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किसान

एक और कर्ज पीड़ित किसान ने आत्महत्या कर ली

नागपुर : नागपुर जिले के नरखेड़ तहसील स्थित मोगरा (टोलापार) गांव के एक किसान ने बुधवार को कुएं में कूद कर आत्महत्या कर ली. प्राप्त जानकारी के मुताबिक बैंक का कर्ज न चुकाने से वह परेशान था. 38 वर्षीय बापू देवीदास वालके नामक इस किसान की अचानक आत्महत्या करने की खबर से पूरे परिसर में शोक व्याप्त गया. वह अपने पीछे अपने वृद्ध माता-पिता को असहाय छोड़ गया. वह अविवाहित था. महाराष्ट्र में कर्ज पीड़ित छोटे किसानों की आत्महत्या की मामले बढ़ाते ही जा रहे हैं. वाल्के की आत्महत्या ने इस कड़ी में एक और किसान आत्महत्या जोड़ दिया है.  बताया गया कि वाल्के परिवार के पास डेढ़ एकड़ खेती है. उसने कृषि कार्य के लिए दो वर्ष पूर्व विजया बैंक की नरखेड़ शाखा से तीन लाख रुपए और अन्य स्रोतों से 1.5 लाख, कुल 4.5 लाख रुपए कर्ज लिया था. लगातार दो वर्षों से सूखे और अति वर्षा के कारण पूरे परिसर में फसलें नष्ट हुई थीं. वाल्के भी फसल नष्ट हो जाने के कारण घोर आर्थिक संकट में था. न तो उसे कर्ज माफी का लाभ मिल पाया था और न ही सरकार की ओर से उसे कोई मदद ही मिल पाई थी. अगली फसल के लिए कोई आर्थिक मदद की उम्मीद भी नहीं थी. बहुत कठिनाई से वह अपना और अपने बूढ़े माता-पिता का लालन-पालन कर रहा था. ऊपर से कर्ज के बोझ ने उसे भीतर से तोड़ दिया था. बुधवार को उसके अपने खेत के कुएं में लोगों ने उसका शव तैरता देखा. उसकी आत्महत्या की खबर तुरंत पूरे गांव में फ़ैल गई. बेटे का शव देखते ही उसके वृद्ध माता-पिता का बुरा हाल था. पुलिस पाटिल ने इसकी सूचना तुरंत नरखेड़ पुलिस थाने को दी. थानेदार मलिकार्जुन इंगले अपने सहयोगी पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और शव का पंचनामा किया. उन्होंने किसान बापू वाल्के की आत्महत्या के मामले की जांच का दायित्व हवलदार प्रकाश खोपे और रूपेश राऊत को सौंपा है.
विश्व

विश्व के सिंधी समाज को एकजुट किया जाएगा : डॉ. मनवानी

विश्व सिंधी महासम्मेलन 3 से 5 जनवरी तक पुणे में होगा, नागपुर में विदर्भ स्तरीय सिंधी महासम्मेलन संपन्न     नागपुर : विश्व सिंधी सेवा संगम के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजू मनवानी ने यहां सिंधी समाज के महासम्मेलन में कहा कि विश्व के सम्पूर्ण सिंधी समाज को एकजुट कर समाज को मजबूत किया जाएगा. उन्होंने सिंधी बोली को बढ़ावा देने के लिए और सिंधी समाज के लोगों से आपस में अपनी भाषा में बात करने और बच्चों से सिंधी में बात करने की अपील की. उन्होंने सभी पंचायतों से सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का आह्वान किया. वे नागपुर में आयोजित विदर्भ स्तरीय सिंधी महासम्मेलन में बोल रहे थे.  पुणे में सिंधी समाज की गणमान्य हस्तियां शामिल होंगी   मनवानी ने बताया कि पूरे सिंधी समाज को एकजुट करने के लिए पूरे विश्व का सिंधी महासम्मेलन 3 से 5 जनवरी तक पुणे में आयोजित किया है. जिसमें पूरे देश-विदेश के सिंधी समाज की सभी गणमान्य हस्तियां शामिल होंगे और सिंधी समाज से जुड़ी सभी समस्याओं और राजनीतिक अधिकार के संदर्भ में विस्तृत चर्चा होंगी. 22 राज्यों और 28 अन्य देशों में विश्व सिंधी सेवा संगम का गठन   उन्होंने बताया कि देश के 22 राज्यों और 28 अन्य देशों में विश्व सिंधी सेवा संगम की टीम का गठन हो चुका है. इस अवसर पर विश्व सिंधी सेवा संगम के नागपुर जिले के अध्यक्ष प्रताप मोटवानी ने डॉ. मनवानी का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि डॉ. मनवानी पूरे सिंधी समाज की एकजुटता का जो बड़ा कार्य कर रहे हैं, उनका अभिनंदन है. मोटवानी ने उन्हें पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया. थैलेसीमिया और सिकलसेल के बारे में समाज को जागरूक करेंगे   महाराष्ट्र मेडिकल कौंसिल के उपाध्यक्ष और विश्व सिंधी सेवा संगम के इंटरनेशनल मेडिको चेयरमैन डॉ. विन्की रुघवानी ने कहा कि इस मंच के माध्यम से वे पूरे विश्व मे सिंधी समाज के समक्ष थैलेसीमिया और सिकलसेल के बारे में समाज को जागरूक करेंगे. उन्होंने सभी पंचायत के पदाधिकारियों से अपील की कि अपने बच्चों का थैलेसीमिया माइनर का टेस्ट करवा कर ही विवाह करवाएं. महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष नानकराम नेभवानी ने कहा कि आज पूरे विश्व में सिंधी समाज को एकजुट कर मजबूत करना हमारा उद्देश्य है. महामंडलेश्वर हंसराज महाराज उदासीन सहित सभी संतों का सम्मान महासम्मेलन के विशेष प्रमुख अतिथि विश्व में सिंधी समुदाय के एकमेव महामंडलेश्वर परमश्रद्धेय हंसराज महाराज उदासीन, विश्व सिंधु सेवा संगम के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष  मा. डॉ. राजू मनवानी जी, संत डॉ. संतोष नवलानी साहब जी, संत जशनलाल साहेब जी ने भी अपने विचार व्यक्त किए. सभी संतों का सम्मान इस अवसर पर किया गया.  सामाजिक-धार्मिक कुरीतियों पर प्रहार   समारोह में डॉ. साई संतोषकुमार महाराज ने अपनी वाणी से सभी को मंत्र मुग्ध किया. उन्होंने सिंधी समाज की सामाजिक और धार्मिक कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया. समाजसेवी तुलसी सेतिया ने देश में हो रहे धर्मांतरण पर गंभीर चिंता व्यक्त की. जेसाभाऊ मोटवानी ने प्रस्तावना की. जगदीशभाई मिहानी ने विचार रखे. हिंगणघाट के नगराध्यक्ष प्रेम बसंतानी ने भी अपने विचार रखे. महासम्मेलन में प्रमुख रूप से नानकराम नेभनानी जी (वरिष्ठ उपाध्यक्ष महा.), जैसाराम मोटवानी जी (अध्यक्ष विदर्भ), प्रताप मोटवानी जी (वरिष्ठ उपाध्यक्ष, विदर्भ...
कोलंबकर

कालिदास कोलंबकर महाराष्ट्र विधानसभा के प्रोटेम अध्यक्ष बने

मुंबई : राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी ने भाजपा विधायक कालिदास कोलंबकर को महाराष्ट्र विधानसभा के प्रोटेम अध्यक्ष पद पर नियुक्त कर दिया है. वे कल मंगलवार को विधानसभा में राज्य के नवनिर्वाचित विधायकों को विधानसभा की सदस्यता की शपथ दिलाएंगे. कोलंबकर वडाला क्षेत्र से भाजपा विधायक चुने गए हैं. 2014 के चुनाव में वे कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीत कर विधायक बने थे. पिछले चुनाव के पहले वे भाजपा में शामिल हुए थे.  प्रोटेम अध्यक्ष पद के लिए भारतीय जनता पार्टी ने तीन, एनसीपी ने एक और कांग्रेस ने दो नवनिर्वाचित विधायकों के नाम भेजे थे. विधानसभा सचिवालय को तीनों दलों से मिले इन नामों में से राजयपाल ने भाजपा के कालिदास कोलंबकर को प्रोटेम अध्यक्ष नियुक्त किया है. उन्होंने राजभवन में प्रोटेम अध्यक्ष पद की शपथ ली.  कोलंबकर कल विधानसभा में राज्य सभी दलों के चुने गए विधायकों को सदन की सदस्यता की शपथ दिलाएंगे. इससे पूर्व कल ही शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की संभावना है. उनके साथ एनसीपी के शपथ विधि के बाद ही संभवतः एनसीपी के जयंत पाटिल और कांग्रेस के बालासाहेब थोरात उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करेंगे.  कोलंबकर के साथ राधाकृष्ण विखे पाटिल, बबनराव पाचपुते, बालासाहेब थोरात, के.सी. पाडवी और दिलीप वलसे पाटिल के नाम विधानसभा सचिवालय को मिला था. सचिवालय ने ये सभी छह नाम राज्यपाल कार्यालय भेज दिया था. 
फड़णवीस

फड़णवीस को छोड़नी पड़ी गद्दी, उद्धव कल शपथ लेंगे

एनसीपी के जयंत पाटिल और कांग्रेस के बालासाहेब थोराट होंगे उप-मुख्यमंत्री   मुंबई : महाराष्ट्र में राजनीतिक घटनाक्रम में आज मंगलवार को तेजी से बदलाव आया. जिस जल्दबाजी में देवेंद्र फड़णवीस ने दोबारा महाराष्ट्र की सत्ता संभाली, उसी तरह आज अचानक उन्हें सत्ता छोड़ने पर बाध्य होना पड़ा. उन्होंने आज थोड़ी देर पहले राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया. इस बीच बड़ी खबर सामने आई है कि उद्धव ठाकरे कल मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हैं. एनसीपी के जयंत पाटिल और कांग्रेस के बालासाहेब थोराट उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. ठाकरे को आज शाम गठबंधन का नेता चुना जाएगा.   आज ही सुप्रीम कोर्ट ने 24 घंटे में फड़णवीस सरकार को फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था. कल होने वाले इस फ्लोर टेस्ट से पहले ही महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस को डिप्टी सीएम अजित पवार ने अपना इस्तीफा सौंप दिया. इसके बाद मुख्यमंत्री  फड़णवीस के लिए करने को कुछ भी नहीं बचा था. जिस अजित पवार के बूते उन्होंने दोबारा राज्य की बागडोर संभालने की पहल की थी, वही अजित पवार उनका साथ छोड़ गए.   प्राप्त जानकारी के अनुसार शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की महा विकास अघाड़ी की ओर से अपने विधायकों के समर्थन का पत्र राज्यपाल को दिया जाएगा, इसके आधार पर राज्यपाल उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद की और बाकी दोनों नेताओं को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिला सकते हैं. यह भी खबर है कि कल ही बुधवार को विधानसभा का सत्र बुलाकर "महा विकास अघाड़ी" से बहुमत साबित करने के लिए कहा जा सकता है. इस्तीफा देने से पूर्व देवेंद्र फड़णवीस ने कहा, "तीन अलग अलग विचारधारा की पार्टियां, जिनकी विचारधारा का आपस में कोई तालमेल नहीं. ये तीनों दल जब कॉमन मिनिमम प्रोग्राम तय कर रहे थे, तब उनके पास एक की कॉमन मिनिमम प्रोग्राम था- भाजपा को सत्ता से बाहर रखना." उन्होंने कहा कि अजित पवार के इस्तीफे के बाद हमारे पास बहुमत नहीं है. भाजपा ने पहले ही कहा कि हम किसी तरह की हॉर्स ट्रेडिंग नहीं करेंगे. हमने तय किया है कि हम भी इस्तीफा देंगे.
आरटीआई

आरटीआई : न्यायाधीन मामले की सूचना देने से नहीं कर सकते इंकार 

प्राथमिक शालाओं के अधिकारियों के लिए आरटीआई पर कार्यशाला में नवीन अग्रवाल के किया मार्गदर्शन   नागपुर : आरटीआई के अंतर्गत मांगी गई सूचना से संबंधित मामला न्यायालय में न्यायाधीन होने का कारण बताकर आवेदक को सूचना देने से इनकार नहीं किया जा सकता. ऐसे मामले में सूचना देने से इंकार तभी किया जा सकता है, जब "सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई), 2005" की धारा 8 (1) (ख) के अनुसार न्यायालय द्वारा किसी सूचना के प्रकट करने पर यदि स्पष्ट रूप से रोक लगाई गई हो अथवा जिसके प्रकट करने से न्यायालय की अवमानना होती हो केवल ऐसी सूचना देने से मना किया जा सकता है. 320 लोगों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया   यह जानकारी दादा रामचंद बाखरू सिंधु महाविद्यालय के रजिस्ट्रार एवं महाराष्ट्र शासन की शीर्ष प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्था यशदा, पुणे के अतिथि व्याख्याता नवीन महेशकुमार अग्रवाल ने दी.  वे प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थितों का आरटीआई पर मार्गदर्शन कर रहे थे. चार दिनों के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 320 लोगों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया. कार्यक्रम का आयोजन गोंदिया जिले  के कार्यालय एवं प्राथमिक शालाओं के राज्य लोक सूचना अधिकारी, सहायक लोक सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों के लिए आयोजित आरटीआई अधिनियम, 2005 के अंतर्गत किया गया था.  यह आयोजन यशदा, पुणे एवं शिक्षणाधिकारी (प्राथमिक), कार्यालय, गोंदिया के संयुक्त तत्वावधान में शिक्षण विभाग (प्राथमिक) गोंदिया ने किया था. दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी गलत ठहराया है     अग्रवाल ने बताया कि कई बार लोक सूचना अधिकारी द्वारा ऐसे कारण बताकर सूचना देने से मना कर दिया जाता है, जो न्यायसंगत नहीं है. दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी अपने एक निर्णय में मामला न्यायाधीन होने का आधार बनाकर सूचना देने से इनकार किए जाने को गलत ठहराया है. गोंदिया जिले की शालाओं के लिए कार्यक्रम आयोजित चार दिनों तक चले इस आरटीआई प्रशिक्षण कार्यक्रम में गोंदिया जिले की तिरोड़ा, गोंदिया, अर्जुनी मोरगांव, देवरी, सड़क अर्जुनी, गोरेगांव, आमगांव एवं सालेकसा पंचायत समिति क्षेत्र की शालाओं से कुल 320 लोगों ने हिस्सा लेकर प्रशिक्षण प्राप्त किया. कार्यक्रम में राजेश रूद्रकार ने भी मार्गदर्शन किया. सूचना अधिकार केंद्र, यशदा की संचालक श्रीमती दीपा सडेकर-देशपांडे एवं संशोधन अधिकारी दादू बुले के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम का संचालन आनंद मानुसमारे ने एवं आभार प्रदर्शन देवराम मालाधारी ने किया.
शिवसेना

महाराष्ट्र : भाजपा ने छोड़ी नहीं उम्मीदें, सेना को लग रहा खतरा

मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद किनारे पड़ चुकी भाजपा ने अब तक उम्मीदें नहीं छोड़ी हैं. शुक्रवार को भाजपा ने कहा कि हमारे पास सबसे ज्यादा विधायक हैं, हम राज्य को एक स्थिर सरकार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. दूसरी ओर अपने प्रयासों में सफल शिवसेना को अब घोड़ा-बाजार (विधायकों की खरीद-फरोख्त) का खतरा नजर आ रहा है.  महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि बिना भाजपा के महाराष्ट्र में कोई सरकार नहीं बन सकती. चंद्रकांत पाटिल ने भाजपा के पास 119 विधायकों के समर्थन का दावा किया, इसमें 105 भाजपा के विधायक हैं, जबकि 14 निर्दलीय के समर्थन का दावा उन्होंने किया है. सरकार गठन के लिए 145 विधायक जरूरी महाराष्ट्र की विधानसभा में 288 विधायक हैं. यहां सरकार बनाने के लिए 145 विधायकों का समर्थन चाहिए. विधानसभा चुनाव में भाजपा को 105 सीटें आई हैं. जबकि शिवसेना के 56 विधायक जीते हैं, एनसीपी के विधायकों की संख्या 54 है तो कांग्रेस के 44 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है. अन्य विधायकों की संख्या 29 है. शिवसेना की जल्दबाजी पर पवार ने फेरा पानी इधर, हालांकि महाराष्ट्र में सरकार बनाने की शिवसेना की कोशिशें सफल होती तो दिख रही है और सरकार बनने की स्थिति में उसका मुख्यमंत्री भी बनता दिखाई दे रहा है, बावजूद इसके यह इतना सरल भी नहीं दिखाई दे रहा. कल तक ऐसा लग रहा था कि 17 नवंबर को यानी बालासाहेब ठाकरे के स्मृति दिवस पर सरकार आ जाएगी, लेकिन जोड़तोड़ के गठबंधन के सबसे बड़े नेता शरद पवार ने उसकी जल्दबाजी पर पानी फेर दिया है पवार ने नागपुर में शुक्रवार को ही कह दिया कि सरकार बनने में वक्त लगेगा. चूंकि शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस का मिलन आसान नहीं रहा है, इसलिए पवार का इतना कहना भी कई सस्पेंस की नई शुरूआत है. घोड़ा बाजार के भूत से शिवसेना परेशान दूसरी ओर उसे अपने और अपने दोनों मित्र दलों के विधायकों का छिटकने का खतरा भी परेशान कर रहा है. उसने "घोड़ा बाजार" अर्थात हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप भी लगाना शुरू कर दिया है. उसके मुखपत्र "सामना" ने आज शनिवार के अंक में इस घोड़ा बाजार पर भाजपा पर हमला भी बोल दिया है. शिवसैनिक बने सीएम : बाला साहेब का यह सपना पूरा करना है ज्ञातव्य है कि राज्य में अपने घटते जनाधार से चिंतित शिवसेना "बाला साहेब ठाकरे का सपना" पूरे करने के लिए इस बार किसी भी तरह से बहुमत जुटाकर महाराष्ट्र में अपना मुख्यमंत्री बनाने के लिए सारी कवायद में जुटा है. उसका कहना है कि बाला साहेब का यह सपना था कि कि एक दिन एक शिवसैनिक महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बने. उद्धव ठाकरे कहते रहे हैं हैं कि उन्होंने बाला साहेब से वादा किया है कि एक दिन शिवसेना का सीएम होगा. इस वादे का हवाला देकर शिवसेना भाजपा पर दबाव बना रही थी. हालांकि, भाजपा साथ उसकी डील नाकाम हो गई, तब शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी की ओर रुख किया. रविवार को फिर होगी सोनिया-शरद की मुलाकात महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की सरकार बनाने के लिए तीनों दलों के बीच कई बार...
आरटीआई

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ‘सूचना का अधिकार’ कानून और मजबूत होगा

नागपुर : सूचना का अधिकार (आरटीआई) संबंधी मामले में एक अहम फैसला लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को भी एक सार्वजनिक प्राधिकरण माना, जिसके तहत अब भारत के मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय भी सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के दायरे में आ गया है. उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस ऐतिहासिक निर्णय में स्पष्ट कहा है कि मुख्य न्यायधीश यानी चीफ जस्टिस का कार्यालय भी अब सूचना के अधिकार के तहत आएगा. इस निर्णय को लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कई टिप्पणियां कीं, जिनमें से एक ये भी रही कि कानून से ऊपर कोई भी नहीं है, सुप्रीम कोर्ट के जज भी नहीं. सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए इस निर्णय का स्वागत करते हुए दादा रामचंद बाखरू सिंधु महाविद्यालय के रजिस्ट्रार एवं सूचना अधिकार केंद्र, यशदा, पुणे के अतिथि व्याख्याता नवीन महेशकुमार अग्रवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से सूचना का अधिकार कानून को और मजबूती मिलेगी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि कानून से ऊपर कोई भी नहीं हैं, स्वयं सुप्रीम कोर्ट भी नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के तहत निम्न लिखित टिप्पणियां भी की हैं, जिससे सूचना के अधिकार दायरा भी साफ हो गया है. ये टिप्पणियां इस तरह की हैं- - सुप्रीम कोर्ट के आरटीआई के तहत आने से पारदर्शिता बढ़ेगी. - इससे न्यायिक स्वायत्तता अधिक मजबूत होगी. - इससे ये भाव मजबूत होगा कि कानून से ऊपर कोई नहीं, सुप्रीम कोर्ट के जज भी नहीं. - चीफ जस्टिस का कार्यालय पब्लिक अथॉरिटी, इसलिए आरटीआई के तहत आना चाहिए. - आरटीआई का इस्तेमाल जासूसी के साधन के रूप में नहीं किया जा सकता है. - पारदर्शिता न्यायिक स्वतंत्रता को कमजोर नहीं करती. - कोलेजियम की जानकारी अब सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर डाली जाएगी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का सुप्रीम कोर्ट में आज शनिवार, 16 नवंबर को आखिरी दिन है. उनका कार्यकाल करीब साढ़े 13 महीने का रहा. इस दौरान उन्होंने कुल 47 फैसले सुनाए, जिनमें से यह ऐतिहासिक फैसला भी शामिल है.
महाशिवआघाड़ी

‘महाशिवआघाड़ी’ का मुख्यमंत्री सेना का, भाजपा भी नहीं हटेगी पीछे

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर स्थितियां धुंधली  मुंबई : महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर स्थितियां अब भी धुंधली हैं. कांग्रेस-राकांपा-शिवसेना को मिलाकर बना "महाशिवआघाड़ी" अपनी सरकार बनाने को लेकर आशान्वित है. लेकिन भाजपा का भी कहना है कि राज्य में भाजपा के अलावा और किसी की सरकार नहीं बन सकती. उसने 119 विधायकों के साथ होने का दावा किया है. अपनी मजबूत स्थिति से समझौता नहीं : भाजपा उल्लेखनीय है कि भाजपा को विधानसभा चुनाव में 105 सीटें मिली हैं और 14 निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है. प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के बाद महाराष्ट्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा के बिना किसी सरकार का गठन संभव नहीं है. बैठक में भाजपा नेताओं ने कहा कि राज्य भाजपा एक करोड़, 42 लाख मतों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है. वह 164 सीटों पर लड़कर 105 पर जीती है और हारी हुई 59 सीटों में से 55 पर नंबर दो की स्थिति में है. अन्य दलों से भाजपा में आए 26 उम्मीदवारों में से 16 को जीत हासिल हुई है. उनका कहना है कि वे चुनाव के बाद अपनी मजबूत स्थिति में हैं और सरकार बनाने के अपने दावे से कोई समझौता नहीं कर सकते. भाजपा इन आंकड़ों के साथ अपने कार्यकर्ताओं में भविष्य के लिए उनका मनोबल भी ऊंचा रखना चाहती है.   महाशिवआघाड़ी का मुख्यमंत्री होगा शिवसेना का इधर शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस की महाशिवआघाड़ी ने दावा किया है कि राज्य में सरकार गठन और सीट सेयरिंग को लेकर उनके बीच आरंभिक शर्तों पर समझौता हो गया है. इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री शिवसेना का ही पूरे पांच वर्षों के लिए होगा. जबकि राकांपा और कांग्रेस के एक-एक उपमुख्यमंत्री होंगे. इसके साथ ही मंत्रिमंडल में शिवसेना 14, राकांपा 14 और कांग्रेस के 12 मंत्री होंगे. सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू : पवार   महाशिवआघाड़ी के सबसे वरिष्ठ नेता शरद पवार ने भी शुक्रवार को नागपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. पवार के अनुसार कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना की यह सरकार न सिर्फ बनेगी, बल्कि अपना कार्यकाल भी पूरा करेगी. पवार ने मध्यावधि चुनाव की संभावना से साफ इन्कार करते हुए कहा कि हम सब राज्य में स्थिर सरकार बनाना चाहते हैं. उससे पहले तीनों दलों के न्यूनतम साझा कार्यक्रम एवं अन्य शर्तों पर चर्चा चालू है. मुख्यमंत्री किसका होगा, इस सवाल पर हालांकि पवार ने शिवसेना का नाम लिए बिना कहा कि जिसकी मुख्यमंत्री पद की मांग होगी, उस पर विचार किया जाएगा. लेकिन पवार की ही पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नवाब मलिक स्पष्ट कर चुके हैं कि महाशिवआघाड़ी की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री पद शिवसेना को दिया जाएगा. शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने भी फिर मुख्यमंत्री शिवसेना का ही बनने की बात न सिर्फ दोहराई है, बल्कि अगले 25 साल तक शिवसेना का ही मुख्यमंत्री रहने का दावा किया है.   किसानों की हमदर्दी बटोर रहे उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में सरकार के गठन को लेकर फंसे पेंच के बीच एकाएक सारे नेताओं को किसानों की याद आ गई है....
बाल दिवस

थैलसीमिया पीड़ित बच्चों को पुरस्कृत कर मनाया बाल दिवस

नागपुर : बाल दिवस के उपलक्ष्य में जरीपटका में डॉ. विंकी रुघवानी थैलेसीमिया व सिकल सेल सेंटर के बच्चों के साथ बाल दिवस मनाया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रुघवानी ने की. समारोह में  थैलेसीमिया सोसाइटी ऑफ सेंट्रल इंडिया के उपाध्यक्ष प्रताप मोटवानी विशेष रूप से उपस्तिथ थे. अन्य अतिथियों में घनश्यामदास कुकरेजा, हरीश बाखरू, नानकराम आहूजा, सुरेश जगयासी, डॉ. जी.टी. रुघवानी, पी.टी  दारा, दादा विजय केवलरमानी, ईश्वर केसवानी, शोभा भागिया, विजय विधानी,जवाहर चुग, मधु रुघवानी, डॉ जयप्रकाश दीपानी, डॉ संगीता रुघवानी उपस्तिथ थे. बच्चों ने अतिथियों का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया. थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों ने बाल दिवस के उपलक्ष्य में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम कर सभी को मंत्रमुग्ध किया. इस अवसर पर चाचा नेहरू को स्मरण कर डॉ. रुघवानी की तुलना उनसे कर बच्चों ने कहा- हम थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए उन्होंने सभी प्रकार के सहयोग और नि:शुल्क सेवा दी है, वह बहुमूल्य है. उपाध्यक्ष प्रताप मोटवानी ने थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को बाल दिवस की बधाई देते हुए डॉ. रुघवानी द्वारा थैलेसीमिया बच्चों के लिए किए गए निस्वार्थ सेवा की सराहना की. दादा घनश्याम दास कुकरेजा, हरीश बाखरु, सुरेश जगयासी, मधु रुघवानी, पी.टी. दारा ने भी बाल दिवस पर विचार रखे. कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ विंकी रुघवानी ने विचार प्रकट कर कहा कि थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे मेरे परिवार का हिस्सा हैं. उनके लिए कोई भी सेवा कार्य करने से मुझे आत्मिक खुशी होती है. बच्चों के चेहरों पर खुशी और मुस्कान लाना मेरा ध्येय है. अंत में अतिथियों द्वारा थैलेसीमिया बच्चों को पुरस्कार वितरण किया गया. कार्यकम का संचालन विजय विधानी ने और आभार प्रदर्शन डॉ. संगीता रुघवानी ने किया. कार्यक्रम में बच्चों के साथ उनके परिवार और अनेक संघटनो के पदाधिकारी गणमान्य उपस्तिथ थे. कार्यक्रम में प्रमुखता से उपस्तिथ लोगों में श्रीमती नीलू रुघवानी, पंकज रुघवानी, विनोद मसंद, मोहन जोतवानी, किशोर लालवानी, डॉ. राजू चावला, राकेश मोटवानी, बंटी दुदानी, दिव्या गुरबानी, जयश्री विधानी, नवीन अग्रवाल,लक्ष्मी शर्मा, श्रीमती बजाज, गुरमुख मोटवानी शामिल थे.
शिव-सत्ता

‘शिव-सत्ता’ के लिए कांग्रेस-एनसीपी से जुड़ेगी शिवसेना?

नए सहयोगियों के कदमों में डालनी होगी 'शिव-तलवार' शिव-सत्ता हासिल करने के लिए महाराष्ट्र में अड़ी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना (56) के पाले में अब गेंद आ गई है. राज्यपाल की ओर से अब उसे सरकार बनाने का न्यौता दिया है. इस तरह अपने स्वर्गीय पिता बाला साहेब ठाकरे को राज्य में शिवसेना का मुख्यमंत्री बनाने के दिए अपने वचन निभाने का उद्धव ठाकरे को यह एक स्वर्णिम मौका मिला है. राज्य में सबसे बड़े दल के रूप में विधानसभा चुनाव में चुन कर आई भाजपा (105) ने भी सरकार बनाने से इंकार कर शिवसेना को अपनी यह महत्वाकांक्षा पूरी करने का अवसर दे दिया है. कीमत भी चुकानी है सरकार बनाने के लिए लेकिन महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए शिवसेना को अब कीमत भी चुकानी है. अपनी सरकार बनाने के लिए बहुमत हेतु उसे जिन कांग्रेस (44) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी, 54) के सहारे की जरूरत है, वे भी 'शिव-सत्ता' कार्यकाल में 50-50 फार्मूले की शर्त रखने वाले हैं. हालांकि शिवसेना का अभी दोनों दलों से औपचारिक रूप से समर्थन मांगना बाकी है, लेकिन एनसीपी ने समर्थन मांगने से पूर्व ही अपनी शर्तों में से एक- "राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से सारे संबंध तोड़ने और केंद्र सरकार में शामिल शिवसेना के मंत्री के इस्तीफे" की शर्त रख दी है. भाजपा-शिवसेना का गठबंधन टूटने की कगार पर   और इसके साथ ही भाजपा-शिवसेना का गठबंधन टूटने की कगार पर आ गई है. अब कांग्रेस और राकांपा की शर्तें पूरी कर दोनों दलों से समर्थन प्राप्त करने की सारी प्रक्रिया शिवसेना को आज शाम तक ही पूरी कर लेनी है. क्योंकि राज्यपाल ने सरकार बनाने का दावा करने का समय उसे आज सोमवार की शाम 7.30 बजे तक का समय दिया है. बैठकों का दौर शुरू इधर शिवसत्ता और मुख्यमंत्री पद पाने के लिए शिवसेना उत्साहित है. बैठकों का दौर शुरू हो चुका है. उद्धव ठाकरे ने आपात बैठक बुलाई है. उधर सत्ता में शामिल होने के लिए शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी भी कम उत्साहित नहीं है. उसने भी बैठक शुरू कर दी है. कांग्रेस नेताओं की गतिविधियां भी आरंभ हो चुकी हैं.  आदित्य को किनारे कर उद्धव सामने   महाराष्ट्र की सरकार का कार्यकाल 9 नवंबर को खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस इस्तीफा देकर अब कार्यकारी मुख्यमंत्री बने हुए हैं. अब अपने बेटे आदित्य ठाकरे को किनारे कर उद्धव ठाकरे के लिए महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना आसान हो गया है. बेटे आदित्य ठाकरे को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर बैठाने का उद्धव का सपना कांग्रेस उसे अनुभवहीन बताकर चकनाचूर कर चुकी है. अब शिवसेना के लिए एक ही विकल्प 'शिव-सत्ता' और मुख्यमंत्री पद के लिए अड़ी शिवसेना के सामने इसके लिए एक ओर भाजपा थी और दूसरी ओर कांग्रेस-एनसीपी का गठबंधन. शिवसेना से पूरी 49 सीटें अधिक जीतने वाली भाजपा को यह स्वीकार नहीं था कि मात्र 56 सीटें पाने वाली शिवसेना को मुख्यमंत्री बनाने का वह समर्थन दे. बहुमत के लिए 145 का समर्थन पाने के लिए भी भाजपा को और 40 के समर्थन की जरूरत थी. हालांकि उसे अनेक निर्दलीयों का समर्थन मिल चुका था, लेकिन बहुमत के लिए संख्या...