साजिश के तहत EPFO द्वारा जारी सर्कुलर का देशव्यापी विरोध

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अनेक शहरों में विरोध प्रदर्शन कर वयोवृद्ध EPS 95 पेंशनरों ने Circular वापस लेने की मांग की

नागपुर : सुप्रीम कोर्ट के 4 नवंबर 2022 के फैसले के आदेश को तोड़मरोड़ कर EPFO द्वारा विगत 29 दिसंबर 2022 को EPS-95 पेंशनरों के विरुद्ध साजिश के तहत जारी किए गए सर्कुलर (Circular) का देश भर में वयोवृद्ध पेंशनरों ने विरोध किया है. देश के लगभग सभी राज्यों में पेंशनरों ने प्रदर्शन कर इस सर्कुलर का कड़ा विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है.

 
यह विरोध प्रदर्शन देश भर में पिछले 10 जनवरी से लगातार जारी है. इससे पूर्व पेंशनरों के संगठनों की ओर से प्रधान मंत्री, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, सहित EPFO एवं CBDT और ट्रस्ट के सभी सदस्यों को विरोध पत्र भेज कर उन्हें EPFO की साजिश से अवगत कराया है एवं 29 दिसंबर 2022 का सर्कुलर निरस्त करने की मांग की है. साथ ही  मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने 4-11-2022 को जो फैसला सुनाया है, उसे आर.सी. गुप्ता प्रकरण के निर्णय के आधार पर EPFO के 23-03-2017 एवं पूर्व के सर्कुलर के अनुसार क्रियान्वित किया जाए.
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पेंशनरों का आरोप है कि EPFO जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की न केवल अनदेखी कर रहा है, बल्कि फैसले को तोड़मरोड़ कर लाखों ईपीएस-95 पेंशनरों को उच्च पेंशन या पूर्ण वेतन पर पेंशन पाने के अधिकार से वंचित करने की साजिश कर रहा है.

सर्कुलर को पूर्णतः अवैध बताते हुए पेंशनरों ने यह मांग दोहराई है कि इस परिपत्र को निरस्त किया जाए. उन्होंने यह भी मांग की है कि कि जो कर्मचारी 1-09-2014 के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं और जो वर्तमान में कार्यरत हैं, उनके न्यायोचित पेंशन देने के लिए शीघ्र परिपत्र जारी किया जाए और पेंशनरों के खिलाफ साजिश बंद की जाए.

उल्लेखनीय है कि ईपीएस 1995 पेंशन के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने 4-11-2022 का फैसला सुनाया है. लेकिन EPFO ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए 29-12-2022 को जो सर्कुलर जारी किया है, वह सर्कुलर सुप्रीम कोर्ट के सभी फैसलों के पूरी तरह खिलाफ है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने ईपीएस पेंशन योजना के पेंशनरों को चकित कर दिया है. भविष्य निधि संगठन का उपरोक्त सर्कुलर पेंशनरों के खिलाफ साजिश है.

इस विवादास्पद सर्कुलर को निरस्त करने की मांग को लेकर महाराष्ट्र के मुंबई, नागपुर, अकोला, बुलढाणा, औरंगाबाद, नांदेड़, पुणे, नासिक समेत अनेक शहरों में पेंशनरों ने अपने अलग-अलग संगठनों के तहत EPFO के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों के समक्ष प्रदर्शन किया और EPFO के संबंधित क्षेत्रीय कमिश्नरों को विरोध पत्र सौंपा.

मध्यप्रदेश के भोपाल, जबलपुर, इंदौर सहित अन्य शहरों में भी पेंशनरों द्वारा विरोध प्रदर्शन के समाचार मिल रहे हैं. इसके साथ ही केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, झारखंड, बंगाल सहित उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान सहित गुजरात के भी अनेक शहरों से प्रदर्शन के समाचार मिले हैं.

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के 4-11-2022 के फैसले की धारा 44(9) ने सुप्रीम कोर्ट को आर.सी. गुप्ता मामले में फैसले को कानूनी और उचित ठहराते हुए आठ सप्ताह के भीतर 4-10-2016 के फैसले को लागू करने का निर्देश दिया. लेकिन EPFO ने 4-11-2022 के फैसलों की धाराओं की गलत व्याख्या करने की साजिश की है और आर.सी. गुप्ता के मामले में 4-10-2016 के फैसले को ही अपने 29-12-2022 के सर्कुलर में बदल कर रख दिया है.
 
इस सर्कुलर के तहत उच्चतम न्यायालय के आर.सी. गुप्ता मामले के निर्णय के अनुसार अधिकांश सेवानिवृत्त कर्मचारी उच्च पेंशन या पूर्ण वेतन पर पेंशन पाने के पात्र नहीं रह पाएंगे और उनमें से अधिकांश को पेंशन का लाभ नहीं मिल पाएगा.

ध्यान देने की बात है कि 2016 के आर.सी. गुप्ता प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट के ही निर्णय के क्रियान्वयन के लिए 23-03-2017 को EPFO द्वारा एक सर्कुलर जारी किया जा चुका है. तदनुसार लगभग 24672 पेंशनरों को उच्च पेंशन देने के लिए इसे क्रियान्वित भी किया जा चुका है. यह सर्कुलर दिनांक 23-03-2017 सीबीटी और भारत सरकार के अनुमोदन से जारी किया गया है. लेकिन वर्तमान 29-12-2022 का सर्कुलर का सीबीटी या भारत सरकार ने कोई अनुमोदन भी नहीं किया है.

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