विरोध प्रदर्शन

विरोध प्रदर्शन : ईपीएफओ के समक्ष ईपीएस-95 पेंशनरों का

नागपुर : ईपीएस-95 पेंशनर हजारों की संख्या में गुरुवार, 25 अगस्त 2022 को क्षेत्रीय कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के 132 रिज रोड, तुकड़ोजी प्रतिमा चौक के पास, रघुजी नगर, नागपुर-9 के कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन करेंगे. विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम में निवृत्त कर्मचारी (1995) राष्ट्रीय समन्वय समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश येंडे, राष्ट्रीय महासचिव प्रकाश पाठक, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष भीमराव डोंगरे, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पुंडलिक पांडे, राष्ट्रीय कानूनी सलाहकार दादा झोड़े, राष्ट्रीय सचिव श्याम देशमुख एवं नागपुर शाखा अध्यक्ष प्रभाकर खोंडे, राष्ट्रीय संगठन सचिव महमूद यूनुस, राष्ट्रीय सचिव अनिल कुसरे और राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अरुण कारमोर की उपस्थिति रहेगी. इस अवसर पर विभिन्न राष्ट्रीय श्रमिक संगठनों के नेताओं में मोहन शर्मा राष्ट्रीय सचिव एआईटीसी, श्रीमती अर्चनाताई भोमले इंटक, श्रीमती नीता चौबे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बी.एम.एस. भी भाग लेंगे. प्रदर्शन में अन्य राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ ईपीएस 95 अखिल भारतीय पेंशनभोगी कल्याण संघ चेन्नई, राज्य परिवहन सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ महाराष्ट्र, पेंशन भोगी संघ कोल्हापुर, महाराष्ट्र राज्य पेंशन भोगी संघ अहमदनगर और अन्य सभी संगठनों का प्रतिनिधित्व रहेगा. पिछले 27 वर्षों से ईपीएस95 पेंशनरों के पेंशन में एक पैसे की भी वृद्धि नहीं करने, कोरोना जैसी महामारी के दौरान भी सरकार द्वारा पेंशनरों को कोइ राहत नहीं देने, भगत सिंह कोशियारी कमेटी की पेंशन सुधार रिपोर्ट 2013 लागू नहीं करने, न्यूनतम पेंशन 9,000 रुपए और महंगाई भत्ता लागू करने की मांग पूरी नहीं करने को लेकर प्रदर्शन किया जाएगा. ईपीएस 95 पेंशनरों के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिनांक 4-10-2016 के फैसले और तदनुसार मुख्य आयुक्त, भविष्य निधि कार्यालय, नई दिल्ली का 23.3.2017 के परिपत्र के आधार पर लगभग 27 हजार पेंशन भोगियों को संशोधित पेंशन देना शुरू करने के बाद उसे रोक देना जैसे कदमों का विरोध किया जाएगा. उल्लेखनीय है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के पास पेंशनरों की 52 हजार करोड़ रुपए की निधि लावारिस पड़ी है. लेकिन, बावजूद इसके पेंशनरों को स्वास्थ्य सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है. विरोध प्रदर्शन दौरान ईपीएफओ के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री को निवेदन सौंपा जाएगा. निवेदन में ईपीएस 95 पेंशनरों के लिए किए गए वाडे की याद उन्हें दिलाई जाएगा और मांग की जाएगी कि जल्द से जल्द पेंशनरों को न्यूनतम 9,000 रुपए मासिक पेंशन और महंगाई भत्ते के साथ निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाए. निवृत्त कर्मचारी (1995) राष्ट्रीय समन्वय समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश येन्डे ने कहा कि मांगें पूरी नहीं होने पर आगामी 6, 7, 8 दिसंबर, 2022 को नई दिली के जंतर-मंतर और रामलीली मैदान पर देश भर के पेंशनरों द्वारा धरना और उपोषण किया जाएगा. साथ ही संसद भवन के समक्ष भी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.
दही हांडी

दही हांडी के गोविंदा को नौकरी में आरक्षण का फैसला अपरिपक्व

इंडिया अगेंस्ट करप्शन की सीएम शिंदे से निर्णय वापस लेने, फड़णवीस से हस्तक्षेप की मांग मुंबई / पुणे : 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' ने महाराष्ट्र सरकार दही हांडी के गोविंदा को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के फैसले को अपरिपक्व और राजनीतिक फैसला बताया है. संगठन ने कहा है कि दही हांडी एक साहसिक खेल है और यह खेल हमारी संस्कृति और परंपरा के अनुरूप है. लेकिन, राज्य सरकार ने गोविंदा को सरकारी नौकरियों में केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से आरक्षण देने का फैसला किया है.   इंडिया अगेंस्ट करप्शन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हेमंत पाटिल ने शनिवार को सरकार के इस निर्णय की आलोचना की. उन्होंने इसे राज्य सरकार का अपरिपक्व फैसला करार दिया है. उन्होंने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस को एक परिपक्व नेता बताते हुए उन्हें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ऐसे फैसले लेने से रोकने की मांग की है. उन्होंने कहा कि दही हांडी और गोविंदा को राजनीति से दूर रखें. ऐसे राजनीतिक निर्णय लेने के बजाय मेगा भर्ती का आयोजन करना चाहिए हेमंत पाटिल ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कई छात्रों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार से इस अपरिपक्व निर्णय को वापस लेने की मांग की है. उन्होंने कहा कि राज्य में अनेक सरकारी पद खाली हैं. सरकार ऐसे राजनीतिक निर्णय लेने के बजाय मेगा भर्ती का आयोजन करे और शिक्षित बेरोजगारों को उनकी योग्यता के अनुसार सरकारी सेवा में शामिल करे. ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री ने दही हांडी में हिस्सा लेने वाले गोविंदाओं को सरकारी नौकरियों में 5 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया है. हालांकि इस संबंध में किसी भी दही हांडी समूह की ओर से ऐसी कोई मांग नहीं की गई है.   नगर निगम चुनावों को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला हेमंत पाटिल ने आरोप लगाया कि यह फैसला नगर निगम के चुनावों को ध्यान में रखकर लिया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य में विभिन्न प्रकार के साहसिक खेल खेले जाते हैं. इनमें से कई खेल और कलाएं लुप्त हो रही हैं. किसी एक खेल के संबंध में ऐसा निर्णय लेने के बजाय, सरकार को लुप्त हो रहे खेल और कलाओं के संबंध में एक व्यापक नीति बनानी चाहिए. पाटिल ने कहा कि केवल राजनीतिक दान के रूप में इस तरह का आरक्षण देना सही नहीं है. उन्होंने कहा, यह दूसरों के साथ अन्याय होगा. शिक्षकों, तलाठी, पशुपालन सहित कई विभागों में भर्ती लंबित हैं. इसलिए सरकार को ऐसी रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया को पूरा करना चाहिए. दही हांडी और गोविंदा को भी राजनीति से दूर रखें उन्होंने सरकार को सलाह दी है कि छात्रों के साथ-साथ दही हांडी और गोविंदा को भी राजनीति से दूर रखें. पाटिल ने यह भी कहा कि अगर सरकार इस फैसले को वापस नहीं लेती है तो पबजी, कैंडी क्रश, हुल्लड़बाजी और बाइक रेसिंग खेलने वाले आरक्षण मांगेंगे. पाटिल ने यह भी कहा कि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस एक परिपक्व नेता हैं. उन्हें मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ऐसे फैसले लेने से रोकना चाहिए.
लाल

लाल किला से इस बार फार्मा मुगलों पर मोदी गिरा सकते हैं गाज

मेडिकल टूरिज्म बढ़ाने के लिए 'Heal in India, Heal By India' नई योजना की घोषणा भी संभव नई दिल्ली : इस बार भी आगामी 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोई बड़ा ऐलान करने वाले हैं. समझा जाता है कि प्रधानमंत्री का यह ऐलान फार्मास्यूटिकल कंपनियों पर गाज गिराने वाला साबित हो सकता है. यदि यह खबर सही है तो निश्चय ही यह एक बड़ी बात होगी. क्योंकि इससे पूर्व काफी दबदबा रखने वाली फार्मास्यूटिकल कंपनियों के विरुद्ध कोई बड़ा कदम नहीं उठाया जा सका था. फार्मास्यूटिकल कंपनियों के दबदबे पर अंकुश लगाने की तैयारी लंबे समय से सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री फार्मास्यूटिकल कंपनियों के दबदबे पर अंकुश लगाने की अपनी योजना को लंबे समय से अंजाम देने में लगे थे. इसके अंतर्गत ही कुछ वर्ष पहले जेनेरिक दवाओं को समर्थन दिया जाने लगा था. पिछले कोरोना काल में आयुर्वेदिक दवाओं के सफल परिणामों के कारण आम लोगों में बढ़ते भरोसे से भी सरकार अब हरकत में आ रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय की सक्रियता से इस बात के संकेत मिलने लगे हैं कि अब फार्मास्यूटिकल कंपनियों द्वारा उत्पादित जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें सरकार का अगला निशाना हो सकती हैं. समझा जा रहा है कि प्रधानमंत्री इन दवाओं की कीमतों को लेकर ही बड़ा ऐलान कर सकते हैं. इस बात के संकेत हैं कि प्रधानमंत्री मोदी इस बार लाल किले से अपने भाषण में जरूरी और लंबे इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के दाम को लेकर बड़ी घोषणा करेंगे. प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी का लाल किले की प्राचीर से ये 9वां भाषण होगा. उन्होंने पहली बार साल 2014 में लाल किले से भाषण दिया था. 70 फीसदी तक कम हो सकते हैं दवाओं के दाम सुविज्ञ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जरूरी दवा की लिस्ट में बड़े पैमाने पर बदलाव हो सकता है. अभी तक इस लिस्ट में 355 दवाएं हैं. साथ ही सरकार कंपनियों के भारी मुनाफे पर अंकुश लगा सकती है. ऐसा होने की स्थिति में दवाओं के दाम 70% तक कम हो जाएंगे. सरकार इसको कई चरणों में लागू कर सकती है. मेडिकल टूरिज्म बढ़ाने के लिए 'Heal in India, Heal By India' नई योजना इसके अलावा लाल किला से पीएम मोदी मेडिकल टूरिज्म बढ़ाने के लिए नई योजना का ऐलान कर सकते हैं. पीएम मोदी अपने भाषण में देश में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने और भारत की आयुर्वेदिक और परंपरागत चिकित्सा पद्धति को अर्थव्यवस्था के विकास का अहम बिंदु मानते हुए कुछ नई घोषणा कर सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, ये 'Heal in India, Heal By India' की थीम पर हो सकती है, जिसमें समग्र आर्थिक विकास का ढांचा तैयार किया जाएगा.
ललित

ललित बनेंगे सुप्रीम कोर्ट के 49वें चीफ जस्टिस, पेंशनरों की चिंता बढ़ी

नई दिल्ली : ईपीएस-95 मामले की सुनवाई में अपनी भूमिका से देश के 70 लाख पेंशनरों के लिए चिंता का विषय बन चुके जस्टिस उदय उमेश ललित आगामी 27 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के 49वें चीफ जस्टिस बन जाएंगे. उनके नाम की सिफारिश चीफ जस्टिस एन.वी. रमना ने विधि और न्याय मंत्रालय को अपने उत्तराधिकारी के तौर पर गुरुवार, 4 अगस्त को भेज दी है. जस्टिस उदय उमेश ललित भारत के दूसरे ऐसे चीफ जस्टिस होंगे, जो सीधे सुप्रीम कोर्ट के जज के पद पर नियुक्त हुए थे. उनसे पहले स्व. जस्टिस एस.एम. सीकरी प्रैक्टिस की दुनिया से सीधे सुप्रीम कोर्ट जज बने और बाद में चीफ जस्टिस के ओहदे तक पहुंचे. जस्टिस यू.यू. ललित 13 अगस्त, 2014 को सुप्रीम कोर्ट जज बने थे और वे 27 अगस्त, 2022 को मौजूदा चीफ जस्टिस एनवी रमना की जगह पर देश के नए प्रधान न्यायाधीश बनेंगे. हालांकि उनका कार्यकाल 73 दिनों का ही रहेगा और वे 8 नवंबर, 2022 तक पद पर रहेंगे. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की रिटायरमेंट की उम्र 65 साल होती है. महत्त्व के फैसले भी सुनाए हैं  क्रिमिनल लॉ के विशेषज्ञ माने जाने वाले जस्टिस ललित तीन तलाक, अनुसूचित जाति और जनजातियों के उत्पीड़न रोकने वाले 1989 के कानून का दुरुपयोग रोकने के मामले में होने वाली एफआईआर के पहले होने वाली जांच की प्रक्रिया तय करने जैसे कुछ चर्चित मुकदमे में बेंच का महत्वपूर्ण फैसला सुनाने वाले जज के रूप में जाने जाते हैं. महत्वपूर्ण मुकदमें छोड़ भी चुके हैं  हालांकि आधा दर्जन से अधिक ऐसे महत्वपूर्ण मुकदमो की सुनवाई में विभिन्न कारणों से अपने को अलग भी किया है. इनमें 2014 में याकूब मेमन की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई से, 2015 में मालेगांव ब्लास्ट केस से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई से, 2016 में आसाराम बापू मामले की सुनवाई से, 2016 में ही हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला की याचिका की सुनवाई से, 2017 में उन्होंने सूर्यनेल्ली रेप केस की भी सुनवाई से, 2018 में उन्होंने मालेगांव ब्लास्ट केस के एक अभियुक्त की एक याचिका की सुनवाई से और 2019 में अयोध्या मामले पर बनी संवैधानिक पीठ से भी उन्होंने अपने को अलग कर लिया था. विवादास्पद रहा है ईपीएस-95 मामले पर आदेश  ईपीएस-95 मामले में उनकी अध्यक्षता वाले दो सदस्यीय बेंच का 2021 का आदेश विवादों में घिर चुका है. इस मामले में केंद्र सरकार और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की एसएलपी और रिव्यु पेटिशन की सुनवाई में अनावश्यक रूप से सुप्रीम कोर्ट के 1916 के आरसी गुप्ता फैसले की जांच बड़े बेंच यानी तीन जजों के बेंच से कराने की सिफारिश उनकी अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय बेंच ने कर दी. जबकि सरकार और ईपीएफओ इस फैसले को स्वीकार कर उसे 2017 में ही लागू भी दिया था. और तो और सुनवाई के दौरान उनकी ओर से आरसी गुप्ता फैसले कोई उंगली भी नहीं उठाई गई थी. जस्टिस  इस रवैये से न केवल देश के 70 लाख पेंशनर हतप्रभ रह गए, बल्कि कानून के जानकार भी आश्चर्यचकित रह गए. पेंशनरों ने तो चीफ जस्टिस रमना से मांग भी कर दी थी कि जस्टिस ललित को उस तीन सदस्यीय बेंच...
UGC

UGC की आपदा प्रबंधन की पढ़ाई देश में अनिवार्य करने की तैयारी

यूजी और पीजी स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन पर मॉडल पाठ्यक्रम जारी किया पाठ्यक्रम विकसित करने में नागपुर के अग्रवाल ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका नागपुर : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने यूजी और पीजी स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन (DRRM) पर मॉडल पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए एक अधिसूचना जारी की है. अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर मॉडल पाठ्यक्रम राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM), गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा NIDM के तत्कालीन कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल मनोज कुमार बिंदल, प्रो संतोष कुमार, शेखर चतुर्वेदी, डॉ. प्रीति सोनी के मार्गदर्शन में और देश भर के विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के परामर्श से विकसित किया गया है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के कार्यकारी निदेशक ताज हसन (IPS) ने भी देश के सभी विश्वविद्यालयों, एवं शैक्षणिक संस्थानों को पत्र भिजवा कर आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर माननीय प्रधान मंत्री के दस सूत्री एजेंडा के एजेंडा 6 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र को मजबूत करने हेतु उच्च शिक्षा की मुख्यधारा में इस पाठ्यक्रम को सम्मिलित करने की अपील की है. पाठ्यक्रम विकसित करने में नागपुर के नवीन अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM), गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक सात सदस्यीय कार्यकारी समूह का गठन किया गया था. NIDM ने दादा रामचंद बाखरू सिंधु महाविद्यालय, नागपुर के रजिस्ट्रार नवीन महेश कुमार अग्रवाल को पश्चिम भारत क्षेत्र से उक्त सात सदस्यीय कार्यकारी समूह के सदस्य के रूप में नामित करके पाठ्यक्रम विकसित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी. कार्यकारी समूह के सदस्यों द्वारा जीरो ड्राफ्ट तैयार होने के बाद इसे देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों में अवलोकन और फीडबैक के लिए भिजवाया गया था. प्राप्त प्रतिक्रिया पर विचार करने के बाद पाठ्यक्रम का अंतिम प्रारूप UGC को अनुमोदन के लिए भेजा गया. जिसे UGC ने मंजूरी प्रदान कर दी है. UGC ने सभी उच्च शिक्षा संस्थानों और उनके संबद्ध कॉलेजों और संस्थानों से अनुरोध किया कि वे आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन पर स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर पाठ्यक्रम शुरू करें ताकि वर्ष 2030 तक देश को आपदाओं के प्रति अधिक सुरक्षित और लचीला बनाया जा सकने के प्रधानमंत्री के वादे को पूरा किया जा सके. यह कोर्स इसलिए जरूरी है... 2019 में हुए सर्वेक्षण के अनुसार, देश भर में स्नातक पाठ्यक्रमों में सबसे अधिक छात्र नामांकित हैं. कुल 3,73,99,388 छात्रों के नामांकन में से 2,98,29,075 छात्र यूजी कार्यक्रमों में नामांकित हैं. यह भारतीय सशस्त्र बलों के सक्रिय कर्मियों की कुल संख्या से कुछ ही अधिक है, जो लगभग 1.4 मिलियन है, यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य बल है और इसके पास दुनिया की सबसे बड़ी स्वयंसेवी सेना है. इसलिए, यदि इतने युवा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में पढ़ाई करके अपना भविष्य बनाते हैं तो आपदा प्रबंधन में बड़ी सहायता मिलेगी. 40 फीसदी स्थानीय आपदाओं की जानकारी मिलेगी भारत एक विशाल देश है. यहां भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर पहाड़ों के दरकने, समुद्री तूफान, बाढ़ से लेकर अन्य आपदाएं आती रहती है. ऐसे में हर क्षेत्र की आपदा अलग-अलग है. इसलिए इसमें 60 फीसदी पाठ्यक्रम आपदा प्रबंधन...
जल

जल योद्धा प्रवीण महाजन को मानद डॉक्टरेट, ‘वाटर डॉक्टर’ बने 

नागपुर : जल क्षेत्र के सतत अध्ययन के लिए प्रवीण महाजन को सनराइज यूनिवर्सिटी, अलवर, राजस्थान ने मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया है. पानी के क्षेत्र में उनके विशेष कार्य के लिए उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी गई है. महाजन महाराष्ट्र शासन के डॉ. शंकररावजी चव्हाण राज्य स्तरीय 'जलभूषण पुरस्कार' से भी सम्मानित किए जा चुके हैं.  राजस्थान के अलवर में शनिवार, 30 जुलाई को आयोजित दीक्षांत समारोह में सनराइज यूनिवर्सिटी के चांसलर एड. सुभाष यादव, पावरगिल्ड के निदेशक विनोद कुमार सिंह, भारत सरकार के केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष इंदु शेखर झा इस दीक्षांत समारोह में उपस्थित थे.  इसके लिए डॉ. प्रवीण महाजन के जल क्षेत्र में 32 साल के कार्य और जल जागरूकता के विषय पर महाजन के निरंतर जल जागरूकता कार्य, प्रचार और प्रयासों को मूल्यांकन किया गया है. लाभार्थियों तक पानी पहुंचाने के लिए किए गए अतुलनीय कार्य, फसल प्रणाली को बदलने के लिए किसानों के प्रयास, ड्रिप सिंचाई के प्रयास, सोशल मीडिया पर दैनिक पानी जागरूकता संदेश, जल साक्षरता अभियान, स्कूली छात्रों को पानी के महत्व के बारे में जागरूक करने के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता, अनुसरण करें सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली अपनाने के लिए सरकार तक, पर्यावरण अभियान- प्रसार, मार्गदर्शन, प्रदूषण नियंत्रण के लिए कार्य, जल संसाधनों का उत्पादन कल-आज-कल संदर्भ पुस्तक, तीर्थ स्थलों पर पानी जागरूकता प्रदर्शनियों के माध्यम से जन जागरूकता, पानी उपयोग संगठनों की बैठकें, वैनगंगा-नलगंगा नदी जोड़ने की परियोजना की मांग एवं प्रयास, बांध से गाद हटाने के संबंध में शासन स्तर पर अनुवर्ती कार्रवाई, सरकारी योजनाओं को लागू कराने का प्रयास, इसके अलावा पानी, पर्यावरण और प्रदूषण पर लिखे गए विभिन्न लेखों के लिए सन राइज यूनिवर्सिटी ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया है. जल क्षेत्र में 32 वर्षों से सतत सक्रिय रहने वाले प्रवीण महाजन का नाम अब किसी परिचय का मोहताज नहीं है. बुलढाणा जिले के ग्राम चिखली के निवासी प्रवीण महाजन ने राज्य स्तरीय 'जलभूषण पुरस्कार' जीतकर विदर्भ का नाम उजागर किया है. आज अनेक संगठन उनके कार्यों की प्रशंसा कर रहे हैं. समाज और देश के लिए उनके इस योगदान का समाज और सामान्य लोग सराहना करते हैं. प्रवीण महाजन अब "वाटर डॉक्टर" बन गए हैं.
संजय राउत

संजय राउत ने दी रेप और मर्डर की धमकी..?

ऑडियो क्लिप में 70 सेकंड के ऑडियो में 27 बार गालियां भी... पीड़ित महिला का रेप और मर्डर की धमकी देने का आरोप मुंबई : शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत की मुश्किलें बढ़ाने वाला एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है. 1,034 करोड़ रुपए के भूमि घोटाला मामले में फंसे राउत पर एक महिला ने बहुत ही गंभीर आरोप लगाए हैं. एक महिला स्वप्ना पाटकर ने संजय राउत पर रेप और मर्डर की धमकी देने का आरोप लगाते हुए मुंबई के वकोला पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराया है. #Shivsena सांसद #SanjayRaut का एक सनसनीखेज़ ऑडियो वायरल..(TIMES NOW नवभारत ऑडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता)https://t.co/evH7N9sAd7— Times Now Navbharat (@TNNavbharat) July 29, 2022 स्वप्ना पाटकर का दावा है कि मनी लॉन्ड्रिंग केस में उन्होंने ईडी को बयान दिया था, ये धमकी का मामला भी इसे केस से जुड़ा है. महिला ने पुलिस को ऑडियो क्लिप भी सौंपा है, जिसमें एक पुरुष गाली गलौज करते हुए महिला से बातचीत कर रहा है. आरोप है कि 70 सेकंड के ऑडियो में 27 बार गाली-गलौज हुई है. महिला का आरोप है कि ऑडियो में जिसकी आवाज सुनाई दे रही है, वह संजय राउत है. जबकि महिला की आवाज उन्हीं की है. पीड़ित महिला स्वप्ना पाटकर ने बताया उन्हें कॉल पर और पेपर के जरिए धमकी दी गई है. हिंदी समाचार  चैनल 'टाइम्स नाउ नवभारत' का दावा है कि उनके पास यह ऑडियो क्लिप मौजूद है. इसमें पुरुष की आवाज सुनाई दे रही है, जिसमें वह गाली गलौज देते हुए कह रहा है - 'नव फोन रख! अबे फोन रख... मेरे को सिखाएगी तू! तू क्या समझती है मेरे को! मेरे से पंगा मत ले फिर से बता रहा हूं, ये रेकॉर्ड करके रख ले, ये रेकॉर्ड कर और पुलिस में लेकर जाना.' ऑडियो में गाली-गलौज, महिला की आवाज - 'मैं तुम्हारे जैसी नहीं हूं, तुमसे बात करने में इंट्रेस्टेड नहीं हूं.' पुरुष की आवाज - 'तू रुक थोड़े दिन, तेरी औकात क्या है? मुझे जमीन के कागज ट्रांसफर करो या तो पेपर सुजीत के नाम ट्रांसफर करो या मेरे नाम.' नवभारत टाइम्स ऑनलाइन ने हालांकि, इस ऑडियो क्लिप की पुष्टि नहीं करता है. चैनल का कहना है कि ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ पीड़ित महिला ने स्वयं उन्हें सारी बातें बताई हैं. कई सालों से मिल रही धमकी शिकायतकर्ता महिला ने बताया, 'मुंबई पुलिस और ईडी को शिकायत की है. मुझे कॉल और पेपर के जरिए धमकी मिली है.' महिला ने दावा किया, ऑडियो में मेरे और संजय राउत के बीच बातचीत है. ऑडियो में कई अपशब्द कहे गए हैं. मैं समझ नहीं पा रही हूं कि इस तरह की भाषा क्यों इस्तेमाल हो रही है. मुझे पिछले कई सालों से धमकियां मिली हैं और डराया जा रहा है. पुलिस में शिकायत मिलने के बावजूद कोई सपोर्ट नहीं मिला.' 1,034 करोड़ रुपए के भूमि घोटाला मामले में समन देने के बाद भी शिवसेना सांसद संजय राउत गुरुवार यानी 28 जुलाई को ईडी के सामने पेश नहीं हुए. इन सबके बीच एक ऑडियो वायरल हो रहा है कि जिसमें मामले की गवाह स्वप्ना पाटकर को धमकी मिल रही...
बालासाहेब

बालासाहेब के बड़े पोते निहार, शिंदे के साथ : उद्धव को बड़ा झटका

मुंबई : राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को शिंदे गुट से रोज नई चुनौतियां और झटके मिल रहे हैं. आज शुक्रवार, 29 जुलाई को उनके भतीजे और बालासाहेब ठाकरे के अपने बड़े पोते निहार ठाकरे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से यहां मुलाकात कर उन्हें अपना समर्थन देने की घोषणा की है. निहार ठाकरे बालासाहेब ठाकरे के बड़े बेटे बिंदुमाधव ठाकरे के पुत्र हैं. बालासाहेब के तीन बेटों में बिंदुमाधव, उद्धव और जयदेव से बड़े थे. उनका निधन 1966 में एक सड़क दुर्घटना में हो गया था. पेशे से सफल वकील निहार ठाकरे द्वारा शिंदे गुट में शामिल होने से मुख्यमंत्री शिंदे को अपने गुट को आम शिवसैनिकों में असली शिवसेना साबित करने का एक और जरिया मिल गया है. वैसे असली शिवसेना का कानूनी फैसला सुप्रीम कोर्ट में होना है. अपने गुट की स्वीकार्यता और मजबूती के लिए मुख्यमंत्री शिंदे अनवरत प्रयासरत हैं. हाल ही में वे शिवसेना के उन वरिष्ठ नेताओं के घर जाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करने सफल रहे हैं, जिन्होंने बालासाहेब ठाकरे के साथ शिवसेना को खड़ा किया और उसकी मजबूती के लिए बालासाहेब के साथ कंधे से कंधा मिला कर काम किया है. पूर्व मुख्यमंत्री और बड़े शिवसैनिक रहे मनोहर जोशी से भी मिलकर उन्होंने उनका आशीर्वाद और समर्थन प्राप्त किया है. अब ठाकरे परिवार के ही निहार ठाकरे द्वारा शिंदे को समर्थन मिलना उनके प्रयासों की बड़ी सफलता मानी जा रही है. निहार ठाकरे के जुड़ने से शिंदे गुट के विधायकों और शिवसैनिकों में निश्चय ही उत्साह और विश्वास का संचार होने वाला है. इसके साथ ही उद्धव गुट को अब राज्य के सभी शिवसैनिकों को अपने पक्ष में करने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. निहार ठाकरे अब शिंदे के साथ जुड़ कर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करेंगे. वैसे उनकी पत्नी अंकिता पाटिल, भाजपा में शामिल बड़े नेता और कांग्रेस शासन में राज्य के कई बार मंत्री रहे हर्षवर्धन पाटिल की पुत्री हैं. उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर हाल ही में बावड़ा लखेवाड़ी से विधान परिषद का चुनाव जीता है.
कोल

कोल इंडिया की कोयला कंपनियों में शुरू होंगी 25 डिजिटल डिस्पेंसरी

कोयला कर्मियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा युक्त टेलीमेडिसिन टर्मिनल के जरिये मिलेगी इलाज की सुविधा नागपुर : कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने अपने कर्मियों की स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. कोल इंडिया की विभिन्न अनुषंगी कोयला कंपनियों की 25 डिस्पेंसरी जल्द ही डिजिटल डिस्पेंसरी के रूप में कार्य करेगा, जहां कोल कर्मियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा युक्त टेलीमेडिसिन टर्मिनल के जरिये स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से इलाज की सुविधा मिलेगी.  कोल इंडिया की इस अनूठी पहल से उन कोयला कर्मियों को भी रीजनल या सेंट्रल हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टरों का चिकित्सीय परामर्श मिल पाएगा, जो सुदूर खदानों में कार्य करते हैं. सीसीएल की 11, एमसीएल की 6, ईसीएल की 6, एसईसीएल की 1 और डब्ल्यूसीएल (वेकोलि) की 1 डिस्पेंसरी में डिजिटल डिस्पेंसरी शुरू किए जाने हेतु कोल इंडिया ने एलओए जारी कर दिया है. कैसे कार्य करेंगी डिजिटल डिस्पेंसरी डिजिटल डिस्पेंसरी में विशेषज्ञ डॉक्टर से मिले बिना मरीज को उनसे इलाज की सुविधा बेहद आसानी से मिल जाएगी. इसके लिए उन्हें सिर्फ डिजिटल डिस्पेंसरी तक पहुंचना होगा. डिजिटल डिस्पेंसरी में टेलीमेडिसिन टर्मिनल लगा होगा. डिस्पेंसरी का पैरा-मेडिकल स्टाफ विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये इस टेलीमेडिसिन टर्मिनल से मरीज को स्पेशलिस्ट डॉक्टर से चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराएगा.  टेलीमेडिसिन टर्मिनल में उपलब्ध क्लीनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के जरिये डॉक्टर मरीज की बीमारी को बेहतर तरीके से समझ कर उनका इलाज कर पाएंगे. साथ ही, डॉक्टर द्वारा दी गई ई-पर्ची के आधार पर डिजिटल डिस्पेंसरी में लगी आईओटी मशीन से 15 मिनट के भीतर मरीज की आवश्यक जांच (एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड के अलावा) कर उसकी डिजिटल रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी. रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञ डॉक्टर मरीज को दवा देंगे. मरीज के डिस्पेंसरी आने से लेकर उसके इलाज, जांच एवं दवा दी जाने तक की प्रक्रिया 30 से 45 मिनट में पूरी कर ली जाएगी. कहां-कहां होगी डिजिटल डिस्पेंसरी कोल इंडिया ने अपनी अनुषंगी कंपनी सीसीएल के बरका सयाल एरिया की उरीमारी डिस्पेंसरी, एनके एरिया की रोहिणी डिस्पेंसरी, पीपरवार एरिया के बछरा हॉस्पिटल, रजहरा एरिया की तेतरियाखार डिस्पेंसरी, मगध एरिया की मगध एवं आम्रपाली प्रोजेक्ट डिस्पेंसरी, हजारीबाग एरिया की जेआरएच केदला डिस्पेंसरी, कथारा एरिया की गोविन्दपुर डिस्पेंसरी, बीएंडके एरिया की एएके ओसीपी/केएमपी एवं डिरिडीह डिस्पेंसरी एवं ढोरी एरिया की कल्याणी डिस्पेंसरी को डिजिटल डिस्पेंसरी के रूप में विकसित करने का फैसला लिया है. इसी तरह, एमसीएल के हिंगुला एरिया की बलराम डिस्पेंसरी, कनिहा एरिया की कनिहा डिस्पेंसरी, बसुंधरा एरिया के बसुंधरा रीजनल हॉस्पिटल, लखनपुर एरिया के लखनपुर रीजनल हॉस्पिटल, ओरियंट एरिया की रामपुर डिस्पेंसरी एवं एमसीएल मुख्यालय संबलपुर के आनंद विहार हॉस्पिटल में डिजिटल डिस्पेंसरी विकसित की जाएगी. ईसीएल के राजमहल एरिया स्थित ललमटिया डिस्पेंसरी, एसपी माइंस एरिया स्थित एसपी माइंस डिस्पेंसरी, मुगमा एरिया स्थित बदजना कोलियरी डिस्पेंसरी, पांडवेश्वर एरिया स्थित पांडवेश्वर कोलियरी डिस्पेंसरी, झांजरा एरिया स्थित झांजरा एरिया डिस्पेंसरी एवं एसबी एरिया स्थित आरएन कॉलोनी डिस्पेंसरी को डिजिटल डिस्पेंसरी बनाया जाएगा. एसईसीएल के कुसमुंडा एरिया स्थित विकास नगर डिस्पेंसरी को डिजिटल डिस्पेंसरी बनाया जाएगा. डब्ल्यूसीएल (वेकोलि) के वणी नॉर्थ एरिया के भालर डिस्पेंसरी को डिजिटल डिस्पेंसरी में विकसित किया जाएगा.
पार्थ चटर्जी

पार्थ चटर्जी को मंत्रिमंडल से निकाला ममता ने, पार्टी पदों से भी हटाया 

चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी ने बताया, 'पार्थ उसके घर को “मिनी-बैंक” की तरह इस्तेमाल करते थे' कोलकाता : शिक्षक भर्ती घोटाले में गिरफ्तार मंत्री पार्थ चटर्जी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने मंत्रिमंडल से निकाल दिया है. इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने भी बड़ा फैसला लिया है और घोटाले में लिप्त आरोपी पार्थ चटर्जी को पार्टी के सभी पदों से भी हटा दिया गया है.  कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पार्थ चटर्जी को टीएमसी के महासचिव, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और तीन अन्य पदों से हटा दिया गया है. जांच जारी रहने तक उन्हें निलंबित कर दिया गया है.   दरअसल उनकी गिरफ्तारी के बाद सीएम ममता बनर्जी विपक्ष के निशाने पर आ गई थीं और उन पर पार्थ चटर्जी के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया था. आज मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पार्थ चटर्जी को मंत्री पद से हटा दिया गया. इस संबंध में बंगाल सरकार की ओर से आदेश जारी किया गया. चौतरफा दबाव के बाद आखिर ममता बनर्जी को चटर्जी को अपने मंत्रिमंडल से बाहर करना पड़ा है. लेकिन उन्हीं की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने चटर्जी को पार्टी से भी बाहर किए जाने की मांग कर दी थी.  पार्थ उसके घर में पैसे जमा कर “मिनी-बैंक” की तरह इस्तेमाल करते थे : अर्पिता  वहीं अर्पिता मुखर्जी ने कथित तौर पर दावा किया कि टीएमसी मंत्री पार्थ चटर्जी उसके घर में पैसे जमा करते थे और इसे “मिनी-बैंक” की तरह इस्तेमाल करते थे. सूत्रों ने कहा कि अर्पिता मुखर्जी ने प्रवर्तन निदेशालय को बताया है कि “सारा पैसा एक कमरे में रखा जाता था, जिसमें केवल पार्थ चटर्जी और उनके लोग ही प्रवेश करते थे.” सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक छापे में मिले अकूत कैश के मामले में अर्पिता ने कबूल किया है कि घर में मौजूद सारा पैसा पार्थ चटर्जी का था. स्टैंड बदला ममता बनर्जी ने  इससे पहले सीएम ममता बनर्जी ने चटर्जी की गिरफ्तारी के बाद कहा था कि अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो उसे सजा दी जानी चाहिए. पार्टी भी कार्रवाई करेगी, लेकिन हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. एक समय सीमा होनी चाहिए, जिसके अंदर सच और अदालत का फैसला सामने आना चाहिए. अगर कोई दोषी साबित होता है तो उसे सजा दी जानी चाहिए. मैं अपने खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियान की आलोचना करती हूं.’ इसके साथ ही  इस घोटाले में पार्थ चटर्जी का नाम और उनकी गिरफ्तारी से लेकर अब तक ममता बनर्जी ने इस मामले में चुप्पी साध रखी थी. ईडी की हिरासत में पार्थ चटर्जी और अर्पिता  शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी को गिरफ्तार किया है. सोमवार को कोलकाता की कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दोनों को 10 दिन की हिरासत में भेज दिया. ईडी ने चटर्जी की 14 दिनों की न्यायिक हिरासत मांगी थी. इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय ने पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के घर पर छापा मारकर 20 करोड़ रुपए और जेवर बरामद किए थे. वहीं बुधवार को भी अर्पिता मुखर्जी के तीन अन्य ठिकानों पर भी दबिश दी गई, जहां से...