सिद्धू ने बनाया किसान आंदोलन को सक्रीय होने का जरिया

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चंडीगढ़ : विवादों से घिरे दो वर्षों तक नेपथ्य में रह रहे पंजाब के दमदार नेता नवजोत सिंह सिद्धू किसान आंदोलन को मौका बना आज फिर सामने आए. मीडिया के सामने आकर सिद्धू ने कृषि कानून को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला. साथ ही पंजाब सरकार के मुखिया कैप्टन अमरिंद सिंह पर भी भड़ास निकाली.

उन्होंने पंजाब में तिलहन और दलहन की खरीद के लिए कैप्‍टन सरकार पर निशाना साधा. चंडीगढ़ के पंजाब भवन में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि आखिर पंजाब सरकार दाल और तिलहन पर किसानों को न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) क्‍यों नहीं दे रही है.

पंजाब की अपनी कांग्रेसी सरकार के खिलाफ ही बोलने वाले सिद्धू ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के लगभग दो साल बाद मीडिया को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि वे सिर्फ केंद्रीय कृषि कानूनों और खेत किसानों की बात करने के लिए आए हैं. इस दौरान उन्होंने हरियाणा का नमूना पेश करते हुए कहा कि सरकार अनाज की खरीद पर मोटी रकम खर्च कर रही है. हरियाणा सरकार तिलहन खरीद रही है और उसमें से तेल बेच रही है. हम इस पर एमएसपी क्यों नहीं दे सकते हैं. उन्होंने कहा कि किसान जैविक खेती के लिए तैयार हैं, लेकिन कम से कम किसी को उनका समर्थन करने के लिए आगे तो आना चाहिए. सिद्धू ने कहा कि किसानों मनरेगा की तरह न्यूनतम समर्थन आय की भी जरूरत है.

सिद्धू ने पंजाब सहित देशभर में चल रहे किसान आंदोलन का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि तीनों कृषि कानूनों को किसानों के हित में रखकर केंद्र सरकार को वापस लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि लोगों ने केंद्र सरकार के काननू को नकार दिया है.

ज्ञातव्य है कि कैप्‍टन सरकार से इस्‍तीफा देने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने मीडिया से दूरी बना ली थी, आज करीब 2 साल बाद पहली बार वो मीडिया के सामने आए. इसके साथ ही उन्होंने किसान आंदोलन का सहारा लेकर फिर से सक्रिय होने की जमीन तलाश ली है.

इससे पूर्व पिछले वर्ष दिसंबर 2020 में नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने ट्वीट के साथ एक वीडियो संदेश भी जारी किया था. इसमें उन्होंने अपने शायराना अंदाज में कहा था, “भट्ठी को दूध पर रखो तो उसका उबलना निश्चित है.” लेकिन तब उन्हें कोई तवज्जो नहीं मिल पाई थी. 

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