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जॉर्ज फर्नांडिस

पूर्व रक्षा मंत्री, प्रखर समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस का निधन

नई दिल्ली : देश के पूर्व रक्षामंत्री और प्रखर समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस का आज निधन हो गया. वे 88 साल के थे. फर्नांडिस ने दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में आज सुबह आखिरी सांस ली. वह काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे. वे अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित थे. फर्नांडिस के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फर्नांडिस के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है- 'जॉर्ज साहब ने भारत के राजनीतिक नेतृत्व का सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधित्व किया. वे स्पष्टवादी और निडर, बेबाक और दूरदर्शी थे, उन्होंने हमारे देश के लिए अहम योगदान दिया है. वह गरीबों और हाशिए पर रहे लोगों के अधिकारों के लिए सबसे प्रभावी आवाजों में से एक थे. उनके निधन की खबर सुनकर दुख हुआ.' विदेश में रह रहे उनके पुत्र के नई दिल्ली पहुंचने पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. फर्नांडीस का जन्म 3 जून 1930 को मैंगलोर में हुआ था. वे अटल सरकार में अक्टूबर 2001 से मई 2004 तक रक्षामंत्री रहे. आखिरी बार वह अगस्त 2009 से जुलाई 2010 तक राज्यसभा के सांसद रहे थे. फर्नांडीस सबसे पहले साल 1967 में लोकसभा सांसद चुने गए थे. रक्षामंत्री के अलावा उन्होंने कम्यूनिकेश, इंडस्ट्री और रेलवे मंत्रालयों की भी कमान संभाली. अपने मंत्रित्व कार्यकाल में उन्होंने कोका कोला और अन्य विदेशी मल्टीनेशनल्स को अलविदा किया था. फर्नांडिस साहब एनडीए के संस्थापक संयोजक थे. वे 1970 में समाजवादी आंदोलन के बड़े नेता थे. समता पार्टी बनाने से पहले जनता दल के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती थी. 1930 में जन्में जॉर्ज ने रोमन कैथोलिक पादरी की ट्रेनिंग ली थी, तभी वे यूनियन पॉलिटिक्स की तरफ मुड़ गए. 1967 में उन्होंने मुंबई से कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता को हराकर संसद पहुंचे थे. उन्होंने 1974 में देशभर में रेलवे हड़ताल भी करवाई थी. 1975 में इंदिरा गांधी की ओर से लगाए गए आपातकाल के दौरान उन्हें जेल में डाल दिया गया था. 1977 में उन्होंने जेल से ही चुनाव लड़ा था और बिहार के मुजफ्फरपुर से भारी मतों से जीत हासिल की. जॉर्ज फर्नांडीज आपातकाल के हीरो बन गए थे, जब 1977 में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी तो उन्हें मंत्री बनाया गया. पूर्व रक्षा मंत्री, प्रखर समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस का निधनपूर्व रक्षा मंत्री, प्रखर समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस का निधन
आयुष्मान

आयुष्मान भारत योजना : 30 रुपए में गोल्डन कार्ड, मुफ्त इलाज और 5 लाख...

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 100 दिनों में 6.85 लाख मरीज हुए लाभान्वित नई दिल्ली : पिछले वर्ष आम बजट में केंद्र सरकार ने दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना 'आयुष्मान भारत योजना' की घोषणा की थी. इस स्वास्थ्य योजना के तहत मुफ्त इलाज और 5 लाख रुपए के बीमा का प्रावधान है. लेकिन लोगों को अभी तक यह जानकारी नहीं है कि इस योजना के तहत इसका फायदा कैसे उठाया जा सकता है? जबकि 'भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई)' से पिछले 100 दिनों में 6.85 लाख मरीज इसका लाभ ले चुके हैं. कैसे और कितने पैसों में बनेगा गोल्डन कार्ड योजना का लाभ लेने के लिए पहले एक गोल्डन कार्ड की जरूरत होती है. कार्ड बनाने के लिए सरकार जगह-जगह शिविर लगवा रही है. इस कार्ड के माध्यम से पूरा इलाज मुफ्त में होगा. गोल्डन कार्ड के लिए आधिकारिक वेबसाइट-mera.pmjay.gov.in पर लॉग इन करना होगा और HHD कोड चुनना होगा, जिसे कॉमन सर्विस सेंटर में आयुष्मान मित्र को देना होगा. आयुष्मान मित्र सीएससी में बाकी प्रक्रिया पूरी करेंगे. गोल्डन कार्ड के लिए आवेदकों को सिर्फ 30 रुपए का भुगतान करना होगा. गोल्डन कार्ड बनवाने के किए पहले एक सॉफ्टवेयर के जरिए इस बात की पुष्टि की जाएगी कि आप योजना के लिए पात्र हैं या नहीं. इसके लिए आपसे आधार कार्ड या आपकी पहचान का दूसरा कार्ड मांगा जाएगा. इसके बाद बीमारी के हिसाब से हॉस्पिटल पैकेज का चयन होगा. इसके बाद जांच और इलाज शुरू होगा. इससे जुड़े दस्तावेज अस्पताल इकट्ठे करेगा. इलाज होने पर डिस्चार्ज समरी जारी होगी. इसके बाद अस्पताल को पेमेंट हो जाएगा. आयुष्मान भारत योजना का हेल्पलाइन नंबर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का हेल्पलाइन नंबर 1800 111 565 और 14555 है. इस पर मरीज आयुष्मान भारत योजना की जानकारी प्राप्त कर सकता है. यह नंबर 24 घंटे चालू रहता है. आप इन नंबरों पर इस बात का पता कर सकते हैं कि आप आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी हैं या नहीं. कैसे उठा सकते हैं आयुष्मान भारत योजना का लाभ इलाज के लिए इस योजना में रजिस्टर्ड हॉस्पिटल में आयुष्मान मित्र (आरोग्य मित्र) लोगों की सहायता के लिए उपलब्ध होते हैं. पीएमजेएवाई के अंतर्गत 'गोल्डन कार्ड' गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पांच लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा. इस योजना का लक्ष्य 10.74 करोड़ लाभार्थी परिवारों के 50 करोड़ से अधिक लोगों को वार्षिक स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करना है.
सत्कार

महानगर पालिका टैक्स में बढ़ोतरी नहीं करने पर कुकरेजा का सत्कार

नागपुर : नागपुर महानगर पालिका द्वारा वर्ष 2019-20 के लिए किसी प्रकार के टैक्स में बढ़ोत्तरी नहीं करने पर नागपुर मनपा की स्थाई समिति के सभापति विकी भाई कुकरेजा का सिन्धु युवा शक्ति, जरीफटका कीओर से सत्कार किया गया. कुकरेजा का सत्कार विगत 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान दयानन्द पार्क में किया गया. कार्यक्रम में कुकरेजा प्रमुख अतिथि और नागपुर सेंट्रल सिंधी पंचायत के अध्यक्ष के रूप में उपास्थि थे. विशेष अतिथि के रूप में नागपुर शहर भाजपा उपाध्यक्ष प्रताप मोटवानी, नगरसेवक महेंद्र धनविजय, नगरसेविका प्रमिला मथरानी कार्यक्रम में शामिल थे. झंडावंदन, राष्ट्रगीत गायन, महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण कर कुकरेजा ने सभी को 70वें गणतंत्र दिवस की बधाई दी. मनपा में किसी भी प्रकार का कर नहीं लगा कर बेहद सराहनीय कार्य के लिए इस अवसर पर प्रताप मोटवानी ने विकीभाई का अभिनंदन किया. सिन्धु युवा शक्ति के महासचिव राजेश धनवानी ने विकी कुकरेजा औऱ प्रताप मोटवानी का शाल श्रीफल बुके देकर स्वागत किया. कुकरेजा ने संस्था के कोषाध्यक्ष भरत पारवानी का सत्कार किया. कार्यक्रम में सहयोग देने वालो में जिया शेख, हीरो मोटवानी, मनोज माखीजा, कमलेश आहूजा, दिलीप धनवानी, राजेश खत्री, विजय जेसवानी, योगेश बकशानी, किशोर वासवानी ,गिरीश नोतानी, सन्नी धनवानी और किशोर धनवानी शामिल थे. कार्यक्रम का संचालन जगदीश वंजानी ने और आभार प्रदर्शन महासचिव राजेश धनवानी ने किया.
राहुल

प्रियंका, राहुल, वरुण और मेनका पर सियासी तुक्के

अमिताभ, सलमान, करीना और शत्रुघ्न सिन्हा पर भी चर्चे नई दिल्ली : चुनावी माहौल में कांग्रेस के खेमे से निकले कुछ तुक्के फिलहाल जोर-शोर से सियासी गलियारे में तैर रहे हैं. पहला तो यह कि राहुल गांधी इस बार अमेठी से ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र की नांदेड़ लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ेंगे. दूसरा यह कि प्रियंका गांधी वाड्रा केवल पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान ही नहीं संभालेंगी, बल्कि वे रायबरेली के साथ वाराणसी से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरुद्ध भी चुनाव लड़ेंगी. यह भी संकेत देने की कोशिश की जा रही है कि वरुण के साथ मानेका गांधी को भी कांग्रेस में लाने की कोशिशें जारी हैं. अमेठी के साथ नांदेड़ से भी लड़ेंगे राहुल...! राहुल गांधी इस बार अमेठी के साथ-साथ किसी और सीट से भी लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं. इस खबर के बीच महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष और नांदेड़ के सांसद अशोक चव्हाण ने अ.भा. कांग्रेस अध्यक्ष के लिए अपनी नांदेड़ सीट को अधिक सुरक्षित बता कर वहां से राहुल गांधी के चुनाव लड़ने की संभावना जताई है. उनके मुताबिक, राहुल गांधी इस बार महाराष्ट्र की नांदेड़ लोकसभा सीट से भी दावेदारी करते नजर आ सकते हैं. पीएम मोदी को चुनौती देंगी प्रियंका...? दूसरी ओर पार्टी में ही चल निकली हवा से यह चर्चा फ़ैलाने लगी है कि महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अगली चाल क्या होगी? क्या सचमुच पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी सीट से वे पीएम मोदी को चुनौती देने वाली हैं ? क्या वो सिर्फ पार्टी के प्रचार प्रसार का जिम्मा संभालेंगी? मां सोनिया गांधी की सीट रायबरेली से चुनाव लड़कर आसानी से लोकसभा जाएंगी या फिर वाराणसी में प्रधानमंत्री मोदी को सीधी टक्कर देंगी? वाराणसी में कांग्रेस के चेहरा समझे जाने वाले और पिछले चुनाव में पीएम मोदी के खिलाफ कांग्रेस उम्मीदवार अजय राय ने प्रियंका गांधी को वाराणसी से चुनाव लड़ाने की मांग कर प्रियंका के वाराणसी से चुनाव लड़ने की खबर को हवा दे दी है. वरुण के साथ मानेका गांधी भी चर्चा में प्रियंका गांधी के चचेरे भाई, स्व. संजय गांधी और केंद्रीय मंत्री मानेका गांधी के पुत्र भाजपा नेता वरुण गांधी के कांग्रेस में शामिल होने की भी चर्चा जोरों पर है. भाजपा के असंतुष्ट युवा नेता वरुण गांधी पिछले कुछ समय में केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर आलोचक रहे हैं. कई मौकों पर उन्‍होंने सरकार पर अपरोक्ष हमला बोला, जिसके बाद ऐसी अटकलें लगाई जाने लगीं कि वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व से खफा हैं. इस बीच ऐसी अटकलों ने भी खूब जोड़ पकड़ा कि वह भाजपा को छोड़ वे अपनी मां मानेका गांधी के साथ कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं. चर्चा सलमान, करीना और शत्रुघ्न सिन्हा की भी पिछले दिनों फ़िल्मी हस्तियों में सलमान खान को इंदौर से और करीना कपूर सैफ अली खान को भोपाल से कांग्रेस की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ाई जाने की खबरें भी सुर्खियां बन चुकी हैं. बिहार के पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के असंतुष्ट भाजपा सांसद अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को भी कांग्रेस में आने के लिए राजी करने की चर्चा जारी हैं. इतना ही नहीं, यहां तक कहा...
मोदी सरकार

आम लोगों से लेकर छोटे कारोबारियों को लुभाने में जुटी मोदी सरकार

लोकसभा चुनावों के मद्देनजर हर वर्ग को खुश करने का दांव नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव अब निकट है. कुछ महीनों का समय बचा है. चुनाव के नजदीक आते ही मोदी सरकार की ओर से हर वह दांव आजमाए जा रहे हैं, जिसके जरिए हर वर्ग के मतदाताओं को लुभाया जा सके. विदेशी समाचार एजेंसी रायटर्स के अनुसार केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में जनरल कैटेगरी में 10 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया गया. इसी तरह 40 लाख रुपए तक के टर्नओवर वाली कंपनियों को जीएसटी फ्री कर छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत दी गई. अब छोटे कारोबारियों को मुफ्त में एक्‍सीडेंट इंश्‍योरेंस की सुविधा भी मिल सकती है. यह इंश्‍योरेंस 5 से 10 लाख रुपए तक का हो सकता है. क्‍यों लिया जा सकता है फैसला रॉयटर्स के मुताबिक 2016 में पीएम मोदी की नोटबंदी के फैसले से सबसे अधिक छोटे कारोबारी प्रभावित हुए. इसके अलावा 2017 में जीएसटी के लागू होने के बाद भी छोटे कारोबारियों को कोई बड़ी राहत नहीं मिली बल्कि कंपोजिशन स्कीम बढ़ने की वजह से उनकी परेशानी ही बढ़ी. ऐसे में इस वर्ग के लोगों में मोदी सरकार को लेकर नाराजगी रही है. यही वजह है कि बीते कुछ समय से सरकार की ओर से कारोबारियों को लुभाने के प्रयास किए जा रहे हैं. जीएसटी में छूट की सीमा को बढ़ाई हाल ही में जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी में छूट की सीमा को बढ़ाकर सालाना 20 लाख से 40 लाख रुपए कर दिया है. यानी 40 लाख रुपए तक के टर्नओवर वाले कारोबारी अब जीएसटी के दायरे में नहीं आएंगे. इसके अलावा काउंसिल की बैठक में कंपोजिशन स्कीम की सीमा 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दी गई. यानि जिन कंपनियों का सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपए तक है, वह अब इस स्कीम का फायदा उठा सकेंगी. दरअसल, शुरुआती दौर में GST टैक्‍स सिस्‍टम की दिक्‍कतों से राहत देने के लिए सरकार ने छोटे कारोबारियों को कंपोजिशन स्कीम अपनाने का विकल्प दिया. इसके तहत छोटे कारोबारियों को हर महीने रिटर्न फाइल नहीं करना होता है.रसीदों को अपलोड करने का झंझट नहीं होता है. इसके अलावा टैक्स का एक निश्चित रेट, एकमुश्त टैक्स भरना होता है.
WCL

कोल इंडिया क्रिकेट टूर्नामेंट में WCL बनी चैम्पियन

नागपुर : कोल इंडिया अन्तर कम्पनी क्रिकेट टूर्नामेंट का ख़िताब WCL (वेकोलि) ने जीत लिया. फाइनल में सिंगरेनी कॉलरिज कंपनी लिमिटेड की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए वेकोलि की टीम को 123 रनों का लक्ष्य दिया, जिसे वेकोलि की टीम ने 17 ओवर्स में 3 विकटों पर 126 रनों के साथ जीत दर्ज की. मैन ऑफ़ द मैच वेकोलि के इमरान शेख, मैन ऑफ़ सीरिज वेकोलि के संजर आलम, बेस्ट बैट्समेन एमसीएल के करतार सिंह और बेस्ट बोलर का ख़िताब संतोष रेड्डी एससीसीएल को दिया गया. समापन समारोह एवं पारितोषिक वितरण पिछले दिन वसंत नगर स्थित ग्राउंड पर वेकोलि एवं एमसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक राजीव रंजन मिश्र के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ. इस अवसर पर नागपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक डी.एम. गोखले, नेशनल खिलाड़ी सुब्रत बनर्जी, संचालन समिति, कल्याण मंडल एवं वेकोलि स्पोर्ट्स प्रमोशन बोर्ड के सदस्यगण प्रमुखता से उपस्थित थे. टूर्नामेंट में कोल इंडिया लिमिटेड की सभी अनुषंगी कम्पनियों एवं सिंगरेनी कॉलरिज कंपनी लिमिटेड की टीमों ने भाग लिया. कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रबंधक (कार्मिक) श्रीमती अर्चना सिंह ने तथा धन्यवाद ज्ञापन क्षेत्रीय कार्मिक प्रबंधक श्री आर. जी. गेडाम ने किया. कार्यक्रम में खेल प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित थे. 22 जनवरी को शुरू हुआ था टूर्नामेंट कोल इंडिया अन्तर कम्पनी क्रिकेट टूर्नामेंट का शुभारंभ पिछले 22 जनवरी को यहां वेकोलि के निदेशक (कार्मिक) डॉ. संजय कुमार ने किया. उन्होंने खिलाड़ियों को अपनी शुभकामनाएं दीं. वेकोलि की मेज़बानी में आयोजित इस टूर्नामेंट के उद्घाटन समारोह में नागपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक डी.एम. गोखले, महाप्रबंधक (संचालन) एस.के. शर्मा, महाप्रबंधक (कार्मिक) इक़बाल सिंह, महाप्रबंधक (कल्याण)एस.एस. वेमुलकोंडा, क्षेत्रीय कार्मिक प्रबंधक आर.जी. गेडाम, कल्याण मंडल सदस्य बृजेश सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक (कार्मिक) ए.के. सिंह तथा वेकोलि स्पोर्ट्स प्रमोशन बोर्ड के सचिव जोवेल चांदेकर प्रमुखता से उपस्थित थे.
मणिकर्णिका

मणिकर्णिका : शुरुआत धीमी लेकिन बॉक्सऑफिस पर मचा सकती है धमाल

समीक्षा बड़े बजट की फिल्म 'मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी' शुक्रवार, 25 जनवरी को रिलीज़ हो चुकी है. यह 2019 की पहली फिल्म है, जो करीब 125 करोड़ के बजट में बनी है. ‘मणिकर्णिका- द क्वीन ऑफ झांसी’ दर्शकों से पहले दिन दर्शकों अलग-अलग प्रतिक्रिया मिल रही है. पहले ही इस फिल्म की इतनी पब्लिसिटी हो चुकी है कि सबकी नजर इस फिल्म के पहले दिन के कलेक्शन पर सभी की नजरें हैं. मणिकर्णिका शुक्रवार को देश के लगभग 3,000 स्क्रीन्स पर रिलीज किया गया है, जबकि विदेशों में 700 स्क्रीन्स पर रिलीज हुई है. इस फिल्म के पहले दिन का कलेक्शन 8 करोड़ का है. माना जा रहा है कि आज गणतंत्र दिवस के मौके पर फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिल सकता है. फिल्म में लीड रोल में कंगना रनौत हैं. साथ ही उन्होंने इसके निर्देशन में भी काफी दखल रखा है. फिल्म के अन्य कलाकार भी एक से बढ़कर एक हैं. उनमें डैनी डैंग्जोपा, कुलभूषण खरबंदा और जीशान आयूब जैसे कलाकार अहम किरदारों में हैं. कमजोर निर्देशन फिल्म की सबसे बड़ी कमी है. दर्शक फिल्म की कहानी से कनेक्ट नहीं कर पाते. पूरी फिल्म आपको ओवर ड्रामेटिक और इमोशनल लगती है. कई सीन्स बड़े ही दोहराते भी लगते हैं. पूरी फिल्म में कमजोर निर्देशन और बचकानी बातें देखने को मिलती है. इतना ही नहीं अंग्रेजों के बोलने का एक्सेंट और तरीका बड़ा ही अजीब है. फिर भी यह फिल्म 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान' का रिकॉर्ड जरूर तोड़ सकती है. फिल्म कुछ दृश्य काफी इम्प्रेस भी करते हैं. जैसे रानी लक्ष्मी बाई के बेटे और पति के निधन वाले सीन हों या अंग्रेजों के सामने उनका सिर नहीं झुकाना या तलवारबाजी के शानदार दृश्य. लेकिन लड़ाई के दृश्य बहुत ही कमजोर हैं. एक दृश्य में रानी लक्ष्मी बाई गांव में जाकर जमकर डांस करती हैं, यह दृश्य हैरान कर देने वाला है. "बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी." सुभद्रा कुमारी चौहान की यह कविता दर्शकों की नसों में खून की तरह दौड़ती रही है. ऐसे में यह फिल्म सोचने पर मजबूर कर देता है कि क्या रानी लक्ष्मी बाई के किरदार के साथ इन्साफ हुआ है ? फिल्म में कंगना रनौत रानी लक्ष्मीबाई के किरदार में पूरी तरह से जमती नजर नहीं आतीं. कई जगह उनका अभिनय शानदार है, लेकिन कई बार उनके एक्सप्रेशंस लाऊड हो जाते हैं. उनकी आवाज भी रानी लक्ष्मी बाई के दमदार किरदार से मैच नहीं हो पाती. कंगना की पतली आवाज और नाजुक शरीर झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के किरदार के अनुरूप नहीं लगता है. कई जगह कंगना योद्धा के रूप में नाजुक लगती हैं. लेकिन कई जगह अपने एक्शन से उन्होंने किरदार में जान डाली है. साथ ही कंगना की तलवारबाजी का दृश्य बढ़िया है. यह फिल्म कंगना के करियर की सबसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म हो सकती थी. लेकिन कमजोर निर्देशन के कारण फिल्म वह मुकाम हासिल करने से यह चूकती नजर आती है. ऐसी बड़े बजट की फिल्म बाजीराव मस्तानी और पद्मावत जैसी फिल्मों की तरह सुपर डुपर हिट हो सकती थी, अगर...
डॉ. विंकी रूघवानी

डॉ. विंकी रूघवानी “नागपुर हीरोज” अवार्ड से सम्मानित

नागपुर : शहर के जाने-माने बालरोग विशेषज्ञ डॉ. विंकी रूघवानी को उनके सेवाकार्यों के लिए अंग्रेजी दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया ने "नागपुर हीरोज" के प्रतिष्ठित अवार्ड से सम्मानित किया है. गत 20 वर्षों से थैलीसीमिया एवं सिकलसेल मरीजों के हित में सेवाकार्य करनेवाले डॉ. विंकी रूघवानी थैलीसीमिया एवं सिकलसेल केंद्र के संचालक भी हैं. इस केंद्र का उदघाटन मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने किया था. सेंटर में आनेवाले मरीजों की निःशुल्क चिकित्सा के साथ ब्लड ट्रांसफ्यूजन की भी व्यवस्था है. यह महत्वपूर्ण अवार्ड प्राप्त होने पर डॉ. विंकी रूघवानी ने सभी का आभार मानते हुए कहा कि पुरस्कार मिलने के बाद मेरी जवाबदारी और बढ़ गई है, और भविष्य में इससे भी अधिक सेवाकार्य करने का मेरा हमेशा प्रयास रहेगा. डॉ. विंकी रूघवानी की उपलब्धि पर थैलीसीमिया सोसायटी ऑफ सेंट्रल डॉ. विंकी रूघवानी "नागपुर हीरोज" अवार्ड से सम्मानितडॉ. विंकी रूघवानी "नागपुर हीरोज" अवार्ड से सम्मानितडॉ. विंकी रूघवानी "नागपुर हीरोज" अवार्ड से सम्मानित के उपाध्यक्ष प्रताप मोटवानी व अनेक सामाजिक संस्थाओं एवं गणमान्य व्यक्तियों ने उनका अभिनंदन किया है.
राहुल गांधी

कांग्रेस में आई प्रियंका : कितना असरकारक होगा राहुल का यह कदम!

विश्लेषण- राहुल गांधी आखिरकार अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस पार्टी में पदाधिकारी की हैसियत से लाने में सफल हो गए हैं. पार्टी के अच्छे भविष्य के लिए कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते जो भी हो सकता है, राहुल कदम उठा रहे हैं. पिछले उपचुनावों में सत्तारूढ़ भाजपा को उत्तरप्रदेश में मिली शिकस्त के साथ ही देश तीन बड़े राज्य के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को सफलता मिली और तीनों राज्यों में सत्तारूढ़ हुई. इसके बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष को संयुक्त विपक्ष द्वारा अपेक्षित महत्त्व नहीं दिया जाना पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गया था. ऐसे में यह जरूरी हो गया कि वह अपने साथ उन लोगों को जोड़े, जिनका व्यक्तित्व और पब्लिक अपील अधिक दमदार है. अमिताभ से निकटता, शत्रु से आशा...! पार्टी में प्रियंका की इंट्री सुनिश्चित कर राहुल गांधी ने कांग्रेसियों में उत्साह का संचार किया है. कांग्रेसी प्रियंका में स्व. इंदिरा गांधी की छवि देखते हैं. यही हाल मतदाताओं के एक बड़े वर्ग का भी है. उधर चर्चा है कि भाजपा से रुष्ट बिहार के पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा को भी पार्टी में लाने के प्रयास उन्होंने शुरू कर दिए हैं. इसके साथ ही पुराने पारिवारिक मित्र रहे बॉलीवुड के महानायक बन चुके अमिताभ बच्चन से भी संबंध सुधार कर राहुल ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया है. अमिताभ बच्चन ने उत्तर प्रदेश के 1,000 से अधिक किसानों के कर्ज की रकम अपनी जेब से भर कर उन्हें कर्ज मुक्त कराया है. उनका यह कदम राज्य में उनकी छवि को और हृदयग्राही बनाया है. जवाब में कांग्रेस की ओर से पिछले वर्ष फरवरी में आभार प्रदर्शन के पोस्टर में "आ अब लौट चलें" और "बने चाहे दुशमन जमाना हमारा, सलामत रहे दोस्ताना हमारा..." जैसे गीतों के मुखड़े लगा कर संबंधों में आई खटास दूर करने का संकेत दे दिया था. भाजपा के साथ ही सपा-बसपा के लिए धर्मसंकट सर्वाधिक 80 लोकसभा सीटों वाला राज्य उत्तर प्रदेश केंद्र की सत्ता का प्रवेश द्वार है. इस राज्य में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और मायावती की बहुजन समाज पार्टी अपने गठबंधन में स्थान नहीं देकर कांग्रेस के लिए विचित्र स्थिति पैदा कर दी थी. इस पर जब कांग्रेस अध्यक्ष ने जब कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी तो पार्टीजनों को भी आश्चर्य हुआ था और विरोधियों ने चुटकी भी लेनी शुरू कर दी थी. ऐसे में कांग्रेसजनों की पहली पसंद रही अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी महासचिव का पद सौंप कर और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया तब स्थितियां बदलती नजर आने लगीं. इसके साथ ही राहुल गांधी ने सत्तारूढ़ भाजपा के साथ ही सपा-बसपा के लिए धर्मसंकट पैदा कर दिया है. साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष को सपा-बसपा गठंधन से हाथ मिलाने की पेशकश कर नहले पर दहला मारने का अवसर भी मिल गया है. लेकिन कांग्रेस के लिए चुनौतियां इतनी बड़ी हैं कि अकेले राहुल गांधी या सोनिया गांधी के बूते उन्हें पार पाना संभव तो बिलकुल ही नहीं माना जा सकता है. कांग्रेस ने पूरे देश में अपनी साख गंवाई है. पिछ्ले 2014 के लोकसभा चुनावों में वह मात्र...
पेंशन

ईपीएफओ का न्यूनतम पेंशन को 7,500 रुपए करने की मांग

5 हजार रुपए महंगाई भत्ता भी शामिल करे सरकार : पेंशनर्स संघर्ष समिति नई दिल्ली : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की ईपीएस- 95 (EPS-95) योजना के पेंशनधारकों ने आगामी 1 फरवरी को केंद्र की भाजपा सरकार का अं‍तरिम बजट आने से पहले इस योजना के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपए करने और इसे महंगाई भत्ते से जोड़ने की मांग की है. मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराएं अखिल भारतीय ईपीएस-95 पेंशनर्स संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत ने कहा है कि ईपीएस-95 के सदस्यों और उनकी पत्नी को मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए. 20 साल तक काम करने वाले पेंशनर्स को नियमानुसार 2 साल का अतिरिक्त लाभ (वेटेज) दिया जाए और ईपीएस की सदस्यता में बढ़ोतरी की जाए. समिति की विज्ञप्ति में राउत ने कहा है कि केंद्र के पास इस योजना के तहत 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक कोष जमा है. सरकार इस राशि पर ब्याज कमा रही है, जबकि पेंशनरों को उनका वाजिब हक नहीं दिया जा रहा है. अपनी मांगों के समर्थन में ईपीएस-95 के बुज़ुर्ग पेंशनर्स ने केन्द्रीय श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार के दिल्ली और बरेली स्थित आवास के सामने धरना प्रदर्शन भी किया. राउत ने कहा कि श्रम मंत्री गंगवार ने पिछले साल हमारी मांगों को पूरा करने का ठोस आश्वासन दिया था, लेकिन उन्होंने अभी तक अपना वादा नहीं निभाया है. कोशियारी समिति की सिफारिशें लागू करें उन्होंने कहा कि करीब 60 लाख पेंशनर्स में से 40 लाख को 1500 रुपए महीने से भी कम पेंशन मिल रही है, जबकि कोशियारी समितिकोशियारी समितिईपीएफओ का न्यूनतम पेंशन को 7,500 रुपए करने की मांगईपीएफओ का न्यूनतम पेंशन को 7,500 रुपए करने की मांगईपीएफओ का न्यूनतम पेंशन को 7,500 रुपए करने की मांगईपीएफओ का न्यूनतम पेंशन को 7,500 रुपए करने की मांग की सिफारिशों के अनुसार इसे कम से कम 7,500 रुपए मासिक किया जाना चाहिए और उस पर 5,000 रुपए महंगाई भत्ता होना चाहिए.