दूल्हा एक, दुल्हन दो, वो भी सगी बहनें

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साईनाथ अपनी दो पत्नियां सगी बहनें-जयश्री और धुरपता के साथ.

मामा की बड़ी बेटी से बचपन में ही तय कर दी गई थी शादी, लेकिन शर्त…

नांदेड़ (महाराष्ट्र ) : नांदेड़ जिला मुख्यालय से 82 किलोमीटर दूर बिलोली तहसील का कोटग्याल गांव पिछले कुछ दिनों से पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल इस चर्चा की वजह 5 मई को यहां हुई एक शादी है, जिसमें दूल्हा तो एक था लेकिन दुल्हन दो थीं.

धुरपता और राजश्री शिरगिरे दोनों सगी बहनें हैं और इन्होंने साईनाथ उरेकर से शादी की है. 60 साल के गंगाधर शिरगिरे की तीन बेटियां हैं- राजश्री, धुरपता और ज्योति. बेटा न होने के कारण वह अपनी बहन के लड़के साईनाथ उरेकर को बचपन में ही अपने घर लेकर आए, वह तब से उनके साथ रहते आ रहे हैं.

दुल्हन की शर्त थी-बड़ी बहन को भी अपनाना होगा
बताया गया कि बचपन में साईनाथ की शादी धुरपता से करना तय किया गया था. लेकिन धुरपता बचपन से ही मंदबुद्धि है और वह हमेशा ही बीमार रहती है. धुरपता का इलाज नहीं हो पाने के कारण उसकी शादी राजश्री के साथ करने का फैसला लिया गया. लेकिन राजश्री ने साईनाथ के सामने शर्त रख दी कि “अगर मुझसे शादी करनी है तो मेरी बड़ी बहन को भी अपनाना होगा.” राजश्री की यह शर्त साईनाथ ने भी मान ली और 5 मई 2018 को उनकी शादी हो गई.

कानून के डर से शिरगिरे परिवार परेशान
दूल्हा दुल्हन के परिवार की मानसिक स्थिति जानने के लिए बीबीसी की टीम ने गांव के कुछ और लोगों से बातें की. उनमें से एक संतोष पाटिल ने बताया, “कानून के डर से शिरगिरे परिवार परेशान है और उन्हें काउंसलिंग की जरूरत है.” संतोष बताते हैं कि इस शादी की वजह से पारंपरिक तौर तरीकों से चलते आ रहे हमारे गांव की चर्चा अब सभी जगह हो रही है, इसलिए शिरगिरे परिवार में थोड़ी बेचैनी है.

कानूनन दो शादियां करना है गुनाह
इस मामले में अधिक जानने के लिए बीबीसी की टीम ने वकील असीम सरोदे से बात की. उन्होंने बताया, “क़ानून के अनुसार दो शादियां करना गुनाह है. आप एक साथ दो पत्नी नहीं रख सकते. इस मामले में, इनमें से अगर कोई एक बहन चाहेगी तो केस दर्ज हो सकता है. इस तरह की शादियां न हों, यह महिला और बाल कल्याण विभाग की ज़िम्मेदारी होती है. ये लोग इस पर स्वतः कार्रवाई भी कर सकते हैं. उनके पास आए हुए रिपोर्ट या न्यूज़ के अनुसार वो लोग कार्रवाई भी कर सकते हैं.”

दोनों से शादी करने में भावनात्मक अपील ज्यादा, अपराध करना उद्देश्य नहीं
वकील सरोदे कहते हैं, “मामले को दर्ज किया जाना आसान है. लेकिन देखा जाए तो जिस उद्देश्य से उस लड़के ने दोनों बहनों से शादी की उसमें भावनात्मक अपील ज्यादा दिखता है. इसका मतलब यह है कि अपराध करना उनका उद्देश्य नहीं था.” उन्होंने कहा, “इस मामले में क़ानून का शिकंजा कसने से फ़ायदा नहीं होगा. सभी लोगों को मिल कर इसका हल निकालना चाहिए.”

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