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विखे पाटिल

महाराष्ट्र : विखे पाटिल और दो नए मंत्रियों की नियुक्ति पर अदालती पेंच

मुंबई : राधाकृष्ण विखे पाटिल तथा दो अन्य मंत्रियों की महाराष्ट्र सरकार में नियुक्ति को बंबई हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में चुनौती दी गई है. महाराष्ट्र विधानसभा में हाल के समय तक नेता प्रतिपक्ष (कांग्रेस) रहे विखे पाटिल को रविवार को देवेंद्र फड़णवीस कैबिनेट में आवास मंत्री बनाया गया है. वह हाल ही में कांग्रेस के विधायक तथा पार्टी की सदस्यता त्याग कर भाजपा में शामिल हुए थे. पिछले सोमवार, 17 जून को महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार अदालती विवाद में फंसता नजर आ रहा है. हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में इन तीन मंत्रियों को दलबदल मामले में संविधान के अनुसार अयोग्य ठहराने की मांग की गई है. याचिका का न्यायमूर्ति एस.सी. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति गौतम पटेल की खंडपीठ के सामने मंगलवार को इन नियुक्तियों का उल्लेख किया गया. इसमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) छोड़ कर शिवसेना में शामिल हुए जयदत्त क्षीरसागर और आरपीआई (आठवले) के अविनाश महातेकर को मंत्री बनाए जाने को भी चुनौती दी गई. याचिकाकर्ताओं सुरेंद्र अरोड़ा, संजय काले और संदीप कुलकर्णी ने कहा है कि मंत्रियों को संविधान के अनुसार दलबदल के आधार पर अयोग्य ठहराया जाना चाहिए और उनकी छह महीने के अंदर निर्वाचित होने की भी कोई मंशा नहीं है.
भागवत

ममता पर भागवत का हमला : कहा ऐसा व्यक्ति शासक के लायक नहीं

नागपुर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नसीहत देते हुए कहा है कि राज्य में जारी राजनीतिक हिंसा को तुरंत बंद किया जाए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गुंडा तत्वों पर एक्शन ले. भागवत ने कहा कि अगर कोई शासक गुंडा तत्वों पर काबू पाने में फेल रहता है तो ऐसा व्यक्ति शासक के लायक नहीं है. मोहन भागवत रविवार को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय वर्ष के प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में आरएसएस के लगभग 800 कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने ममता बनर्जी का बिना नाम लिए कहा, "आज क्या चल रहा है बंगाल में, चुनाव के बाद ऐसा होता है, किसी और प्रांत में ऐसा हो रहा है? नहीं होना चाहिए...अगर गुंडा प्रवृति के व्यक्तियों की वजह से ऐसा होता है तो शासन को कदम उठाना चाहिए." उन्होंने कहा कि अगर राज्य में कहीं कोई हिंसा होती है, तो शासन को उसे कंट्रोल करना चाहिए और अगर राज्य का राजा (मुख्यमंत्री) ऐसा नहीं कर पाता, तो उसे खुद को राजा कहलाने का हक नहीं है. उन्होंने कहा, 'सामान्य व्यक्ति नासमझ हो सकता है, गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार कर सकता है. लेकिन राज्य के राजा का यह कर्तव्य है कि समाज के हित में राष्ट्र की एकात्मता और अखंडता सुनिश्चित करने वाला व्यवहार वह अपनी दंडशक्ति से स्थापित करे.अगर कोई राजा ऐसा नहीं कर पाता, तो क्या वह राजा कहलाने का हकदार है?' उल्लेखनीय है कि राज्य में लोकसभा चुनाव के बाद टीएमसी और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा की कई खबरें आई हैं. पिछले हफ्ते उत्तर 24 परगना जिले में दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच पार्टी का झंडा लगाने को लेकर हुआ विवाद खून-खराबे तक पहुंच गया, जिसमें भाजपा ने अपने पांच कार्यकर्ताओं और टीएमसी ने अपने तीन कार्यकर्ताओं की मौत का दावा किया था. पिछले वर्ष संघ के तृतीय वर्ष प्रशिक्षण शिविर को मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने संबोधित किया था. इस वर्ष संघ ने उद्योगपति रतन टाटा को अतिथि के लिए निमंत्रित किया था, लेकिन व्यस्तता के कारण रतन टाटा इस समारोह में उपस्थित नही आ सके. वैसे हर वर्ष सरसंघचालक तृतीय वर्ष प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते हैं. यहां संघ मुख्यालय के निकट स्थानीय रेशिमबाग मैदान में समारोह संपन्न हुआ.
महाराष्ट्र

महाराष्ट्र मंत्रिमंडल : बोंडे को कृषि, विखे पाटिल को मिला आवास

मुंबई : महाराष्ट्र में राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार रविवार को संपन्न हुआ. मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मंत्रिमंडल में फेरबदल एवं विस्तार किया. राज्यपाल विद्यासागर राव ने कुल 13 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इनमें से 8 ने कैबिनेट और 5 ने राज्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. इनमें राधाकृष्ण विखे पाटिल, जयदत्त क्षीरसागर, अधि. आशिष शेलार, डॉ. अशोक उईके, प्रा.डॉ. तानाजी सावंत, सुरेश खाडे, डॉ. संजय कुटे, डॉ. अनिल बोंडे को कैबिनेट मंत्रिपद की और संजय भेगडे, अतुल सावे, अविनाश महातेकर, योगेश सागर और डॉ. परिणय फुके को राजयमंत्री पद की शपथ दिलाई गई. आज शपथ लेने वाले कांग्रेस के पूर्व नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल को मुख्यमंत्री फड़णवीस ने अपने मंत्रिमंडल में आवास विभाग सौंपा है. राकांपा के पूर्व नेता जयदत्त क्षीरसागर को रोजगार गारंटी एवं बागवानी मंत्रालय दिया गया है. वह पिछले महीने शिवसेना में शामिल हुए थे. भाजपा के 6 नेताओं को कैबिनेट और 4 को राज्यमंत्री बनाया गया है. वहीं, शिवसेना के कोटे से 2 को कैबिनेट में जगह दी गई. आरपीआई के कोटे से एक राज्यमंत्री मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. भाजपा ने इस विस्तार में करीब 4 महीने बाद (अक्टूबर-नवंबर) होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सहयोगी दलों को साधने की कोशिश की. किसे मिला कौन सा मंत्रालय कैबिनेट मंत्री 1. राधाकृष्ण विखे पाटिल- आवास मंत्रालय 2. जयदत्त क्षीरसागर- रोजगार की गारंटी और बागवानी मंत्रालय 3. आशीष शेलर- स्कूली शिक्षा के खेल और युवा कल्याण मंत्रालय 4. संजय श्रीराम कुटे- श्रमिक विमुक्त जाति घुमंतू जनजाति अन्य पिछड़ा और विशेष पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्रालय 5. सुरेश खाडे- समाज कल्याण विभाग 6. अनिल बोंडे- कृषि मंत्रालय 7. अशोक रामजी उइके- आदिवासी कल्याण विभाग 8. तानाजी सावंत- जल संरक्षण मंत्रालय राज्यमंत्री 9. श्रीराम शिंदे- विपणन और कपड़ा मंत्रालय 10. शंभाजी पाटिल- खाद्य और नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता संरक्षण कौशल विकास पूर्व सैनिक कल्याण मंत्रालय 11. जयकुमार रावल- खाद्य और दवाओं प्रशासन पर्यटन प्रोटोकॉल 12. सुभाष देशमुख- सहकारिता राहत और पुनर्वास 13. परिणय फुके - सार्वजनिक निर्माण ( सार्वजनिक उपक्रम छोड़ कर), वन और आदिवासी विकास आवास विभाग पर हमलावर रहे थे विखे पाटिल विखे पाटिल की आवास मंत्री के तौर पर नियुक्ति को फड़वीस के राजनीतिक दांव के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि पूर्व में विपक्ष के नेता के तौर पर पाटिल आवास विभाग से जुड़े मुद्दों के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे हैं. विखे पाटिल और क्षीरसागर दोनों ही फिलहाल न तो राज्य विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के. ये दोनों ही छह महीने के लिए मंत्री पद संभाल सकते हैं. इन छह महीनों के भीतर उन्हें किसी एक सदन के लिए निर्वाचित होना होगा. हालांकि राज्य विधानसभा के चुनाव सितंबर-अक्टूबर में होने वाले हैं, इसलिए ये मंत्री मौजूदा विधानसभा के कार्यकाल तक अपने-अपने पद पर बने रह सकते हैं. तावड़े को झटका मौजूदा शिक्षा मंत्री भाजपा के विनोद तावड़े को फेरबदल में झटका मिला है. उनसे स्कूल शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण विभाग लेकर ये विभाग उनके संगठनात्मक सहयोगी एवं भाजपा की मुंबई इकाई के प्रमुख आशीष शेलार को सौंपे गए हैं. कैबिनेट से इनकी हुई छुट्टी कैबिनेट ने जिन मंत्रियों की छुट्टी हुई...
सिंधी

निर्विरोध चुने गए पंजवानी अध्यक्ष, ग्वालानी महासचिव

नागपुर : सिंधी समुदाय की सामाजिक संस्था 'पूज्य लकड़गंज सिंधी पंचायत' के वार्षिक आम चुनाव में प्रदीप पंजवानी अध्यक्ष पद पर और महासचिव पद पर महेश ग्वालानी निर्विरोध चुने गए. अन्य पदाधिकारियों में वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरधर भोजवानी, उपाध्यक्ष पप्पू बजाज, सचिव हरीश बुधवानी, सहसचिव हरीश मोटवानी, कोषाध्यक्ष जगदीश चेलानी, भंडार अधिकारी अशोक बदलानी, कार्यकारी सदस्य नवल थारवानी, श्याम रामरखयानी, प्रताप थारवानी, राजकुमार थारवानी, सुनील जग्यासी, मनोज भोजवानी भी निर्वाचित हुए. ये चुनाव सिंधु भवन वर्धमान नगर में आयोजित किए गए थे. इस अवसर पर पूर्व अध्यक्ष प्रताप मोटवानी ने गत टीम के दो वर्षों के बेहतरीन कार्यों की सराहना की. उन्होंने विशवास जताया कि नई टीम भी पंचायत के सदस्यों के हित में बेहतरीन कार्य करेगी. नए अध्यक्ष प्रदीप पंजवानी ने सदस्यों को आश्वस्त किया कि वह सिंधु भवन के सौंदर्यीकरण करेंगे और सभी सुविधाएं भी उपलब्ध करवाएंगे. पंचायत के सदस्यों को उन्होंने आश्वस्त किया कि वे उनके लिए 24 घंटे सभी दिन उपलब्ध रहेंगे. पूर्व अध्यक्ष प्रताप मोटवानी, किशनचंद ग्वालानी, जसवंतलाल ग्वालानी और विजय ग्वालानी पुष्पगुच्छ भेंट कर सत्कार निवर्तमान अध्यक्ष भागचंद उत्तमचंदानी, महेश ग्वालानी, पप्पू बजाज, अशोक बदलानी ने किया. कार्यक्रम में नए अध्यक्ष प्रदीप पंजवानी ने पंचायत के सदस्यों के मेरिट में आए बच्चों- चिराग शंकर मोटवानी, भरत राजेश ग्वालानी और गंधर्वराज ग्वालानी को पुरस्कृत किया. अंत में सभी भूतपूर्व अध्यक्षों ने पंजवानी को बुके देकर सम्मानित किया. चुनाव अधिकारी पूर्व अध्यक्ष जसवंतलाल ग्वालानी थे. चुनावी कार्यक्रम सभा का संचालन महेश ग्वालानी ने किया. आभार भागचंद उत्तमचंदानी ने माना.
ईपीएफ

पेंशनर्स विरोधी हैं ईपीएफओ के नियम, नहीं मिल रहा न्याय

ईपीएफ सेवानिवृत्तों को भी न्याय देना होगा नई मोदी सरकार को आलेख : कल्याण कुमार सिन्हा कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के अंतर्गत इससे संबद्ध निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के स्थापनाओं के सेवानिवृत्त कर्मचारियों का पेंशन कोई सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजना नहीं है, यह कर्मचारियों का अधिकार है. पेंशन का मुख्य उद्देश्य सेवानिवृत्ति के बाद व्यक्ति को अपना जीवन ससम्मान जीने के लायक आर्थिक आधार उपलब्ध कराना. लेकिन ईपीएफओ के गठन के साथ ही कर्मचारी भविष्य निधि और पेंशन के नियम कर्मचारी विरोधी और अन्यायपूर्ण बनाए गए. बीच-बीच में नियमों में संशोधन भी यदि किए गए तो उनमें से अधिकांश सदस्य कर्मचारियों के हितों के खिलाफ ही थे. कर्मचारियों के हित ठेंगे पर आज भी देखा जाए तो सरकार द्वारा स्थापित कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) जैसा संगठन स्वयं तो सारी सुविधाएं केंद्र सरकार की स्थापनाओं की तरह लेता है, लेकिन जिन सदस्य कर्मचारियों के वेतन से यह रकम जुटाता है, उन्हें ही यह ठेंगे पर रखता है. उसे ईपीएफ के करीब 15 लाख करोड़ रुपए के प्रबंध की जिममेदारी मिली हुई है. जिसे वह देश के करोड़ों निजी क्षेत्र के कर्मचारियों और नियोक्ताओं से वसूलता रहा है. आश्चर्य का विषय तो यह है कि आजादी के बाद की सभी सरकारें भी ईपीएफओ की इन कर्मचारी विरोधी हथकंडों का समर्थन ही करती आई हैं. यहां तक कि पिछली एनडीए की नरेंद्र मोदी सरकार का रवैया भी पिछली कांग्रेस सरकारों अलग नहीं रहा. ईपीएफओ का हथकंडा नरेंद्र मोदी की पिछली सरकार के समय में ही ईपीएफओ की अन्यायपूर्ण पेंशन नीति को पहली बार सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाने पर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों के वास्तविक वेतन के आधार पर पेंशन देने का आदेश दिया. लेकिन इसके बावजूद ईपीएफओ तरह-तरह के हथकंडे अपना कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को धता बताने की कोशिश करता रहा. जब फिर सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ को फटकार लगाई तो गतिशील हुआ और इसे लागू करने की दिशा में कदम भी उठाए. लेकिन इसके बावजूद इसके हथकंडे कायम हैं और इन हथकंडों के कारण अधिसंख्य कर्मचारी आज भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार सुधारित पेंशन पाने से वंचित हैं. ईपीएफओ का हथकंडा भी खूब है. सुधारित पेंशन की मांग करने वाले सेवानिवृत्तों से वह अपने पूर्व नियोक्ता (एम्प्लॉयर) से 1995 से रिटायरमेंट अवधि तक का मासिक कंट्रीब्यूशन का संपूर्ण ब्यौरा लाने को कहता है. स्वयं नियोक्ता से नहीं मांगता. उधर नियोक्ता सेवानिवृत्तों को बताता है कि उसने तो पहले ही नियमित रूप से ईपीएफओ को प्रत्येक माह के कंट्रीब्यूशन का ब्यौरा भेज चुका है. अब उसके पास पुराने ब्यौरे नहीं हैं. इधर ईपीएफओ तर्क देता है कि पुरानी परंपरा के अनुसार वह पुराने कागजात नष्ट कर चुका है. केवल उसके पास वही ब्यौरे हैं, जब से ईपीएफओ का डिजिटिलाइजेशन हुआ अर्थात 2009 से ही ब्यौरे उपलब्ध हैं. उसका तर्क है कि बिना सम्पूर्ण ब्यौरे के वह पेंशन निर्धारित नहीं कर सकता. क्योंकि उसे पेंशन के लिए कटौती की अतिरिक्त रकम भी संबंधित सेवानिवृत्त कर्मचारी से वसूलनी है. ईपीएफओ के इस हथकंडे से सेवानिवृत्त कर्मचारी अधर में हैं. वह ईपीएफओ और अपने पूर्व नियोक्ता के आगे नाक रगड़ने को बाध्य हो रहे हैं....
अमित शाह

अमित शाह क्या पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ नए गृह मंत्री बनेंगे?

नए मंत्रिमंडल के संभावित चेहरों पर चल निकली अटकलें नई दिल्ली : एनडीए की आगामी नई केंद्र सरकार में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह क्या देश के नए गृह मंत्री होंगे? राजनाथ सिंह क्या फिर पार्टी अध्यक्ष बनाए जाएंगे अथवा मंत्रिमंडल में कोई और बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे? वित्त मंत्री अरुण जेटली और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज नए मंत्रिमंडल में बने रहेंगे? नए मंत्रिमंडल का स्वरूप कैसा होगा? किन-किन राज्यों से नए चहरे नए मंत्रिमंडल का हिस्सा बनेंगे? इन प्रश्नों के साथ अब लोगों की नजरें सरकार गठन की ओर टिक गई हैं. केंद्रीय मंत्रिपरिषद ने राष्ट्रपति को सौंपा इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित केंद्रीय मंत्रिपरिषद ने शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया. राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री सहित मंत्री परिषद का इस्तीफा स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री से नई सरकार बनने तक पद पर बने रहने का आग्रह किया है. इस बीच इधर नए मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नए-पुराने चेहरों को लेकर अटकलें भी शुरू हो गई हैं. सरकार गठन को लेकर जारी गहमागहमी के बीच पार्टी के कई नेताओं का ऐसा विचार है कि शाह, मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होंगे और उन्हें गृह, वित्त, विदेश या रक्षा में से कोई एक मंत्रालय दिया जा सकता है. लेकिन इससे पूर्व अभी 17वीं लोकसभा का गठन किया जाना है. इसके बाद ही एनडीए नेता नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति सरकार गठन और शपथ ग्रहण के लिए आमंत्रित करेंगे. जेटली और सुषमा स्वराज को लेकर आशंकाएं वित्त मंत्री अरुण जेटली और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के समक्ष स्वाथ्य संबंधी समस्याएं हैं. इसी कारण इस बार उन्होंने चुनाव भी नहीं लड़ा. ऐसे में उनके नई सरकार में शामिल होने को लेकर शंकाएं प्रकट की जा रही हैं. जेटली राज्यसभा के सदस्य हैं और वह 2014 के चुनाव में अमृतसर सीट पर हार गए थे. सुषमा स्वराज ने पिछला चुनाव मध्य प्रदेश के विदिशा से जीता था. इन दोनों नेताओं ने नई सरकार में शामिल होने या नहीं होने पर कोई टिप्पणी नहीं की है. चुनाव प्रचार के दौरान शाह ने भी इस बारे में पूछे गए सवालों को टाल दिया और कहा कि यह पार्टी और प्रधानमंत्री के अधिकार क्षेत्र का विषय है. सीतारमण, ईरानी को बड़ी जिम्मेदारी उम्मीद है कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण नई सरकार में मुख्य भूमिका में रह सकती हैं. स्मृति ईरानी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अमेठी से पराजित किया है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि पार्टी उन्हें भी कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है . जदयू, शिवसेना को अधिक मंत्री पद समझा जाता है कि राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल, नरेन्द्र सिंह तोमर, प्रकाश जावड़ेकर को नए मंत्रिमंडल में बनाए रखे जाने की संभावना है. जेडीयू और शिवसेना को भी नए कैबिनेट में स्थान दिया जा सकता है, क्योंकि दोनों दलों ने क्रमश: 16 और 18 सीट दर्ज करके शानदार प्रदर्शन किया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना से नए चेहरों को स्थान दिया जा सकता है. दूसरी कतार के लिए युवा चहरे भी भाजपा के एक वरिष्ठ...
भाजपा

मोदी ने दिया इस्तीफा, एनडीए संसदीय दल के नेता चुने जाएंगे

नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद भाजपा ने सरकार गठन की तैयारी तेज कर दी है. भाजपा ने लोकसभा चुनाव में विजयी अपने और सहयोगी दलों के सभी सांसदों को आज दिल्ली में होने वाली एनडीए की बैठक में बुलाया है. बैठक के दौरान नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता चुना जाना तय हुआ है. इस बैठक के बाद नरेंद्र मोदी अपने घटक दलों के साथ भी बातचीत करेंगे. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, लोजपा के रामविलास पासवान समेत एनडीए के तमाम नेता आज दिल्ली पहुंच रहे हैं. लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों के बाद शुक्रवार की शाम नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके साथ ही सभी मंत्री परिषद सदस्यों ने भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को अपना इस्तीफा सौंपा. राष्ट्रपति ने इस्तीफा स्वीकार करते हुए सभी से नई सरकार के गठन तक कामकाज संभालने का आग्रह किया, जिसे पीएम ने स्वीकार कर लिया. अब वह शपथ लेने तक कार्यवाहक पीएम के तौर पर जिम्मेदारियां संभालेंगे. भाजपा ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर इस बात की जानकारी देते हुए कहा है कि एनडीए के सभी घटक दलों की बैठक 25 मई को शाम 5 बजे सेंट्रल हॉल में बुलाई गई है. इसी के साथ आज ही मंत्रिमंडल और विभागों को लेकर भी एक बैठक की जाएगी. इस बैठक को अमित शाह देखेंगे और एनडीए के सभी नेताओं से इस पर मुलाकात करेंगे. एनडीए को 350 सीटें अब तक के नतीजों में भाजपा की अगुआई वाले एनडीए ने 350 सीटों पर ऐतिहासिक जीत हासिल की है. वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस 52 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई. सहयोगियों को मिलाकर यूपीए के हिस्से में 92 सीटें आई हैं, जबकि अन्य दलों के खाते में 97 सीटें आईं. उत्तर प्रदेश, बिहार में महागठबंधन को किया विफल भाजपा ने उत्तर प्रदेश में मायावती-अखिलेश यादव और बिहार में लालू यादव के राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन को विफल कर दिया. उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 80 में 62 सीटें और बिहार में सहयोगी दल जदयू और लोजपा के साथ 40 में से 39 सीटें जीत लीं. बिहार में राजद महागठबंधन एक सीट भी हासिल नहीं कर पाया. उधर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी अपनी अमेठी सीट भी नहीं बचा पाए. कांग्रेस को राज्य में मात्र एक सीट मिली. पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी को रायबरेली में जीत मिल सकी. बिहार में कांग्रेस एक सीट हासिल करने में सफल रही.
आग

भीषण आग लगने से सूरत में 20 लोगों की मौत

सूरत (गुजरात) : यहां मुंबई-अहमदाबाद हाइवे के पास एक कॉम्पलेक्स में शुक्रवार को भीषण आग लगने से 20 लोगों की मौत हो गई है. यह एक व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स है, जिसका नाम तक्षशिला है. इसमें कई दुकानें और कोचिंग सेंटर्स हैं. मृतकों में अधिकतर छात्र हैं, जो कॉम्पलेक्स में स्थित एक कोचिंग सेंटर्स में थे. अधिकतर छात्रों की मौत छलांग लगा देने की वजह से प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि भीषण आग की वजह से बच्चों ने इमारत के ऊपर से छलांग लगानी शुरू कर दी. हालांकि इस दौरान स्‍थानीय लोगों ने सीढ़ी लगाकर बच्चों को बचाने का भी प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए. एक स्थानीय व्यावसायी के अनुसार अधिकतर छात्रों की मौत घबराहट के कारण छलांग लगाने की वजह से हुई. फायर ब्रिगेड सूत्रों के हवाले से बताया गया कि करीब एक घंटे बाद आग पर आखिरकार काबू पा‌ लिया गया और इमारत में किसी और के फंस होने की फायर ब्रिगेड के कर्मचारी और पुलिस द्वारा मौके पर सघन जांच जांच भी कर ली गई. फिलहाल आग के कारणों का पता नहीं चल सका है. कोचिंग सेंटर में 30 से ज्यादा बच्चे मौजूद थे. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बिल्डिंग में अचानक लग जाने से बच्चे इमारत की तीसरी मंजिल पर फंस गए. आग इतनी तेजी से फैली की बच्चों को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला और इस दौरान कई बच्चे धुंए के कारण वहीं बेहोश हो गए. राज्य के दमकल विभाग के एक अधिकारी ने बताया, "करीब 10 छात्र आग से बचने के लिए तीसरी और चौथी मंजिल से कूद गए. कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है." गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा, "हमने मामले में विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं और दोषी पाए गए किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा." मृतकों को 4 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने इस हादसे पर दुःख व्यक्त करते हुए हादसे में मारे गए लोगों को चार लाख रुपए देने की घोषणा की है. स्टेट अरबन डेवलपमेंट विभाग को भी इमारत की जांच के आदेश दिए गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर दुख जताया है और गुजरात सरकार को फौरन राहत पहुंचाने के आदेश दिए हैं.
एनडीए

महाराष्ट्र में एनडीए गठबंधन के 41 विजयी

मुंबई : महाराष्ट्र में अपने प्रमुख प्रतिद्वंदी कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (रांकपा) के दिग्गजों को पराजित कर एनडीए (भाजपा-शिवसेना-रिपब्लिकन गठबंधन) ने अपना 2014 का प्रदर्शन दोहराते हुए प्रचंड जीत दर्ज की है. राज्य की कुल 48 सीटों में से भाजपा 23, शिवसेना 18, राष्ट्रवादी कांग्रेस 4, कांग्रेस 1, एआयएमआयएम 1 और निर्दलीय 1 पर विजयी हुए है. विदर्भ के 10 में से 8 पर एनडीए विजयी विदर्भ की प्रमुख सीटों एनडीए ने अमरावती और चंद्रपुर की दो सीटें खोई है. जब की आठ सीटों पर विजय हासिल की है. इनमें नागपुर जिले के नागपुर से भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी और रामटेक से शिवसेना के कृपाल तुमने चुनाव जीत गए हैं. गढ़चिरोली से भाजपा के अशोक नेते ने कांग्रेस को पराजित किया. अकोला में भाजपा सांसद संजय धोत्रे ने रिपब्लिकन नेता प्रकाश आंबेडकर को पराजित किया. अमरावती में शिवसेना के आनंदराव अडसूल को निर्दलीय नवनीत राणा ने पराजित किया. भंडारा-गोंदिया क्षेत्र से भाजपा के अशोक मेंढे विजयी रहे. वाशिम से शिवसेना सांसद भावना गवली फिर विजयी हुईं. वर्धा से भी भाजपा सांसद रामदास तड़स दुबारा चुनाव जीत गए हैं. बुलढाणा से प्रतापराव जाधव चुनाव जीत गए हैं. एनडीए ने विदर्भ में चंद्रपुर और अमरावती गंवाई वहीं चंद्रपुर में भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री हंसराज अहीर तथा अमरावती में शिवसेना सांसद आनंदराव अडसूल चुनाव हार गए हैं. चंद्रपुर संसदीय क्षेत्र से केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर को पराजित कर कांग्रेस के उम्मीदवार बालू ऊर्फ सुरेश धानोरकर 44763 मतों से विजयी हुए हैं. वे महाराष्ट्र में अब एक मात्र कांग्रेस लोकसभा सदस्य होंगे. अमरावती में शिवसेना सांसद आनंदराव अडसूल युवा स्वाभिमान नेता श्रीमती नवनीत राणा से पराजित हो गए हैं. नगर भाजपा को उल्लेखनीय सफलता भाजपा को एक उल्लेखनीय सफलता नगर लोकसभा क्षेत्र में मिली है. वहां से कांग्रेस से भाजपा में आए डॉ. सुजय विखे चुनाव जीत गए हैं. विधानसभा में कांग्रेस के विरोधी पक्ष के नेता रामकृष्ण विखेपाटिल के पुत्र डॉ. विखे को भाजपा में लाने का श्रेय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को है. हालांकि डॉ. विखे की जीत से सर्वाधिक चोट राकांपा प्रमुख शरद पवार को पहुंची है, लेकिन इससे भारी नुक्सान कांग्रेस को हुआ है. जानकारों के मुताबिक अब रामकृष्ण विखे पाटिल का भाजपा प्रवेश का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है. कांग्रेस एक पर सिमटी इस चुनाव में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद रहे अशोक चव्हाण और पूर्व केंद्रीय मंत्री कांग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे चुनाव हार गए हैं. कांग्रेस को राज्य में केवल एक चंद्रपुर की सीट पर ही जीत हासिल हुई है. वह अपनी पिछली बार की दो सीटों की जगह अब मात्र एक सेट पर ही सिमट गई. राकांपा को चार, पवार को झटका राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार की पुत्री सुप्रिया सुले और प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे सहित चार राकांपा उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे. मावल से राकांपा नेता शरद पवार के पोते पार्थ पवार को भी हार का मुंह देखना पद गया है. शरद पवार इस बार चुनाव में नहीं उतरे. उन्हें कांग्रेस-राकांपा गठबंधन की इस असफलता से भारी निराशा हुई है. महाराष्ट्र के आज के सबसे बड़े...
व्यापारी

व्यापारी, किसान और आम जनता हर्ष से झूम रहे – मोटवानी

नागपुर : गुरुवार को शाम होते-होते लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी की सुनामी से पूरे देश की आम जनता, किसान और व्यापारी सभी हर्ष से झूमने लगे हैं. पुणे, मुम्बई और नागपुर की अनेक व्यापारिक संगठनों से जुड़े प्रताप मोटवानी ने आगामी लोकसभा में पुनः मोदी सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारी जीत पर आशा व्यक्त की कि आगामी 5 वर्षों में देश का किसान बेहद खुशहाल होगा. व्यापार और उद्योगों में भी नई दिशा, विकास की पहल और देश मे रोजगार बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव पूर्व दिल्ली में 'कैट' की राष्ट्रीय सभा में देश के सभी व्यापारियों को आश्वस्त किया था कि सरकार व्यापारियों के हितों में कार्य करेगी. व्यापारियों को सम्मान और उन्हें साथ लेकर ही व्यापार को बढ़ाने और व्यापारियों और सरकार के बीच सामंजस्य बना कर रखेगी. मोटवानी ने कहा कि मोदी सरकार आगामी 5 वर्षो तक आम जनता के साथ किसानों और देश के करोड़ों व्यापारियों के हित में सराहनीय कार्य करेगी. चुनाव में व्यापारी वर्ग भी मोदी का मान रखा. व्यापारियों ने खुल कर समर्थन किया मोटवानी ने नागपुर से विकास-पुरुष, लोकप्रिय सांसद नीतिन गडकरी की जीत पर खुशी प्रकट की है. उन्होंने विशवास व्यक्त किया कि नागपुर में अब विकास कार्य जोर-शोर से जारी रहेंगे. गडकरी पूरे नागपुर की जनता के दिल में बसे हैं. मोटवानी ने बताया कि नागपुर के लगभग सभी व्यापारियों ने खुल कर गडकरीजी का समर्थन किया. पूरे सिंधी समाज ने गडकरी के पक्ष में मतदान किए मोटवानी ने कहा कि नागपुर सेंट्रल सिंधी पंचायत के अध्यक्ष होने के नाते मैं ने नागपुर सिंधी समाज का पूरा समर्थन पत्र गडकरीजी को दियाथा. शहर के पूरे सिंधी समाज ने गडकरीजी को भारी मतों से विजयी बनाने के लिए मतदान किए. उन्होंने देश में फिर से मोदीजी की सरकार आने और नागपुर से गडकरी जी की जीत से देश के साथ नागपुर का कायापलट होने की उम्मीद जताई.