कर्मचारी पेंशन योजना में बढ़ोतरी से सरकार ने झाड़ा पल्ला

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कर्मचारी पेंशन

ईपीएस 95 पेंशनरों के बदले “पीएम श्रम योगी मानधन योजना” पर जोर

नई दिल्ली : सरकार ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के अंतर्गत पेंशन बढ़ाने अथवा उसे मूल्य सूचकांक से जोड़ने का कोई इरादा नहीं रखती. उसने संसद को लिखित रूप से बता दिया है कि ईपीएस 95 पेंशन को मुद्रास्फीति सूचकांक से जोड़ने के लिए वह तैयार नहीं है. साथ ही इस बात का संकेत देने में वह विफल रही कि वह विभिन्न सिफारिशों और मांगों के अनुरूप पेंशन राशि में बढ़ोतरी करने को तैयार है.

केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने पिछले बुधवार, 10 मार्च को संसद को सूचित किया है. उसने कहा कि इसके लिए गठित विशेषज्ञ समिति ऐसा करने की सिफारिश नहीं की है.

ईपीएस 1995 पूर्ण मूल्यांकन मात्र एक झांसा
जब कि शुरू में ही भांप लिया गया था कि सरकार द्वारा गठित यह समिति मूल रूप से ईपीएफओ कोष में कर्मचारियों के अनक्लेम्ड जमा लाखों करोड़ रुपए का उपयोग “प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना” (पीएम-एसवाईएम) में करने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए ही की गई थी. हालांकि मंत्रालय ने संसद को बताया कि कर्मचारी पेंशन योजना ईपीएस 95 पेंशनरों की मांगों पर विचार करने के लिए सरकार ने ईपीएस 1995 के पूर्ण मूल्यांकन और समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया था. लेकिन यह ईपीएस 1995 पूर्ण मूल्यांकन मात्र एक झांसा साबित हुई. 

श्रम मंत्रालय की ओर से लिखित जवाब में संसद को बताया गया कि “समिति ने (कर्मचारी पेंशन योजना) ईपीएस 1995 के तहत मासिक पेंशन को कॉस्ट ऑफ़-लिविंग इंडेक्स के साथ जोड़ने की सिफारिश नहीं की, क्योंकि एक्वैरियम मूल्यांकन के अनुसार ईपीएस 1995 को मूल्य सूचकांक, डीए (महंगाई भत्ता) से जोड़ने से राहत पेंशन फंड के वित्तीय स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करेगी.”

मंत्रालय ने हालांकि यह जानकारी दी कि ईपीएस पेंशनरों को मूल न्यूनतम पेंशन 1,000 प्रति माह से 3,000 तक बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत रूप से और सामूहिक रूप से आवेदन प्राप्त किए हैं. लेकिन यह नहीं बताया कि वह इसे मानने को तैयार भी है या नहीं.

मंत्रालय ने एक लिखित बयान में कहा, “कोशियारी समिति की सिफारिशों के संदर्भ में ईपीएस 1995 के तहत न्यूनतम पेंशन में वृद्धि के लिए व्यक्तिगत पेंशनरों के साथ-साथ पेंशनर्स संघों से भी आवेदन प्राप्त किए गए हैं. सरकार ने पहली बार, 1 सितंबर 2014 से ईपीएस 1995 के तहत पेंशनरों को प्रति माह 1,000 की न्यूनतम पेंशन प्रदान करना शुरू किया, जो कि 1.16% के बजटीय समर्थन के अलावा व्यापक मांगों को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा सदस्य की मजदूरी पर अतिरिक्त बजटीय सहायता प्रदान करता है.” हालांकि, मंत्रालय ने यह नहीं बताया कि यह न्यूनतम पेंशन को बढ़ाने वाला है या नहीं.

सभी कर्मचारी के भविष्य निधि ग्राहक पेंशन कॉर्पस में योगदान करते हैं, लेकिन सरकार प्रति माह ₹ 15,000 से कम वेतन पाने वालों को प्रोत्साहन (1.16% अतिरिक्त वेतन) देती है. ईपीएस कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) का हिस्सा है. ईपीएफ कटौती के 12% नियोक्ता के हिस्से का हर महीने 8.33% पेंशन कोष में जाता है.

सरकार अनौपचारिक श्रमिकों के लिए 2019 में प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (पीएम-एसवाईएम) योजना शुरू करने की तैयारी कर रही है. लेकिन ईपीएफओ के तहत ₹3,000 से अधिक कम से कम ₹7,500 पेंशन की मांग के बारे में कुछ भी कहने से बची.

जबकि पीएम-एसवाईएम 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद कम से कम ₹ 3,000 की मासिक पेंशन का आश्वासन देता है.

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