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महाराष्ट्र के चुनावी दंगल में चल पड़ा वंशवाद का घमासान

विधानसभा चुनाव-2019 : समीक्षा  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का इस बार का मैदान वंशवाद के दंगल का घमासान दिखाने वाला है. चुनाव में उतर चुके कई नए युवा चेहरे वंशवाद की झलक दिखला रहे हैं. इन युवा चेहरों में अनेक चेहरे किसी न किसी राजनीतिक परिवार से जुड़े हैं. दलों के नेता अपनी-अपनी अगली पीढ़ी के लिए चुनावी मैदान को लॉन्च पैड के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. लिहाजा, महाराष्ट्र भी अब वंशवाद की राजनीति से अछूता नहीं रहा. कांग्रेस, एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) और शिवसेना सहित वंशवाद विरोधी भारतीय जनता पार्टी भी इस बार की चुनावी गंगा में हाथ धोने का लोभ संवरण नहीं कर पाई हैं.  महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव-2019 में राज्य के दो सबसे ताक़तवर राजनीतिक परिवारों की तीसरी पीढ़ी के चुनावी मैदान में उतरने की गवाही दे रहा है- इनमें हैं पवार और ठाकरे परिवार. इन्हें महाराष्ट्र की राजनीति के शीर्ष परिवारों के रूप में देखा जाता है और यहां की राजनीति अक्सर इन्हीं दोनों परिवारों के ईर्द-गिर्द घूमती दिखती है. परम्परा तोड़ उतरे आदित्य ठाकरे   इधर आदित्य ठाकरे, जो शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के पोते हैं, ठाकरे परिवार की परम्परा तोड़ कर चुनावी मैदान में उतरने वाले पहले सदस्य हैं. वहीं पवार परिवार से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख और कद्दावर नेता शरद पवार के पोते रोहित पवार का भी यह पहला चुनाव है. शिवसेना राज्य की सत्ताधारी पार्टियों में से एक रही है और इसके संस्थापक बाल ठाकरे राज्य की राजनीति में हमेशा ही एक कद्दावर शख्सियत रहे. क्षेत्रीयता और विभाजनकारी हिंदुत्व की पहचान वाली शिवसेना ने एक बार साल 1995 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का पद हासिल किया. इसके साथ ही साल 2014 से वह केंद्र और राज्य में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार का हिस्सा भी रही है. लेकिन खुद को रिमोट कंट्रोल बताने वाले इसके संस्थापक बाल ठाकरे ने चुनावी मैदान में कभी अपना हाथ नहीं आजमाया. न तो वे और न ही उनके बेटे उद्धव कभी चुनाव लड़े. 2012 के बाद से शिवसेना की कमान उद्धव के हाथों में ही है. उद्धव के चचेरे भाई राज ठाकरे ने भी कभी चुनावी अखाड़े में आजमाइश नहीं की. बाला साहेब ठाकरे से प्रेरित राज ठाकरे ने शिवसेना से अलग महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) के नाम से पार्टी भी बनाई और 2014 में चुनाव लड़ने का मन भी बनाया और सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा तक की, लेकिन बाद में वो इससे पीछे हट गए. लेकिन इस चुनाव में ठाकरे परिवार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए तीसरी पीढ़ी के ठाकरे यानी आदित्य ठाकरे को मुंबई की वर्ली विधानसभा सीट से उतारा है. यानी चुनाव के मैदान में उतरने वाले वे अब पहले ठाकरे बन गए हैं. नई पीढ़ी को चुनाव में आजमा चुका है पवार परिवार दूसरी ओर पवार परिवार की तीसरी पीढ़ी के रोहित पवार भी करजात-जमखेद से चुनावी मैदान में उतरे हैं. ठाकरे के उलट पवार ने कभी ऐसा नहीं माना कि चुनाव में उनकी दिलचस्पी नहीं है. दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीतिक क्षितिज पर शरद पवार के वर्चस्व के बाद उनकी बेटी सुप्रिया सुले लोकसभा चुनाव जीत कर संसद पहुंची. इसके अलावा उनके भतीजे और राज्य में विपक्ष के नेता अजीत पवार उप-मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. 2019 के विधानसभा चुनाव...
नोबेल शांति

इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को नोबेल शांति पुरस्कार

नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है. इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को नोबेल शांति पुरस्कार मिला है. शत्रु देश इरिट्रिया के साथ शांति स्थापित कर अंतरराष्ट्रीय शांति और सहयोग में उनके प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री अबी अहमद अली का नाम नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है. नोबेल कमेटी ने इसकी जानकारी दी है. नोबेल पुरस्कार जूरी ने बताया अबी को "शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करने के प्रयासों के लिए और विशेष रूप से पड़ोसी इरिट्रिया के साथ सीमा संघर्ष को सुलझाने के निर्णायक पहल के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है."   2018 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उदारीकरण की शुरुआत की अबी अहमद ने इथियोपिया में बड़े पैमाने पर उदारीकरण की शुरुआत की. उन्होंने हज़ारों विपक्षी कार्यकर्ताओं को जेल से रिहा कराया और निर्वासित असंतुष्टों को देश में वापस लौटने की इजाज़त दी. सबसे अहम काम, जिसके लिए नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया, वह यहहै कि पड़ोसी देश इरिट्रिया के साथ दो दशक से भी अधिक समय से चले आ रहे संघर्ष को ख़त्म करते हुए उसके साथ शांति स्थापित की. हालांकि, उनके सुधारों ने इथियोपिया की नस्लीय तनाव पर से पर्दा उठा दिया, इसके बाद हुई हिंसा में 25 लाख लोगों को अपना घरबार छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. साहित्य के नोबेल पुरस्कार इससे पहले 10 अक्‍टूबर को वर्ष 2018 के लिए पोलिश लेखिका ओल्गा टोकार्कज़ुक (Olga Tokarczuk) को साहित्य के नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize in Literature) से सम्मानित किया गया. वर्ष 2019 के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize in Literature) ऑस्ट्रियाई लेखक पीटर हैंडके (Peter Handke) को दिया गया. स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में नोबेल फाउंडेशन (Nobel Foundation) ने नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize 2019) विजेताओं की घोषणा की. बुधवार, 9 अक्‍टूबर को कैमिस्ट्री के नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize 2019) की घोषणा की गई थी, और वह लिथियम-आयन बैटरी का विकास करने के लिए अमेरिका के जॉन बी. गुडइनफ (John Goodenough), इंग्लैंड के एम. स्टैनली विटिंघम (Stanley Whittingham) तथा जापान के अकीरा योशिनो (Akira Yoshino) को संयुक्त रूप से दिया गया था.    
गायन

‘विश्व का सबसे लम्बा गायन स्पर्द्धा’ का ऑडिशन अमरावती में 6 को

अमरावती के गायकों को भी मिलेगा विश्व रेकॉर्ड का हिस्सा होने का सुनहरा मौका अमरावती : राष्ट्रीय कर्तव्य पालन के लिए विभिन्न सामाजिक उपक्रमों के प्रचार और प्रसार के लिए समर्पित विराग मधुमालती एवं टीम द्वारा 'विश्व का सबसे लम्बा कराओके गायन स्पर्द्धा का विश्वविक्रमी मैराथन' - (“World’s Longest singing Marathon Guinness World Record”), करने का संकल्प किया गया है. इस के लिए रविवार, 6 अक्टूबर को विराग मधुमालती और टीम ऑडिशन लेने वाले हैं. यह ऑडिशन मिशन देशभक्त डिफेन्स पेरामेलट्री ॲकेडेमी, सिटी सेंटर काम्प्लेक्स, 202 दूसरा माला, पंचवटी चौक, अमरावती में भी संपन्न होगा. “विश्व का सबसे लम्बा गायकी का विश्वविक्रमी मैराथन स्पर्द्धा" अगले माह से 9 नवंबर से 21 दिसंबर तक नवी मुम्बई के खारघर स्थित 'लिटिल वर्ल्ड मॉल' में होने जा रहा है. यह मौका गायक कलाकारों के लिए एक सुनहरा अवसर हो सकता है. विराग मधुमालती व उनकी टीम राष्ट्रीय कर्तव्य पालन को समर्पित अवयवदान जनजागृति, बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ, स्टॉप ग्लोबल वार्मिंग, कैंपस विथ हेलमेट, सेव वॉटर-सेव ट्रीज, रक्तदान जैसे ज्वलंत सामाजिक उपक्रमों को बढ़ावा देने और लोगों में इन सभी विषयों के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.   अभी कराओके गायन के लिए दुनिया का सबसे बड़ा रिकॉर्ड (792 घंटों का) चीन के नाम है और विराग मधुमालती ने 1000 घंटों का नया विश्व रिकॉर्ड को बनाने का फैसला किया है. विराग का कहना है कि 42 दिनों के इस गायन कार्यक्रम में से प्रत्येक7 दिन उपरोक्त गतिविधियों में से हर एक उपक्रम के लिए समर्पित होंगे. देश के विभिन्न हिस्सों से गायकों को इस विश्व रिकॉर्ड के लिए चुना जा रहा है. इस स्पर्द्धा में 10 से 70 वर्ष की आयु के कोई भी गायक भाग ले सकते हैं. सभी गायक कलाकारों के लिए विश्व के इस सबसे बड़े संगीत महोत्सव में गाने का स्वर्ण अवसर है यह प्रतिपादन आयोजक एवं विश्वविक्रमी गायक विराग मधुमालती ने किया है. यह "अखंड संगीत यज्ञ" एक ऐतिहासिक संगीत उत्सव होगा, जिसमें लगभग 18,000 से 20,000 गाने गाए जाएंगे. गायकी के इस महाकुम्भ में विविधता में एकता का दर्शन होने जा रहा है. गायक विविध भाषाओं में गाने गा सकेंगे. उम्मीद है कि खारघर के लिटिल वर्ल्ड मॉल में लगभग 8 से 9 लाख लोगों का जनसमूह इस संगीत महाकुम्भ का आनंद लेने पहुंचेगा. आगामी माह के 9 नवंबर से 21 दिसंबर 42 दिनों के दौरान यह विश्व रिकॉर्ड बनाया जाएगा. इसके अलावा, इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान नेत्रदान और अवयव दान के लिए भी  लोगों से शपथ दिलवाई जाएगी. यह नया विश्व रिकॉर्ड निश्चित रूप से हमारे देश की संस्कृति को बढ़ावा देने और उपरोक्त ज्वलंत सामाजिक गतिविधियों के बारे में जागरूकता लाने में सफल होगा. विराग मधुमालती ने अब तक चार विश्व विक्रम स्थापित करके देश की एकता व नेत्रदान की जनजागृति के लिए समर्पित किए हैं. दिव्यांग मित्रों की पीड़ा को महसूस करने के लिए विराग ने अपनी जान जोखिम में डाल कर 100 दिनों तक अपनी आंखों पर पट्टी बांधी और इस दौरान, समाज में नेत्रदान जनजागृति के लिए कई कार्यक्रम किेए. सुप्रसिद्ध गायक सुरेश वाडकर, पार्श्वगायिका साधना सरगम, अभिनेत्री अलका कुबल तथा महाराष्ट्र के सांकृतिक मंत्री विनोद तावड़े ने इस नए...
पटना

पटना में जल-प्लावन : कोल इंडिया सामने आई, पानी निकालने में जुटी

सीमा सिन्हा,  पटना : बिहार की राजधानी पटना में बाढ़ और जल-प्लावन के कारण जन-जीवन संकट में है. राजधानी के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने भी हाथ बटाया है. सीआईएल शहर में जल-प्लावन से निपटने के लिए चार बड़े,शक्तिशाली पम्प्स उपलब्ध करवाए हैं. राजेंद्रनगर, सैदपुर तथा पाटलिपुत्र कॉलोनी के निचले रिहायशी इलाकों में भरे पानी को निकालने में ये पम्प रात-दिन लगे हैं. प्रति मिनट 5000 गैलन पानी की निकासी- क्षमता के दो तथा 1000 गैलन पानी की पम्पिंग-क्षमता के दो पम्प यानि चार पम्प्स वहां लगातार पानी निकालने के कार्य में लगे हैं, जिससे बाढ़ प्रभावित बिहार की राजधानी पटना में राहत-कार्य में सहूलियत हो सके इनमें से दो पंप एक हजार गैलन प्रति मिनट और दो पंप पांच-पांच हजार गैलन प्रति मिनट की क्षमता से पानी को निकालने में सक्षम हैं. पिछले हफ्ते पटना समेत बिहार के कई शहरों को मात्र 2 दिनों में वहां होने वाली औसतन सालाना बारिश की 40 प्रतिशत बारिश का सामना करना पड़ा, जिससे वहां भीषण बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई. पुनपुन ने फिर बढ़ाई मुसीबत, ट्रेन परिचालन रुका पटना में जलजमाव कायम है. पुनपुन नदी में आई बाढ़ ने पटनावासियों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं. पुनपुन नदी पर बने रेल पुल के गार्डर पर पानी चढ़ने से पटना-गया रेल रूट पर ट्रेनों का परिचालन रोक दिया गया है. इससे पटना से गया के बीच रेल संपर्क टूट गया है. इसके अलावा बख्तियारपुर-राजगीर रूट पर भी बेना के पास ट्रैक पर पानी चढ़ने से ट्रेनों का परिचालन अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है. ट्रैक के निरीक्षण के बाद रेलवे ने गुरुवार शाम से पैसेंजर और एक्सप्रेस सभी तरह की ट्रेनों का परिचालन बंद करने का निर्णय लिया है. रेल यात्रियों को हो रही परेशानी इस कारण पटना से जहानाबाद, गया होकर रांची, धनबाद, बनारस जाने वाले रेल यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. वहीं, बख्तियारपुर से राजगीर आने-जाने वाले को सड़क मार्ग से जाना पड़ा. दानापुर रेल मंडल के पीआरओ संजय कुमार प्रसाद ने बताया कि ट्रैक से पानी उतरने के बाद ही इन दोनों रूटों पर ट्रेन सेवा शुरू होगी. गुरुवार शाम छह बजे पुनपुन का जलस्तर 53.60 मीटर हो गया था. वर्ष 1976 के बाद नदी का जलस्तर इतना ऊपर गया है. तब जलस्तर 53.91 मीटर हो गया था, जो अब तक रिकॉर्ड है. 1976 में पटना में मचाई थी तबाही वर्ष 1976 में पुनपुन से आई बाढ़ ने पटना में तबाही मचाई थी. इस बार भी बाढ़ का पानी इंजीनियरिंग बांध के ऊपर से बहकर पटना सुरक्षा बांध तक पहुंच गया है. इससे दर्जनों गांव जलमग्न हो गए हैं. जिन गांवों में पानी घुसा है, वहां के लोग बांध, नेशनल हाईवे और अन्य ऊंची जगहों पर रह रहे हैं. लोगों ने जान-माल की हिफाजत के लिए अन्य कई ऊंचे स्थानों पर शरण ले रखी है. सुरक्षा बांध पर कोई खतरा नहीं हालांकि प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा बांध पर कोई खतरा नहीं है. स्थिति को देखते हुए डीएम कुमार रवि और एसएसपी गरिमा मलिक ने इंजीनियरिंग बांध और पटना सुरक्षा बांध का जायजा लिया. जल संसाधन विभाग...
सड़क दुर्घटनाओं

सड़क दुर्घटनाओं से 17 लोग मर रहे हैं प्रति मिनट

राष्ट्रीय राजधानी में जागरूकता के लिए 'सेफ ड्रायविंग कैंपेन' के तहत 1000 बाईक्स की रैली शीघ्र नई दिल्ली : सड़क दुर्घटनाओं के प्रति जागरूकता के लिए प्रतिष्ठित न्यूज पोर्टल 'ताजाखबर न्यूज' की ओर से 'सेफ ड्रायविंग कैंपेन' (Drive Safe India campaign) के अंतर्गत यहां 1000 बाईक्स की रैली का आयोजन करने का निर्णय किया है. यह जानकारी यहां 'ताजाखबर न्यूज' के सीईओ और संपादक नीरज महाजन ने दी. महाजन ने बताया कि रैली का उद्देश्य देश में "सड़क सुरक्षा" के प्रति आम नागरिकों के साथ ही वाहन चालकों में जागरूकता पैदा करना है. इसे a talk of the town और गलियों-सड़कों एवं प्रत्येक घरों में चर्चा का विषय बनाना है. ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सके. उन्होंने कहाकि हमें अब अपनी सड़कों को अधिकाधिक सुरक्षित बनाने की जरूरत है. इसके लिए जरूरी है कि आम लोगों की मानसिकता में सुधार लाएं और लोग अपनी जिम्मेदारी ऐसे निभाएं कि दुर्घटनाओं से किसी की जान नहीं जाने पाए. महाजन ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि विश्व में सड़क दुर्घटनाओं में सर्वाधिक मौतें हमारे देश में होती है. यहां प्रति मिनट 17 व्यक्ति की जान सड़क दुर्घटना में जाती है और 400 से अधिक लोग प्रतिदिन अपने प्राण गंवाते हैं. यदि ऐसा ही चलता रहा तो 2025 तक 25 लाख से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते जाएंगे. ऐसी दुर्घटनाएं न केवल लोगों की जान लेती हैं, बल्कि लोगों को अपाहिज बना कर उनका जीवन कष्टप्रद भी बना देती हैं. सड़क दुर्घटनाएं युद्ध और आतंकवादी हमलों से कहीं अधिक संख्या में जानमाल की क्षति पहुंचा रही हैं. लोग मर रहे हैं, अपाहिज बनते जा रहे हैं और अपनी संपत्ति भी गंवा रहे हैं. एक अध्ययन के अनुसार 5 से 10 प्रतिशत मौतें और 50 प्रतिशत से अधिक जख्मियों के आंकड़े आधिकारिक रेकॉर्ड में ही नहीं आ पाती हैं. महाजन ने कहा कि हमारे लोगों को खतरा केवल बाहरी शत्रुओं पाकिस्तान अथवा चीन से ही नहीं, बल्कि अपनी लापरवाही और अनदेखी के कारण है. सड़क दुर्घटनाएं हमारे "छुपे हुए शत्रु" की तरह हैं. यह सड़क दुर्घटनाएं देश में किसी बाहरी देश से युद्ध के बिना ही नरसंहार कर रही हैं. उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार प्रति वर्ष सड़क दुईघटनाओं में मरने वालों में 13.5 लाख लोग 5 वर्ष से 29 वर्ष की आयु वाले होते हैं. इसी कारण संयुक्त राष्ट्र ने 2011-2020 के दशक को "सड़क सुरक्षा पहल दशक" (Decade of Action for Road Safety) घोषित किया है. इसके तहत 50 लाख लोगों को सड़क दुर्घटना से बचाने का लक्ष्य रखा गया है. डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानों घेबरियेसुस ने इन मौतों को "गतिशीलता के लिए अस्वीकार्य कीमत" करार दिया है. अपने 1000 बाईक्स की रैली के बारे में महाजन ने बताया कि रैली में इतनी बड़ी संख्या में बाईक्स शामिल करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि दोपहिया वाहनों की दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या 30 प्रतिशत से अधिक जा पहुंची है. दोपहिया चालकों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना भी जरूरी हो गया है. रैली की तिथि की घोषणा शीघ्र ही की...
सिंधी सेवा

विश्व सिंधी सेवा संगम का प्रदेश महासम्मेलन 23 नवंबर को

राज्य स्तरीय बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय नागपुर : अंतरराष्ट्रीय संस्था 'विश्व सिंधी सेवा संगम' के महाराष्ट्र प्रदेश महासम्मेलन का आयोजन अमरावती में किया जाएगा. यह प्रस्ताव बैठक में सर्वसम्मति से पारित किया गया. तीन दिवसीय सम्मेलन की तारीख 23, 24 और 25 नवंबर तय की गई. यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय संस्था विश्र्व सिंधी सेवा संगम द्वारा अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजू मनवानी की अध्यक्षता में होगा, पूरे प्रदेश से हजारों की संख्या में सिंधी बंधुओं को आमंत्रित किया जाएगा. यह जानकारी महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील सचदेव ने दी. विश्र्व सिंधी सेवा संगम की महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को नागपुर के वर्धा रोड स्थित होटल सुखकर्ता के सभागृह में संपन्न हुई. महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील सचदेव, महाराष्ट्र उपाध्यक्ष नानकराम नेभनानी, विदर्भ अध्यक्ष जेसामल मोटवानी, नागपुर महानगर और जिला अध्यक्ष प्रताप मोटवानी के साथ प्रत्येक जिले से अध्यक्ष एवं पदाधिकारी उत्साह से बैठक में उपस्थित थे. सिंधी समाज और सिंधीयत के हित में अनेक विषयों पर उपस्थितों ने विचार रखे. बैठक में राज्य स्तरीय महासम्मेलन आयोजित करने का सुझाव सामने आया.   बताए उद्देश्य और किया आह्वान बैठक में अंतरराष्ट्रीय संस्था विश्र्व सिंधी सेवा संगम के गठन के महत उद्देश्यों से सभी पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों को अवगत कराया गया. संगठन का उद्देश्य सिंधी बोली भाषा को प्रोत्साहन देना, सिंधी समाज के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना और हर संभव सहायता उपलब्ध कराना, सिंधी समाज में धर्मांतरण रोकना, समाज में व्याप्त कुरीतियों को रोकना तथा समाज के प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने की दृष्टि से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन है. विदर्भ अध्यक्ष जैसाराम मोटवानी ने बताया रजिस्टर्ड संस्था विश्व सिंधी सेवा संगम की पूरे देश मे तथा करीब 42 देशों में संगठन कार्यरत है. इसका मुख्य कार्यालय मुम्बई में है. जगदीश मिहानी ने भी समाज हित में सुझाव दिए. राजनीति में आगे आएं बैठक में सिंधी समाज के हित में अनेक विषयों और मुद्दों पर मान्यवरों ने बेबाकी से विचार रखे. कहा गया कि समाज को आगे बढाने के लिए गरीब तबकों और वर्गों की भरपूर सहायता की जानी चाहिए. उसी प्रकार समाज उत्थान के विविध उपक्रमों पर चर्चा हुई. साथ ही राजनीति के क्षेत्र में समाज बंधुओं को आगे बढ़ाने पर विचार हुआ. सभी ने राय रखी कि राजनीतिक क्षेत्र में समाज के लोगों को आगे आना चाहिए. इससे व्यापक परिवर्तन का लक्ष्य साध्य किया जा सकता है. ऐसे ही राजनीति में कदम रखनेवाले समाजबंधु-भगिनी का एकजुट होकर साथ देने का विचार भी सेवा संगम की नागपुर बैठक में प्रमुखता से रखा गया। नागपुर जिला अध्यक्ष प्रताप मोटवानी ने बताया कि अतिशीघ्र नागपुर जिले के सभी पदाधिकारियों की लिस्ट जारी की जाएगी और सिंधी समाज के लिए पुरजोर तरीके से कार्य किए जाएंगे. सत्कार किया बैठक में आयोजकों की तरफ से विश्र्व सिंधी सेवा संगम के महाराष्ट्र अध्यक्ष एवं  सुनील सचदेव, महाराष्ट्र उपाध्यक्ष  नानकराम नेभनानी, विदर्भ अध्यक्ष जेसामल मोटवानी, नागपुर महानगर और जिला अध्यक्ष प्रतापराय मोटवानी आदि का शाल, श्रीफल और पुष्पगुच्छ देकर स्वागत सत्कार किया गया. सभी का सत्कार कर जीता दिल   विश्र्व सिंधी सेवा संगम की इस बैठक में सर्वश्री विश्र्व सिंधी सेवा संगम के गोदिंया जिला अध्यक्ष भगतराम ठकरानी, वर्धा जिला अध्यक्ष जगदीशभाई...
एलियन

जिज्ञासा : क्या पृथ्वी पर दस्तक दे चुके हैं एलियन..!

कृष्ण किसलय, एलियन : क्या सचमुच सुदूर अंतरिक्ष से अपनी आकाशगंगा या किसी दूसरी आकाशगंगा के ग्रहवासी (एलियन) पृथ्वी तक दस्तक दे चुके हैं? नासा के वैज्ञानिक सिल्वानो पी. कोलम्बानो का तो ऐसा ही कहना है. सिल्वानो पी. कोलम्बानो की बात इसलिए गौर करने लायक है कि वह नासा की इंटेलिजेन्स सिस्टम के लिए करते हैं. उनका कहना है कि कि पृथ्वी के मनुष्यों से बेहद अधिक बुद्धिमान एलियन पृथ्वी की यात्रा कर चुके हैं, जिन्हें हम पहचान नहीं पाएं. दूसरे ग्रह के वासियों का रूप हमारी कल्पना और समझ से एकदम भिन्न हो सकता है. सिल्वानो पी. कोलम्बानो ने मार्च 1918 में ही डिकोडिंग एलियन इंटेलिजेन्स वर्कशाप में अपने शोधपत्र में बताया था कि एलियन अंतरिक्ष-यात्रा करने में सक्षम हो चुके हैं. नवम्बर 2018 में आयरलैंड के आकाश में चार पायलटों ने अन-आइन्डेन्टीफाइड फ्लाइन्ग आब्जेक्ट (यूएफओ) को देखने का दावा भी किया था. इन पायलटों ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल को बताया कि आसमान में बिजली जैसी रफ्तार से तेजी से उड़ती हुई चमकीली चीज दिखी है. पायलटों के कथन ने एलियन के पृथ्वी पर आने की बात को फिर से 21वीं सदी में एक नई हवा दे दी है. 17वीं सदी में शुरू हुई थी उड़नतश्तरियों को देखे जाने की अफवाह 20वीं सदी में अक्सर उड़नतश्तरियों या यूएफओ की खबरें दुनिया भर की पत्र-पत्रिकाओं और सार्वजनिक चर्चा का विषय बनती थीं. माना जाता था कि यूएफओ हमारे सौरमंडल से बाहर किसी पारग्रहीय सभ्यता के अंतरिक्ष यान हैं. तब यूएफओ का रहस्य जानने के लिए अमेरिकी एयरफोर्स ने वर्ष 1947 में 'प्रोजेक्ट साइन' के नाम से खोजी अभियान शुरू किया था. इसके बाद वर्ष 1948 में 'प्रोजेक्ट स्टार' और वर्ष 1952 में 'प्रोजेक्ट ब्लूबुक' शुरू किए गए. कनाडा के राष्ट्रीय रक्षा विभाग ने भी इस दिशा में शोध कराया था. अगले वर्ष 1953 में तो इस खोज अभियान के लिए अर्द्धसरकारी संगठन ब्रिटिश फ्लाइंग सेन्सर ब्यूरो की स्थापना भी गई थी. विज्ञान पत्रकार एडगर प्लन्केट और उनके पुत्र साइंस रिपोर्टर डेनिस प्लन्केट के प्रयास से स्थापित हुई इस अर्द्धसरकारी उपक्रम के अनेक देशों में करीब एक हजार सदस्य बनाए गए, जो विज्ञान की अपेक्षाकृत बेहतर समझ रखते थे. मगर 50 सालों बाद भी कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं मिलने के कारण इस उपक्रम को बंद कर देने की घोषणा की गई. यूएफओ का रहस्य जानने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने भी शोध कराया था, मगर उस शोध में यूएफओ के होने की बात तथ्यात्मक रूप में सामने नहीं आई. यूएफओ को देखे जाने के किस्से या अफवाह 17वीं सदी में शुरू हुई थी और बीती 20वीं सदी में तो ऐसी चर्चा उफान पर थी. अब एक बार फिर नए सिरे से इसकी चर्चा है. सभ्यता के आरंभ से ही परेशान करता रहा है पृथ्वी से परे जीवन का सवाल सभ्यता के आरंभ से ही यह सवाल आदमी को परेशान करता आया है कि क्या पृथ्वी के अलावा ब्रह्मांड के अन्य किसी स्थान पर उसके जैसा बुद्धिमान प्राणी है? पुराण कथाओं में देवी-देवता, देवलोक होने की और लोककथाओं में परिलोक होने की बातें शायद इसी सवाल से जुड़े आदमी की कल्पनाएं रही हैं. अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक में...
अस्पताल

बड़े अस्पताल दवा के नाम पर भी लूट रहे हैं मरीजों को

एक ही कंपनी की, एक ही दवा की दो कीमतें, दवा कंपनियों से सांठगांठ सुविज्ञ सूत्रों से, गोरखधंधा : देश के कॉरपोरेट अस्पताल इलाज के नाम पर तो लूट मचा ही रहे हैं, दवा के नाम पर भी मरीजों को खुलेआम लूट रहे हैं. इस गोरखधंधे में देश की नामी-गिरामी और प्रतिष्ठित दवा कंपनियां शामिल हैं. सूत्रों ने बताया कि ये अस्पताल इन दवा कंपनियों से सांठगांठ कर दवाओं की कीमताें में हेराफेरी का धंधा कर रहे हैं. इस पर किसी मरीज के परिजन को शक भी नहीं होता है. सुविज्ञ सूत्रों से पता चला है कि दवा कंपनियां अपने उत्पाद की कीमतों में हेराफेरी करती हैं.   दवा कंपनियों के साथ सांठगांठ   ये बड़े और प्रतिष्ठित अस्पताल प्रबंधन बड़ी चालाकी से दवा कंपनियों के साथ ऐसी सांठगांठ करते हैं. इस दुरभिसंधि के तहत कंपनियां एक ही कंपोजिशन की दवाओं की दो तरह की कीमत टैबलेट्स, इंजेक्शंस आदि पर अंकित करती हैं. इनमें एक पर कम कीमत और दूसरी पर दोगुनी या तीनगुनी कीमत दर्ज होती है. इस तरह एक ही दवा की कीमत में 2,500 से 3000 रुपए तक का अंतर देखने को मिलता है. चूंकि यह दोहरी कीमत वाली दवाएं अलग-अलग हैसियत वाले मरीजों के लिए दी जाती हैं, इस कारण आसानी से पकड़ में नहीं आता है. सबसे ज्यादा हेराफेरी एंटीबायोटिक दवाओं (जीवन रक्षक दवाओं) की कीमतों में होती है, जो मरीज को देना बेहद जरूरी होता है.   दवा कंपनी से पहले ही तय कर लेते हैं मुनाफा दवा कंपनियां दवाओं की एमआरपी (मैक्सिम रिटेल प्राइस) तय करने से पहले अस्पताल प्रबंधकों से बातचीत करती हैं. दवाओं की बिक्री से मिलनेवाला मुनाफा (मार्जिन) तय होने के बाद एक ही कंपोजिशन वाली दवाओं के लिए दो तरह की कीमतें तय की जाती हैं. इसके बाद प्रोडक्ट तैयार कर अस्पतालों को उसका  स्टॉक भेज दिया जाता है. मरीज की हैसियत के हिसाब से उपयोग होती है दवा अस्पताल में दो तरह की दवा आने के बाद मरीज की हैसियत के हिसाब से उसका उपयोग किया जाता है. अस्पताल में अगर 'आयुष्मान भारत योजना' के तहत या कोई गरीब मरीज इलाज करा रहा है तो उसके लिए सस्ती एमआरपी (1,089 रुपए) वाली दवा का इस्तेमाल किया जाता है.  वहीं, अगर मरीज के पास हेल्थ इंश्योरेंस कार्ड है या मरीज पैसेवाला है, तो उसी कंपनी की महंगी एमआरपी (3,619 रुपए ) वाली दवा का इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा सामान्य बुखार में भी महंगी एमआरपी वाली दवा का उपयोग किया जाता है. पारासिटामोल के इंजेक्शन की वास्तविक कीमत 30 से 40 रुपए होती है, जबकि एमआरपी 350 से 400 रुपए तक होती है.   क्रिटिकल केयर यूनिट में सबसे ज्यादा महंगी दवाएं अस्पताल में महंगी दवा का उपयोग सबसे अधिक क्रिटिकल केयर विंग में किया जाता है. यहां मरीज को पता होता है कि बीमारी बड़ी है और मरीज गंभीर है. ऐसे में उसको बताया जाता है कि जान बचाने के लिए  महंगी दवा देनी होगी, जिससे मरीज हर प्रकार का खर्च करने के लिए तैयार हो जाता है.   दवा कंपनियां एक ही दवा के लिए तैयार करती हैं दो...
राजभाषा

‘राजभाषा शील्ड’ वेकोलि के पाथाखेड़ा एवं नागपुर क्षेत्र को

नागपुर : वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) में राजभाषा हिंदी में सर्वोत्तम कार्य के लिए "क क्षेत्र" में पाथाखेड़ा तथा "ख क्षेत्र" में नागपुर क्षेत्र को राजभाषा शील्ड से नवाजा गया. हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों एवं विभागों को भी शील्ड, प्रशंसा पत्र एवं नकद राशि से सम्मानित किया गया. पखवाड़ा के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को ये पुरस्कार प्रदान किया गया. किए गए. प्रतियोगिताएं टिप्पण आलेखन, वाद विवाद, स्लोगन, सामान्य ज्ञान, अंताक्षरी, प्रश्न मंच तथा काव्य स्पर्धा के रूप में आयोजित की गईं.   राजभाषा हिंदी पखवाड़ा का समापन 30 सितंबर को हुआ. कम्पनी के सभी क्षेत्रों, इकाइयों में 14 सितंबर को 'हिंदी दिवस' पर यह यह पखवाड़ा आरंभ हुआ था. इसका समापन पुरस्कार वितरण के साथ संपन्न हुआ. मुख्यालय में आयोजित समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह की अध्यक्षता कम्पनी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक राजीव रंजन मिश्र ने की.  सीएमडी मिश्र ने कर्मियों को और उत्साह से हिंदी में कार्य करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि वेकोलि को नगर राजभाषा क्रियान्वयन समिति (नराकास) की अध्यक्षता का गुरुतर दायित्व मिलने के बाद हमारी ज़िम्मेवारी और ज़्यादा बढ़ गई है. प्रारंभ में महाप्रबंधक (कार्मिक/राजभाषा प्रमुख) आर.जी. गेडाम ने स्वागत भाषण किया. कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रबन्धक (जनसंपर्क) एस.पी. सिंह ने किया. समारोह में विभागाध्यक्ष, हिंदी समिति के सदस्य, क्षेत्रों से आमंत्रित कर्मी-कविगण तथा मुख्यालय के हिंदी प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित थे.
विज्ञान मेला

‘भोपाल विज्ञान मेला- 2019’ में वेकोलि के स्टॉल को प्रथम पुरस्कार

नागपुर : टीम वेकोलि को आज एक बार फ़िर गौरवान्वित होने का अवसर मिला, जब भोपाल में आयोजित 'भोपाल विज्ञान मेला - 2019' में कम्पनी के कोयला खनन प्रदर्शित करने वाले स्टॉल को 'इनोवेशन इन इंडस्ट्रियल केटेगरी' में प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया. भोपाल में 13 से 16 सितंबर तक चले इस विज्ञान मेला के अंतिम दिन मुख्य अतिथि, हरियाणा एवं त्रिपुरा के भूतपूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने उक्त पुरस्कार प्रदान किया. उल्लेखनीय है कि कम्पनी के स्टॉल में प्रदर्शित विभिन्न मॉडल्स को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और उसे सराहा. खासकर,युवाओं ने वेकोलि के मॉडल्स में गहरी रूचि दिखाई. प्रदर्शनी में संयोजन कर रहे टीम वेकोलि के सदस्यों ने स्टॉल में प्रदर्शित कोयला-खनन गतिविधियों के बारे में दर्शकों की जिज्ञासा को शांत किया. अंतिम दिन छात्र-छात्राओं के साथ-साथ स्कूली बच्चों की उपस्थित देखने को मिली. साथ ही विज्ञान प्रेमियों की भी बड़ी संख्या में सहभागिता दिखाई. युवा यहां लगाई गई प्रदर्शनियों के साथ सेल्फी लेने के साथ-साथ मॉडल्स के बारे में जानकारी लेते नजर आए. विज्ञान मेला में भारत शासन और मध्यप्रदेश शासन के कई प्रमुख विभागों, उपक्रमों सहित कई निजी संस्थान विभिन्न वैज्ञानिक उपलब्धियों और कार्यक्रमों को प्रदर्शित भी किया गया. इनके द्वारा विद्यार्थियों को शिक्षित करने के उद्देश्य से विभिन्न वैज्ञानिक मॉडलों को भी प्रस्तुत किया गया. इनमें वेकोलि सहित इसरो, ब्रह्मेस, एनटीपीसी, एनपीसीआईएल, एन्वायरनो टेक, डीएई, सेन्टर फॉर ग्राउण्ड वाटर, सीआईएई, आईआईएसएस, एमपीपीसीबी, एचईजी, बीएचईएल, वर्धमान, एनएचडीसी, जैव विविधता विभाग और बागवानी विभाग प्रमुख थे. यहां पर लगभग 110 से ज्यादा स्टॉल्स लगाए थे.   बाढ़ पीड़ितों के लिए झंकार महिला मंडल ने 1 लाख रुपए प्रदान किया महाराष्ट्र में आई भीषण बाढ़ की विभीषिका से पीड़ित लोगों की मदद के लिए झंकार महिला मंडल, नागपुर ने महाराष्ट्र राज्य मुख्यमंत्री राहत कोष में एक लाख रुपए की राशि का योगदान किया. झंकार महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती अनिता मिश्र की पहल और उनके निर्देशन में एकत्र की गई इस राशि में वेकोलि के क्षेत्रों में सक्रिय महिला मंडलों ने भी योगदान किया है. झंकार महिला मंडल की ओर से एक लाख रुपए का चेक आज सचिव श्रीमती संगीता दास, श्रीमती सिम्मी सिंह एवं श्रीमती संध्या सिंहा, महाप्रबंधक (कार्मिक/कल्याण) ने माननीय मुख्यमंत्री की विशेष कार्य अधिकारी श्रीमती आशा पठान को सौंपा. उन्होंने झंकार महिला मंडल की इस सदाशयता के लिए धन्यवाद व्यक्त किया. उल्लेखनीय है कि श्रीमती अनिता मिश्र के मार्गदर्शन में झंकार महिला मंडल जरूरतमन्दों की सेवा में सदैव तत्पर रहता है.