सूचना के अधिकार पर ‘Digest of RTI Cases’ शीघ्र  

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पुस्तक का कवर. 

सूचना अधिकार फिल्ड के चैम्पियन नवीन अग्रवाल की नई कृति

नागपुर : सूचना अधिकार विषय पर एक अनूठी पुस्तक “Digest of RTI Cases” शीघ्र रिलीज होने जा रही है. जिसमें RTI से सबंधित सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट के लगभग सभी महत्वपूर्ण निर्णयों का समावेश किया गया है. पुस्तक अंग्रेजी में लिखी गई है.
सूचना
इस Digest के सह-रचनाकार हैं- नवीन महेश कुमार अग्रवाल. अग्रवाल दादा रामचंद बाखरू सिंधु महाविद्यालय, नागपुर के रजिस्ट्रार हैं. इस पुस्तक के उनके सहलेखक प्रोफेसर नीरज कुमार और प्रोफेसर (डॉ.) नवीन कुमार अग्रवाल भी सूचना के अधिकार क्षेत्र के बड़े जानकारों में से हैं. इस विषय पर इन दोनों लेखकों की और भी पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं. प्रोफेसर नीरज कुमार जहां लखनऊ विश्वविद्यालय के बिज़नेस एडमिनिस्ट्रशन विभाग के सेवानिवृत हेड रहे हैं, वही प्रोफेसर (डॉ.) नवीन कुमार अग्रवाल एल.एन. मिश्रा विश्वविद्यालय, दरभंगा (बिहार) के गणित विभार के हेड और विश्वविद्यालय के जनसम्पर्क अधिकारी भी हैं. विषय के गहन अध्येयता नवीन महेश कुमार अग्रवाल- सूचना अधिकार केंद्र, यशदा (महाराष्ट्र शासन की शीर्ष प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्था), पुणे के अतिथि व्याख्याता (सूचना अधिकार अधिनियम, 2005) रहे हैं. वे सचिवालय, प्रशिक्षण तथा प्रबंध संस्थान (आई.एस.टी.एम.), (कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार द्वारा प्रमाणित) के सूचना अधिकार प्रशिक्षक भी हैं. सूचना का अधिकार क्षेत्र में तीनों सहलेखकों की गहरी रुचि, गहन अध्ययन और विशाल अनुभूत जानकारियों का ही परिणाम है कि इस क्षेत्र से सम्बंधित यह सर्वसमावेशी पुस्तक “Digest of RTI Cases” सामने आ रही है.  

RTI के अंतर्गत कैसी सूचनाएं मांगी जा सकती हैं, कौनसी सूचनाएं प्रदान की जा सकती है या किन सूचनाओं को देने से मना किया जा सकता है, इन बिंदुओं पर भी विस्तार से पुस्तक में समझाया गया है. नवीन अग्रवाल बताते हैं कि व्यक्तिगत सूचना, थर्ड पार्टी से सम्बंधित सूचना, व्यापक जनहित, अपील प्रक्रिया, दंड, आदि.. को समझने एवं उससे सम्बंधित निर्णय लेने में सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट के निर्णयों का सन्दर्भ लेना आवश्यक हो जाता है. क्योंकि विभिन्न विधायी शब्द, अवधारणाएं और पेचीदगियों की व्याख्या उनके द्वारा ही की जाती है. इस पुस्तक में इन विषयों की सारगर्भित जानकारी दी गई है.

लेखक अग्रवाल का कहना है कि पुस्तक लोक सूचना अधिकारी (Public Information Officer), प्रथम अपीलीय अधिकारी, अधिवक्ता, सूचना अधिकार प्रशिक्षक, केंद्र एवं राज्य सरकार के अधिकारी, लोक प्राधिकारी, विश्वविद्यालय, महाविद्यालय एवं शालाओं के प्राचार्य, शिक्षक, प्रशासकीय कर्मचारी, विद्यार्थी एवं जो भी सूचना अधिकार का उपयोग करते हैं, ऐसे सभी नागरिकों के लिए निश्चित रूप से उपयोगी रहेगी.
 
429 पन्नों की यह पुस्तक हार्ड कॉपी एवं ई बुक दोनों विकल्पों में उपलब्ध हैं. निर्धारित शुल्क प्रदान कर धनश्री बुक एजेंसी, अमेज़ॉन, फ्लिपकार्ट एवं अन्य अनेकों माध्यम से हार्ड कॉपी में तथा यूनिस्टी, गूगल बुक, अमेज़ॉन किंड्ले आदि के माध्यम से ई-बुक के रूप में प्राप्त हो सकती है.

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