कौन बनेगा महाराष्ट्र का सीएम : भाजपा-शिवसेना में पेंच कायम  

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महाराष्ट्र

राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावना

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए 14 दिन बीत चुके हैं, राज्य में भाजपा-शिवसेना गठबंधन भारी बहुमत के बाद भी सरकार गठन में विफल हैं. दोनों दलों के बीच मुख्यमंत्री पद का पेंच फंस गया है. भाजपा सर्वाधिक 105 सीटें जीतकर सरकार बनाने के अपने दावे पर कायम है, वहीं मात्र 56 सीटें पाने वाली शिवसेना भी मुख्यमंत्री पद के लिए अड़ी हुई है. आज 8 नवंबर राज्य में सरकार गठन करने का आखिरी तारीख है. कल 9 नवंबर को राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने को बाध्य होंगे.
 
ज्ञातव्य है कि 2014 के चुनाव के बाद विधानसभा का गठन 10 नवंबर 2014 को हुआ था, अतः 9 नवंबर 2019 यानी शनिवार को विधानसभा भंग हो जाएगी. ऐसी स्थिति में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होना अवश्यम्भावी है.

इस बीच भाजपा और मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री पद के दावेदार उद्धव ठाकरे आज आरोप-प्रत्यारोप के साथ दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना क्षीण नजर आने लगी है. चुनाव परिणाम आने के बाद से ही भाजपा और शिवसेना के बीच रिश्ते तल्ख होते गए हैं और बयानबाजी का दौर चलता रहा. सत्ता पर 50-50 के फॉर्मूले और मुख्यमंत्री के पद को लेकर दोनों दल आमने सामने हैं और इस बीच अन्य दलों के साथ मुलाकातों का दौर भी चला.

गुरुवार को शिवसेना के विधायकों ने एक प्रस्ताव पारित कर, महाराष्ट्र में सरकार गठन पर अंतिम निर्णय लेने के लिए पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे को अधिकृत किया. तमाम अनिश्चितता और विधायकों के दल-बदल की आशंका के बीच शिवसेना ने अपने विधायकों को होटल में ठहराया दिया.

वहीं गुरुवार को ही भाजपा नेताओं ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात भी की लेकिन सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया.

दोनों दलों की तरफ से लगातार आ रहे बयानों के बीच अब शुक्रवार को सभी नज़रें राज्य की राजनीतिक हलचल पर टिकी हैं, क्योंकि सरकार के गठन के फैसले को लेकर यह अंतिम और निर्णायक दिन है.

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