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धनबाद

धनबाद के जज का हत्यारा समेत तीन गिरफ्तार

*डी.एस. सिन्हा/वरुण कुमार- धनबाद/रांची (झारखंड) : मॉर्निंग वॉक पर निकले जिला व सत्र न्यायाधीश-8 उत्तम आनंद की हत्या मामले में धनबाद पुलिस हरकत में आई और हत्या में शामिल ऑटो चालक और उसके सहयोगी लखन वर्मा और राहुल वर्मा को गिरिडीह से गिरफ्तार कर लिया है. ये दोनों जोड़ापोखर थाना क्षेत्र के डिगवाडीह 12 नंबर के रहने वाले हैं. इस दौरान पुलिस ने ऑटो को भी जब्त कर लिया है. घटना के CCTV की जांच में साफ-साफ नजर आ रहा है कि न्यायाधीश, रणधीर वर्मा चौक की ओर से हीरापुर सब स्टेशन की ओर आ रहे थे. वह सड़क के किनारे जॉगिंग कर रहे थे. उसी वक्त पीछे से आ रहा एक ऑटो बीच सड़क से हटकर किनारे न्यायाधीश की तरफ आया और पीछे से उन्हें टक्कर मार कर सीधा रास्ता पकड़ कर पुलिस लाइन की ओर भाग निकला. बता दें कि धनबाद के एडीजे उत्तम आनंद हर दिन की तरह बुधवार को भी मॉर्निंग वॉक पर निकले थे. रणधीर वर्मा चौक के पास पीछे से जा रहे ऑटो ने उन्हें टक्कर मार दी. इससे वह सड़क पर गिर पड़े. वहां से गुजर रहे लोगों ने आनन-फानन में उन्हें शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SNMMCH) पहुंचाया. जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. सुबह 7 बजे तक जब वह घर नहीं पहुंचे, तो उनके परिवार वालों ने खोज शुरू की. इसके बाद पता चला कि सड़क दुर्घटना के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उनकी मौत हो गई है. दुर्घटना की सूचना पर जिला के लगभग सभी न्यायिक पदाधिकारी अस्पताल पहुंचे. न्यायाधीश उत्तम आनंद ने 6 माह पूर्व ही धनबाद में योगदान दिया था. इससे पहले वह बोकारो जिला में पदस्थापित थे. झारखंड की राजधानी रांची से 'विदर्भ आपला' संवाददाता के अनुसार पुलिस मुख्यालय के प्रवक्ता ए.वी. होमकर ने कहा कि सिटी एसपी राम कुमार के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी गई है. वहीं, पूरी टीम को खुद धनबाद एसएसपी संजीव कुमार लीड कर रहे हैं, जबकि बोकारो रेंज डीआइजी कन्हैया मयूर पटेल धनबाद पहुंच घटना को लेकर चल रही जांच की बारीकी से मॉनिटरिंग कर रहे हैं. डीजीपी नीरज सिन्हा के निर्देश पर रांची से फोरेंसिक और सीआईडी टीम को जांच में सहयोग के लिए धनबाद भेजा गया है. तकनीकी साक्ष्य के लिए घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी का फुटेज पुलिस एकत्र कर रही है. इसके अलावा अन्य तकनीकी साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं. इधर, झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डॉ. रवि रंजन की पीठ ने मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए धनबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आज गुरुवार को ही कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है. वहीं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने आज (गुरुवार) सुबह इस चौंकाने वाली घटना को सुप्रीम कोर्ट के ध्यान में लाया है. उन्होंने इस घटनाक्रम की सीबीआई जांच की मांग की. भारत के मुख्य न्यायाधीश ने विकास सिंह को सूचित किया कि झारखंड हाईकोर्ट ने मामला को उठाया है. जज उत्तम आनंद के परिवार में सभी हैं वकील न्यायाधीश उत्तम आनंद के पिता अधिवक्ता सदानंद प्रसाद हजारीबाग शिवपुरी मुहल्ले में रहते हैं. उत्तम आनंद के...
अनाथ

अनाथ बच्चों के साथ खुशियां बांटीं सिंधी सेवा संगम ने 

नागपुर : विश्व सिंधी सेवा संगम के महाराष्ट्र प्रदेश की महिला टीम, नार्थ सेंट्रल महिला टीम और सेंट्रल नागपुर महिला टीम ने रविवार को उत्तर नागपुर के अनाथालय में जाकर वहां के अनाथ बच्चों को उपहार सामग्री भेंट कर उनमें खुशियां बांटीं. इस अवसर पर संगम के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष प्रताप मोटवानी भी उपस्थित थे.   अपने मां-बाप से बिछड़े बच्चों को संगम की महिलाओं के स्नेह और वातसल्य ने उन्हें अपने परिवार के बीच होने की अनुभूति कराई. अनाथ बच्चों की आंखें नम हो गईं और वे भाव विभोर नजर आए.  महाराष्ट्र महिला टीम की कार्यकारी अध्यक्ष श्रीमती साक्षी थारवानी ने इस कार्य को सफल कर गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व का दिन सार्थक बनाया. महिला टीम की कार्यकारी अध्यक्ष डॉ भाग्यश्री खेमचन्दानी, महासचिव सुनीता जेसवानी, सचिव विद्या बाखरू, अनिता राजपाल, खुशंक खेमचन्दानी ने सर्वप्रथम अनाथालय के संचालकों और बच्चों को विश्व सिंधी सेवा संगम की सामाजिक गतिविधियों से अवगत कराया.  इस पावन कार्य मे सेंट्रल नार्थ महिला टीम की अध्यक्ष वंदना वतियानी, सचिव प्रिया चंदवानी, सदस्य चाहत चुग, डॉ. दिशा वतियानी, डॉ सुनिधि नाहटा, डॉ. नंदिनी बोहरा, इंजीनियर प्रतीक बहरानी और सेंट्रल नागपुर की अध्यक्ष किरण तोतलानी, विधि ग्वालानी, दिशा पारवानी ने सम्मिलित होकर अनाथ बच्चों को भेंट सामग्री में टावेल, पानी की बॉटल, गिलास, बैट-बाल, केरम बोर्ड, बैडमिंटन इंडोर गेम, आउटडोर गेम्स, कम्पास बॉक्स, मिठाई, चॉकलेट, फ्रूट्स, स्नेक्स, बिस्किट, टी शर्ट, पिकल्स, वितरित किए.  तत्पश्चात सभी बच्चों को बहनों ने अपने हाथों से परोस खाना खिलाया. अंत में सभी बहनों ने वहाँ के समस्त परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण सुरक्षा का संदेश दिया. बच्चे इतना स्नेह और अपनापन पाकर बेहद आनंदित हुए.  अंत मे साक्षी थारवानी ने सभी का धन्यवाद किया. महारास्ट्र महिला टीम सेंट्रल नागपुर महिला टीम की अध्यक्ष किरण तोतलानी और उनकी टीम नार्थ सेंट्रल नागपुर महिला टीम की अध्यक्ष वंदना वतियानी और उनकी टीम का अत्याधिक सहयोग मिला. बहनों ने इस मानवीय कार्य से आत्मिक सुख की अनुभूति महसूस की.   बहनों ने अनाथ बच्चों के लिए कार्य करने में मार्गदर्शन करने के लिए संगम के प्रदेश अध्यक्ष मोटवानी जी का भी अभिनंदन किया. उन्होंने बहनों के इस सद्कार्य के लिए उनकी भूरी-भूरी प्रशंसा की. 
कारगिल

कारगिल विजय दिवस समारोह में वीरमाता, वीरपत्नी का सम्मान

सैनिकों और शहीदों की वीरता की अमर महागाथा है कारगिल युद्ध : कलेक्टर विमला आर. नागपुर : कारगिल की लड़ाई में, भारतीय सैनिकों ने देश की सीमा की रक्षा के लिए एक बड़ी लड़ाई लड़ी, इस युद्ध में हमारे वीर सैनिक सीमा की रक्षा में शहीद हुए. इन शहीदों ने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी. 22 साल पुराना कारगिल युद्ध सैनिकों और शहीदों की वीरता की अमर महागाथा है. इस मिशन की जीत वीर सैनिकों के पराक्रम के कारण हुई थी. कारगिल युद्ध वीरता की कहानी है. उन शहीदों के परिजनों की हम हर संभव सहायता करेंगे. यह बात नागपुर की जिला कलेक्टर विमला आर. ने यहां सोमवार, 26 जुलाई को सैनिक बाल छात्रावास में आयोजित 'कारगिल विजय दिवस' समारोह में कहीं. कार्यक्रम में जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर डॉ. शिल्पा खड़पकर, सहायक जिला सैनिक कल्याण अधिकारी सत्येंद्र कुमार चावरे, माणिक इंगले आदि उपस्थित थे. इस अवसर पर वीरमाता की मीरा रामेशराव सताई और वीरपत्नी प्रमिला नरेश बडोले का कलेक्टर विमला आर. ने शॉल, श्रीफल और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया. कार्यक्रम की शुरुआत में कलेक्टर विमला आर. ने शहीद भूषण कुमार सताई और शहीद नरेश बडोले की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. जिला सैनिक कल्याण अधिकारी श्रीमती खड़पकर ने अपने परिचयात्मक भाषण में बताया कि कारगिल युद्ध 3 मई 1999 से 26 जुलाई 1999 तक चला. युद्ध 2 महीने, 3 सप्ताह और 2 दिन तक चला. इस लड़ाई में हमारे करीब 527 सैनिक शहीद हुए और 1363 घायल हुए. हमारे लिए गर्व का विषय है कि इस युद्ध में नागपुर जिले के सैनिकों ने भी भाग लिया था। जिला कलेक्टर ने शहीदों के परिवारों का मनोबल बढ़ाया. उन्होंने कहा कि शहीदों को भुलाया नहीं जा सकेगा. उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि उनके परिवार को सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता दी जाएगी. सभी जरूरतमंद दिव्यांग रोजगार गारंटी योजना के जॉब कार्ड प्राप्त करें नागपुर : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को गांव में ही रोजगार प्रदान करती है. इस योजना के अंतर्गत सभी दिव्यांगों को भी जॉब कार्ड प्राप्त करना चाहिए. जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी योगेश कुंभेजकर ने यह बात कही. जिले में अब तक 2575 विकलांग हितग्राहियों को जॉब कार्ड जारी किए जा चुके हैं. जिसमें से 271 विकलांग व्यक्तियों को रोजगार प्रदान किया गया है. उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों को रोजगार के लिए जॉब कार्ड बनवाने की जरूरत है. इसके लिए वे अपने गांव के सरपंच, ग्राम सेवक और ग्राम रोजगार सेवक से संपर्क करें. जॉब कार्ड पंजीकृत करके रोजगार प्राप्त किया जा सकता है.
बैंक

वरिष्ठ नागरिक पेंशन संबंधी नागपुर पीठ का लैंडमार्क फैसला

एसबीआई, बेलापुर, नवी मंबई के विरुद्ध मुंबई हाई कोर्ट, नागपुर बेंच का महत्वपूर्ण निर्णय *_निर्णय आरक्षित करने की तिथि: 13 अगस्त, 2020_* *_निर्णय सुनाए जाने की तिथि: 20 अगस्त, 2020_* *_न्याय के अंश_*.... *_14. बैंक याचिकाकर्ता की तरह पेंशनभोगियों के खाते का ट्रस्टी है, और कानून की नजर में बैंक के रोजगार में कर्मचारियों के अलावा कर्मचारियों को देय पेंशन की पात्रता पर विवाद करने का कोई अधिकार नहीं है. ऐसे खाते से छेड़छाड़ करना और बिना किसी अधिकार के पेंशन की वसूली को प्रभावित करना, बैंक द्वारा याचिकाकर्ता के विश्वास का उल्लंघन है. हमें यह नहीं समझा जाना चाहिए कि जहां गणना में तकनीकी त्रुटि है, पात्रता के अलावा, अधिक भुगतान के परिणामस्वरूप प्रतिबद्ध है, बैंक इसे पुनर्प्राप्त नहीं कर सकता है। हम पहले ही मान चुके हैं कि यहां ऐसा कोई मामला नहीं बनता है.* *_16. इस फैसले से अलग होने से पहले, हमें बैंक को यह याद दिलाना होगा कि सेवानिवृत्ति पर कर्मचारियों को देय पेंशन भारत के संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत एक 'संपत्ति' है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आजीविका का मौलिक अधिकार है भारत की. वंचन, यहां तक कि इस राशि का एक हिस्सा, कानून के अनुसार और अधिकार के अलावा, स्वीकार नहीं किया जा सकता है. भारत के संविधान के अनुच्छेद 41 में राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों के भाग IV में वृद्धावस्था, बीमारी और अक्षमता के मामले में सार्वजनिक सहायता के अधिकार को मान्यता देने के लिए राज्य पर एक दायित्व बनाया गया है. अनुच्छेद 46 में राज्य को लोगों के कमजोर वर्गों के आर्थिक हितों को विशेष सावधानी से बढ़ावा देने की आवश्यकता है. संक्षेप में, राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के उपरोक्त प्रावधान राज्य पर उपयुक्त कानून बनाने, सार्वजनिक सहायता के अधिकार को मान्यता देने, आर्थिक हितों को बढ़ावा देने, वरिष्ठ नागरिकों के जीवन और संपत्ति की रक्षा करने के लिए एक दायित्व बनाते हैं, उनके साथ सम्मान और सम्मान के साथ पेश आना और उसका व्यापक प्रचार करना. *_17. दुर्भाग्य से, बैंक को यह बताने का समय आ गया है कि बुढ़ापा एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिससे शरीर और दिमाग कमजोर हो जाता है. बढ़ती उम्र के साथ उत्पादकता, काम करने की क्षमता और गतिशीलता कम हो जाती है या पंगु हो जाती है. भारतीय समाज में पारंपरिक मानदंड, मूल्य और संस्कृति वरिष्ठ नागरिकों के साथ सम्मान, सम्मान के साथ व्यवहार करने और उन्हें सुरक्षा, देखभाल और सहायता प्रदान करने पर जोर देने की मांग करती है. यह वरिष्ठ नागरिकों के मानवाधिकार का हिस्सा बन जाता है. *_. वरिष्ठ नागरिक वे व्यक्ति होते हैं, जिन्होंने सेवा में रहते हुए सामान्य रूप से एक राष्ट्र और विशेष रूप से समाज या समुदाय के निर्माण की जिम्मेदारी उठाई थी. जीवन और कार्य में उनके अनुभव का उपयोग करते हुए, युवा व्यक्तियों के मजबूत कंधों का निर्माण किया जाता है, ताकि वे कार्यालय छोड़ते समय उन पर जिम्मेदारी डाल सकें. बैंक अधिकारियों को यह महसूस करना चाहिए कि पेंशन या सेवानिवृत्ति के बाद के लाभों के लिए लड़ने के लिए कल सेवानिवृत्ति पर उनकी बारी हो सकती है. विचार प्रक्रिया,- इसलिए अपनाए...
जयदेव

जयदेव केसरी डीआईजी सीआरपीएफ के पद पर पदोन्नत

नई दिल्ली : लगभग 28 वर्षों की विशिष्ट सेवा के बाद, वर्तमान में कमांडेंट (प्रशिक्षण) के रूप में सेवारत जयदेव केसरी को डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) के पद पर पदोन्नत और सम्मानित किया गया. डीजी सीआरपीएफ कुलदीप सिंह, आईपीएस (IPS) ने नई दिल्ली में सीआरपीएफ मुख्यालय में आयोजित एक पाइपिंग समारोह में उन्हें यह सम्मान दिया.   मूल रूप से बलिया (यूपी) में जन्मे और मिलिट्री स्कूल चैल शिमला (एचपी) के पूर्व छात्र; जयदेव केसरी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एमएससी (जूलॉजी) पूरा करने के बाद 15 जुलाई, 1993 को सीआरपीएफ में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया था. जयदेव केसरी वर्तमान में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में तनाव प्रबंधन पर पीएच.डी कर रहे हैं' अपनी लंबी और शानदार सेवा के दौरान, केसरी ने त्रिपुरा, पंजाब, असम, झारखंड, छत्तीसगढ़ और जम्मू-कश्मीर जैसे कुछ सबसे अशांत और अस्थिर उग्रवाद प्रवण क्षेत्रों में सेवा की और अपनी योग्यता साबित की. करियर की कुछ उत्कृष्ट उपलब्धियां - त्रिपुरा में कार्यकाल के दौरान उन्होंने 15 से अधिक कट्टर आतंकवादियों के आत्मसमर्पण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. - 5वीं बटालियन सीआरपीएफ क्यूएमएस और ईएमएस के दोहरे आईएसओ प्रमाणन के साथ एकमात्र बटालियन बन गई. - डीजी असम पुलिस ने ऑपरेशन उपलब्धि के लिए अधिकारी को प्रशस्ति प्रमाण पत्र से सम्मानित किया. - उनकी कमान में 5वीं बटालियन ने सर्वश्रेष्ठ प्रशासित बटालियन ट्रॉफी जीती - उन्होंने कोसोवो में संयुक्त राष्ट्र मिशन में भी भाग लिया, जहाँ उन्हें संयुक्त राष्ट्र शांति पदक से सम्मानित किया गया. - अधिकारी को आंतरिक सुरक्षा पदक, स्टार के साथ डीजी की गोल्डन डिस्क से सम्मानित किया गया है और लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है. आध्यात्मिक मनोवृत्ति और विचारधारा से सुसज्जित डीआईजी जयदेव केसरी ने प्रशिक्षण में एक लंबा कार्यकाल पूरा किया है - जो उनकी खूबी है. 53 साल की उम्र में भी वह अपने को फिट रखने में विश्वास रखते हैं और एक उत्साही मैराथन धावक हैं.
दलहन भंडारण

दलहन भंडारण : कारोबारियों को बड़ी राहत दी केंद्र सरकार ने

किसानों को मिलने लगे थे कम भाव, व्यापारियों ने घटा दी थी खरीदी नागपुर : दी होलसेल ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन के सचिव प्रताप मोटवानी ने केंद्र सरकार द्वारा दलहन भंडारण को सीमित करने वाले आदेश को वापस लेने पर खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से व्यापारियों समेत किसानों ने भी राहत महसूस की है. मंडियां बंद कर विरोध दर्शाया था व्यापारियों ने व्यापारिक संगठन दी होलसेल ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन मध्य भारत का सबसे पुराना 80 वर्ष का है. इस संगठन से मध्य भारत के हजारों की संख्या में व्यापारी जुड़े हुए हैं. इसके सचिव मोटवानी ने बताया कि करीब डेढ़ माह पूर्व केंद्र सरकार द्वारा दलहनों पर स्टॉक सीमा लागू करने के आदेश से राष्ट्रीय स्तर पर धान्य मंडियों, किसानों और व्यापारियों द्वारा तीव्र विरोध दर्शाया गया. कई स्थानों पर मंडिया इसके विरोध में बंद भी की गईं. दाल का भाव काबू में आते ही थोक कारोबारियों को मिली बड़ी राहत सरकारी सूत्रों ने बताया कि प्रमुख दालों की कीमतों में आई गिरावट को देखते हुए सरकार ने थोक कारोबारियों को राहत दी है. अब 31 अक्टूबर तक स्टाक की सीमा सिर्फ अरहर, उड़द, चना और मसूर दाल पर लागू होगी. थोक व्यापारियों के लिए स्टॉक की सीमा 500 टन होगी, लेकिन कोई भी एक दाल 200 टन से अधिक नहीं रख सकेंगे. चिल्लर विक्रेता पांच टन से ज्यादा का भंडारण नहीं कर सकेंगे. मिलों के लिए स्टॉक की सीमा छह माह का उत्पादन या 50 फीसद की स्थापित क्षमता (जो भी अधिक हो) रहेगी.  दालों की महंगाई पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने दो जून को थोक, चिल्लर व्यापारियों तथा मिलों के लिए अक्टूबर तक मूंग को छोड़कर दलहन भंडारण सीमा निर्धारित की थी. भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने सोमवार, 19 जुलाई को नया आदेश जारी कर दलहन के आयातकों के लिए भंडारण की सीमा खत्म कर दी है. मोटवानी ने भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी और पीयूष गोयल को ट्वीट कर किसानों और देश के व्यापार के हित में स्टॉक सीमा सीमित करने का आदेश रद्द करने की मांग की थी. अंततः केंद्र सरकार ने व्यापारियों और किसानों की परेशानी सूनी और 19 जुलाई को अध्यादेश में सुधार कर दलहन भंडारण लिमिट में बढ़ोतरी कर राहत प्रदान की. स्टॉक सीमा आगामी अक्टूबर तक के लिए सरकार के नए आदेश से अब 19 जुलाई से होलसेल व्यापारी को 2000 से बढ़ा कर 5000 मैट्रिक टन, चिल्लर व्यापारी के लिए 5 मैट्रिक टन और दाल मिल के लिए छह माह का उत्पादन अथवा वार्षिक स्थापित क्षमता का 50 फीसदी, जो भी अधिक हो रख सकते हैं. यह स्टॉक सीमा आगामी अक्टूबर, 2021 तक लागू रहेगी. दलहनों के भाव 200-250 रुपए क्विंटल बढ़ी मोटवानी ने बताया कि सरकार का निर्णय आते ही किसानों और व्यापारियों में खुशी की लहर फैल गई. जो खरीददारी स्टॉक सीमा लगाने से बंद हो गई थी, वह शुरू होने से दलहनों के भाव 200-250 रुपए क्विंटल बढ़ी. इससे अब किसानों को फसलों की ज्यादा कीमत मिल सकेगी. समर्थन मूल्य से घटने से दलहनों की कीमत भी घट गई थी. अब किसानों...
परमबीर

परमबीर सिंह के खिलाफ जबरन वसूली का मामला दर्ज

मुंबई : आईपीएस अफसर और मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गए हैं. राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के विरुद्ध जाकर राज्य सरकार से सीधे पंगा मोल ले लिया है. इससे उनकी मुश्किलें और बढ़ती जा रही हैं. मुंबई पुलिस ने परमबीर सिंह के खिलाफ जबरन वसूली का मामला दर्ज कर दिया है. यह मामला मुंबई के मेरिन ड्राइव पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ है.  A case of extortion registered against former Mumbai Police Commissioner Param Bir Singh (in file pic), at Marine Drive Police Station. Complainant is a businessman. FIR names a total of 8 people,incl 6 Police personnel. Two civilians arrested in this matter so far: Mumbai Police pic.twitter.com/2tHMbIB7Wg— ANI (@ANI) July 22, 2021 जबरन वसूली के इस मामले में मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्‍नर के साथ 8 और लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है. मेरिन ड्राइव पुलिस स्टेशन में जिन लोगों पर केस दर्ज हुआ है, उनमें 6 पुलिसकर्मी और 2 आम नागरिक हैं. परमबीर सिंह के साथ मुंबई पुलिस के डीसीपी अकबर पठान पर भी यह मामला दायर किया गया है. शिकायतकर्ता श्यामसुंदर राधेश्याम अग्रवाल ने शिकायत दर्ज कराई है कि परमबीर सिंह, डीसीपी पठान और छह अन्य ने उन्हें फर्जी मामले में फंसाने के बाद मामला वापस लेने के लिए 15 करोड़ रुपए मांगे. मुंबई पुलिस के कमिश्नर रहे परमबीर सिंह के ऊपर शिकंजा कसता जा रहा है. एक ओर जहां महाराष्ट्र सरकार ने एंटी करप्शन ब्यूरो यानी एसीबी को आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह के खिलाफ ओपन जांच के आदेश दे दिए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन में परमबीर सिंह के खिलाफ रंगदारी का मामला दर्ज किया गया है. शिकायतकर्ता एक व्यवसायी है. एफआईआर में कुल 8 लोगों के नाम हैं, जिनमें 6 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. मुंबई पुलिस ने इस मामले में अब तक दो नागरिकों को भी गिरफ्तार किया है. ज्ञातव्य है कि परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखकर गृह मंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपए वसूली करने का आरोप लगाया था. परमबीर सिंह ने खत में लिखा था कि गृह मंत्री ने सब इन्स्पेक्टर सचिन वाजे से कहा था कि उन्हें हर महीने सौ करोड़ रुपए जुटाने हैं. इस टारगेट को हासिल करने के लिए गृह मंत्री ने वाजे से कहा था कि मुंबई में मौजूद 1750 बार और रेस्टोरेंट से अगर 2-3 लाख भी मिल जाएं तो महीने में चालीस-पचास करोड़ रुपए जुटाए जा सकते हैं. इस चिट्ठी ने महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल ला दिया था. इससे पूर्व परमबीर सिंह को मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटा दिया गया था.
कैंडिडेट

पीएम पद के ‘कांग्रेस कैंडिडेट’ बन राहुल को दी चुनौती

स्वयंभू कांग्रेस कैंडिडेट ने बिहार, झारखंड में लगाए अपना पोस्टर *सीमा सिन्हा- पटना (बिहार) : कांग्रेस में राहुल गांधी की पीएम उम्मीदवारी की चर्चा अभी शुरू भी नहीं कि बिहार के भागलपुर से एक कांग्रेस नेता ने खुद को पीएम कैंडिडेट घोषित कर दिया है. भागलपुर के एक कांग्रेस नेता ने अपने आलाकमान राहुल गांधी को ही चुनौती दे दी है. दरअसल, भागलपुर के एक कांग्रेस नेता संजीव कुमार सिंह ने भागलपुर में कई जगह होर्डिंग लगाकर खुद को भारत का अगला प्रधानमंत्री कैंडिडेट घोषित कर दिया है. पोस्टर लगाकर संजीव सिंह ने लोगों से अपील की है कि उन्हें प्रधानमंत्री बनाएं और देशवासियों में खुशहाली लाएं. उन्होंने खुद को कांग्रेस का राष्ट्रीय नेता भी बताया है. राहुल गांधी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं. लोकसभा चुनाव 2019 में मिली हार के बाद कांग्रेस में उनके नेतृत्व को लेकर सवाल उठे, अब पार्टी अपनी पैठ जमाने के लिए केंद्र सरकार को घेरने के लिए आंदोलन और विरोध प्रदर्शन भी कर रही है. इस बीच बिहार के भागलपुर से एक कांग्रेस नेता ने खुद को पीएम कैंडिडेट घोषित कर दिया है. 'सोनिया गांधी ने दी सहमति' संजीव कुमार सिंह ने बताया कि वे उच्चतम न्यायालय में अधिवक्ता हैं. बाबू भुमेश्वर सिंह के पौत्र और बाबू रघुनाथ सिंह के पुत्र हैं. यह भी बताया है कि उनके दादा और पिता दोनों कांग्रेसी रहे हैं. इंदिरा गांधी के साथ उनके दादा और पिता ने काम किया है. संजीव कुमार सिंह ने खुद को यूपी, बिहार और झारखंड का कांग्रेस पर्यवेक्षक प्रभारी बताया. उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी कांग्रेस के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे और वे प्रधानमंत्री कैंडिडेट बनाए जाएंगे. उनका दावा है कि इस बात की सहमति उनको सोनिया गांधी ने दे दी है।' संजीव कुमार सिंह ने कहा कि वे लगातार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए विभिन्‍न राज्‍यों में काम कर रहे हैं. 31 साल से कांग्रेस में हैं। 1990 में राजीव गांधी की पटना रैली के दौरान वे युवा कांग्रेस में थे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की कमान किसी गांधी परिवार के सदस्यों के पास ही रहेगा. इसलिए राहुल गांधी फ‍िर से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे. देशभर में लगाएंगे पोस्‍टर्स संजीव कुमार सिंह ने कहा कि अभी बिहार और झारखंड में पोस्टर लगाए गए हैं. उत्तर प्रदेश में लगाए जा रहे हैं. यह पोस्टर देशभर में लगाए जाएंगे. ताकि लोगों को यह पता चले कि कांग्रेस का अगला प्रधानमंत्री कैंडिडेट कौन है. उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान वे कई राज्‍यों में काम कर चुके हैं. वहां के कार्यकर्ताओं का भी उन्हें समर्थन प्राप्त है. कांग्रेस विधायक दल नेता को पता नहीं- कौन हैं संजीव कुमार सिंह इस संबंध में कांग्रेस विधायक दल नेता सह भागलपुर के विधायक अजीत शर्मा ने कहा कि वे किसी संजीव कुमार सिंह को नहीं जानते. उनका उनसे कोई लेना-देना नहीं है. किसने पोस्टर लगाया, क्‍यों लगाया, मुझे नहीं पता. उनके नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी हैं.
आपदा

आपदा जोखिम पर स्नातक पाठ्यक्रम शुरू कराएगा गृह मंत्रालय 

विकास और मानकीकरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर की गई सात-सदस्यीय कार्य समूह की स्थापना नागपुर : केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) 'आपदा जोखिम न्यूनीकरण' पर स्नातक स्तर का पाठ्यक्रम/कोर्स (Graduate Level Curriculum on Disaster Risk Reduction Programme) तैयार कर रहा है. कोर्स के विकास और मानकीकरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक सात सदस्यीय कार्य समूह (Seven Member Task Force) का गठन किया है. यह जानकारी डी.आर.बी. सिंधु महाविद्यालय, नागपुर के रजिस्ट्रार नवीन अग्रवाल ने दी. अग्रवाल को भी पश्चिम भारत से इस कार्य समूह में शामिल किया गया है. अग्रवाल ने बताया कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर यह स्नातक स्तरीय कोर्स प्रधानमंत्री के 10 सूत्री एजेंडा का एजेंडा नंबर 6 के अंतर्गत उच्च शिक्षा की भूमिका पर केंद्रित है. उसी दृष्टिकोण से सभी विश्वविद्यालयों के लिए यह कोर्स तैयार किया जाने वाला है.   यूजीसी ने भी i) बम खतरा ii ) भूकंप iii) विस्फोट, iv) खतरनाक सामग्री फैलाव, v) कैंपस शूटिंग vi) आतंकवादी घटना vii) वित्तीय आपातकाल जैसी आपदा के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से सभी छात्रों के लिए आपदा प्रबंधन विषय पर अनिवार्य पाठ्यक्रम की अधिसूचना भी पहले ही जारी कर दिया है. यह अधिसूचना पत्र संख्या 24-1/2016 (सीपीपी-II) दिनांक 4 अक्टूबर, 2017 के माध्यम से जारी की गई है. इस पाठ्यक्रम में युवा पीढ़ी में ज्ञान, कौशल और क्षमता का निर्माण के लिए आपदा जोखिम में कमी करने के उपाय शामिल किए जाएंगे. अग्रवाल के अनुसार, कार्य समूह के सदस्यों को आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) पर अनिवार्य पेपर/पाठ्यक्रम के विकास और मानकीकरण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसे उच्च शिक्षा में स्नातक स्तर पर सभी संकायों (फैकल्टी) में पढ़ाया जाएगा. सदस्यों द्वारा कोर्स का मसविदा तैयार होने के बाद इसे देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों में अवलोकन और फीडबैक के लिए भेजा जाएगा. प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद अंतिम प्रारूप अनुमोदन के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भेजा जाएगा. उक्त सात सदस्यीय कार्य समूह में डॉ. सुभासिस भद्रा, प्राध्यापक और प्रमुख, सामाजिक कार्य विभाग, केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान (उत्तरी संभाग), डॉ. प्रतीश, केंद्रीय विश्वविद्यालय केरल (दक्षिण संभाग), डॉ. किरण जलेम, ग्रामीण विकास संस्थान और पंचायती राज, हैदराबाद (दक्षिण-मध्य संभाग), नवीन महेशकुमार अग्रवाल, रजिस्ट्रार, दादा रामचंद बाखरू सिंधु महाविद्यालय, नागपुर (पश्चिम संभाग), कोसिगीन लीशंगथेम, मणिपुर तकनीकी विश्वविद्यालय (उत्तर-पूर्व संभाग), डॉ धर्मवीर सिंह, सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइनफॉरमैटिक्स, सिम्बायोसिस इंटरनेशनल, पुणे (पश्चिम संभाग), डॉ. अमित सिन्हा, रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश (मध्य संभाग) को शामिल किया गया है. सिंधी हिंदी विद्या समिति के अध्यक्ष एच.आर. बाखरू, चेयरमैन डॉ. विंकी रूघवानी, महासचिव डॉ. आई.पी केसवानी, सचिव महाविद्यालयीन मामले नीरज बाखरू, डी.आर.बी. सिंधु महाविद्यालय के  कार्यकारी प्राचार्य डॉ. वी.एम. पेंडसे,  उप प्राचार्य डॉ. एस.वी. तेवानी, डॉ.ए.जी. थडानी और मनोज येनप्रेडीवार ने नवीन अग्रवाल को उनकी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बधाई दी है.
टाटानगर

टाटानगर-नागपुर पैसेंजर जल्द शुरू करेंगे

डीआरएम उप्पल ने दिया नाग विदर्भ चेंबर ऑफ कॉमर्स को आश्वासन नागपुर : टाटानगर-नागपुर पैसेंजर ट्रेन जल्द ही फिर से चलाने की कोशिश की जाएगी. व्यापारियों की सुविधा के लिए शालीमार एक्सप्रेस ट्रेन में चार वैगन पार्सल के लिए लगाए गए हैं, उनसे व्यापारी अपना माल भिजवा सकते हैं. अगर 4 वैगन में पार्सल को बेहतर प्रतिसाद मिला तो वह पुनः 0881/0882 पार्सल ट्रैन शुरू करने का आग्रह रेलवे जोन को करेंगे. यह आश्वासन दक्षिण पूर्व सेंट्रल रेलवे के नागपुर मंडल के डीआरएम मनिन्दर उप्पल ने नाग विदर्भ चेंबर ऑफ कॉमर्स को दिया.   चेंबर का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को डीआरएम उप्पल से मिल कर अपनी बातें रखीं और ज्ञापन सौंपा. प्रतिनिधि मंडल में चेम्बर के उपाध्यक्ष फारुख अकबानी, सहसचिव उमेश पटेल और चेम्बर की रेलवे कमिटी संयोजक और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के जेडआरयूसीसी सदस्य प्रताप मोटवानी सम्मिलित थे. सर्वप्रथम प्रतिनिधि मंडल ने डीआरएम का शाल, बुके और चेम्बर की पुस्तिका देकर स्वागत किया. तत्पश्चात मोटवानी ने फारुख भाई और उमेश भाई का परिचय उप्पल जी से कराया.   मोटवानी ने डीआरएम से टाटानगर-नागपुर पैसेंजर को अविलंब शुरू करने की मांग की और बताया कि इसे शुरू करने की यात्रियों और व्यापारियों की जबरदस्त मांग है. साथ ही उन्होंने 0881/82 पार्सल ट्रेन भी पुनः शुरू करने की मांग की. व्यापारियों को उस ट्रैन से झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, बिहार और बंगाल अपना माल भेजने और मंगाने में बेहद सुविधा होती थी. फारुख भाई अकबानी कलमना रेलवे गिट्टी यार्ड से रेलवे की जगह में सड़कों की दुर्दशा के बारे में अवगत कराया. उन्होंने बताया कि ट्रकों से गिट्टी उड़ने से अनेक दुर्घटनाए हो रही है. आस पड़ोस के घरों के खिड़की के कांच टूट रहे हैं.   उमेश भाई पटेल ने डीआरएम को चेम्बर में व्यापारियों के साथ मिलने का आमंत्रण दिया. सौहाद्रपूर्ण वातावरण में प्रतिनिधिमंडल  के साथ चर्चा में डीआरएम उप्पल ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि टाटानगर पैसेंजर अति शीघ्र शुरू करने के लिए वह हर संभव प्रयास करेंगे. साथ ही उन्होंने बताया कि शालीमार एक्सप्रेस ट्रेन में चार वैगन पार्सल के लिए लगाए गए हैं, उनसे व्यापारी अपना माल भिजवा सकते हैं. अगर 4 वैगन में पार्सल को बेहतर प्रतिसाद मिला तो वह पुनः 0881/082 पार्सल ट्रैन शुरू करने का आग्रह रेलवे जोन को करेंगे.    कलमना रेलवे गिट्टी यार्ड की सड़कों को तुरंत ठीक करने का उन्होंने आश्वासन दिया. कोरोना की स्थिति ठीक होने के बाद चेंबर के सदस्यों से मिलने का भी आश्वासन दिया. प्रताप मोटवानी ने डीआरएम द्वारा सभी समस्यायों के शीघ्र समाधान के लिए आश्वासन देने पर आभार माना. फारुख भाई अकबानी और उमेश पटेल ने सकारात्मक सहयोग हेतु उनका अभिनंदन किया.