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राजद्रोह कानून

राजद्रोह कानून के तहत कोई नया केस दर्ज करने पर रोक

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, राजद्रोह कानून धारा 124A पर पुनर्विचार करने की इजाजत सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को लेकर चार अहम बातें कही- - पहला, फिलहाल कोई मुकदमा इस मामले में दर्ज नहीं होगा. - दूसरा, पेंडिग मामलों में जो मुकदमे इस धारा के तहत दर्ज है उन्हे ठंडे बस्ते में रखा जाएगा. - तीसरा, जो लोग 124A के तहत जेल में बंद हैं, वो जमानत के लिए कोर्ट में जाएं. - चौथा, ये सारे आदेश तब तक लागू रहेंगे, जब तक कोर्ट कोई अगला आदेश न दे या फिर सरकार इस पर कोई फैसला न ले ले. नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला देते हुए राजद्रोह कानून (Sediton Law) के तहत कोई नया केस दर्ज करने पर रोक लगा दी. चीफ जस्टिस एन.वी. रमणा की बेंच ने केंद्र सरकार को देशद्रोह कानून धारा 124A पर पुनर्विचार करने की इजाजत देते हुए कहा कि इस प्रावधान का उपयोग तब तक करना उचित नहीं होगा, जब तक कि इस पुनर्विचार की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती. उन्होंने उम्मीद जताई कि 124ए पर फिर से विचार की प्रक्रिया पूरी होने तक न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार इसके तहत केस दर्ज करेगी. कोर्ट ने यह भी कहा कि जो लोग 124A के तहत जेल में बंद हैं, वो जमानत के लिए कोर्ट में जाएं. राजद्रोह कानून (Sediton Law) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने के मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. अब प्रावधान की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जुलाई में सुनवाई होगी. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में दी दलील केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि जब तक केंद्र ब्रिटिश काल के कानून की फिर से जांच नहीं करता तब तक राजद्रोह कानून के प्रावधान पर रोक लगाना सही दृष्टिकोण नहीं हो सकता है. इसके साथ ही उन्होंने ने यह भी बताया कि हमने राज्य सरकारों को जारी किए जाने वाले निर्देश का मसौदा तैयार किया है और उसके मुताबिक राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश होगा कि पुलिस अधीक्षक (SP) या उससे ऊपर रैंक के अधिकारी की मंजूरी के बिना राजद्रोह संबंधी धाराओं में एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी.
जमशेदपुर

जमशेदपुर : टाटा स्टील के कोक प्लांट में धमाका, तीन कर्मचारी घायल

रांची : जमशेदपुर में टाटा स्टील के कोक प्लांट में शनिवार की सुबह 10.20 बजे जोरदार धमाका हुआ. इससे भीषण आग लगी गई. अग्नि शमन दस्ते की कई दमकलों को आग बुझाने में लगाया गया है. पता चला है कि आग में झुलसकर कुछ लोग घायल हो गए हैं.  टाटा स्टील के अनुसार  तीन ठेका (अनुबंध) कर्मचारियों को मामूली चोटें आईं हैं और उनका प्राथमिक उपचार किया गया है. इस घटना पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी ट्वीट किया है. उन्होंने पूर्वी सिंहभूम की डिप्टी कमिश्नर को टैग करते हुए कहा, "जमशेदपुर में टाटा स्टील प्लांट में ब्लास्ट होने की खबर मिली है. जिला प्रशासन, टाटा स्टील प्रबंधन के साथ सामंजस्य बनाकर घायलों के त्वरित इलाज हेतु कार्यवाई कर रही है." जमशेदपुर में टाटा स्टील प्लांट में ब्लास्ट होने की खबर मिली है। जिला प्रशासन, टाटा स्टील प्रबंधन के साथ सामंजस्य बनाकर घायलों के त्वरित इलाज हेतु कार्यवाई कर रही है।@DCEastSinghbhum— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) May 7, 2022 इस अग्निकांड मामले में पहले टाटा स्टील की ओर से भी बयान जारी किया गया है. इसके मुताबिक, कोक प्लांट की बैटरी में विस्फोट हुआ था. फायर टेंडर तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया. 2 ठेका कर्मचारियों को मामूली चोटें आईं हैं और एक कर्मचारी ने सीने में दर्द की शिकायत की है, उनकी हालत स्थिर है. देर शाम टाटा स्टील की ओर से एक और बयान जारी किया गया. इसके मुताबिक, तीन ठेका (अनुबंध) कर्मचारियों को मामूली चोटें आईं हैं और उनका प्राथमिक उपचार किया गया है. इनमें से दो को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि एक का फिलहाल इलाज चल रहा है. फैक्ट्री में चल रहे उत्पादन पर कोई असर नहीं है. बंद पड़े बैट्री नंबर-5 को हटाने का काम चल रहा था इस हादसे के बारे में टाटा कॉरपोरेट कम्युनिकेशन की ओर से बताया गया है कि जब धमाका हुआ, तब बंद पड़े बैट्री नंबर 5 एरिया में उसे हटाने का काम चल रहा था. इसी दौरान अचानक धमाका हो गया. धमाके के समय वहां पर काम कर रहे दो कैजुअल (ठेका) मजदूरों के पैर में चोटें आई हैं. इसी तरह से दूर में खड़े एक कर्मचारी गैस रिसाव से बेहोश हो गया. घटना के बाद तत्काल तीनों को इलाज के लिए टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) में भर्ती कराया गया है.
टाटा-इतवारी-टाटा

टाटा-इतवारी-टाटा पैसेंजर अब एक्सप्रेस, किराया तीन गुना

जमशेदपुर (झारखंड) : रेलवे ने कोविड में बंद ट्रेनों को चलाने की घोषणा कर दी है. अनेक पैसेंजर ट्रेनों को एक्सप्रेस में बदलकर चलाने की घोषणा की गई है. इसमें टाटा से चलने वाली इतवारी पैसेंजर भी शामिल है. 5 मई से टाटा-इतवारी-टाटा पैसेंजर की जगह यह ट्रेन टाटा-इतवारी-टाटा एक्सप्रेस (18109, 18110) बनकर चल रही है. इसमें किराया एक्सप्रेस का लगा रहा है, जबकि ट्रेन का कोच वही होगा, पूर्व के निर्धारित मार्ग व ठहराव भी वही रहेंगे. समय भी पूर्व की तरह ही लगेगा. हां, अब उसका किराया एक्सप्रेस का वसूला जाएगा, जो छोटे स्टेशनों को जाने वाले यात्रियों के लिए तीन गुना तक हो सकता है. प्रतिदिन यह गाड़ी नंबर 18110 इतवारी-टाटानगर मध्यरात्रि 12.05 बजे इतवारी स्टेशन से प्रस्थान करेगी. यह गाड़ी रात 8.40 बजे टाटानगर पहुंचेगी. इसी तरह ट्रेन नंबर 18109 टाटानगर-इतवारी एक्सप्रेस टाटानगर से सुबह 9.10 को चल कर इतवारी स्टेशन पर सुबह 4.45 बजे पहुंचेगी.  पैसेंजर ट्रेन को ही एक्सप्रेस बनाने का कड़ा विरोध टाटा-इतवारी के बीच एक्सप्रेस ट्रेन का परिचालन स्वागत योग्य है, लेकिन पैसेंजर ट्रेन को ही एक्सप्रेस बनाकर तीन गुना किराया लेना पूरी तरह से अनुचित व गलत है. झारखंड के नेताओं ने इसका कड़ा विरोध किया है. उन्होंने मांग की है कि पैसेंजर ट्रेन ही चलाई जाए, जिसका स्थानीय लोग, स्टूटेंड, बीमार यात्रियों, महिलाओं, कामगारों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने का उपयोग करते थे. ट्रेनों को सुपरफास्ट बनाकर इसी तरह बढ़ाया था किराया इससे पहले भी इसी तरह के एक निर्णय में रेलवे ने देश भर की कई ट्रेनों को एक साथ सुपरफास्ट बना दिया था. तब भी बिना किसी बदलाव के ट्रेन के किराया में सुपरफास्ट चार्ज जोड़ दिया गया और यात्रियों से अधिक वसूली की जाने लगी. इस तरह एक बार फिर से बिना किसी सुविधा अथवा बदलाव के पैसेंजर ट्रेनों को एक्सप्रेस का नाम देकर रेलवे ने अतिरिक्त राजस्व जुटाने का इंतजाम कर लिया है. हालांकि इसका विरोध भी शुरू हो गया है. कई यात्रियों ने इस संबंध में जानकारी लेने के बाद कहा कि रेलवे ने बिना किसी अतिरिक्त सुविधा के यात्रियों पर किराया का अतिरिक्त बोझ डाल दिया और कहने के लिए ट्रेन चलाकर सुविधा देने के नाम पर वाहवाही पाने का प्रयास किया जा रहा है.
स्टार बस

स्टार बस में लगी आग, 35 यात्री बाल-बाल बचे 

40 दिनों में लोकल स्टार बस में आग लगाने की तीसरी घटना  नागपुर : नागपुर के सीताबर्डी स्थित मुख्य बस स्टैंड- मोर भवन से खापरखेड़ा जा रही लोकल स्टार बस के इंजन में रिजर्व बैंक चौक के समीप अचानक आग लग गई. प्रातः 9 बजे हुए इस हादसे में बस ड्राइवर बोनट से इंजन में आग देखते ही तुरंत बस को मार्ग के किनारे कर रोक दिया और बस में सवार सभी यात्रियों को तुरंत बस से बाहर उतरने को कहा. https://twitter.com/i/status/1522077832897196032 रिजर्व बैंक चौक के समीप जलती हुई स्टार बस का मराठी दैनिक लोकमत द्वारा ट्विटर पर जारी वीडियो. बस में सवार सभी 35 यात्री बिना समय गंवाए बस से बाहर आ गए. इसके साथ यही बस धू-धू कर जलने लगी. जानकारी मिलते ही अग्निशमन दस्ता मौके पर पहुंचा, दस्ते ने आग पर काबू तो पा लिया, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जल कर खाक हो चुकी थी. उल्लेखनीय है कि पिछले 40 दिनों में यह तीसरी स्टार बस है, जिसमें इस प्रकार अचानक  है. चलाती बस में आग लगाने की लगातार हो रहे हादसे से यात्रियों के जीवन की सुरक्षा पर प्रश्न चिह्न उठ खड़ा हो गया है.    बढ़ती गर्मी से आग लगने की घटना भी बढ़ती जा रही है. 40 दिनों में यह तीसरी स्टार बस है, जो अचानक ऐसे आग का शिकार बनी. बार-बार स्टार बसों में आग लगाने की घटना पर चिंता की बात हो गई है. इससे पूर्व की गर्मियों में ऐसा हादसा कभी नहीं हुआ है. बसों के रख-रखाव में लापरवाही ही ऐसी घटना का कारण बताया जा रहा है. 
देश

देश के विधायिका प्रमुख, न्याय प्रमुख जब भाषा प्रश्न पर हों एक मत..!

फिर भी भाषायी जटिलता की कुटिलता में फंसी हुई है देश की न्यायिक प्रणाली और न्यायिक फैसले *कल्याण कुमार सिन्हा- विश्लेषण : हाल ही में चेन्नई के एक आयोजन में देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एन.वी. रमना ने भी कहा था कि 'न्यायिक प्रक्रिया शादी के मंत्रों जैसी जटिल नहीं होनी चाहिए, जिसे लोग समझ ही न सकें.' इसी बात की पैरवी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल के मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन में की है. पिछले शनिवार, 30 अप्रैल को सम्मलेन का उदघाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 'न्याय जनता से जुड़ा हुआ होना चाहिए और जनता की भाषा में होना चाहिए.' इसी कार्यक्रम में फिर सीजेआई रमना ने भी भारतीय न्याय प्रणाली के भारतीयकरण पर जोर देते हुए उच्चतम और उच्च न्यायालयों में स्थानीय भाषा में कार्यवाही की आवश्यकता को रेखांकित किया. देश की विधायिका के प्रमुख और दूसरी ओर न्यायपालिका के प्रमुख जब न्यायालयों की भाषा के प्रश्न पर एक मत हों, तब देश की न्याय प्रणाली को देश की 130 करोड़ जनता के साथ जोड़ दिए जाने से और अच्छी बात क्या हो सकती है. देश के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों के लिए संबंधित राज्य की भाषा पर कमान अनिवार्य है. न्यायिक सेवा के अधिकारियों और न्यायाधीशों के लिए भी तो यह जरूरी होना चाहिए. वकीलों के लिए तो यह और भी जरूरी है, चाहे वे भारी-भरकम फीस लेने वाले देश की सर्वोच्च अदालत में मुकदमों की पैरवी करने वाले क्यों न हों. अंग्रेजी की गुलामी...शर्म की बात है..! देश अंग्रेजों की गुलामी से तो मुक्त हो गया, लेकिन देश की जनता अंग्रेजी की गुलामी से मुक्त नहीं हो पाई है. शर्म की बात है, अंग्रेजी को आजादी के 74-75 साल बाद भी हुक्मरानों ने देश की वैसी बहुसंख्य जनता पर लाद रखी है, जिनका अंग्रेजी से दूर-दूर तक का भी नाता नहीं है. अंग्रेजी के न्यायिक फैसले अधिकांश मामलों में बरगलाने और गुमराह कर उन्हें धनशोधन का शिकार भी बनाते रहे हैं. जब सीजेआई रमना यह कहते हैं कि न्यायिक प्रक्रिया 'शादी के मंत्रों जैसी जटिल' नहीं होनी चाहिए तो निश्चय ही उनका यह अनुभव सिद्ध ज्ञान रहा होगा कि कैसे अंग्रेजी के माध्यम से चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया जनसाधारण के लिए भयावह होती जा रही है. भाषा की बात करें तो यह मानना होगा कि देश की लगभग आधी जनसंख्या हिंदीभाषी है. लेकिन हिंदी देश के सभी राज्यों के जनसाधारण की भाषा नहीं है. भाषा तो हमारे देश के राज्य रूपी बागों के अलग-अलग रंगों, खुशबू और अलग-अलग छवि वाले सुंदर-सुंदर फूलों की तरह हैं. हमारे देश में अनेक समृद्ध भाषाएं हैं और उनकी भाषा-भाषी अंग्रेजी के मोहताज नहीं हैं. वहां हिंदी को लादने की जरूरत भी नहीं है, न्यायिक प्रक्रिया में तो बिलकुल ही नहीं. अहिन्दी भाषी राज्यों में हिंदी जानने की इच्छा पैदा करना ही काफी होगा. संविधान के प्रावधान संविधान निर्माताओं ने कम से कम 15 वर्षों तक अंग्रेजी में राजकीय कामकाज की भी मंजूरी दी थी. उन्होंने अपेक्षा की थी कि 1965 के बाद अंग्रेजी में कामकाज बंद हो जाएगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं....
हाईमास्ट

हाईमास्ट गिरा चलती कार पर, बाल-बाल सपत्नीक बचे कृषि अधिकारी

*अश्विन शाह- वर्धा (महाराष्ट्र) : चलती हुई कार पर हाईमास्ट का गिरना अपने आप में एक बड़ा हादसा है. लेकिन इस हादसे में दैव योग से कोई प्राण हानि नहीं हुई. किस्मत से कार में सवार पति-पत्नी बाल-बाल बच गए. यह घटना वर्धा शहर के सवांगी मेघे के व्यस्त टी-प्वाइंट के पास की है. गनीमत रही कि यह हाईमास्ट कार के बोनट पर गिरा. जिससे कार में सवार वर्धा के जिला कृषि अधीक्षक और उनकी पत्नी बाल-बाल बच गए. रविवार की शाम इलाके में तेज आंधी चली. इसी दौरान वर्धा जिला कृषि अधीक्षक अनिल इंगले अपनी पत्नी के साथ वर्धा के पालक मंत्री के जनता दरबार का समापन कर जन्मदिन की पार्टी के लिए अमरावती जा रहे थे. इसी बीच सवांगी मेघे के टी-प्वाइंट इलाके में हाईमास्ट अचानक कार के बोनट पर आ गिरा. हाई मास्ट के गिरते ही कार रुक गई. सौभाग्य से, इंगले और उनकी पत्नी को किसी प्रकार की चोट भी नहीं आई. हालांकि, इस घटना को देखने वालों के दिल दहल गए. इस घटना के बाद वर्धा-सवांगी मार्ग पर यातायात कुछ देर के लिए बाधित हो गया. कई लोगों ने लगभग पचास फीट ऊंचे हाई मास्ट को कार पर गिरते देखा. घटना के बाद कुछ देर के लिए दर्शक स्तब्ध रह गए और देखने वालों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई. इस घटना में सही-सलामत कृषि अधिकारी और उनकी पत्नी को देख नागरिक भी 'देव तारी त्याला कोण मारी' (जिसकी रक्षा भगवान करें, उसे कौन मार सकता है),  कहते नजर आए. कितने सुरक्षित हैं ऐसे हाईमास्ट, रखरखाव की जवाबदेही किसकी? रात्रि में सड़कों को रोशन रखने के लिए चौक पर काफी ऊंचे-ऊंचे लौह मस्तूल लगाए गए हैं. लेकिन, इस हादसे के बाद सवाल यह उठता है कि क्या ऐसे तूफान में हाई मास्ट सुरक्षित हैं..? इस हाई मास्ट को जमीन पर बनाए गए सीमेंट के आधार से जोड़ने वाले नटबोल्ट जंग खाए हुए दिखते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि इसकी देखभाल की व्यवस्था कौन करता है? और इसे दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी किसकी है..?
जवाहरलाल दर्डा

जवाहरलाल दर्डा जन्मशती पर जारी होगा सौ रुपए का सिक्का

100वीं जयंती पर दो जुलाई 2023 को स्मारक सिक्का जारी की जाएगी नागपुर : दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी, लोकमत समाचार पत्र समूह (अब लोकमत मीडिया) के संस्थापक एवं महाराष्ट्र सरकार के मंत्री रहे स्व. जवाहरलाल दर्डा की जन्मशती के अवसर पर भारत सरकार सौ रुपए का स्मारक सिक्का जारी करेगी. इस संबंध में वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की ओर से पिछले माह 26 अप्रैल, 2022 को एक अधिसूचना जारी की गई. जवाहरलाल दर्डा की 100वीं जयंती पर दो जुलाई 2023 को स्मारक सिक्का जारी किए जाने की उम्मीद है. स्मारक सिक्का होने के चलते इसे बाजार में नहीं उतारा जा सकेगा. सिक्का जारी होने के बाद इसे भारत सरकार की टकसाल द्वारा बेचा जाएगा. ज्ञातव्य है कि भारत सरकार स्व. जवाहरलाल दर्डा की स्मृति में 2 दिसंबर 2005 को 5 रुपए का डाक टिकट भी जारी कर चुकी है. जवाहरलाल दर्डा कांग्रेस पार्टी के एक अनुभवी राजनेता होने के साथ साथ अपने समय के जाने माने पत्रकार भी थे. उन्होंने मराठी दैनिक लोकमत, हिन्दी दैनिक लोकमत समाचार और अंग्रेजी दैनिक लोकमत टाइम्स पत्र की नींव रखी थी. सिक्कों का संग्रह और अध्ययन करने वाले सुधीर लुणावत के अनुसार जवाहरलाल दर्डा की स्मृति में जारी होने वाले 100 रुपए के सिक्के का कुल वजन 35 ग्राम होगा, जिसमे 50 प्रतिशत चांदी, 40 प्रतिशत तांबा, 5 प्रतिशत निकल और 5 प्रतिशत जस्ते का मिश्रण होगा. इस सिक्के की गोलाई 44 मिलीमीटर होगी. सुधीर लुणावत के अनुसार सिक्के के अग्र भाग पर जवाहरलाल दर्डा के फोटो के ऊपर देवनागरी में 'जवाहरलाल दर्डा की जन्म शताब्दी' लिखा होगा. वही फोटो के नीचे अंग्रेजी में 'Birth Centenary of Shri Jawaharlal Darda' लिखा होगा तथा फोटो के दाएं और बाएं 1923-2023 लिखा होगा. वहीं सिक्के के दूसरी तरफ अशोक स्तम्भ के दाएं और बाएं भारत -INDIA लिखा होगा व अशोक स्तम्भ के नीचे अंकित मूल्य 100 लिखा होगा. वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने इस सिक्के को जारी करने का गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है. लुणावत के अनुसार 2 जुलाई 2023 को जवाहरलाल दर्डा की जन्म जयंती के दिन इस सिक्के के जारी होने की संभावना है. यह एक स्मारक सिक्का होगा जो कभी भी बाजार में प्रचलन में नहीं आएगा. जारी होने के बाद भारत सरकार की टकसाल द्वारा एक संग्रहणीय वस्तु की तरह बिक्री किया जाएगा. देश विदेश में बाबूजी के चाहने वाले और सिक्कों के संग्रहकर्ता इसे एक धरोहर के रूप में सहेज कर रखेंगे.
अधिकारी

अधिकारी काम नहीं करते तो उनकी जरूरत क्या है- पालक मंत्री 

जनता दरबार में नागरिकों की समस्या ऑन द स्पॉट हल, प्रलंबित मामलों के लिए अधिकारियों को फटकार *अश्विन शाह- वर्धा : 1 मई, महाराष्ट्र दिन पर वर्धा जिले में जनता दरबार का आयोजन किया गया. जिले के पालक मंत्री सुनील केदार ने जिला परिषद के सभागार में जनता से सीधे संवाद साधते हुए उनकी समस्या सुनी और समस्या का निराकरण, जो ऑन स्पॉट संभव था, वह किया. साथ ही विविध विभाग के बड़े अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि आपको जनता की सेवा के लिए नौकरी पर रखा गया है. यदि आप जनता की तकलीफ के भागीदार बनते हैं तो प्रशासन में आपकी क्या आवश्यकता है.  अधिकारी कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते जनता दरबार में नागरिकों ने अपनी शिकायत और समस्या से पालक मंत्री को अवगत कराया. पालक मंत्री के समक्ष समस्या रखते हुए कई लोगों ने बताया कि बार-बार अधिकारी के कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं. अधिकारी कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते और ऐसे अधिकारी के अधीन कार्य करने वाले कर्मचारी सीधे मुंह बात भी नहीं करते. यह सुनकर पालक मंत्री ने जिलाधिकारी प्रेरणा देशभ्रतार की उपस्थिति में अन्य विभाग के अधिकारियों की क्लास ले डाली. उन्होंने जिले सभी विभागों के अधिकारी से अपील की कि वे आम लोगों की तकलीफें दूर करने के लिए तत्पर रहें. पालक मंत्री ने कहा की जिन लोगों की समस्या इस जनता दरबार में लंबित रह गई है, उनकी समस्या जल्द से जल्द अधिकारी दूर करें और अगले जनता दरबार में उसकी जानकारी दें.   राज्य में महाविकास आघाड़ी सरकार के सत्ता में आने के पश्चात वर्धा जिले के पालक मंत्री सुनील केदार ने महाराष्ट्र दिन के अवसर पर जनता दरबार लेकर आम जनता को विशवास दिलाया कि सरकार जनता की समस्या सुलझाने के लिए कटिबद्ध है.  वर्धा जिले के इस जनता दरबार में जिले के विभिन्न तहसीलों के नागरिक अलग-अलग विभागों से संबंधित अपनी शिकायत और समस्या के साथ उपस्थित हुए. जिले के सभी शासकीय विभागों के अधिकारी भी उपस्थित थे.
विश्वासघात

विश्वासघात विदर्भ के साथ, उजागर करेंगे महाराष्ट्र दिवस पर

पूरे विदर्भ में मनाया जाएगा "विश्वासघात दिवस", सरकारी बोर्ड में महाराष्ट्र पर चिपकाएंगे विदर्भ का स्टीकर *कल्याण कुमार सिन्हा- पृथक विदर्भ : एक बार फिर महाराष्ट्र स्थापना दिवस 1 मई, विदर्भवादियों के लिए परीक्षा का दिन है, पृथक विदर्भ राज्य का संकल्प साधने का दिन है, पृथक विदर्भ राज्य की मांग को जगाए रखने का दिन है. विदर्भवादियों के लिए 1 मई का दिन उनके दिलों में नासूर की तरह हो गया है. यह विश्वासघात दिवस (Betrayal Day) बन गया है. हालांकि 100 वर्षों से भी पुरानी रही है पृथक विदर्भ प्रांत की मांग. इतिहास बताता है कि इसी मांग के फलस्वरूप 1 अक्टूबर 1938 को तत्कालीन मध्य प्रांत की विधायिका को भी पृथक महाविदर्भ का प्रस्ताव बहुमत से पारित करना पड़ा था. देश के आजाद होने के बाद से अब तक देश की संसद एक दर्जन से अधिक नए राज्यों और केंद्र शासित राज्यों का गठन करा चुकी है. लेकिन सबसे पुरानी पृथक विदर्भ राज्य की मांग को ध्वस्त करने के राजनीतिक प्रयास आज तब भी जारी है, जब पिछले 2014 के लोकसभा चुनाव में विदर्भ को पृथक राज्य का दर्जा देने के वादे के साथ देश की सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी की सरकार अभी भी केंद्र में बनी हुई है. इतना ही नहीं, वह राज्य की सत्ता भी पाने के लिए विदर्भ के लोगों को यही सब्जबाग दिखा कर सत्ता में पांच वर्ष बनी रही. लेकिन उसने विदर्भ के लोगों के साथ विश्वासघात ही किया. "विश्वासघात दिवस" : महाराष्ट्र पर विदर्भ के स्टीकर चिपकाएंगे इस वर्ष महाराष्ट्र स्थापना दिवस, रविवार, 1 मई को है. और इस बार विदर्भ इसे "विश्वासघात दिवस" (Betrayal Day) के रूप में मनाएगा. पृथक विदर्भ राज्य की मांग का अलख जगाए रखने वाली विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने विश्वासघात दिवस पर एक बार फिर इस आंदोलन को एक और दिशा देने वाली है. समिति का फैसला है कि 1 मई को जब महाराष्ट्र के सरकारी कार्यक्रमों में "गरजा महाराष्ट्र माझा..." गाया जा रहा होगा, तब विदर्भवादी विदर्भ के सभी तहसील से लेकर जिलों के सभी कार्यालयों की नाम फलकों (बोर्ड) पर महाराष्ट्र की जगह विदर्भ के नाम का स्टीकर चिपकाएंगे. "महाराष्ट्र हटाओ-विदर्भ लाओ" का नारा इसके साथ ही सभी विदर्भवादी नेता और कार्यकर्ता हाथ पैर और सिर में काला फीता बांधकर महाराष्ट्र की गुलामी का निषेध करेंगे और जनता तक महाराष्ट्र के विश्वासघात का संदेश पहुंचाएंगे. नेशनल हाईवे पर मलकापुर से देवरी तक विदर्भ राज्य के बोर्ड लगाए जाएंगे. साथ ही "महाराष्ट्र हटाओ-विदर्भ लाओ" का नारा दिया जाएगा. आत्महत्या करने के लिए विवश है विदर्भ का किसान वर्तमान महाराष्ट्र राज्य का 31% भूभाग और 21% आबादी विदर्भ की है. विदर्भ घने उष्णकटिबंधीय जंगलों से आच्छादित है और विदर्भ की बिजली, खनिज एवं कपास महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को बड़ा आधार देता आया है. कृषि उपज में गन्ना, चावल, ज्वारी और कपास के साथ फलों में संतरा के साथ शाक-सब्जियों में विदर्भ आत्मनिर्भरता के साथ शेष महाराष्ट्र को भी उपकृत करता है. जबकि सिंचाई के मामले में 1960 से ही देखें तो लगातार पिछले कम से कम छह दशकों तक विदर्भ को महाराष्ट्र की सत्ता ने धोखा ही...
जनरल

जनरल मनोज पांडे बने 29वें थल सेना प्रमुख, नरवणे सेवानिवृत

नई दिल्ली : जनरल मनोज पांडे ने शनिवार, 30 अप्रैल को 29वें थल सेना प्रमुख (Cheif of Army Staff) के तौर पर पदभार संभाल लिया. जनरल एम.एम. नरवणे के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सेना प्रमुख का पदभार ग्रहण किया. उप थलसेना प्रमुख रहे जनरल पांडे सेना की इंजीनियर कोर से सेना प्रमुख बनने वाले पहले अधिकारी हैं. एक फरवरी को थल सेना का उप-प्रमुख बनने से पहले वह थल सेना की पूर्वी कमान का नेतृत्व कर रहे थे. इस कमान पर सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा की रक्षा की जिम्मेदारी है. जनरल पांडे ने ऐसे समय में थल सेना की कमान संभाली है, जब भारत चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर चुनौती सहित असंख्य सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है. सेना प्रमुख के रूप में, उन्हें थिएटर कमांड को तैयार करने की सरकार की योजना पर नौसेना और वायु सेना के साथ समन्वय करना होगा. भारत के पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत थिएटर कमांड तैयार करने पर काम कर रहे थे, जिनका पिछले साल दिसंबर में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन हो गया. सरकार ने अभी नया ‘प्रमुख रक्षा अध्यक्ष’ नियुक्त नहीं किया है. लेफ्टिनेंट जनरल पांडे अपने करियर के दौरान अंडमान निकोबार कमान के प्रमुख के तौर पर भी काम कर चुके हैं. अंडमान निकोबार कमान भारत में तीनों सेनाओं की एकमात्र कमान है. पांडे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व छात्र हैं और उन्हें दिसंबर 1982 में कोर ऑफ इंजीनियर्स (द बॉम्बे सैपर्स) में शामिल किया गया था. उन्होंने अपने बेहतरीन करियर में कई अहम पदों पर काम किया और विभिन्न इलाकों में आतंकवाद रोधी अभियानों में भाग लिया. उन्होंने जम्मू कश्मीर में ऑपरेशन पराक्रम के दौरान नियंत्रण रेखा के पास एक इंजीनियर रेजिमेंट की कमान संभाली. इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों में एक पर्वतीय डिवीजन और पूर्वोत्तर में एक कोर की भी कमान संभाली.