‘हम’, ‘आप’, ‘सबसे बड़ी पार्टी’ मिलाकर 23 सौ दल लड़ेंगे चुनाव

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नई दिल्ली : अब तक छोटी-बड़ी तकरीबन 2300 राजनीतिक पार्टियां चुनाव आयोग में पंजीकृत हो चुकी हैं. भारत चुनाव आयोग में राजनीतिक दलों के नवीनतम डेटा के अनुसार देश में कुल 2293 राजनीतिक दल हैं. चुनाव आयोग में पंजीकृत इन पार्टियों में से 7 मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और 59 मान्यताप्राप्त राज्य पार्टियां हैं.

सबसे बड़ी पार्टी‘ …जी हैं, चौकें नहीं, यह भी नाम है इस पार्टी का. इसी तर्ज पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की भी पार्टी है, जिसका नाम है हम “हम” (हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा) पार्टी. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल जी की ‘आप’ पार्टी तो पहले से ही है.

हाल-फिलहाल आयोग में पंजीकरण करने वाली राजनीतिक पार्टियों में ‘भरोसा पार्टी‘, ‘राष्ट्रीय साफ नीति पार्टी’ और ‘सबसे बड़ी पार्टी’ सरीखे राजनीतिक दल शामिल हैं.

सीतामढ़ी से ‘बहुजन आजाद पार्टी’, उत्तर प्रदेश के कानपुर से ‘सामूहिक एकता पार्टी’ और तमिलनाडु के कायंबतूतर से ‘न्यू जेनरेशन पीपुल्स पार्टी’ ने अपना पंजीकरण कराया है.

आम तौर पर चुनाव आने से पहले दलों के पंजीकरण का सिलसिला शुरू हो जाता है. इस बार भी लोकसभा चुनाव से पहले ढेर सारे राजनीतिक दलों ने पंजीकरण के लिए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया.अकेले फरवरी और मार्च के बीच 149 राजनीतिक दलों ने आयोग में अपना पंजीकरण करवाया है. राजनीतिक दलों के पंजीकरण का यह सिलसिला लोकसभा चुनावों की घोषणा के एक दिन पहले, नौ मार्च तक चला.

पिछले साल नवंबर-दिसंबर के दौरान मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, मिजोरम और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनावों से पहले 58 राजनीतिक पार्टियों ने अपना पंजीकरण कराया था.

बहरहाल, ये पंजीकृत, लेकिन गैर-मान्यताप्राप्त राजनीतिक पार्टियां हैं. उनका अपना कोई नियत विशिष्ट चुनाव चिह्न नहीं होता है, जिसपर ये चुनाव लड़ सकें. उन्हें चुनाव आयोग से जारी ‘मुक्त चुनाव चिह्नों’ में से चुनना होगा. आयोग के नवीनतम सर्कुलर के अनुसार ऐसे 84 चुनाव चिह्न हैं. एक बात और, इन पार्टियों को आयोग में अपना पंजीयन बरकरार रखना है तो अपने उम्मीदवारों को हर चुनाव क्षेत्र में अलग-अलग चुनाव चिह्नों पर भी लड़ना पड़ सकता है.
राजनीतिक पार्टियांचुनाव आयोग

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