मणिकर्णिका : शुरुआत धीमी लेकिन बॉक्सऑफिस पर मचा सकती है धमाल

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मणिकर्णिका

समीक्षा
बड़े बजट की फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’
शुक्रवार, 25 जनवरी को रिलीज़ हो चुकी है. यह 2019 की पहली फिल्म है, जो करीब 125 करोड़ के बजट में बनी है. ‘मणिकर्णिका- द क्वीन ऑफ झांसी’ दर्शकों से पहले दिन दर्शकों अलग-अलग प्रतिक्रिया मिल रही है. पहले ही इस फिल्म की इतनी पब्लिसिटी हो चुकी है कि सबकी नजर इस फिल्म के पहले दिन के कलेक्शन पर सभी की नजरें हैं.

मणिकर्णिका शुक्रवार को देश के लगभग 3,000 स्क्रीन्स पर रिलीज किया गया है, जबकि विदेशों में 700 स्क्रीन्स पर रिलीज हुई है. इस फिल्म के पहले दिन का कलेक्शन 8 करोड़ का है. माना जा रहा है कि आज गणतंत्र दिवस के मौके पर फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिल सकता है.

फिल्म में लीड रोल में कंगना रनौत हैं. साथ ही उन्होंने इसके निर्देशन में भी काफी दखल रखा है. फिल्म के अन्य कलाकार भी एक से बढ़कर एक हैं. उनमें डैनी डैंग्जोपा, कुलभूषण खरबंदा और जीशान आयूब जैसे कलाकार अहम किरदारों में हैं.
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कमजोर निर्देशन फिल्म की सबसे बड़ी कमी है. दर्शक फिल्म की कहानी से कनेक्ट नहीं कर पाते. पूरी फिल्म आपको ओवर ड्रामेटिक और इमोशनल लगती है. कई सीन्स बड़े ही दोहराते भी लगते हैं. पूरी फिल्म में कमजोर निर्देशन और बचकानी बातें देखने को मिलती है. इतना ही नहीं अंग्रेजों के बोलने का एक्सेंट और तरीका बड़ा ही अजीब है. फिर भी यह फिल्म ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ का रिकॉर्ड जरूर तोड़ सकती है.

फिल्म कुछ दृश्य काफी इम्प्रेस भी करते हैं. जैसे रानी लक्ष्मी बाई के बेटे और पति के निधन वाले सीन हों या अंग्रेजों के सामने उनका सिर नहीं झुकाना या तलवारबाजी के शानदार दृश्य. लेकिन लड़ाई के दृश्य बहुत ही कमजोर हैं. एक दृश्य में रानी लक्ष्मी बाई गांव में जाकर जमकर डांस करती हैं, यह दृश्य हैरान कर देने वाला है. “बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी.” सुभद्रा कुमारी चौहान की यह कविता दर्शकों की नसों में खून की तरह दौड़ती रही है. ऐसे में यह फिल्म सोचने पर मजबूर कर देता है कि क्या रानी लक्ष्मी बाई के किरदार के साथ इन्साफ हुआ है ?
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फिल्म में कंगना रनौत रानी लक्ष्मीबाई के किरदार में पूरी तरह से जमती नजर नहीं आतीं. कई जगह उनका अभिनय शानदार है, लेकिन कई बार उनके एक्सप्रेशंस लाऊड हो जाते हैं. उनकी आवाज भी रानी लक्ष्मी बाई के दमदार किरदार से मैच नहीं हो पाती. कंगना की पतली आवाज और नाजुक शरीर झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के किरदार के अनुरूप नहीं लगता है. कई जगह कंगना योद्धा के रूप में नाजुक लगती हैं. लेकिन कई जगह अपने एक्शन से उन्होंने किरदार में जान डाली है. साथ ही कंगना की तलवारबाजी का दृश्य बढ़िया है.

यह फिल्म कंगना के करियर की सबसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म हो सकती थी. लेकिन कमजोर निर्देशन के कारण फिल्म वह मुकाम हासिल करने से यह चूकती नजर आती है. ऐसी बड़े बजट की फिल्म बाजीराव मस्तानी और पद्मावत जैसी फिल्मों की तरह सुपर डुपर हिट हो सकती थी, अगर इसे भी शानदार और जबरदस्त निर्देशन मिला होता. फिर भी कंगना ने इसे लीक पर रखने की पूरी कोशिश की है.

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