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पाकिस्‍तानी

पकड़े गए परमाणु टेक्‍नोलॉजी को चुरा रहे पांच पाकिस्‍तानी

अमेरिका में बने परमाणु उत्‍पादों को पाकिस्‍तान स्‍मगल कर रहे थे  वॉशिंगटन : अमेरिका में परमाणु टेक्‍नोलॉजी चुराने वाले पांच पाकिस्‍तानी बिजनेसमेन पकड़े गए हैं. अमेरिकी न्‍याय विभाग के मुताबिक इन पांचों ने पाकिस्‍तानी न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम के लिए अमेरिकी तकनीक की स्मगलिंग की है.  जो पाकिस्‍तानी पकड़े गए हैं, उनमें मुम्मद कामरान वली (41) जो पाकिस्‍तान में रहता है, मुहम्मद अहसान वली (48) और हाजी वली मुहम्मद शेख (82) जो कनाडा में है, अशरफ खान मुहम्मद हॉन्‍गकॉन्‍ग में और अहमद वहीद (52) यूके में रहता है.  अमेरिकी असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल जॉन सी डेमर्स ने कहा, 'आरोपियों अमेरिका में बने उत्पाद उन संस्थानों को निर्यात किए, जिन्हें अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में घोषित किया गया है. क्योंकि इन संस्थानों के संबंध पाकिस्तान के हथियार कार्यक्रमों से है.'   इन पांचों लोगों पर इंटरनेशनल एनर्जी इकनॉमिक पावर्स ऐक्ट और एक्सपोर्ट कंट्रोल रिफॉर्म एक्‍ट के उल्लंघन की साजिश रचने का आरोप लगा है. जो आरोप लगे हैं, उनके मुताबिक, इन्‍होंने पाकिस्तान में उस जगह की पहचान छिपाने की कोशिश की, जहां अमेरिकी उत्पाद भेजे जा रहे थे. इन्होंने सामान खरीदने वाली और इसका आखिरी प्रयोग करने वाली कंपनियों के झूठे नाम बताए, जबकि अमेरिकी उत्पाद वास्तव में पाकिस्तान पहुंचे, इन उत्पादों का प्रयोग पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के लिए होता था और एईआरओ या पीएईसी ने इन उत्पादों की कीमत चुकाई. अमेरिकी अथॉरिटीज के अनुसार पाकिस्‍तान के ये पांच व्‍यापारी एक इंटरनेशनल रैकेट का हिस्‍सा हैं. इन्‍होंने ऐसी फ्रंट कंपनियों का नेटवर्क तैयार किया था, जो अमेरिका में बने उत्‍पादों को पाकिस्‍तान स्‍मगल करने का काम करती थीं. अमेरिका के न्‍याय विभाग ने उन्‍हें दोषी ठहराया है. रावलपिंडी में है कंपनी  पाकिस्‍तान के रावलपिंडी स्थित फ्रंट कंपनी 'बिजनस वर्ल्ड' से जुड़े इन पांच पाकिस्तानियों ने उत्‍पादों को पाक की एडवांस्‍ड इंजीनियरिंग रिसर्च ऑर्गनाइजेशन और पाकिस्‍तान एटॉमिक एनर्जी कमीशन को सप्‍लाई किया था. ऐसे 38 गैर-कानूनी परमाणु निर्यातों की पहचान की गई है जिन्‍हें 29 अमेरिकी कंपनियों से पाकिस्‍तान को सितंबर 2014 से अक्‍टूबर 2019 के बीच भेजा गया था. पहले भी पाकिस्‍तान ने की है ऐसी चोरी  16 साल पहले पाकिस्तान का न्यूक्लियर स्मगलिंग और प्रॉलिफरेशन स्कैंडल सामने आया था. उसमें पाकिस्तानी वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल कदीर खान (ए.क्यू. खान) का हाथ सामने आया था. उसी ए.क्यू. खान ने डच कंपनी रेंको से सेंट्रीफ्यूज चुरा लिया था, जिसके दम पर पाकिस्तान ने साल 1980 में परमाणु बम बना लिया. पाकिस्तान ने यह टेक्नॉलीज नॉर्थ कोरिया और चीन को भी बेच दी. खान ने लीबिया और ईरान को भी मदद की थी. अमेरिका के लिए भी खतरा बने पाकिस्‍तानी  अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के मुताबिक, ये पांच पाकिस्तानी कनाडा, हॉगकॉन्‍ग और ब्रिटेन में रहते हैं. डिपार्टमेंट का कहना है, 'ये अपनी फ्रंट कंपनियों के लिए दुनियाभर से खरीद करने का नेटवर्क चलाते थे. फ्रंट कंपनियां एडवांस्ड इंजीनियरिंग रीसर्च ऑर्गनाइजेशन और पाकिस्तान एटॉमिक एनर्जी कमिशन (पीएईसी) के लिए अमेरिका में बने उत्पाद खरीदती है. यह कंपनी अमेरिका से सामानों का निर्यात बिना एक्सपोर्ट लाइसेंस के ही करवाती है, जो अमेरिकी कानून का खुला उल्लंघन है.'  जर्मनी की गुप्तचर एजेंसी ने भी दी थी जानकारी उल्लेखनीय है कि जर्मनी की आतंरिक गुप्तचर एजेंसी ‘बीएफवी’ ने पिछले...
पत्रकारिता

मीडिया को अपनी विश्वसनीयता बरकरार रखनी चाहिए : प्रसून

स्व. बालासाहब तिरपुड़े पत्रकारिता पुरस्कार से वाजपेयी सम्मानित   नागपुर : टीवी समाचार चैनल के वरिष्ठ पत्रकार पुण्यप्रसून वाजपेयी को यहां स्व. बालासाहब तिरपुड़े पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया. स्थानीय वसंतराव देशपांडे सभागृह में आयोजित समारोह में बालासाहब तिरपुड़े जन्मशताब्दी समिति की ओर से युगांतर शिक्षण संस्था के अध्यक्ष राजकुमार तिरपुड़े ने वाजपेयी को पुरस्कार स्वरूप 1 लाख रुपए नकद, शाल और श्रीफल भेंट किया. इस अवसर पर अपने भाषण में वाजपेयी ने कहा कि मीडिया को सरकारी सहयोग पर सहारे रहने के बजाय अपने पाठकों के बीच अपनी पहचान और विश्वसनीयता बनाए रखना चाहिए. शासक आते-जाते रहते हैं, वे अपने प्रोपगैंडा के लिए मीडिया का इस्तेमाल उन्हें अपने ऊपर निर्भर बना कर करने का प्रयास करते हैं. मीडिया को इस खतरे से बचने की जरूरत है. वाजपेयी ने कहा कि मीडिया की अपनी एक बड़ी ताकत है. उसे देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है. उसे अपनी ताकत का इस्तेमाल देश के निर्माण में करने के लिए सरकारों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. उन्होंने वर्तमान समय में मीडिया के अस्वस्थ होने का कारण बताते हुए कहा कि यह स्थिति सरकार पर निर्भरता के कारण है. उन्होंने बताया कि सरकार को जब मीडिया का अपने पक्ष में उपयोग करने की जरूरत थी तब उसने मीडिया के लिए 2015 में बजट में 9 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान कर रखा था. इसमें 4 हजार करोड़ इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए और 5 हजार करोड़ प्रिंट मीडिया के लिए था. अब जब चुनाव जीत कर सरकार फिर से सत्ता में आ गई तो उसने 2019 से मीडिया के लिए अपना बजट घटा कर 4.5 करोड़ रुपए कर दिया है. इसमें इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए 2 हजार करोड़ और प्रिंट मीडिया के लिए 2.5 हजार करोड़ रुपए है. इस बार मीडिया के हिस्से में सरकार के पास धन नहीं है. इससे मीडिया अस्वस्थ होती जा रही है. वाजपेयी ने कहा कि सरकार के प्रोपगैंडा में जुटी मीडिया ने जनता में अपनी विश्वसनीयता खोई है और जिस मीडिया ने अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखने की कोशिश की उसके पीछे सरकार ने ईडी और सीबीआई को लगा दिया है. उन्होंने कहा कि यह हालात देश की मीडिया के लिए ठीक नहीं है. कार्यक्रम में मंच पर वरिष्ठ पत्रकार एस.एन. विनोद, महाराष्ट्र श्रमिक पत्रकार संघ के अध्यक्ष प्रदीप मैत्रा, युगांतर शिक्षण संस्था के अध्यक्ष राजकुमार तिरपुड़े, उपाध्यक्ष टीबी गेडाम, महासचिव गणेश गौरखेड़कर, सचिव कोबांडे उपस्थित थे. आरंभ में एस.एन. विनोद ने पुण्यप्रसून का परिचय कराया. प्रस्तावना प्रदीप मैत्रा ने रखी. राजकुमार तिरपुड़े ने अपने भाषण में पत्रकारिता पुरस्कार के संबंध में जानकारी दी. कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन पराग बोंबटकर ने किया.  
तान्हाजी

तान्हाजी : अजय देवगन की सौवीं फिल्म, 100+ करोड़ का कारोबार!

इसको संयोग कहें या किस्मत का लेखा..!   *जीवंत के. शरण, फिल्म 'तान्हाजी : द अनसंग वाॅरियर' अजय देवगन के करियर की 100 वीं फिल्म है और संयोग देखिए बाॅक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने सिर्फ छह दिनों में 100+ करोड़ की कमाई भी कर ली है. इसके साथ ही साल 2020 की यह पहली सौ करोड़ कमाने वाली फिल्म भी बन गई है. इस फिल्म के प्रति दर्शकों के रूझान को देखते हुए यह माना जा सकता है कि अब 200 करोड़ की कमाई करना भी तय है. Thanks to each and everyone for making this happen! I'm humbled & grateful for all the love, support & appreciation for #TanhajiTheUnsungWarrior 🙏@itsKajolD #SaifAliKhan @omraut @itsBhushanKumar @SharadK7 @ADFFilms @TSeries @TanhajiFilm pic.twitter.com/QmHmJ5zBaZ— Ajay Devgn (@ajaydevgn) January 16, 2020 इस फिल्म को हरियाणा सरकार के साथ उत्तर प्रदेश सरकार ने भी टैक्स फ्री कर दिया है. खबर है कि इसे महाराष्ट्र सरकार भी टैक्स फ्री करने वाली है.  अजय देवगन की यह लगातार पांचवीं फिल्म है, जिसकी सौ करोड़ के क्लब में एंट्री हुई है. 'गोलमाल अगेन' (2017) से यह सिलसिला आरंभ हुआ। 2018 में फिल्म 'रेड' ने भी सौ करोड़ का कारोबार किया था. 2019 में फिल्म 'टोटल धमाल' और 'दे दे प्यार दे' ने भी बाॅक्स ऑफिस पर धमाल कर अजय के साथ निर्माताओं को भी मालामाल कर दिया था. 'तान्हाजी: द अनसंग वाॅरियर' यह सतरहवीं शताब्दी की पृष्ठभूमि पर आधारित एक ऐतिहासिक फिल्म है, जिसमें मुगल और मराठों के बीच जंग दिखाई गई है. ओम राउत निर्देशित इस फिल्म में छत्रपति शिवाजी शासन काल के सूबेदार महान योद्धा तान्हाजी मालसुरे के शौर्य को बेहद रोमांचक तरीके से परोसा गया है. अजय देवगन ने तान्हाजी के किरदार को बेहद सजीव अभिनय से यादगार बना दिया है. अजय देवगन एक्शन हीरो के रूप में जाने जाते हैं. उनकी पहली फिल्म 'फूल और कांटे' (1991) थी. सफलता और असफलता के साथ यह साधारण नाक-नक्श वाला हीरो अपनी शर्तो पर धीरे-धीरे अपनी दबंगता को कायम करते हुए उन्नतीस साल के सफर में सौ फिल्मों का सफर तय कर लिया. वो भी अमिताभ बच्चन, सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान जैसे दिग्गज कलाकारों की उपस्थिति में. सैफ अली खान और काजोल की भी मुख्य भूमिका फिल्म 'ओंकारा' में लंगड़ा त्यागी के बाद निगेटिव रोल में सैफ ने फिर एक बार 'तान्हाजी' में उदयभान सिंह राठौर के किरदार में अपने अभिनय का जबरदस्त दम दिखाया है. अजय देवगन की पत्नी काजोल ने भी इस फिल्म में छोटी भूमिका में भी अपनी अदाकारी की गहरी छाप छोड़ी है. सैफ और काजोल दोनों ही अजय के साथ फिल्म में लीड रोल में हैं. मराठी फिल्मों के निर्देशक ओम राऊत की बॉलीवुड में तानाजी पहली फिल्म है. अपने निर्देशन से एक्शन सहित हर पहलू को बखूबी के साथ फिल्म आने में हुए कामयाब दिखाई देते हैं. बची-खुची कसर सपोर्टिंग एक्टर पूरी करते नजर आते हैं. दुनिया में मूवीज को रेट करने वाले ऑनलाइन डेटाबेस IMDb ने अजय देवगन की इस फिल्म को 10 में से 8.9 की रेटिंग दी है. IMDb की इस रेटिंग को फिल्म के लिए बहुत पॉजिटिव बताया जा रहा है क्योंकि यह एजेंसी अमूमन हॉलीवुड के बड़े...
पुलिस

महाराष्ट्र पुलिस में जल्द होंगी 8000 नियुक्तियां

पुणे : महाराष्ट्र पुलिस में जल्द ही 8000 विभिन्न पदों पर पुलिसकर्मियों की भर्ती होगी. यह जानकारी राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने दी. उन्होंने कहा कि राज्य में कानून एवं व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए पुलिस बल को मजबूत किया जाएगा. गृह मंत्री ने कहा कि पुलिस बल को सक्षम बनाया जाना जरूरी है.  जेडी पाटिल उर्फ बाबासाहेब संगलुडकर की 51वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम को अनिल देशमुख सम्बोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि ग्रामीण युवाओं को पुलिस भर्ती के साथ-साथ नौकरियों के लिए अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर भी फोकस करना चाहिए. उन्होंने राज्य में छात्रों के बढ़ती आत्महत्याओं के मामलों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि यह स्थिति छात्रों में पढ़ाई को लेकर अत्यधिक तनाव के कारण है. उन्होंने छात्रों के माता-पिता से कहा कि वे अपनी उम्मीदों का बोझ अपने बच्चों पर न डालें.  उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई कड़े कदम उठा रही है. सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर है. नक्सलवाद को रोकने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
विज्ञापनों

दीपिका वाले विज्ञापनों को दिखाने में कटौती शुरू

मुंबई : अखबारों व मीडिया विज्ञापनों और फिल्मों के लिए सबसे ज्यादा पेमेंट पाने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण से अपने कनेक्शन को लेकर प्रमुख ब्रांड्स सतर्कता बरतने लगे हैं. अब वे उन विज्ञापनों को दिखाने में कटौती करने लगे हैं, जिनमें दीपिका हैं. जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में नकाबपोशों ने छात्रों पर लोहे के रॉड, चेन और लाठियों से हमला किया था. इसके विरोध में लेफ्ट विंग के छात्रों की ओर से आयोजित एक प्रदर्शन में दीपिका पादुकोण भी कैंपस में गई थीं. इससे नाराज एक वर्ग ने दीपिका की नई फिल्म छपाक का विरोध शुरू कर दिया. अब विवाद को देखते हुए ब्रांड्स भी सतर्कता बरत रहे हैं. 23 ब्रांड्स के लिए विज्ञापन करती हैं दीपिका कुछ ब्रांड्स ने बताया कि वे दीपिका वाले अपने विज्ञापनों को फिलहाल के लिए कम दिखा रहे हैं. दीपिका लक्स, ब्रिटानिया के गुड डे, लॉरियल, तनिष्क, विस्तारा एयरलाइंस और एक्सिस बैंक सहित 23 ब्रांड्स के लिए विज्ञापन करती हैं. दीपिका की नेटवर्थ 103 करोड़ रुपए की है. ट्विटर पर उनके 2.68 करोड़ फॉलोअर हैं. बताया जाता है कि एक फिल्म के लिए वह 10 करोड़ रुपए और विज्ञापन के लिए 8 करोड़ रुपए लेती हैं. दो हफ्तों के लिए रोका विज्ञापन एक मीडिया बाइंग एजेंसी के एग्जिक्यूटिव को मझोले आकार के एक ब्रांड ने कहा कि दीपिका वाले उसके विज्ञापन करीब दो हफ्तों के लिए रोक दिए जाएं. उम्मीद है कि तब तक विवाद ठंडा पड़ जाएगा.' इसके बाद मीडिया बाइंग एजेंसी को दीपिका वाले विज्ञापन रोकने पड़े हैं.  ट्रोल्स के निशाने पर दीपिका अपनी फिल्म 'छपाक' की रिलीज से तीन दिन पहले दीपिका 7 जनवरी को JNU कैंपस गई थीं. गुंडों के हमले में घायल JNU छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष के पास खड़ी दीपिका की तस्वीर वायरल हो गई थी. इस पर जहां उनके साहस की प्रशंसा की गई थी, वहीं कई मंत्रियों, दक्षिणपंथी ट्रोल्स आदि ने उन पर निशाना साधा था.
देविंदर सिंह

बड़ा खुलासा : आतंकियों का अकेला मददगार नहीं है देविंदर सिंह

श्रीनगर :  जम्मू-कश्मीर पुलिस में पाकिस्तानी आतंकवादियों की मदद करने वाला अकेले नहीं है बर्खास्‍त डीएसपी देविंदर सिंह. पुलिस पूछताछ में उसने बड़ा खुलासा किया है. उसने बताया है कि पुलिस बल में तैनात एक और वरिष्‍ठ अधिकारी आतंकवादियों के लिए काम कर रहा है. इस बीच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने देविंदर सिंह से जम्मू-कश्मीर पुलिस का सर्वोच्च वीरता पदक "शेरे-ए-कश्मीर" छीन लिया है. यह पदक उसे 2018 में आतंकवादियों के विरुद्ध कार्रवाई में मिला था.  बता दें कि डीएसपी देविंदर सिंह को हिज्‍बुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों को अपनी कार में जम्‍मू ले जाते हुए गत 11 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था. जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस के सूत्रों के अनुसार देविंदर सिंह को आतंकवादियों को जम्‍मू ले जाने के लिए 10 लाख रुपए दिए गए थे. उन्‍होंने कहा, 'सिंह ने दावा किया है कि एक और वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी आतंकवादियों के साथ मिलकर काम कर रहा है. जांचकर्ताओं ने कहा है कि हम इसकी पुष्टि करेंगे, क्‍योंकि जांच को भटकाने का एक प्रयास भी हो सकता है.' सूत्रों ने कहा कि पूछ-ताछ में देविंदर सिंह ने कबूल किया कि उसने आतंकवादियों की मदद कर बहुत बड़ी गलती की है. उसको अब इस बात का पछतावा हो रहा है कि उसने आतंकवादियों की मदद करके 'बड़ी गलती की है.' नवीद बाबू को जम्‍मू ले गया था देविंदर सूत्रों ने बताया था कि पिछले साल सिंह ने पिछले साल भी हिज्‍बुल के आतंकवादी नवीद बाबू को जम्‍मू ले गया था. सूत्रों ने कहा, 'नवीद ने सिंह को 8 लाख रुपए दिए थे और वह दो महीने तक जम्‍मू में रहा था. 11 जनवरी को जब सिंह को नवीद बाबू और एक अन्‍य आतंकवादी के साथ पकड़ा गया था, तब उसने दावा किया था कि दोनों ही लोग आत्‍मसमर्पण करने वाले थे. जांचकर्ताओं ने कहा है कि देविंदर सिंह झूठ बोल रहा है.' इतना ही नहीं, यह भी बताया जा रहा है कि देविंदर सिंह हिज्‍बुल के रफी नामक आतंकी के संपर्क में भी था, जो लोगों को पाकिस्‍तान ले जाया करता था. सूत्रों ने बताया कि जल्द ही एनआईए की टीम श्रीनगर पहुंच रही है और वह देविंदर सिंह को लेकर दिल्‍ली जाएगी जहां उससे पूछताछ होगी. पुलवामा के त्राल का निवासी है देविंदर सिंह जांच के दौरान यह भी पता चला है कि देविंदर सिंह का ड्रग्‍स माफिया से गहरा संबंध था. देविंदर सिंह पुलवामा के त्राल का रहने वाला है. यह वही इलाका है, जो हिज्‍बुल मुजाहिदीन का गढ़ माना जाता है. आतंकी बुरहान वानी और जाकिर मूसा इसी इलाके के रहने वाले हैं. त्राल में देविंदर सिंह की पैतृक संपत्ति भी है. उसका एक घर जम्‍मू में भी है. सिंह के परिवार में पत्‍नी और दो बच्‍चे हैं. उसकी एक बेटी बांग्‍लादेश से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है. सिंह का बेटा श्रीनगर में पढ़ाई करता है.
इतवारी

नागपुर के इतवारी स्टेशन को टर्मिनल बनाएं : मोटवानी

हावड़ा से आने-जाने वाली सभी ट्रेनों को इतवारी में स्टॉपेज देने की मांग नागपुर : नाग विदर्भ चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि 'जोनल रेलवे सलाहकार समिति' (ZRUCC) के सदस्य प्रताप मोटवानी ने सभा में इतवारी रेलवे स्टेशन को टर्मिनल के रूप में शीघ्र विकसित करने की मांग की है. उन्होंने हावड़ा से अप-डाऊन सभी ट्रेनों को इतवारी में स्टॉपेज देने की भी मांग की है. साथ ही इतवारी स्टेशन में पूर्व द्वार को विकसित करने और संबंधित सुविधाएं बढ़ाने की भी मांग की है. यह मांग उन्होंने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) की ZRUCC की बैठक में की. जोनल समिति की यह बैठक विगत बुधवार, 8 जनवरी को SECR मुख्यालय में महाप्रबंधक गौतम बनर्जी की अध्यक्षता में संपन्न हुई. इस अवसर पर महाप्रबंधक सचिव हिमांशु जैन व सचिव उपमहाप्रबंधक साकेत रंजन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों व छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र राज्य के विभिन्न श्रेणियों व समितियों से नामांकित सदस्य उपस्थित थे. मोटवानी ने इतवारी स्टेशन पर प्लेटफार्म को और चौड़ा और लंबा करने की सलाह दी. उन्होंने बताया कि वर्तमान में इतवारी से शिवनाथ और बिलासपुर इंटरसिटी ट्रेन सेवा शुरू होने और ट्रेन के लंबी होने के कारण यहां असुविधा की स्थिति पैदा हो गई है. प्लेटफार्म छोटा होने से यात्रियों को बारिश और धूप  में बेहद असुविधा हो रही है. उन्होंने यात्रियों को इतवारी से समस्त नागपुर में जाने के लिए रियायती दर पर बस सेवा उपलब्ध करवाने और कुलियों की संख्या बढ़ाने का सुझाव भी दिया. साथ ही नागपुर से छिंदवाड़ा ब्रॉडगेज लाइन अतिशीघ्र पूरी कर दिन में 3  ट्रेनें इतवारी से शुरू करने की जरूरत की ओर भी उन्होंने महाप्रबंधक का ध्यान आकृष्ट किया. मोटवानी ने नागपुर-नागभीड़ नैरोगेज बन्द होने पर चिंता व्यक्त करते हुए अतिशीघ्र ब्राडगेज लाइन का काम शुरू करने आवश्यकता पर बल दिया. इसके साथ ही उन्होंने इतवारी से हावड़ा दुरंतो ट्रेन शुरू करने, तीर्थ स्थली रामटेक से शेगांव और शिरडी तक ट्रेन शुरू करने तथा नागपुर-बालाघाट ट्रेन पुनः शुरू करने की भी मांग रखी. इसके अलावा मोटवानी ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की ZRUCC की मीटिंग 15 माह बाद होने की ओर महाप्रबंधक बनर्जी को ध्यान दिलाते हुए बताया कि इससे वर्तमान समिति का कार्यकाल अब समाप्त होने को है. अतः जोनल समिति का कार्यकाल 2 वर्षो तक बढ़ाने की मांग भी उन्होंने की. बैठक में गाड़ी संख्या 12409/12410 गोंडवाना एक्सप्रेस को प्रतिदिन चलाने, हावड़ा- मुम्बई रूट में बिलासपुर से नागपुर के बीच एक भी ट्रेन हरिद्वार के लिए चलाने का सुझाव भी मोटवानी ने दिया. इसके साथ गाड़ी संख्या 12855/12856 इंटरसिटी एक्सप्रेस और गाड़ी संख्या 18239/18240 शिवनाथ एक्सप्रेस को नागपुर स्टेशन से आगे अजनी स्टेशन तक विस्तार करने की मांग रखी गई. बताया गया कि यह दोनों ट्रेन पहले नागपुर तक चलती थी, लेकिन विगत साल से इनको नागपुर से पहले इतवारी तक ही सीमित कर दिया गया है. जिसके कारण आम यात्रियों को नागपुर मुख्य शहर पहुंचने में अधिक व्यय के साथ भारी असुविधा व कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. मोटवानी ने महाप्रबंधक बनर्जी से आग्रह किया कि जब भी वे नागपुर दौरे पर आएं, 13 लाख व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था...
दीपिका

फिल्म : दीपिका ने ‘छपाक’ से दिखाया दम

*जीवंत शरण, दीपिका पादुकोण JNU में यदि ABVP के नेताओं से गले मिल लेती तो कोहराम नहीं मचता. मसला ये था कि वो वामपंथी नेताओं और उनके साथियों के पास क्यों खड़ी हुई? चंद नेता यह पचा ही नहीं पाते हैं कि केंद्र की मजबूत सत्ता उनके पास है, फिर भी कुछ नामचीन उनका समर्थन करने की बजाए आलोचना करने लगते हैं. लेकिन सिर्फ बाजीगरी से जीवन की नैया लंबे समय तक नहीं चलती है और जब विस्फोट होता है, तो 'छपाक' से भी लोग भयभीत हो जाते हैं. दुष्कर्म और तेजाबी हमले की घटनाएं तेजी से बढ रही है. इस पर अंकुश के लिए 'छपाक' जैसी फिल्मों का परदे पर आना बदलाव की दिशा में एक सार्थक कदम है. इसे हर तरफ से प्रोत्साहन मिलना चाहिए था, लेकिन कुछ नेता इसे 'बेपटरी' करने के प्रयास में लगे हुए हैं. बावजूद इसके फिल्म को सिर्फ समीक्षकों की ही सराहना नहीं मिल रही है, बल्कि दर्शकों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है. 'छपाक' रिलीज के आज चौथे दिन सिनेमा से लेकर राजनीतिक गलियारे में भी खूब चर्चा में है. दीपिका JNU में जाकर रहीं तो मौन, लेकिन राजनीति के कुछ धुरंधरों को यह रास नहीं आया. सत्ता पक्ष के कुछ नेता 'वाचाल' हो गए. 'छपाक' के बहिष्कार का भी ऐलान कर दिया. फिर भी फिल्म ने सिर्फ चार दिनों में ही तकरीबन बीस करोड़ के आंकड़े को छू ही लिया है. दरअसल 'छपाक' से बतौर निर्माता भी दीपिका पादुकोण का नाम पहली बार सामने आया है. जाहिर तौर पर दीपिका के ऊपर फिल्म की जिम्मेदारी और बढ गई. वह एक मंजे हुए खिलाड़ी की तरह विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए फिल्म की सफलता के प्रयास में निरंतर लगी हुई हैं. मेघना गुलजार के निर्देशन में दिल को छू लेने वाली 'छपाक' की कहानी और दीपिका का अभिनय बेहद दमदार है. समाज में एक विकृत वर्ग की अमानवीय हरकतों के कारण जिंदगी कैसे तबाह हो जाती है औऱ अटूट साहस से विपरीत परिस्थितियों के बावजूद समाज में हक से एक युवती के जीने की कला को दर्शाने वाली यह बेहद भावुक फिल्म अपने मिशन में पूरी तरह सफल रही. निश्चित रूप से फिल्म देखने के बाद बहुत सारे लोगों का मन बदलेगा. यही नहीं जिन्होंने कभी बदला लेने के लिए तेजाब को हथियार बनाया होगा, वो भी पश्चात की ताप से गुजरेंगे. 2005 में दिल्ली की युवती लक्ष्मी अग्रवाल पर एक युवक ने एसिड से उसकी सूरत बिगाड़ दिया था. चेहरा झुलस जाने के बाद समाज तो दूर, घर में भी जीना मुश्किल हो जाता है. टूटे हुए आत्मविश्वास, वेदना और जीवन के प्रति हताशा के बाद भी यदि कोई सही राह दिखाने वाला मिल जाए, तो जीवन के प्रति ललक बढ जाती है. दीपिका पादुकोण ने अपने किरदार को यादगार बना दिया है. फिल्म देखते हुए अधिसंख्य दर्शकों की आंखे नम हो जाती हैं.
इम्मा

वेकोलि के सीएमडी एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित

नागपुर : वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक राजीव रंजन मिश्र को पिछले दिन प्रतिष्ठित "इम्मा एक्सीलेंस अवार्ड-2020" से सम्मानित किया गया.   इंडियन माइन मैनेजर्स असोसिएशन ने वेकोलि के सीएमडी मिश्र को "इम्मा एक्सीलेंस अवार्ड-2020" से सम्मानित किया. धनबाद (झारखंड) में पिछले 10 और 11 जनवरी को आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार "माइनिंग इंडस्ट्री : चैलेंज एंड अपोर्चुनिटी" (MICO' 2020) के दौरान यह पुरस्कार दिया गया.  उल्लेखनीय है कि वेकोलि की कार्य-संस्कृति में सकारात्मक बदलाव से कम्पनी के कोयला-उत्पादन और प्रेषण में अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल हुई है. इसी आलोक में सीएमडी मिश्र को उक्त पुरस्कार से नवाज़ा गया. आर.आर. मिश्र ने इस उपलब्धि का श्रेय पूरी टीम वेकोलि को दिया है.
महाराष्ट्र शासन

महाराष्ट्र शासन : मंत्रियों का थम नहीं रहा असंतोष

कांग्रेस के पूर्व सांसद यशवंतराव गड़ाख ने कहा कि अगर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री ऐसे ही लड़ते रहेंगे तो सीएम ठाकरे को इस्तीफा न सौंपना पड़ जाए मुंबई : महा विकास आघाड़ी के महाराष्ट्र शासन में शामिल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस (NCP) के मंत्रियों में बंगले और विभागों को लेकर असंतोष अब सरकार के कामकाज में व्यावधान पहुंचाने लगे हैं. इससे परेशान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अत्यधिक परेशान हो गए हैं. उन्होंने इस्तीफा तक तैयारी दिखा दी है. इसकी पुष्टि आज कांग्रेस के पूर्व सांसद यशवंत राव गड़ाख ने भी की है.   गड़ाख ने ट्विट कर महाराष्ट्र शासन पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि अगर कांग्रेस और NCP के मंत्री बंगलों और विभागों के आवंटन जैसे मुद्दों पर ऐसे ही सरकार के कार्यों में बाधा डालते रहे तो, मुख्‍यमंत्री उद्धव ठाकरे को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. ज्ञातव्य है कि शिवसेना खुद इस बात को स्‍वीकार कर चुकी है कि मंत्री पद को लेकर इस गठबंधन की सरकार में खींचतान चल रही है, जिससे सीएम ठाकरे परेशान हो गए हैं. पिछले 30 दिसंबर को महाराष्ट्र मंत्रिमंडल के विस्तार में 36 मंत्रियों को शामिल किया गया था. हालांकि, मंत्रिपरिषद के सदस्यों की संख्या अब 43 हो गई है जिसमें मुख्यमंत्री भी शामिल हैं. मिली जानकारी के अनुसार विभिन्न दलों के नेताओं ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ मुलाकात के बाद मंत्रियों के विभागों के आवंटन को अंतिम रूप दिया था और सभी मुद्दों को सुलझा भी लिया गया था. कांग्रेस कृषि और सहकारिता जैसे ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित कोई भी विभाग न मिलने के कारण नाराज है. मंत्रिमंडल में विभागों और बंगलों के बंटवारे को लेकर मंत्री खुश नहीं हैं. सरकार के करीब दर्जनभर शिवसेना विधायक भी मंत्रिमंडल पद न मिलने से नाराज चल रहे हैं, तो वहीं कई विधायक अपने कम ओहदे के कारण भी असंतोष जाता रहे हैं. शिवसेना के कुल 14 मंत्री बनाए गए हैं. जिनमें पूर्व सरकार में मंत्री रहे रामदास कदम, रवींद्र वायकर, शिवसेना नेता दिवाकर रावते, दीपक केसरकर मंत्रिमडल में शामिल होने का मौका नहीं मिल पाया है. महाराष्ट्र शासन में विपक्षी भाजपा एक माह से अधिक समय से सत्ता में होने के बावजूद विभागों के आवंटन में देरी के लिए महाराष्ट्र विकास अघाड़ी सरकार पर निशाना साध चुकी है. शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के दो-दो सदस्यों के साथ मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 28 नवम्बर को शपथ ग्रहण की थी. इसके पश्चात 30 दिसंबर को मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया था. ज्ञातव्य है कि तीनों दलों के प्रमुख नेताओं में एनसीपी के अनिल देशमुख को गृह मंत्रालय, शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे को शहरी विकास मंत्रालय, कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरात को राजस्व विभाग, अशोक चव्हाण को पीडब्ल्यूडी मंत्री इसके अलावा शिवसेना नेता और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को पर्यटन और पर्यावरण मंत्रालय सौंपा गया है. साथ ही एनसीपी नेता अजित पवार को वित्त मंत्रालय सौंपा गया है.