ओबीसी आरक्षण : महाराष्ट्र में चुनाव प्रक्रिया शुरू करने का आदेश

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बनठिया आयोग के 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश पर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले की प्रतीक्षा

नई दिल्ली : ओबीसी आरक्षण से महाराष्ट्र में स्थानीय स्वराज संस्था चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और संबंधित राज्य प्राधिकरणों को अहम आदेश दिया है. कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि स्थानीय निकायों के संबंध में चुनाव प्रक्रिया तुरंत शुरू हो और 4 मई के आदेश के आधार पर इसे आगे बढ़ाया जाए. इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को 2 सप्ताह के अंदर चुनावी अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, “हम चाहते हैं कि चुनाव हो इसे अनिश्चित काल के लिए इस तरह टाला नहीं जा सकता.” इस आदेश से राज्य के 17 जिलों की 92 नगर परिषदों और चार नगर पंचायतों में चुनाव कराने का मार्ग प्रशस्त हो गया है.

इससे पहले महाराष्ट्र में निकाय चुनाव में पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए सीटों के रिजर्वेशन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी. पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि, जहां-जहां चुनाव को लेकर अधिसूचना जारी हो गई है वहां निर्वाचन प्रक्रिया जारी रहेगी लेकिन नए नोटिफिकेशन अगले आदेश तक स्थगित रहेंगे.

बनठिया आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक ही आगे चुनाव के आदेश दिए गए हैं. साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया है कि चुनाव कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और चुनाव बनठिया आयोग की सिफारिश के अनुसार ही कराए जाएं. चुनाव बनठिया आयोग के अनुसार होना चाहिए, यह कहकर कोर्ट को गुमराह न करें. कोर्ट ने साफ तौर पर आदेश दिया कि चुनाव समय पर हो.

प्रदेश के स्थानीय स्वशासी निकायों में ओबीसी समुदाय के राजनीतिक आरक्षण की बहाली का मार्ग प्रशस्त हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बनठिया आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए ओबीसी आरक्षण के साथ स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की मंजूरी दे दी है. इससे राज्य में ओबीसी समुदाय को बड़ी राहत मिली है. पिछले सप्ताह निलंबित किए गए 17 जिलों की 92 नगर परिषदों और चार नगर पंचायतों में ओबीसी आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है.

महाविकास अघाड़ी सरकार के दौरान कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण पर रोक लगा दी थी. उसके बाद ठाकरे सरकार ने इस आरक्षण को बहाल करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी थी. हालांकि, वे इसमें सफल नहीं हुए. हालांकि, एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस सरकार के चंद दिनों के भीतर ही सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकायों में ओबीसी आरक्षण को हरी झंडी दे दी है.

राज्य में ओबीसी की आबादी 37 प्रतिशत है. बनठिया आयोग ने उनके लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश की है. चूंकि पूर्व मुख्य सचिव जयंत कुमार बनठिया आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार करने के बाद ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण को अदालत स्वीकार करेगी या नहीं, इस मुद्दे पर यह एक महत्वपूर्ण सुनवाई होगी, सभी की निगाहें अदालत के फैसले पर टिकी हैं. इस बीच, बनठिया आयोग की रिपोर्ट की स्वीकृति ने इन चुनावों का मार्ग प्रशस्त कर दिया है.

नागपुर भाजपा कार्यालय के सामने उल्लास कार्यक्रम आयोजित

अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण के साथ स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव का सुप्रीम कोर्ट द्वारा अगले दो हफ्ते में चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के आदेश देने पर गुरुवार, 21 जुलाई को सुबह में 9.30 नागपुर भाजपा  कार्यालय  के समक्ष उल्लास कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है –

इसलिए भाजपा अन्य पिछड़ा वर्ग मोर्चा के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से भारी संख्या में शामिल रहने की अपील भाजपा अन्य पिछड़ा वर्ग मार्च नागपुर महानगर के अध्यक्ष रमेश चोपड़े ने की है.

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