LATEST ARTICLES

भगोड़ा

भगोड़ा नहीं रहे परमबीर, गैर-जमानती वारंट हुआ रद्द

मुबंई : भगोड़ा घोषित कर दिए गए मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह आज, शुक्रवार को ठाणे कोर्ट के सामने पेश हुए. पेशी के बाद अदालत ने उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट रद्द कर दिया. साथ ही उन्हें ठाणे पुलिस को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया. उनके विरुद्ध यह वारंट 15 हजार रुपए के निजी मुचलके और पर्सनल बॉन्ड भरवाने के बाद रद्द किया गया. हाल ही में ठाणे कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी कर परमबीर को भगोड़ा घोषित किया था.एक समाचार एजेंसी एएनआई ने ट्वीट कर यह जानकारी दी. शुक्रवार की सुबह करीब 10:30 बजे IPS अधिकारी परमबीर सिंह अपने वकील के साथ ठाणे पुलिस थाने पहुंचे. इस दौरान जोनल पुलिस आयुक्त अविनाश अंबुरे भी थाने में मौजूद थे. Maharashtra: Former Mumbai Police Commissioner Param Bir Singh leaves Thane Court. The Court cancelled the non-bailable warrant against him after he appeared before them. Court directed him to cooperate with Thane Police in investigation. pic.twitter.com/nkXeRe69U0— ANI (@ANI) November 26, 2021 यह था पूरा मामला ज्ञातव्य है कि ठाणे नगर थाना पुलिस ने जुलाई में बिल्डर केतन तन्ना की शिकायत पर परमबीर और अन्य 28 के खिलाफ रंगदारी का केस दर्ज किया था. इस मामले में की समन भेजे जाने पर भी अदालत में उपस्थित नहीं होने पर उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया था. हाल ही में कोर्ट ने परमबीर को भगोड़ा घोषित किया था. कई महीनों तक वे लापता चल रहे थे. लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक लगाने के अचानक बाद वे गुरुवार को मुंबई पहुंचे. मुंबई आने के बाद वे गुरुवार को सुबह 11 बजे कांदिवली पुलिस स्टेशन गोरेगांव एक्सटॉर्शन केस की जांच में शामिल होने के लिए पहुंचे. वहां मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने रंगदारी के एक अन्य मामले में उनसे करीब 7 घंटे तक पूछताछ की गई.  उल्लेखनीय है कि परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखकर तत्कालीन गृह मंत्री और एनसीपी नेता अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार और कदाचार के गंभीर आरोप लगाए थे. इस चिट्ठी के बाद परमबीर सिंह पर महाराष्ट्र में करप्शन और एक्सटॉर्शन के छह मामले दर्ज किए गए. 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह को 17 मार्च को मुंबई पुलिस के कमिश्नर पद से हटा दिया गया था. परमबीर सिंह करीब 7 महीने के बाद गुरुवार को मुंबई पहुंचे हैं. कोर्ट ने 100 करोड़ की वसूली के मामले में उन्हें भगोड़ा घोषित कर रखा था. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने परमरबीर सिंह की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी.
YouTube

YouTube : सावधान हो जाएं, नए साल से नहीं चलेगी मनमानी

Google (गूगल) अपने महत्वपूर्ण वीडियो शेयरिंग प्लेटफार्म YouTube की सेवा की शर्तों में बदलाव करने जा रहा है. हालांकि, इन बदलावों से YouTube इस्तेमाल करने के तरीके पर कोई असर नहीं पड़ेगा. यह बदलाव भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक किए जा रहे हैं.    YouTube पर अश्लीलता, नग्नता, मानहानि, उत्पीड़न, वाणिज्यिक और विज्ञापन और आपराधिक आचरण को प्रोत्साहित करने वाली सामग्री पहले से निषिद्ध हैं. इन शर्तों के माध्यम से अब ऐसे वीडियो पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा. अब तक पंजीकृत और गैर-पंजीकृत दोनों प्रकार के उपयोगकर्ता मनमानी ढंग से अप्रमाणिक और मानहानि करने वाले कंटेंट अपलोड करते रहे हैं. ऐसे उपयोगकर्ताओं को अब सावधान हो जाने की जरूरत है.  इसके अंतर्गत भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्थानों के लिए दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता नियम, 2021) के नियम पांच में बताई गई जरूरी शर्तों के मुताबिक, YouTube उपयोगकर्ता को यह बताना अनिवार्य होगा कि इस प्लेटफॉर्म पर प्रेषित होने वाले समाचार ऐप्लिकेशन या हाल-फिलहाल की घटनाओं से जुड़े कॉन्टेंट के प्रकाशक आप ही हैं. आपको YouTube पर अपने खाते की जानकारी, भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय को देनी होगी. YouTube अपने पंजीकृत सदस्यों को वीडियो अपलोड करने, देखने, शेयर करने, पसंदीदा वीडियो के रूप में जोड़ने, रिपोर्ट करने, टिप्पणी करने और दूसरे सदस्यों के चैनल की सदस्यता लेने देता है. इसमें सदस्यों से लेकर कई बड़े कंपनियों के तक वीडियो मौजूद रहते हैं. इनमें वीडियो क्लिप, टीवी कार्यक्रम, संगीत वीडियो, फ़िल्मों के ट्रेलर, लाइव स्ट्रीम आदि होते हैं. कुछ लोग इसे वीडियो ब्लॉगिंग के रूप में भी प्रयोग करते हैं.   गैर-पंजीकृत सदस्य केवल वीडियो ही देख सकते हैं, वहीं पंजीकृत सदस्य असीमित वीडियो अपलोड कर सकते हैं और वीडियो में टिप्पणी भी जोड़ सकते हैं. कुछ ऐसे वीडियो, जिसमें मानहानि, उत्पीड़न, नग्नता, अपराध करने हेतु प्रेरित करने वाले वीडियो या जो भी 18 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए घातक हो, उन्हें केवल 18+ आयु के पंजीकृत सदस्य ही देख सकते हैं. YouTube पर अश्लीलता, नग्नता, मानहानि, उत्पीड़न, वाणिज्यिक और विज्ञापन और आपराधिक आचरण को प्रोत्साहित करने वाली सामग्री पहले से निषिद्ध हैं. बदलावों के बारे में खास जानकारी और अपडेट की हुई शर्तें YouTube के पंजीकृत और गैर-पंजीकृत सदस्यों दोनों तरह के सदस्यों पर लागू होने वाले हैं. ये सेवा की शर्तें अब भी एक कानूनी दस्तावेज हैं. इन शर्तों में खाते का निलंबन और खाता बंद करना जैसे कुछ सेक्शन को फिर से व्यवस्थित किया जा रहा है. साथ ही, अन्य सेक्शन भी फिर से तैयार किए जा रहे हैं, जैसे, इस कानूनी समझौते को बदलना. ख़ास कर कम्यूनिटी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की शिकायत करने की प्रक्रिया को शामिल किया जाने वाला है. YouTube का इस्तेमाल हमेशा से इसके कम्युनिटी दिशा-निर्देशों और उनके उल्लंघन की शिकायत करने की प्रक्रिया पर निर्भर रहा है. अब हर चीज़ के बारे में साफ तौर पर जानकारी देने के लिए, कम्यूनिटी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की शिकायत कैसे की जाती है या किसी कॉन्टेंट के खिलाफ या चैनल को शिकायत कब मिलेगी, इन दोनों प्रक्रियाओं में कोई बदलाव नहीं किए गए हैं. ये शर्तें और Google की निजता नीति और आपके YouTube के इस्तेमाल पर लागू होती...
परमबीर

परमबीर सिंह मुंबई पहुंचे, जांच में हुए शामिल

मुंबई : मुंबई की एक अदालत द्वारा भगोड़ा करार दिए पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह गुरुवार को सुबह 11 बजे कांदीवली पुलिस स्टेशन गोरेगांव एक्सटॉर्शन केस की जांच में शामिल होने के लिए पहुंचे. मुंबई पुलिस के जॉइंट कमिश्नर मिलिंद भराम्बे ने बताया, "वे क्राइम ब्रांच के दफ़्तर 11 बजे पहुंचे. गोरेगांव एक्सटॉर्शन केस में वे अपना बयान दर्ज कराएंगे." परमबीर सिंह ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वे देश में ही मौजूद हैं और कहीं भागे नहीं हैं. इसके बाद अदालत ने उन्हें गिरफ़्तारी से राहत देते हुए जांच में शामिल होने का आदेश दिया था. परम बीर सिंह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखकर तत्कालीन गृह मंत्री और एनसीपी नेता अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार और कदाचार के आरोप लगाए थे. इस चिट्ठी के बाद परमबीर सिंह पर महाराष्ट्र में करप्शन और एक्सटॉर्शन के छह मामले दर्ज किए गए. 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी करमबीर सिंह को 17 मार्च को मुंबई पुलिस के कमिश्नर पद से हटा दिया गया था. परमबीर सिंह करीब 7 महीने के बाद गुरुवार को मुंबई पहुंचे हैं. कोर्ट ने 100 करोड़ की वसूली के मामले में उन्हें भगोड़ा घोषित कर रखा है. गौरतलब है कि कोर्ट ने परमरबीर सिंह की गिरफ्तारी पर कोर्ट लगा दी थी.
ग्रेच्युटी

ग्रेच्युटी से सेवानिवृत्त कर्मी को वंचित नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली : कोई सरकारी, अर्द्ध सरकारी या निजी संस्थान सेवानिवृत्त कर्मी को ग्रेच्युटी (Gratuity) से वंचित नहीं कर सकता. ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 की धारा 5 के अनुसार 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने पर भी उसे अनिवार्य रूप से इसका भुगतान करना जरूरी है. जी.बी. पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की विशेष अनुमति याचिका (Special Leave petition) पर सुनवाई के दौरान सुप्रीन कोर्ट ने ऐसी व्यवस्था देते हुए विश्वविद्यालय की याचिका खारिज कर दी. शीर्ष न्यायालय ने कहा है कि केवल कर्मचारी द्वारा सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष तक बढ़ाने के विकल्प का इस्तेमाल करने से, ग्रेच्युटी के लिए उसकी पात्रता को समाप्त नहीं किया जा सकता है. विश्वविद्यालय की विशेष अनुमति याचिका खारिज करते हुए और यह कहते हुए कि हस्तक्षेप का कोई मामला नहीं बनता है, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि, "...हम उच्च न्यायालय के विचार से सहमत हैं कि एक कर्मचारी द्वारा सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष तक बढ़ाने का लाभ उठाने के विकल्प का प्रयोग, ग्रेच्युटी के लिए उसकी पात्रता के खिलाफ संचालित नहीं हो सकता है; और इस तरह के एक विकल्प का प्रयोग करने से निजी प्रतिवादियों को ग्रेच्युटी से तब तक वंचित नहीं किया जाएगा, जब तक कि प्रतिष्ठान अर्थात याचिकाकर्ता-विश्वविद्यालय को राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन के बाद ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 की धारा 5 (Payment of Gratuity Act, 1972) के सख्त अनुपालन में छूट नहीं दी गई हो." इस मामले में न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ एक विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें जी.बी. पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की ओर से उत्तराखंड हाईकोर्ट के एक नवम्बर 2017 के आदेश को चुनौती दी गई थी. जी.बी. पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और 22 नवंबर, 2016 को ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत पारित निर्णय और आदेश, अपीलीय फोरम द्वारा और 19 जनवरी, 2013 को पारित आदेश, ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972 के तहत नियंत्रण प्राधिकरण द्वारा पारित किया गया था.
कोल इंडिया

कोल इंडिया ने मासूम बच्ची के इलाज के लिए स्वीकृत किए 16 करोड़

कोलकाता : देश की सबसे बड़ी कोयला कंपनी कोल इंडिया ने दिल को छू लेने वाली एक पहल करते हुए अपने एक कोयला खनिक की 2 वर्ष की मासूम बच्ची के इलाज के लिए 16 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है.   कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के दीपका कोयला क्षेत्र में कार्यरत ओवरमैन सतीश कुमार रवि की बेटी सृष्टि रानी 'स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी' (एसएमए) नामक एक बेहद ही दुर्लभ बीमारी से ग्रस्त है. अमूमन छोटे बच्चों में होने वाली इस बीमारी में स्पाइनल कॉर्ड और ब्रेन स्टेम में नर्व सेल की कमी से मांसपेशियां सही तरीके से काम नहीं कर पातीं और धीरे-धीरे यह बीमारी प्राणघातक होती चली जाती है. इसका इलाज बेहद ही महंगा है और इलाज में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन ‘जोलजेंस्मा’ की कीमत 16 करोड़ रुपए है. अब कोल इंडिया ने अपने परिवार की बिटिया के इलाज के लिए 16 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है. कोल इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया "सतीश जैसे कर्मी को अपनी बच्ची के इलाज के लिए इतनी ऊंची कीमत पर इंजेक्शन खरीद पाना संभव नहीं था. कोल इंडिया ने न सिर्फ अपने परिवार की बेटी की जान बचाने के लिए यह बड़ी पहल की है, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य उपक्रमों और दूसरे संस्थानों के लिए भी एक मिसाल पेश की है, जो इस धारणा पर कार्य करते हैं कि कर्मी और उनका परिवार उनकी सबसे बड़ी पूंजी है और उनकी जिंदगी बचाना संस्थान का प्राथमिक कार्य है." गौरतलब है कि कोल इंडिया की यह पहल ऐसे समय में आई है, जब देश भर में कोल इंडिया और उसकी अनुषंगी कंपनियों में कार्यरत कर्मी बिजली बनाने के लिए कोयले की बढ़ती मांग के मद्देनजर जरूरी सप्लाई सुनिश्चित किए जाने हेतु दिन-रात अनवरत कार्य में जुटे हैं. सृष्टि रानी के इलाज के लिए विदेश से आयात कर 16 करोड़ रुपए का ‘जोलजेंस्मा’ इंजेक्शन दिया जाना है. एम्स, दिल्ली में इलाज के बाद सृष्टि फिलहाल अपने पिता के कार्यस्थल दीपका के आवास में रह रही है, जहां उन्हें पोर्टेबल वेंटिलेटर पर रखा गया है. बता दें कि 22 नवंबर, 2021 को अपने जन्म के 6 महीने के भीतर ही सृष्टि काफी बीमार रहने लगी. इस बीच कोविड महामारी की वजह से उसके माता-पिता उसे बेहतर इलाज के लिए बाहर नहीं ले जा सके और स्थानीय स्तर पर उसका इलाज चलता रहा. हालत में सुधार न होता देख सतीश दिसंबर, 2020 में सृष्टि के इलाज के लिए सीएमसी वेल्लोर गए, जहां जांच के बाद पता चला कि उसे ‘स्पाइनल मस्क्युलर एट्रॉफी’ (एसएमए) है और ‘जोलजेंस्मा’ इंजेक्शन की जरूरत होगी, जो भारत के बाहर उपलब्ध है. 30 दिसंबर, 2021 को जब सतीश, सृष्टि को वेल्लोर से लेकर छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला स्थित दीपका के अपने आवास लौट रहे थे तो रास्ते में ही सृष्टि की तबीयत ज्यादा खराब हो गई और उसे एसईसीएल से इंपैनल्ड अपोलो अस्पताल बिलासपुर में भर्ती करना पड़ा. वहां काफी समय इलाज चलने के बाद सतीश ने एम्स दिल्ली से सृष्टि का इलाज कराया. फिलहाल बच्ची का इलाज घर पर ही चल रहा है, जहां वह...
कृषि कानूनों

कृषि कानूनों की वापसी महज राजनीतिक निराशा तो नहीं…

*कल्याण कुमार सिन्हा- विश्लेषण : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुक्रवार को तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की अप्रत्याशित घोषणा महज राजनीतिक निराशा का परिणाम तो नहीं है..! हालांकि इस घोषणा में राजनीति के मुकाबले लोकनीति का पलड़ा एक बार फिर भारी नजर आया है. स्वतन्त्र भारत में अब तक का यह 37वां सफल आंदोलन है. जयप्रकाश आंदोलन के बाद यह दूसरा लंबा चलने वाला आंदोलन है.   प्रधानमंत्री ने इन कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के साथ अपनी निराशा का इजहार किया है, उनका कहना कि 'हमारी सरकार, किसानों के कल्याण के लिए, खासकर छोटे किसानों के कल्याण के लिए, देश के कृषि जगत के हित में, देश के हित में, गांव गरीब के उज्जवल भविष्य के लिए, पूरी सत्य निष्ठा से, किसानों के प्रति समर्पण भाव से, नेक नीयत से ये कानून लेकर आई थी. लेकिन इतनी पवित्र बात, पूर्ण रूप से शुद्ध, किसानों के हित की बात, हम अपने प्रयासों के बावजूद कुछ किसानों को समझा नहीं पाए.'... उनकी निराशा ही दर्शाती है. इस घोषणा से आंदोलनकारियों के हौसले और बढ़े हैं. आंदोलन समाप्त कर अपने घर लौटने की प्रधानमंत्री की अपील भी उन्होंने ठुकरा दिया है. किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि जब तक उनकी बाकी मांगों पर सरकार अपना रुख स्पष्ट नहीं करती, संसद में इन कृषि कानूनों की वापसी की औपचारिकता पूरी नहीं होती और एमएसपी पर गारंटी देने का कानून नहीं बनाती है, तब तक वे वापस जाने वाले नहीं हैं. 26 नवंबर 2020 को दिल्ली कूच के साथ शुरू किया गया यह किसान आंदोलन सफलतापूर्वक एक साल पूरे करने जा रहा है. जयप्रकाश आंदोलन के बाद अब तक का सबसे लंबा चलने वाले इस किसान आंदोलन ने सरकार को झुकाने के लिए मजबूर कर अपनी पहली लड़ाई जीत ली है. इसके बावजूद एमएसपी को कानूनी जामा पहनाने और संसद से इन कानूनों की औपचारिकता पूरी होने तक डटे रहने का उन्होंने ऐलान कर दिया है. पंजाब और हरियाणा के इन किसानों के साथ उत्तर प्रदेश के किसानों इस आंदोलन से उपजी नाराजगी ने सरकार और भारतीय जनता पार्टी को सोचने पर विवश किया है. 26 नवंबर को भारत के वर्तमान ऐतिहासिक किसान आंदोलन को शुरू हुए एक वर्ष होने जा रहा है. पिछले वर्ष 26 नवंबर 2020 को जब किसान दिल्ली चले थे, तो उन्हें पता नहीं था कि उन्हें एक वर्ष तक दिल्ली की सीमा और सड़क पर रहकर लड़ना पड़ेगा. फिर भी उन्हें पता था कि यह लड़ाई इतनी छोटी भी नहीं है. इसलिए उन्होंने ट्रॉलियों में एक माह का राशन, बर्तन, ईंधन और बिस्तर साथ लेकर निकल पड़े थे. हालांकि पंजाब और हरियाणा के किसानों के सिंघु और टिकरी बॉर्डर मोर्चों ने इस आंदोलन की रीढ़ का काम किया है. लेकिन आंदोलन के इस एक वर्ष के दौरान 27 जनवरी 2021 को गाजीपुर बॉर्डर और 3 अक्टूबर 2021 को लखीमपुर खीरी में सत्ता की साजिशों से इस आंदोलन पर किए गए दो बड़े हमलों का मजबूत प्रतिकार कर इसे बचाए रखने में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसानों के पड़ाव गाजीपुर मोर्चे की भी बड़ी भूमिका रही है. जिन लोगों...
चारा घोटाला

चारा घोटाला पीछा नहीं छोड़ रहा राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद का

अब बांका जिला सब ट्रेजरी से 46 लाख रुपए की अवैध निकासी मामले में सिर पर टंग गई एक और तलवार *सीमा सिन्हा- पटना (बिहार) : चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं. सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 23 नवंबर को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव समेत 28 आरोपियों को अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है. इन मामलों सजा और बाकी बचे मामले में सजा की संभावना के दर्द के साथ बड़े बेटे तेजप्रताप भी उनकी परेशानी बढ़ाने से बाज नहीं आ रहे, पार्टी में पड़ रहे इसके विपरीत असर भी उनका सिर दर्द बढ़ा रहा है. यह मामला भागलपुर से बांका जिला के उप कोषागार से फर्जी पत्र के सहारे 46 लाख रुपए की अवैध निकासी का है. इसी केस में विशेष कोर्ट ने अनुपस्थित अभियुक्तों के बारे में सीबीआई को निर्देश दिया है कि यह रिपोर्ट दें कि वे जिंदा है या मर गये? बिहार विधानसभा उपचुनाव में प्रचार करने के लिए लालू यादव पटना आए थे. चुनाव खत्म होते ही पत्नी राबड़ी देवी के साथ वापस दिल्ली लौट गए. बताया गया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है. अब चारा घोटाला मामले में पटना सिविल कोर्ट ने 23 नवंबर को हाजिर होने का आदेश दे दिया है. एक तो बीमार, ऊपर से कोर्ट का चक्कर, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अध्यक्ष लालू यादव की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. चारा घोटाला मामले में पटना सिविल कोर्ट से उपस्थित होने का आदेश है. स्पेशल जज प्रजेश कुमार की अदालत ने 23 नवंबर को पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव समेत 28 आरोपियों को अदालत में हाजिर होने के लिए कहा है. बता दें कि मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव समेत तीन अभियुक्तों ने बीमारी का कारण देते हुए कोर्ट में वकील के माध्यम से उपस्थित होकर 317 का आवेदन दिया था और कोर्ट में अनुपस्थित होने का कारण बताया था. अदालत ने आवेदन को स्वीकार करते हुए 23 नवंबर को सदेह उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान विशेष कोर्ट में जगदीश शर्मा, आरके राणा, बेग जुलियस, साधना सिंह, ध्रुव भगत, त्रिपुरी मोहन प्रसाद, संजय उत्पल, फ्रेडरिक करकेटा, प्रभाकर कुमार सिंह समेत कुल 16 अभियुक्त सदेह उपस्थित थे, जबकि लालू प्रसाद यादव, नागेंद्र पाठक और प्रकाश कुमार लाल बीमारी के कारण कोर्ट में सदेह उपस्थित नहीं थे. गौरतलब हो कि यह मामला वर्ष 1996 से चल रहा है. प्रारंभ में कुल 44 अभियुक्त बनाए गए थे. वर्तमान में 28 अभियुक्तों पर मामला चल रहा है और आधा दर्ज अभियुक्त मरने की सूचना कोर्ट तक आ चुकी है. वहीं अन्य मामले में सीबीआई को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है. बता दें कि बांका कोषागार से फर्जी विपत्र के माध्यम से अवैध निकासी से संबंधित है. इसमें लगभग 46 लाख रुपए की अवैध निकासी अभियुक्तों द्वारा आपसी साजिश करने की गई थी. फिलहाल दिल्ली में हैं आरजेडी सुप्रीमो फिलहाल लालू यादव की तबीयत ठीक नहीं है. किडनी ट्रांसप्लांट के लिए उनके परिजन विदेश के डॉक्टरों की संपर्क में हैं. वे दिल्ली में बड़ी बेटी और राज्यसभा सांसद मीसा भारती के सरकारी आवास में रह...
3,000

3,000 की पेंशन मंजूर नहीं है EPS-95 पेंशनरों को

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की पेशकश का पेंशनरों के संगठनों ने भी किया भारी विरोध पेंशन के नाम पर क्रूर मजाक : देश के कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPS) के पेंशनर्स के लिए जल्द पेंशन की रकम में इजाफा होने की संभावना को अच्छी खबर के रूप में प्रचारित किया जा रहा है. विभिन्न न्यूज़ चैनलों के पोर्टलों पर इसे कई दिनों से बढ़-चढ़ कर गूगल प्लेटफॉर्म से प्रसारित किया जा रहा है. लेकिन, जिस मासिक पेंशन राशि 3,000 रुपए के मिलने की संभावना की वाहवाही की जा रही है, उसके बारे में पेंशनरों की क्या राय है, यह बताने की कोई कोशिश नहीं की जा रही. खबर है कि 31 प्रतिशत महंगाई भत्ते और राहत के बाद केंद्र की मोदी सरकार एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) के पीएफ खाताधारकों की न्यूनतम पेंशन की राशि 3,000 तक बढ़ा सकती है. जबकि यह पेंशन राशि पेंशनर्स और उनके संगठनों को मंजूर नहीं है. निवृत कर्मचारी ईपीएफ 1995 राष्ट्रीय समन्वय समिति ने आज मंगलवार, 16 नवंबर को देश भर में काला दिन मनाया गया और जिला कलेक्टरों और EPFO के क्षेत्रीय आयुक्तों को ज्ञापन सौंप कर 9,000 रुपए + महंगाई भत्ता मासिक पेंशन के रूप में निर्धारित करने की मांग की है. नागपुर में समन्वय समिति के महासचिव प्रकाश पाठक के नेतृत्व में यह ज्ञापन सौंपा गया. केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 6,000 रुपए करने की मांग की है, ऐसे में माना जा रहा है कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी 3,000 रुपए तक बढ़ा सकती है और जल्द ही इस मांग को पूरा किया जा सकता है. फिलहाल इस पर विचार चल रहा है. वैसे इस संबंध में 16 नवंबर 2021 को बैठक होनी थी, जिसे स्थगित कर 21 नवंबर किया जाने वाला है. केंद्रीय ट्रेड यूनियन के मेंम्बर्स की सोच पर अफसोस समन्वय समिति के विधि सलाहकार एवं वरिष्ठ पेंशनर योद्धा दादा झोड़े ने केंद्रीय ट्रेड यूनियन के मेंम्बर्स की सोच पर अफसोस जाहिर है. उन्होंने कहा कि उनकी इस सोच से साफ है कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी में शामिल ट्रेड यूनियंस के इन मेम्बरों को ईपीएफ पेंशनरों की तकलीफों की कोई चिंता नहीं है. 65 लाख पेंशनरों में लगभग 30 लाख ऐसे हैं, जिन्हें 1,000 रुपए से भी कम पेंशन मिल रहा है. अन्य पेंशनरों को भी लम्बी सेवाओं के बावजूद 1,500 रुपए से अधिकतम 3,000 या 3,500 रुपए ही पेंशन ही दिए जा रहे हैं. दादा झोड़े ने कहा कि 2016 में ही सुप्रीम कोर्ट ने EPS 95 के अंतर्गत पेंशनरों को उनकी सेवानिवृति के समय के वेतन के अनुसार पेंशन तय करने का आदेश जारी किया था. जिसे EPFO ने स्वीकार भी किया था और तदनुरूप जिन पेंशनरों ने इसके लिए पहल की, उन्हें देना भी शुरू कर दिया था. लेकिन बाद में नई-नई अधिसूचनाओं के सहारे इसमें पेंच लगाने शुरू कर दिए और फिर बड़ी हुई पेंशन राशि देना भी बंद कर दिया. दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि EPFO के नियमों के मुताबिक पेंशनरों का अंतिम वेतन चाहे जितना भी अधिक रहा हो, उनका पेंशन 5,500 और 6,500 रुपए पर ही तय होता आया...
त्रिपुरा

त्रिपुरा के बहाने महाराष्ट्र को जलाने की कोशिश

कल्याण कुमार सिन्हा- विश्लेषण : आश्चर्य की बात है कि त्रिपुरा की घटनाओं की प्रतिक्रिया देश के अन्य राज्यों में नहीं, केवल महाराष्ट्र के तीन शहरों में साम्प्रदायिक प्रदर्शनों और दंगों के रूप में हुई. इसे राज्य में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोई सोची-समझी साजिश ही कही जाएगी. महाराष्ट्र के अमरावती, नांदेड़ व मालेगांव में शांति व्यवस्था को बिगाड़ने के प्रयास के रूप में ही देखा जाएगा. शुक्र है कि कोई प्राण हानि नहीं हुई एवं ऐसे प्रदर्शन और दंगे राज्य के दूसरे शहरों में फ़ैलाने नहीं दिया गया. लेकिन जिन लोगों या संस्थाओं ने भी ऐसे प्रदर्शनों का आयोजन किया और दंगों के हालात पैदा किए, उनकी पहचान निष्पक्ष रूप से अब करने की जरूरत है. उत्तर-पूर्व के राज्य त्रिपुरा में पिछले दिनों जो कुछ हुआ वह निश्चित रूप से निंदनीय है. वहां कुछ उग्रवादी संगठनों ने बांग्लादेश में हुए सांप्रदायिक दंगों की प्रतिक्रिया में एक विशेष समुदाय के लोगों के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किया और उनके पूजा स्थलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. साथ ही मुस्लिम समुदाय के लोगों के वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों व उनके घरों पर हमला तक किया. संतोष की बात है कि समय रहते वहां भी इस उपद्रव पर काबू पा लिया गया. लेकिन समाज विरोधी तत्वों ने इस दुर्भाग्यपूर्ण वारदातों के बारे में सोशल मीडिया पर बहुत ही निंदनीय अफवाह फैलाई. मस्जिद को ध्वस्त करने की झूठी बात भी फैलाई गई. और इधर महाराष्ट्र में तैयार बैठे ऐसे ही तत्वों ने अपनी घृणित सोच को अंजाम दे दिया. केंद्रीय गृह मंत्रालय शनिवार को स्पष्ट कर दिया कि त्रिपुरा के गोमती जिले में एक मस्जिद के क्षतिग्रस्त होने और तोड़फोड़ के बारे में सोशल मीडिया में प्रसारित समाचार फर्जी है और तथ्यों की पूरी तरह से गलत बयानी है. इन वारदातों के बाद अमरावती शहर में चार दिनों का कर्फ्यू लागू करना पड़ा, इसके साथ ही अमरावती जिले के चार तहसील कस्बों मोर्शी, वरुड, अचलपुर, अंजनगांव सुरजी में प्रतिक्रिया स्वरूप भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रदर्शन आयोजित करने के बाद ऐहतियात के तौर पर इन कस्बों में भी कर्फ्यू लागू कर दिया गया. इसके साथ ही पूरे राज्य में निषेधाज्ञा लागू करने के अलावा तमाम तरह के सार्वजनिक आयोजनों पर भी रोक लगा दी गई है. इंटरनेट सेवाओं पर तो पहले से ही प्रतिबंध कायम है. सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के ऐसे घृणित कृत्यों पर भी राजनीति इस देश का दुर्भाग्य रहा है. त्रिपुरा की घटना के विरोध में महाराष्ट्र में सामने आने वाले संगठन 'रजा एकेडमी' का नाम सामने आ रहा है. इसी संगठन ने पूरे राज्य में शुक्रवार, 12 नवंबर को बंद का ऐलान किया था. बंद के दौरान संगठन से जुड़े लोगों ने नादेड़ में खुराफात की शुरूआत कर दी. ऐसा ही अमरावती और मालेगांव में भी किया गया. रजा एकेडमी को ही राज्य के इन तीन शहरों में दंगों जैसे हालत पैदा करने का दोषी माना जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिन्दू परिषद ने जहां इस संगठन पर बैन लगाने की मांग कर रही है और सरकार के मंत्री नवाब मालिक को निशाना बना रही है, वहीं शिवसेना रजा एकेडमी के...
आर्यन

आर्यन का छूटना, घर वापसी और जश्न बाप-बेटे की

*कल्याण कुमार सिन्हा- आर्यन खान का 26 दिनों का "जेल प्रवास" पूरे देश को आंदोलित करता रहा. आज शनिवार, 30 अक्टूबर को उनकी मन्नत वापसी, जन्नत वापसी से कम नहीं है. इस 26 दिनों के कारागार की सैर से खुद उनकी मार्केट वैल्यू तो बनी है, पिता शाहरूख खान ऊर्फ बादशाह खान की ब्रांड वैल्यू भी उन्होंने बढ़ा दी है. अब फिल्मों में आर्यन खान की डिमांड तो बढ़नी ही है. शाहरुख की भी ब्रांड वैल्यू के बढ़ने से अब उनके भी वारे-न्यारे हैं. बेटे ने पिता के न केवल ख्वाब पूरे किए, बल्कि पिता को बॉलीवुड में एक नई ऊंचाई भी दिला दी है. #WATCH Aryan Khan reaches his home 'Mannat' after being released from Arthur Road Jail in MumbaiA large gathering of media personnel outside Shah Rukh Khan's residence delayed the car's entry into the residential premises pic.twitter.com/Zgay7BQQ8N— ANI (@ANI) October 30, 2021 क्रूज पर जश्न मनाने गए आर्यन और उनके पिता दोनों को इस बात का गुमान शायद नहीं होगा कि अचानक ऐसे इतना बड़ा मौक़ा हाथ लगाने वाला है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के सचिन वानखेड़े को भी कहां पता होगा कि नाम कमाने की जगह ऐसी जलालत भी झेलनी पड़ेगी. वैसे बहती गंगा में हाथ धोने का मौका भी छक कर उठाया महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक ने. NCB से अपने दामाद की गिरफ्तारी का बदला तो जम कर वे ले ही रहे हैं, अपनी TRP भी उन्होंने खूब बढ़ाई है. मन्नत के जश्न के चीफ गेस्ट पर तो कायदे से उनका ही हक बनाता है. View this post on Instagram A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani) बहरहाल, आर्यन खान जेल से रिहा हो गए हैं. मुंबई क्रूज ड्रग्स मामले में छापे के दौरान गिरफ्तार हुए आर्यन खान 27 दिनों बाद आर्थर रोड जेल से रिहा हुए हैं. जेल के बाहर शाहरुख के बॉडीगार्ड रवि पहुंचे थे. मुंबई के आर्थर रोड जेल प्रशासन ने आर्यन को रवि के हवाले किया. इसके बाद पापा शाहरुख खान के साथ आर्यन खान अपने घर मन्नत पहुंच गए हैं. उनके जेल से बाहर निकलते ही फैन्स के बीच खुशी देखी गई और मन्नत के बाहर भी उनके स्वागत में भारी भीड़ जुटती गई. आर्यन की जमानत जूही चावला ने ली. उन्होंने कोर्ट में कहा कि वह आर्यन को बचपन से जानती हैं. शाहरुख खान के वकील ने कहा कि जूही चावला बचपन से ही आर्यन खान को जानती हैं दोनों के परिवारिक और प्रोफेशनल रिश्ते हैं. आर्यन का विस्तृत बेल ऑर्डर करीब पांच पेज का है, जिसके मुताबिक, आर्यन और उनके दोनों साथियों को एक लाख रुपये के मुचलके पर जमानत मिली है. इसके साथ ही उन्हें कुछ शर्तों का पालन भी करना होगा. जमानत की शर्तों के मुताबिक, आर्यन खान को 1 लाख रुपए का पर्सनल बॉन्ड भरना पड़ा. वे अब इस तरह की किसी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे. किसी साथी आरोपी से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे. गवाहों को प्रभावित और सबूत से छेड़छाड़ नहीं करेंगे. उन्हें पासपोर्ट...