म्यूकोर्मिकोसिस की दवा के उत्पादन में बाधा बनी कच्चे माल की कमी

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म्यूकोर्मिकोसिस

Black Fungus के कारण होता है यह रोग, यूरोप और चीन से कच्चे माल के आने का इंतजार

नागपुर : कच्चे माल की कमी से कोविड से ठीक हुए मरीजों में काले कवक (Black Fungus) के कारण होने वाले म्यूकोर्मिकोसिस के इलाज के लिए आवश्यक एम्फोटेरिन बी परिवार की दवाओं के उत्पादन में बाधा उत्पन्न हो गई है. बताया गया कि एम्फो के लिए कच्चा माल जर्मनी और चीन से आता है, जहां कुछ प्रतिबंधों के कारण देरी हो रही है. समझा जाता है कि जर्मनी से डिप्लोमेटिक चैनल से ही यह बाधा दूर करना संभव हो सकेगा. 
म्यूकोर्मिकोसिस
जेनेटिक, जिसे पिछले हफ्ते एम्फोटेरिसिन बी के उत्पादन की मंजूरी भी मिली थी, यूरोप और चीन से कच्चे माल के आने का इंतजार कर रही है. जेनेटिक लाइफसाइंसेज के प्रबंध निदेशक महेंद्र क्षीरसागर ने बताया कि विदेशों से कच्चा माल खरीदना एक चुनौतीपूर्ण और समय लेने वाला काम हो गया है.

म्यूकोर्मिकोसिस के मामलों में वृद्धि के बाद एम्फो परिवार (लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी, एम्फोटेरिसिन बी डीऑक्सीकोलेट और एम्फोटेरिसिन लिपिड इमल्शन) दवाओं की पूरे देश में भारी कमी बताई जा रहा है.

भारत सीरम को भी नहीं मिल रहा कच्चा माल
मुंबई के पास अंबरनाथ में स्थित भारत सीरम एंड वैक्सीन लिमिटेड, जो वर्तमान में राज्य में एम्फो परिवार दवाओं का उत्पादन करने वाली एकमात्र दवा कंपनी है, को भी कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ रहा है.

भारत सीरम ने कहा है कि प्राथमिक ध्यान देश में लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी की वर्तमान मांग को पूरा करना है. कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि वे महत्वपूर्ण स्थानों पर स्टॉक और आवंटन पर सरकारी अधिकारियों को लगातार अपडेट कर रहे हैं.

भारत सीरम ने यह भी दावा किया कि कंपनी प्रमुख इनपुट सामग्री की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकारी अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं के साथ काम कर रही है और रोगियों की हर संभव सहायता के लिए विभिन्न उपाय कर रही है.

राज्य भर में बढ़ती मांग के साथ, कंपनी ने अपने दो बैच प्रोडक्शन को प्री-शेड्यूल किया है. कंपनी के एक सूत्र ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य तीसरे सप्ताह तक राज्य सरकार को लगभग 6,500 इंजेक्शन और इसी तरह की एक अन्य मात्रा इस महीने के अंत तक सौंपने का है. एक सूत्र ने कहा, “एम्फो के लिए कच्चा माल जर्मनी से आता है, जहां कुछ प्रतिबंधों के कारण देरी हुई है, लेकिन सरकारी स्तर पर डिप्लोमेटिक चैनल से ही देरी कम हो सकती है.”

पता चला है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए), विदर्भ की कम से कम तीन और दवा कंपनियों को म्यूकोर्मिकोसिस की एम्फोटेरिसिन बी बनाने की मंजूरी जारी करने पर विचार कर रहा है.

जेनेटिक के वर्धा लैब से रेमेडीसवीर की आपूर्ति जारी 
एक अच्छी खबर यह है कि जेनेटिक लाइफसाइंसेज द्वारा वर्धा प्रयोगशाला में उत्पादित लगभग 6,306 रेमेडिसविर की शीशियां रविवार को नागपुर के हेटेरो लैब डिपो को आवंटित किया जा चुका है. इससे पूर्व पिछले सप्ताह लगभग 12,000 शीशियां पुणे को आवंटित किए गए थे.

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