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थरूर

थरूर की चुनौती कितनी भारी पड़ेगी दिग्गज नेता खड़गे को..?

*कल्याण कुमार सिन्हा - अशोक गहलोत के ड्रामे के बाद अब अखिल भारतीय कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए होने वाला चुनाव फिर एक नए दिलचस्प दौर में पहुंचता नजर आ रहा है. 30 सितंबर को नामांकन और उसकी जांच के बाद अब मुकाबला कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मापन्ना मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर के बीच है. इसी बीच रविवार को शशि थरूर के एक बयान से चुनावी माहौल में एक नई गर्मी आती दिखने लगी है. थरूर चाहते हैं कि ब्रिटेन के कंजरवेटिव पार्टी के नेता पद के चुनाव की तरह दोनों प्रत्याशियों की बीच सार्वजनिक बहस हो. थरूर ने कहा कि, "वे अपने प्रतिद्वंद्वी मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ सार्वजनिक बहस के लिए तैयार हैं, क्योंकि इससे लोगों की उसी तरह से पार्टी में दिलचस्पी पैदा होगी, जैसे कि हाल में ब्रिटेन में कंजरवेटिव पार्टी के नेतृत्व पद के चुनाव को लेकर हुई थी." शशि थरूर के इस बयान ने खड़गे खेमे में थोड़ी कशमकश देखी जा रही है. अपने गृह राज्य कर्नाटक में "सोलिलाडा शारदार" (अजेय विजेता) रहे खड़गे के लिए थरूर की यह चुनौती थोड़ी भारी जरूर है. अब तक तो थरूर पर पार्टी के वफादार और बुजुर्ग नेता के नाते उनका पलड़ा भारी माना जा रहा है. लेकिन ऐसी सार्वजनिक बहस में उन्हें उतरना पड़ा तो पार्टी के मतदाताओं पर असर पड़ने का अंदेशा उनके पक्ष के लोगों को हो रहा है. ऐसी सार्वजनिक बहस को टालने के प्रयास शुरू हो चुके हैं. इसके लिए पहल भी खड़गे ने की है. प्रतिक्रिया में खड़गे ने कहा, "हम दोनों मिलकर उनके खिलाफ लड़ें, जो महंगाई को बढ़ावा दे रहे हैं, जो बेरोजगारी को को बढ़ावा दे रहे हैं, जो लोगों में झगड़ा करा रहे हैं, जो धर्म को धर्म से लड़ा रहे हैं, जो भाषा के नाम पर झगड़ा करा रहे हैं." उन्होंने कहा, "अगर बहस करनी है, तो हम दोनों मिलकर उनके खिलाफ करें, आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा के खिलाफ हम दोनों लड़ें. आपस के वाद-विवाद से कोई फायदा नहीं है. न देश का फायदा है इसमें, न पार्टी के लिए कोई फायदा है. लड़ना है, हमारी विचारधारा के खिलाफ जो काम कर रहे हैं, उनसे लड़ना है." खड़गे ने कहा, "हमारा संघर्ष भाजपा से है, मोदी-शाह से है. जो लोग देश को बर्बाद कर रहे हैं, समाज को बर्बाद कर रहे हैं, लोगों को बर्बाद कर रहे हैं, उन लोगों के खिलाफ हम दोनों को मिलकर काम करना है. तो एक अपील है, सबसे कि इसमें न पड़ें कि किसने क्या कहा और कौन क्या कह रहा है." जवाब में शशि थरूर ने ट्वीट किया है कि मैं खरगे जी से सहमत हूं कि कांग्रेस में सभी लोगों को एक दूसरे की बजाय भाजपा से मुकाबला करना चाहिए. हमारे बीच कोई वैचारिक मतभेद नहीं है. थरूर ने कहा कि मैं स्पष्ट कर दूं कि मैं खरगे जी से सहमत हूं कि हम सभी को एक-दूसरे के बजाय भाजपा का मुकाबला करना है. हमारे बीच कोई वैचारिक अंतर नहीं है. लेकिन यह भी साफ कर दिया कि 17 अक्टूबर को होने वाला चुनाव हमारे मतदान सहयोगियों के...
प्रजापिता

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी संस्कारी पीढ़ी का निर्माण कर रही : फड़णवीस

विश्वशांति सरोवर में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का स्वर्ण जयंती कार्यक्रम नागपुर : 'स्नान करने से व्यक्ति के शरीर की सफाई होगी. जबकि, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी के माध्यम से पूरे देश में मन को साफ और शुद्ध करने का काम चल रहा है. इस ईश्वरीय विश्वविद्यालय के राजयोगी शिक्षक देश भर में संस्कारी पीढ़ी बनाने का काम करते हैं. हमें इस पर गर्व है.' यह उदगार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में व्यक्त किया. वे नागपुर में ब्रह्माकुमारी की स्वर्ण जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने की. प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय ने विदर्भ में 50 साल पूरे कर लिए हैं. पहले नागपुर में लक्ष्मी नगर, फिर धर्मपेठ, फिर वसंत नगर और अब जामठा क्षेत्र में बड़ा केंद्र 'विश्व शांति सरोवर' बनाया गया है. राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के साथ राजयोगिनी संतोष दीदी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विधायक चंद्रशेखर बावनकुले, विधायक मोहन माटे, पूर्व राज्यसभा सदस्य विजय दर्डा, अजय संचेती, रजनी दीदी, नागपुर से ब्रह्माकुमारी वरिष्ठ राजयोगी शिक्षक, उपमुख्यमंत्री की पत्नी अमृता फड़णवीस, किरीट भंसाली, केंद्र के वरिष्ठ साधक उपस्थित थे. फड़णवीस ने कहा, "भारत का हृदय स्थल नागपुर नगरों में पिछले 50 वर्षों से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी के माध्यम से संस्कारी पीढि़यां बनाने का कार्य हमारी बहनों के माध्यम से चल रहा है. आज भीड़ जमा है. इस भीड़ में कोई भव्यता नहीं है, पवित्रता है, सरलता है, आप हमारे मन को स्वच्छ बनाएं, हम इससे खुश हैं.इस गॉड्स यूनिवर्सिटी की बहनें दुनिया के सभी हिस्सों में शांति लाने के लिए पूरी दुनिया में काम करती हैं. ब्रह्माकुमारी शांति का रास्ता तय करने का काम कर रही है. संसार के अंधकार को दूर करना आवश्यक है, अज्ञान के अंधकार के कारण संघर्ष है. उन्होंने कहा कि उन्हें इस संघर्ष को कम करने और शांति स्थापित करने का पवित्र कार्य करने पर गर्व है." दुनिया भर में हुए शोध और उत्खनन से कई सबूत सामने आए हैं. दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यता भारतीय संस्कृति है. इसलिए भारत दुनिया को विचार दे सकता है. दुनिया भी भारत से यही उम्मीद करती है. इसलिए ब्रह्माकुमारी के माध्यम से देश और दुनिया में शांति बहाल करने का काम कई सालों से चल रहा है, आखिर में उन्होंने कहा कि हम उन्हें इस काम के लिए शुभकामनाएं देते हैं. इस मौके पर पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने भी संबोधित किया. उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी के विचार बहुत पवित्र हैं और उनका काम दुनिया में शांति स्थापित करना है. उनके इस काम से भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना जरूर पूरा होगा. पुरोहित ने कहा, सादा और स्वच्छ जीवन भी भ्रष्टाचार को खत्म कर सकता है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की स्वतंत्रता के अमृत में, यदि प्रत्येक नागरिक सरल और शुद्ध जीवन शैली का पालन करता है, तो हमें विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता. इस मौके पर पूर्व सांसद विजय दर्डा, अजय संचेती ने भी संबोधित किया. प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय विदर्भ में 50 वर्षों से कार्य कर रहा है. वरिष्ठ राजा योगी शिक्षक रजनी दीदी के मार्गदर्शन में,...
नवीन

नवीन अग्रवाल बने महाराष्ट्र कॉलेज रजिस्ट्रार एसो. के उपाध्यक्ष

नागपुर : दादा रामचंद बाखरू सिंधु महाविद्यालय, नागपुर के कुलसचिव नवीन महेशकुमार अग्रवाल महाराष्ट्र राज्य महाविद्यालयीन रजिस्ट्रार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष पद पर निर्विरोध चुने गए हैं. महाराष्ट्र राज्य महाविद्यालयीन रजिस्ट्रार एसोसिएशन महाविद्यालय में कार्य करने वाले कुलसचिवों का राज्य स्तरीय शीर्ष संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य कुलसचिव के साथ-साथ महाविद्यालय के अन्य शिक्षकेतर कर्मचारियों के हित में कार्य करना तथा उनकी समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करना है. नवीन अग्रवाल इससे पूर्व रजिस्ट्रार एसोसिएशन के नागपुर विभाग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. उन्हें राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की ओर से सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार 'आदर्श शिक्षकेतर कर्मचारी पुरस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है. नवीन कुमार अग्रवाल- सूचना अधिकार केंद्र, यशदा (महाराष्ट्र शासन की शीर्ष प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्था), पुणे के अतिथि व्याख्याता (सूचना अधिकार अधिनियम, 2005) रहे हैं. वे सचिवालय, प्रशिक्षण तथा प्रबंध संस्थान (आई.एस.टी.एम.), (कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार द्वारा प्रमाणित) के सूचना अधिकार प्रशिक्षक भी हैं.   अग्रवाल ने कहा कि महाविद्यालयों में कुलसचिव एवं अन्य शिक्षकेतर कर्मचारियों के अधिकांश पद कई वर्षों से रिक्त हैं, इसके साथ ही एक समान जवाबदारी के पदों में वेतन की असमानताएं, शिक्षकेतर कर्मचारियों का प्रशिक्षण कार्यक्रम न के बराबर आयोजित होना जैसी कई समस्याएं सामने हैं, उन समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करना मेरी प्राथमिकता होगी. नवीन अग्रवाल की उपलब्धि पर सिंधी हिंदी विद्या समिति के अध्यक्ष एच.आर. बाखरू, चेयरमैन डॉ. विंकी रूघवानी, महासचिव डॉ. आई.पी. केसवानी, महाविद्यालयीन मामलों के सचिव नीरज बाखरू, महाविद्यालय के कार्यकारी प्राचार्य डॉ. वी.एम. पेंडसे, उपप्राचार्य डॉ. सतीश तेवानी, डॉ. आनद थदानी व डॉ. मिलिंद शिनखेड़े, डॉ. योगेश भूते, डॉ. मुकेश कौशिक, हिस्लॉप कॉलेज के कुलसचिव सुजीव अब्राहम, पोरवाल कॉलेज के कुलसचिव स्वप्निल राठोड़, एलएडी कॉलेज की कुलसचिव दीपिका रेड्डीवार, धरमपेठ कॉमर्स कॉलेज के कुलसचिव संजय हम्बर्डे आदि ने अभिनन्दन किया है. इसके साथ ही दादा रामचंद बाखरू सिंधु महाविद्यालय के शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों ने भी उनका अभिनंदन किया है.
समन्वय

‘समन्वय’ मंत्र है हिंदी सहित सभी 22 राजभाषाओं की समृद्धि का

भाषा और शब्दों की शक्ति एवं श्रेष्ठता पहचानने की जरूरत *कल्याण कुमार सिन्हा- आजादी के 75 साल हो चुके, फिर भी राष्ट्रभाषा हिंदी के साथ देश की अन्य सभी भाषाएं समुचित प्रतिष्ठा पाने से वंचित हैं. हमारे देश की भाषा और संस्कृति, उनकी विविधताएं एक उस सुन्दर बाग की तरह हैं, जिसमें रंग-बिरंगे और विविध प्रजातियों के पुष्प अपनी खुशबू और सौंदर्य की आभा बिखेरती हैं. हमारी भाषाओं की इस बगिया में हिंदी, असमिया, बांग्ला, गुजराती, संस्कृत, पंजाबी, उड़िया, मराठी, मलयालम, कश्मीरी, कन्नड़, तेलुगु, उर्दू, तमिल, सिंधी, कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली, बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली के पुष्प सरीखे मधुर स्वरों की राग-रागिनियां गुंजायमान हैं. लेकिन इसके चारों ओर एक ऊंची दीवार खड़ी है, यह दीवार अंगरेजी की है. अंग्रेजी से कोई गुरेज नहीं. लेकिन इसे बाग का हिस्सा नहीं, दीवार बना दिया गया है. भाषाएं संवाद की माध्यम होती हैं, ये सामाजिक-आर्थिक विकास की भी संवाहक हैं. इनमें समाज और संस्कृतियों को निकट लाने और उनमें एकात्मता के भाव भरने की भी अद्भुत शक्ति भी है. इनकी इस शक्ति को विकास एवं सामाजिक समन्वय के अन्य घटकों अथवा कारकों से कम नहीं आंका जा सकता. भारतीय समाज की अनेक विशेषताओं में यह एक महत्वपूर्ण विशेषता है कि हमारा यह समाज बहुभाषिक भी है. किंतु अपनी भाषाओं की इस ताकत का सदुपयोग हम नहीं कर पाए हैं. यह तथ्य है कि समर्थकों की ताकतवर लॉबी होने और पिछले सवा सौ वर्षो से सत्ता का समर्थन प्राप्त होने के बावजूद अंग्रेजी आज तक हमारे देश में ‘सर्वव्यापी’ नहीं बन पाई. लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी अथवा अन्य दूसरी भारतीय भाषा में भी सर्वव्यापकता एवं सर्वग्राह्यता का अभाव है. भारतीय भाषाओं की शक्ति और श्रेष्ठता की पहचान कर पाने में हमारी विफलता भी हमारे विकास की गति को अवरुद्ध कर रहा है. साथ ही केंद्र और राज्यों के बीच भी संपर्क भाषा अंग्रेजी को बना दिए जाने से निजी क्षेत्र और वाणिज्य-व्यापार के क्षेत्र में भी अंग्रेजी ही संपर्क भाषा बन गई है. भाषा जितनी समृद्ध होती है, उसका समाज उतना ही सुसंस्कृत, गतिमान और शक्तिशाली होता है. भाषा की समृद्धि उसकी ग्रहणशीलता पर निर्भर होती है. भाषा जब अन्य भाषाओं के शब्द और गुणधर्म ग्रहण करती है, तभी वह सर्वसामान्य के लिए स्वीकार्य बनती है. इसमें सर्वव्यापकता के गुण भी आते हैं. ऐसी सर्वव्यापक भाषाएं ही समाज या राष्ट्र के प्रत्येक वर्ग के साथ सफल संवाद स्थापित कराती हैं और समाज या राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक विकास के लाभ तीव्र गति से सामान्य जन तक भी पहुंचाती हैं. भाषा की सर्वव्यापकता, ग्रहणशीलता के मामले में अंग्रेजी है उदाहरण भाषा की सर्वव्यापकता और ग्रहणशीलता के मामले में अंग्रेजी को इसका उदाहरण माना जा सकता है. समस्त यूरोपीय और एशियाई भाषाओं की शक्ति ग्रहण कर उसने अपने को इतना समृद्ध बनाया है कि आज वह पश्चिमी सभ्यता और संस्कृति का वाहन बन विश्व भर में छा गई है और हमारे देश की अस्मिता पर कुंडली जमा कर बैठ गई है. यही कारण है, हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी समेत भारत की सभी 22 राजभाषाएं पंगु ही बनी हुई है. इससे देश की तीन-चौथाई जनता देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्र में...
CJI

CJI, शिंदे के मंच साझा करने पर बिफरी उद्धव सेना, एनसीपी

मुंबई : उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना और सीएम खेमे की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बीच भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) यू.यू. ललित के साथ एक मंच साझा करने को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर उद्धव सेना ने आज रविवार, 11 सितंबर को निशाना साधा है. CJI ललित को शनिवार को मुंबई में एक कार्यक्रम में सम्मानित किया गया, जहां केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू भी महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता देवेंद्र फडणवीस के साथ मौजूद थे. कार्यक्रम में उपस्थित केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने भी मुंबई में भारत के प्रधान न्यायाधीश के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित अन्य सभी लोगों का जिक्र ट्विटर पर किया है. Attend the Felicitation Ceremony of the Chief Justice of India, Justice U.U Lalit ji in Mumbai. The function was attended by CM @mieknathshinde ji, DyCM @Dev_Fadnavis ji, SC Judges Bhushan Gavai ji, Abhay Oka ji, CJ of Bombay HC Justice Dipankar Datta ji & many Judges. pic.twitter.com/C2fIYwPA9L— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) September 10, 2022 जब एकनाथ शिंदे सरकार की वैधता को चुनौती देने के एक गंभीर मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के समक्ष हो, ऐसे में CJI द्वारा अपात्र होने की संभावना वाले व्यक्ति के मंच साझा करने पर उद्धव शिवसेना ने कड़ी आपत्ति जताई है. शिवसेना के प्रवक्ता अरविंद सावंत ने दावा किया कि मानदंडों, नियमों और कानून के अनुसार "इन दिनों कुछ भी नहीं हो रहा".. "यही कारण है कि हम कहते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है." शिंदे ने इस साल जून में शिवसेना नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था, जिसके परिणामस्वरूप ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार गिर गई थी. इसके बाद उन्होंने 30 जून को सीएम के रूप में शपथ ली और फडणवीस ने डिप्टी के रूप में शपथ ली. सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में शिवसेना और गुटों द्वारा दायर याचिकाओं को पांच-न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजा, जिसमें दलबदल, विलय और अयोग्यता से संबंधित कई संवैधानिक प्रश्न उठाए गए थे. मा. सर्वोच्य न्यायालयाच्या घटनापीठासमोर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे आणि त्यांच्या सरकारच्या वैधतेची गंभीर सुनावणी सुरु आहे, असे असताना मुख्यमंत्र्यांनी सर्वोच्य न्यायालयाचे मा. सरन्यायाधीश यांच्यासोबत एका व्यासपीठावर बसणे, हे संकेतांना धरून नाही. pic.twitter.com/3pkPzx2KqY— Jayant Patil- जयंत पाटील (@Jayant_R_Patil) September 11, 2022 इस बीच, महाराष्ट्र एनसीपी अध्यक्ष जयंत पाटिल, जिनकी पार्टी शिवसेना और कांग्रेस के साथ एमवीए का एक घटक है, ने भी कहा कि यह "अनुचित" है कि शिंदे ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ मंच साझा किया है. जब उनकी सरकार की "वैधता" सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ द्वारा सुनी जा रही है. ज्ञात हो कि एकनाथ शिंदे सरकार की वैधता को चुनौती देने के एक गंभीर मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ कर रही है. पाटिल ने कहा, "ऐसे मामले में, यह अनुचित है कि शिंदे का भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ मंच साझा करना, यह प्रोटोकॉल के अनुसार नहीं है." शिंदे फडणवीस सरकारची वैधता आणि कायदेशीरता स्वतः माननीय सर्वोच्च न्यायालयाद्वारे तपासली जात असताना आणि केवळ सध्याचे राज्य सरकारच नाही तर राज्याचे...
दशहरा

दशहरा रैली पर काले बादल, फिर टूटेंगे उद्धव के सांसद, विधायक..!

*कल्याण कुमार सिन्हा-  दावेदारी की सियासत : महाराष्ट्र में शिवसेना के दावेदारों उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच का घमासान जारी है. दोनों नेताओं के बीच असली शिवसेना की दावेदारी के साथ शिवाजी पार्क की दशहरा रैली भी दोनों के अस्तित्व के लिए भी जरूरी हो गया है. इस बीच मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बनाम शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की अदालती जंग पर सुनवाई की तारीख इसी महीने की 27 सितंबर मुकर्रर हो गई है. सुप्रीम कोर्ट का संवैधानिक बेंच राज्य के सियासी संकट से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करने जा रहा है. खबर है कि शिंदे गुट के वकील नीरज किशन कौल की तरफ से मामले में तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया था. चुनाव चिह्न, 16 एमएलए की अयोग्यता पर छिड़ा सियासी युद्ध शिंदे कैंप की तरफ से 'असली शिवसेना' की मान्यता पाने के लिए आवेदन किया गया था. इसमें शिवसेना का चुनाव चिह्न 'तीर और धनुष' दांव पर लगा हुआ है. इस पर शीर्ष न्यायालय ने भारत चुनाव आयोग को पत्र भेजकर आवेदन पर फैसले नहीं करने के आदेश दिए थे. साथ ही कोर्ट ने मामले को 25 अगस्त को सुनवाई के लिए संवैधानिक बेंच के पास भेज दिया था. अब यह सुनवाई 27 सितंबर को होगी, जिसमें शिंदे गुट ने भी 16 विधायकों के खिलाफ जारी अयोग्यता के नोटिस की वैधता पर भी विचार होगा. एक सांसद, दो विधायक सहित 15 शिंदे सेना में आएंगे इस बीच चर्चा है कि शिंदे गुट उद्धव ठाकरे को घुटने पर लाने की तैयारी कर रहा है. बताया गया कि विजयादशमी के मौके पर उद्धव गुट के करीब 15 नेता एकनाथ शिंदे के समर्थन में आ सकते हैं. इन नेताओं में एक सांसद, दो विधायक और लगभग 5 पूर्व पार्षद के होने की बात कही जा रही है. इसके अलावा उद्धव गुट के कुछ और नेता, जो विभिन्न निगमों पर पदासीन हैं या किसी और पद पर हैं, शिंदे गुट के साथ आने को तैयार बताए जा रहे हैं.   शिवाजी पार्क में विजयादशमी की रैली रोकने पर आमादा इतना ही नहीं, एकनाथ शिंदे गुट ने तो उद्धव ठाकरे खेमे को शिवाजी पार्क में विजयादशमी की रैली संबोधित करने से रोकने के लिए भी पूरी फिल्डिंग सजा ली है. शिवाजी पार्क में दशहरा रैली न हो पाए, ऐसे जुगत भी किए जा रहे हैं. 1966 में शिवसेना की स्थापना हुई थी और तब से ही दशहरे की रैली को बाला साहब ठाकरे संबोधित किया करते थे, जैसे हर वर्ष 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री का भाषण होता है. बाद में शिवसेना प्रमुख के नाते उद्धव का भाषण होता आया. यह शिवसेना का बड़ा और महत्वपूर्ण आयोजन होता है. शिवाजी पार्क पर दशहरा रैली का नहीं होना, उद्धव गुट के लिए बहुत बड़ा झटका सिद्ध होगा. एक ओर उद्धव पर शिवसेना चुनाव चिह्न छिन जाने का खतरा मंडरा रहा है, दूसरी ओर दशहरा रैली की परंपरागत जगह से उन्हें महरूम करने की तैयारी है. शिंदे गुट अपने आप को असली शिवसेना साबित करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार नजर आ रहा है. पुराने सहयोगियों पर भी डोरे डालने...
मिशन

मिशन बारामती : उद्धव से निपटने के बाद बीजेपी का अगला खेला

'मिशन' के आगाज से प्रदेश की राजनीति में एक नया जलजला *कल्याण कुमार सिन्हा- राजनीति : महाराष्ट्र की सत्ता पर शिवसेना के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी पिछले दो महीने में प्रभावी राजनीतिक वर्चस्व स्थापित कर चुकी है. एक मिशन की तरह ही पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को उनके 16 विधायकों के साथ उसने हाशिए पर धकेल दिया है. इसके साथ ही शिवसेना की कमान पूरी तरह शिंदे गुट के हाथों में सौंपने की तैयारी भी हो चुकी है. राजनीतिक शतरंज की बिसात पर बीजेपी की चाल पर चाल से ठाकरे गुट पस्त है. अब, बारी- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की और अब, इसके बाद बारी आ रही है- राजनीति के सब से बड़े धुरंधर शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की. शरद पवार की ही तरह उनकी NCP प्रदेश में बड़ी राजनीतिक ताकत है. लेकिन महाराष्ट्र प्रदेश बीजेपी के नए अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने उनके गढ़ पर ही हल्ला बोल दिया है. प्रदेश के अपने दौरे के क्रम में रविवार को पुणे पहुंचे बावनकुले ने NCP सुप्रीमो को खुली चुनौती दे डाली है. सीधा और सपाट इशारा- "बचा सको तो बचा लो अपना गढ़, अगले चुनाव में लोकसभा और विधानसभा की दोनों सीटें बारामती से हम ले जाएंगे." बावनकुले प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बाद दो महीने के प्रदेश दौरे पर हैं. उनके 'मिशन बारामती' ने प्रदेश की राजनीति में एक नया जलजला पैदा कर दिया है. बारामती का NCP अभेद्य दुर्ग रहा है. पवार घराने के साम्राज्य में खुलेआम सेंध लगाने के ऐलान से NCP खेमा उद्वेलित हो चुका है, मगर हतप्रभ है. वहीं बीजेपी और शिंदे गुट के शिवसेना के रग-रग में नए जोश और उत्साह का संचार होने लगा है. बारामती का आशय पूरे प्रदेश से पवार के इस अभेद्य दुर्ग के बारे में इससे पहले किसी ने ऐसी हिमाकत करने का साहस किया भी तो उसे मुंह की ही खानी पड़ी है. लेकिन इस बार की चुनौती भारी है. बीजेपी का इस मिशन का नाम 'मिशन बारामती' भले हो, लेकिन यहां बारामती का आशय पूरे प्रदेश से है, तो मिशन बारामती मतलब- पूरे प्रदेश से NCP का सफाया. शरद पवार 1967 से 2009 तक बारामती प्रतिनिधित्व करते रहे. 2009 से उनकी पुत्री सुप्रिया सुले उनकी उत्तराधिकारी के रूप में बारामती की लोकसभा सदस्य हैं. उसी तरह उनके भतीजे अजित पवार भी NCP से 1995 से लगातार बारामती विधानसभा चुनाव क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं. पवार चुनावी राजनीति से भले ही संन्यास ले चुके हों, लेकिन पुणे जिले के इस बारामती क्षेत्र ही नहीं, पुणे सहित प्रदेश के सभी जिलों में उनका दबदबा कायम रहा है. 2019 के लोकसभा चुनाव में सुप्रिया सुले के विरुद्ध बीजेपी जोर लगा चुकी है. अब एक बार फिर नए सिरे से इस दुर्ग को भेदने की तैयारी कर रही है. किसी का गढ़, किसी का वर्चस्व हमेशा नहीं रहता बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने अपनी पार्टी का प्रहार इन शब्दों में व्यक्त किया है- “देश में कई किले नष्ट कर दिए गए हैं. जब संगठन मजबूत होता है तो लड़ने की ताकत आती है. जब वह शक्ति आती है तो कई अच्छे किले नष्ट हो...
मारबत

मारबत और पोला की धूम मची नागपुर और विदर्भ में

नागपुर : नागपुर शहर शनिवार, 27 अगस्त को 142 वें वर्ष भी परम्परागत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मारबत जुलूस का साक्षी रहा. साथ ही विदर्भ के परम्परागत पोला पर्व शुक्रवार को संपन्न होने के बाद, शनिवार को ही तान्हा पोला भी मनाया गया. मारबत जुलूस की परम्परा नागपुर के तेली समाज के लोगों ने शुरू किया था. यह वार्षिक आयोजन आगे चल कर आजादी की लड़ाई में अंग्रेजी सत्ता और गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की प्रेरणा भी बन गया था. (नागपुर- नागपूरातील मारबत ही प्रथा १४२ वर्ष जुनी आहे. भोसले कालीन ही प्रथा आहे पोळ्याच्या पाडव्याच्या दिवशी साजरी केली जाते. मागील कोरोनाच्या २ वर्षे हे काढण्यात आली नव्हती. परंतु यंदा ती जल्लोषात होत असल्याने म्हणून आज लोकांमध्ये उत्साह दिसत आहे.) Historical Marabat procession begins in Nagpur. https://t.co/feTD1KZ8fD— RIGHTS PLATFORM (@platform_rights) August 28, 2022 बुराई की प्रतीक काली मारबत और अच्छाई की प्रतीक पीली मारबत नागपुर शहर में 142 वर्ष पूर्व शुरू किया गया 'बुराई की प्रतीक काली मारबत और अच्छाई की प्रतीक पीली मारबत' का जुलूस अब विदर्भ के अन्य शहरों की सांस्कृतिक विरासत के रूप में शामिल हो गया है. नागपुर में इस बार भी "इड़ा पिड़ा रोगाराई... दुष्ट प्रवृति आणि संकटानां घेऊन जा रे मारबत" अर्थात 'रोग दुःख कुप्रवृतियां हर तरह के संकट साथ ले जाओ री मारबत" की गूज सुनाई दी. शनिवार को नागपुर के जग्गनाथ बुधवारी से बुराई की प्रतीक काली मारबत के विशालकाय पुतले का जुलूस निकला और इतवारी के श्रीदेवस्थान से अच्छाई और भलाई की प्रतीक भव्य पीली मारबत के साथ लोगों का हुजूम आगे बढ़ा. दोनों मारबत का मिलन नेहरू पुतला चौक पर हुआ. बड़गों (काली मारबतों) के साथ ढोल-ताशों और डीजे के लय पर नाचते-थिरकते जनसैलाब को देखने के लिए इतवारी से बडकस चौक तक हजारों की संख्या में सपरिवार लोग उनका उत्साह बढ़ाते नजर आए. कुल बुराई के बैनरों के साथ 12 बड़गे निकाले गए थे. इस वर्ष बुराइयों की सूची में महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को शामिल किया गया था. Nagpur: BJP leader Munna Yadav seems hit lightly by a bullock during Pola Celebrations at Kachipura a day ago. pic.twitter.com/B00pubZcnP— Anjaya Anparthi (@anjayaaTOI) August 27, 2022 किसानों के मित्र बैल जोड़ियों का सम्मान पर्व- पोला इन दोनों सांस्कृतिक और ऐतिहासिक लोक पर्व के प्रति आस्था और जुड़ाव का अद्भुत दृश्य पिछले दो वर्षों के कोरोना महामारी के बाद अपनी पूरे शबाब में नजर आई. पोला पर किसान अपने कृषि कार्य के सबसे प्रिय और निकट सहयोगी अपने बैल जोड़ियों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करते हुए उन्हें नहला-धुला सजाते हैं और उनकी पूजा कर उनके प्रति अपने प्रेम प्रदर्शित करते हैं. सामूहिक रूप से मनाए जाने वाला यह पर्व मुहल्लों और गांवों में उत्सव का रंग भर देते हैं. Tanha pola in Nagpur.Small kids gather with their nandi toy made of wood.They decorate nandi and dress in traditional attire.The best decorated nandi gets prize from the organisers.After this kids visit neighborhood where they get money or chocolate’s pic.twitter.com/WJWkptlBLd— ÊcosŸstem (@Team_Ecosystem) August 27, 2022 लकड़ी के बैलों के साथ बच्चे मनाते हैं तान्हा पोला इसी तरह दूसरे दिन अन्नदाता किसान अपने बच्चों...
प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर वैश्विक रेटिंग में शीर्ष पर

विश्व के शीर्ष नेताओं की लोकप्रियता पर नजर रखने वाली संस्था 'मॉर्निंग कंसल्ट' का ताजा सर्वेक्षण   नई दिल्ली : वैश्विक स्तर पर दुनिया के सत्ताधारी शीर्ष नेताओं की लोकप्रियता पर नजर रखने वाली संस्था 'मॉर्निंग कंसल्ट' के ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, 75 प्रतिशत की अनुमोदन रेटिंग के साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर वैश्विक रेटिंग में शीर्ष पर हैं. Global Leader Approval: *Among all adultsModi: 75% López Obrador: 63% Draghi: 54% Bolsonaro: 42% Biden: 41% Trudeau: 39%Kishida: 38%Macron: 34% Scholz: 30% Johnson: 25% ...view the full list: https://t.co/wRhUGsLkjq *Updated 08/25/22 pic.twitter.com/1v8KHIEuHj— Morning Consult (@MorningConsult) August 26, 2022 पीएम मोदी के बाद मेक्सिको के राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्राडोर और इटली के प्रधानमंत्री ड्रागी क्रमशः 63 फीसदी और 54 फीसदी रेटिंग के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे. 22 विश्व नेताओं की सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति को 41 प्रतिशत रेटिंग के साथ पांचवें स्थान पर रखा गया है. बाइडेन के बाद कनाडा के राष्ट्रपति ट्रुडो 39 प्रतिशत और जापानी प्रधानमंत्री किशिदा 38 प्रतिशत पर हैं. 'मॉर्निंग कंसल्ट' पॉलिटिकल इंटेलिजेंस वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, ब्राजील, जर्मनी, भारत, मैक्सिको, नीदरलैंड, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्वीडन में सरकारी नेताओं और देश के प्रक्षेपवक्र (Trajectories) की अनुमोदन रेटिंग पर नजर रखता रहा है. इस बार भी दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं के सर्वेक्षण की सूची में नरेंद्र मोदी सबसे 75% रेटिंग के साथ ऊपर हैं. इससे पहले जनवरी 2022 और नवंबर 2021 के सर्वेक्षण में भी दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं की सूची में प्रधानमंत्री मोदी शीर्ष पर थे. यह मंच राजनीतिक चुनावों, निर्वाचित अधिकारियों और मतदान के मुद्दों पर रीयल-टाइम मतदान डेटा प्रदान करता है. मॉर्निंग कंसल्ट प्रतिदिन 20,000 से अधिक वैश्विक साक्षात्कार (Interview) आयोजित करता है. वैश्विक नेता और देश प्रक्षेपवक्र डेटा किसी दिए गए देश में सभी वयस्कों के सात-दिवसीय चलती औसत पर आधारित है, जिसमें त्रुटि का अंतर +/- 1-4 प्रतिशत के बीच है. संयुक्त राज्य अमेरिका में, सर्वेक्षण का औसत नमूना आकार लगभग 45,000 है. अन्य देशों में, नमूने का आकार लगभग 500-5,000 के बीच होता है. वयस्कों के राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधि नमूनों के बीच सभी साक्षात्कार ऑनलाइन आयोजित किए जाते हैं. भारत में किए गए सर्वेक्षण में साक्षर आबादी का ही प्रतिनिधित्व है. हर देश में उम्र, लिंग, क्षेत्र और कुछ देशों में आधिकारिक सरकारी स्रोतों के आधार पर और  शिक्षा के आधार पर भी सर्वेक्षणों को महत्व दिया जाता है. संयुक्त राज्य अमेरिका में, सर्वेक्षणों को नस्ल और जातीयता के आधार पर भी महत्व दिया जाता है.   साक्षात्कार में उत्तरदाता इन सर्वेक्षणों को अपने देशों के लिए उपयुक्त भाषाओं में पूरा करते हैं.
क्षेत्रीय

क्षेत्रीय ईपीएफओ कार्यालयों पर पेंशनरों का जोरदार प्रदर्शन

नागपुर में विभिन्न जिलों के 600 वयोवृद्ध पेंशन भोगियों ने कार्यक्रम में भाग लिया नागपुर : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सभी 27 राज्यों के क्षेत्रीय आयुक्त कार्यालयों पर ईपीएस-95 पेंशनरों ने जोरदार देशव्यापी धरना प्रदर्शन 25 अगस्त को किया. इसके साथ ही ईपीएफओ के सभी क्षेत्रीय आयुक्तों को अपनी मांगों का निवेदन सौंपा. नागपुर के क्षेत्रीय आयुक्त शेखर कुमार को भी उनके तुकड़ोजी पुतला चौक स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पेंशनरों के विभिन्न संगठनों के पांच प्रतिनिधियों ने निवेदन सौंपा. साथ ही कार्यालय के समक्ष नागपुर के अलावा वर्धा, चंद्रपुर, यवतमाल, भंडारा और गोंदिया जिले के विभिन्न तालुका से लगभग 600 पेंशनरों ने प्रदर्शन किया. प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय आयुक्त शेखर कुमार से पेंशन से संबंधित सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के फैसलों को ईपीएफओ द्वारा दरकिनार किए जाने पर क्षोभ प्रकट किया. उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि सरकार और ईपीएफओ उस भगत सिंह कोश्यारी कमेटी की अनुशंसा को लागू नहीं होने दे रही, जिसे केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार 2014 में सत्ता में आने की पूर्व चुनावों के दौरान बार-बार वादा करती रही कि सरकार में आते ही वह कमेटी की सिफारिशें तुरंत लागू करेगी. प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने इस बात पर भी नाराजगी प्रकट की कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा केरल हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराने के बाद भी ईपीएफओ अनावश्यक रूप से फैसले का रिव्यू कराने की चाल चल कर पेंशनरों को वैधानिक हक से वंचित करने का प्रयास कर रहा है. और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में झूठी दलीलें पेश कर देश की सर्वोच्च अदालत को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने निजी कंपनियों के ठेका मजदूरों के भविष्य निधि मामले भी शीघ्र सुलझाने की मांग की. नागपुर के क्षेत्रीय आयुक्त शेखर कुमार ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि उनकी मांगे वे केंद्र सरकार के श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ मुख्यालय तक पहुंचाएंगे. प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय महासचिव, निवृत्त कर्मचारी( 1995) राष्ट्रीय समन्वय समिति प्रकाश पाठक, राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष, निवृत्त 1995) राष्ट्रीय समन्वय समिति भीमराव डोंगरे, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, निवृत कर्मचारी (1995) राष्ट्रीय समन्वय समिति अरुण कारमोरे, उपाध्यक्ष, एम.एस.आर.टी.सी. संघटना, मुम्बई हरिश्चन्द्र जयपुरकर और महिला प्रतिनिधि, एम.एस.आर.टी.सी. संघटना, मुम्बई .श्रीमती कुसुमताई उदार शामिल थे. इसके बाद प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने धरना प्रदर्शन में हिस्सा लेने आए पेंशनरों को चर्चा की जानकारी दी. धरना प्रदर्शन में नागपुर, वर्धा, चंद्रपुर, यवतमाल, भंडारा और गोंदिया जिले के विभिन्न तालुका से लगभग 600 पेंशनरों नई हिस्सा लिया. उनसे अपील की गई कि सरकार और ईपीएफओ द्वारा उनकी मांगों पर तत्काल उचित फैसला नहीं लिया तो सभी पेंशनर नई दिल्ली में जंतर-मंतर, रामलीला मैदान और संसद भवन के आगे 6, 7 और 8 दिसम्बर को मोर्चा में शामिल रहने के लिए तैयार रहें.