में वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार देश के लाखों बुजुर्ग पेंशनरों के प्रति बेहद असंवेदनशील और क्रूर है. इससे पहले केंद्र में इतनी असंवेदनशील सरकार कभी नहीं रही. यह शिकायत ईपीएस-95 पेंशनर एवं वयोवृद्ध एक्टिविस्ट दादा झोड़े ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत से की है. उन्होंने इससे पूर्व 6 फरवरी को भी उन्हें पत्र भेज कर समस्त स्थिति से अवगत कराया था. 

सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान और पालन नहीं करती
उन्होंने यह भी कहा है कि यह सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का सम्मान और पालन नहीं करती है. इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने 4-10-2016 को, आरसी गुप्ता के मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने पेंशनरों के पक्ष में फैसला सुनाए गए फैसले से अवगत कराया और बताया कि लेकिन भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और केंद्र सरकार ने चार साल बाद भी आदेश को पूरी तरह से लागू नहीं किया है. इन चार वर्षों में, लगभग दो लाख वरिष्ठ पेंशनरों की मृत्यु उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुसार न्याय पाने के बिना हुई है और यह संख्या हर दिन बढ़ रही है. लेकिन क्रूर केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लागू करने के लिए असंवेदनशीता की हद तक अनिच्छुक है.

दादा झोड़े ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1-04-2019 को पेंशनरों के पक्ष में एक और फैसला दिया, लेकिन केंद्र सरकार उस फैसले को भी स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. देश के लोगों को सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलता है, लेकिन सरकार इसकी अनुमति वृद्ध पेंशनरों के लिए नहीं दे रही. स्पष्ट है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं मानती. उन्होंने संघ प्रमुख से कहा है कि यह कहना दुखद है कि देश में ऐसी विकट स्थिति पैदा हुई है और यह सब केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद हुआ है.

बुजुर्ग सेवानिवृत्त पेंशनरों को धोखा दिया
झोड़े ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने, न केवल देश के बुजुर्ग सेवानिवृत्त पेंशनरों को धोखा दिया है, बल्कि उनके साथ एक बड़ा जोखिम भी लिया है और अब एक बहुत ही शातिराना रवैया दिखा रहे हैं.

संघ प्रमुख को दादा झोड़े ने पृष्ठभूमि की फिर से जानकारी दी है. उन्होंने बताया है कि 2014 से पहले, जब भारतीय जनता पार्टी केंद्र में विपक्ष में थी, इसके नेताओं ने वयोवृद्ध पेंशनरों के लिए पेंशन वृद्धि के लिए आंदोलन किया था. उनके द्वारा राज्यसभा में दायर एक याचिका दायर कर समिति गतह्ण की मांग की गई. केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तत्कालीन राज्यसभा सांसद भगत सिंह कोशियारी (फिलहाल माननीय राज्यपाल, महाराष्ट्र शासन) समिति का गठनकिया. कोशियारी समिति ने जो सिफारिशें दीं, उन्हें लागू करने की मांग भी भाजपा के तत्कालीन सांसद प्रकाश जावड़ेकर ने उठाई. लेकिन जब 2014 में लोकसभा चुनाव घोषित हुए और सिफारिश लागू नहीं हुई तो चुनाव अभियान में, भाजपा नेताओं (अब केंद्रीय मंत्रीगण) ने वादा किया कि अगर हम निर्वाचित हुए और केंद्र में सत्ता में आए तो हम 90 दिनों के भीतर भगत सिंह कोशियारी समिति की सिफारिशों को लागू करेंगे. इसी भरोसे के साथ अनेक सेवानिवृत्त पेंशनरों ने भाजपा नेताओं के लिए प्रचार किया और वोट दिलाए. परिणाम स्वरूप भारतीय जनता पार्टी के नेता चुने गए और इस पार्टी की सरकार केंद्र में सत्ता में आई. 

सत्ता में आने के बाद किए गए वादों को पूरा करने तो दूर, भाजपा की सरकार ने 1-09-2014 से ईपीएस 95 रिटायरमेंट एक्ट में कई श्रम-विरोधी परिवर्तन किए और पूर्ण वेतन रियायत को समाप्त कर दिया और देश के बुजुर्ग सेवानिवृत्त पेंशनरों को एक बड़ा धोखा दिया. 

सेवानिवृत्त पेंशनर्स 2014 के नए ईपीएस 95 अधिनियम के खिलाफ अदालत में गए. केरल उच्च न्यायालय ने इसे अवैध घोषित करते हुए बदलाव को रद्द कर दिया. 12-10-2018 को सेवानिवृत्त पेंशनरों के पक्ष में इस फैसले को चुनौती देते हुए भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की. उच्चतम न्यायालय 1-04-2019 को अपील को खारिज करते हुए, केरल उच्च न्यायालय ने निर्णय को बरकरार रखा. साथ ही 1-09-2014 से कानून में किए गए परिवर्तनों को अवैध ठहराया और सेवानिवृत्त पेंशनरों के पक्ष में फिर फैसला सुनाया. 

लेकिन केंद्र सरकार और ईपीएफओ दोनों ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने के लिए तैयार नहीं हैं. केंद्र ने साफ कर दिया है कि वह बुजुर्ग सेवानिवृत्त पेंशनरों को न्याय देने के लिए तैयार नहीं है. भले ही उन्होंने कानून को किनारे रख अन्यायपूर्ण बदलाव किए, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने बदलावों को अवैध घोषित कर दिया है. 

झोड़े ने बताया है कि केंद्र सरकार खुद बुजुर्ग गरीब पेंशनरों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विभिन्न याचिकाएं दायर कर रही है, बुजुर्ग सेवानिवृत्त लोगों को न्याय नहीं दिलाने और बुजुर्गों को उनकी सही पेंशन से वंचित करने की पूरी कोशिश कर रही है. यह सब भारतीय जनता पार्टी सरकार के बुरे रवैये और कर्मचारी विरोधी नीति के कारण हो रहा है. केंद्र सरकार खुद देश के बुजुर्गों के रिटायर होने और उन्हें दुश्मनों की तरह मानने की दुर्दशा को बढ़ा रही है. यह बहुत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है.

झोड़े ने संघ प्रमुख को संक्षेप में सरकार और भाजपा नेताओं के रवैये से अवगत कराते हुए कहा है कि चूंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारतीय जनता पार्टी का मूल संगठन है, केंद्र सरकार में भाजपा के अधिकांश उच्च पदस्थ पदाधिकारी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ही देन हैं. ऐसे में इस नेता से वरिष्ठ नागरिकों को धोखा देने, धमकी देने और मजदूर विरोधी की भूमिका निभाने की उम्मीद नहीं थी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को भी कभी उनसे ऐसी उम्मीद नहीं रही होगी. लेकिन दुर्भाग्य से केंद्र सरकार में भाजपा के नेता और वैकल्पिक रूप से केंद्र सरकार बहुत ही  दुष्ट रवैया दिखा रहे हैं. 

झोड़े डॉ. भागवत से देश के लाखों बुजुर्ग गरीब सेवानिवृत्त लोगों और उनके जीवन के अंतिम दिनों की दुर्दशा पर ध्यान देने और सहानुभूतिपूर्वक विचार का निवेदन किया है. उन्होंने संघ प्रमुख से सेवानिवृत वृद्ध पेंशनरों के जीवन के अंतिम पहर को सुखी बनाने में अपनी भूमिका निभाने का निवेदन किया है. 

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