रेप के दोषियों को फांसी देने के लिए अध्यादेश, 2 महीने में पूरी करनी होगी जांच

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प्रधानमंत्री आवास पर चली ढाई घंटे की बैठक में केंद्रीय कैबिनेट ने लिया बच्चियों से रेप की बढ़ती घटनाओं पर बड़ा फैसला

अध्यादेश के प्रावधान
– 12 साल से कम उम्र के बच्चों से रेप के दोषी को मिलेगी मौत की सजा
– तेज होगी जांच और सुनवाई, समयसीमा निर्धारित कर दी गई है, जो 2 महीने है
– 16 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप पर अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं
– 12 साल से कम उम्र की बच्ची से गैंगरेप पर ताउम्र जेल या मौत की सजा
– महिला से रेप मामले में न्यूनतम सजा 7 साल से बढ़ाकर 10 साल, इसे उम्रकैद में भी बदला जा सकता है

नई दिल्‍ली : भारत सरकार ने नाबालिग बच्चियों से रेप के मामलों पर कठोर निर्णय लेते हुए पॉकसो एक्‍ट में बदलाव पर मुहर लगा दी है. प्रधानमंत्री आवास पर शनिवार, 21 अप्रैल को चली ढाई घंटे की बैठक में यह फैसला लिया गया कि रेप के दोषियों को फांसी देने के लिए अध्यादेश लाया जाएगा. इस बैठक में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से रेप के मामलों में दोषियों को मौत की सजा का रास्ता साफ हो गया. इसे मंजूरी के लिए अब राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा.

जांच तेजी से 2 महीने में पूरी की जाएगी
इसके अलावा इस बैठक में यह निर्णय भी लिया गया है कि ऐसे मामलों में जांच तेजी से 2 महीने में पूरी की जाएगी. आपको बता दें कि रेप की हाल की घटनाओं के बाद देश में काफी गुस्‍सा व्‍याप्‍त है. जनता बार-बार इस तरह के मामलों में कठोर से कठोर सजा दिए जाने की मांग भी लगातार करती रही है. इसी जनभावना का सम्‍मान करते हुए केंद्र ने यह फैसला लिया है.

पॉक्सो के मौजूदा प्रावधान
पॉक्सो के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, दुष्कर्म के दोषियों के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद है और न्यूनतम सात साल की जेल है. 18 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का यौन व्यवहार इस कानून के दायरे में आता है. इसके तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है. यह कानून लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है.

राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फांसी की सजा पर मुहर
गौरतलब है कि देश के कुछ राज्‍य राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में केबिनेट ने 12 वर्ष से कम उम्र की बच्‍ची के साथ रेप के मामलों में फांसी की सजा पर मुहर लगा दी है. हालांकि इन्‍हें अभी राष्‍ट्रपति से मंजूरी मिलना बाकी है, लेकिन इससे यह बात साफ हो गई है कि राज्‍य भी इसको लेकर काफी सख्‍त रुख अपना चुके हैं.

रेप में कब फांसी
इसके अलावा आईपीसी की धारा-376 ए के तहत प्रावधान किया गया कि अगर रेप के कारण महिला मरने जैसी स्थिति में चली जाए तो दोषी को अधिकतम फांसी की सजा हो सकती है. साथ ही गैंग रेप के लिए 376 डी के तहत सजा का प्रावधान किया गया, जिसके तहत कम से कम 20 साल और ज्यादा से ज्यादा उम्रभर के लिए जेल का प्रावधान किया गया. साथ ही 376 ई के तहत प्रावधान किया गया कि अगर कोई शख्स रेप के लिए पहले दोषी करार दिया गया हो और वह दोबारा अगर रेप या गैंग रेप के लिए दोषी पाया जाता है तो उसे उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजा होगी.

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