कला संगम ने “इम्मॉरटल रफी” कार्यक्रम से दिया मो. रफी को श्रद्धांजलि

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पुण्यतिथि पर महान पार्श्व गायक की स्मृति में लक्ष्मीनगर सायंटिफिक सभागृह में कार्यक्रम

नागपुर : अपनी सुमधुर गायकी और मखमली आवाज से संगीत क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ जाने वाले स्व. मोहम्मद रफी की पुण्यतिथि पर नागपुर के ‘कलासंगम’ द्वारा आयोजित और ‘स्वरधारा’ संस्था की ओर से हाल ही में प्रस्तुत कार्यक्रम “इम्मॉरटल रफी” लक्ष्मीनगर सायंटिफिक सभागृह में संपन्न हुआ. ‘कलासंगम’ और ‘स्वरधारा’ की ओर से पिछले दस वर्षों से इस महान पार्श्व गायक की स्मृति को उन्हीं के गाए गीतों की प्रस्तुति से उनके चाहने वालों को भावविभोर किया जाता रहा है.

ऐसे ही कार्यक्रम में नागपुर की सुप्रसिद्ध गायक जोड़ी योगेंद्र और ईशा रानडे ने वाद्यवृंद के साथ सुन्दर कार्यक्रम प्रस्तुत किया. गायकद्वय के अलावा नन्हीं सी “अवनी” कार्यकम की मुख्य आकर्षण थी. तीनों ने मिलकर रफ़ी की यादगार गीत “नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुठ्ठी में क्या है” गाकर श्रोताओं को मुग्ध कर दिया. अवनी की गायकी और उसके आत्मविश्वास के लिए श्रोताओं की ओर से उसे ढेर शुभेच्छाएं मिलीं.

‘तुमने पुकारा और हम चले आए’ गीत से कार्यक्रम की शुरुआत हुई. अपनी मधुर आवाज से योगेंद्र ने “गर तुम भुला ना दोगे…, जो बात तुझमें है तेरी तसवीर में नहीं…, लिखे जो खत तुझे…,आज पुरानी राहों से…, मैं तो तेरे हसीन खयालों में खो गया” और अन्य सोलो गीत प्रस्तुत किए. ईशा के सुरों के साथ भी रफी के युगल गीतों में “साज ए दिल छेड़ दे…, देख हमें आवाज न देना ओ बेदर्द जमाने…, आवाज देके हमें तुम बुलाओ… के साथ जान चली जाए…. , नि सुलताना रे.., आया सावन झुमके…, ओ हसीना जुल्फों वाली…, आदि दमदार गीतों ने पूरी महफिल को झूमने पर मजबूर कर दिया. योगेंद्र के “जंगल में मोर नाचा” और ईशा-योगेंद्र के “जबाने यार मन तुर्की” ने कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिया. श्रोता प्रत्येक प्रस्तुति पर ‘वन्स मोर-वन्स मोर’ की आवाज लगा कर कार्यक्रम की श्रेष्ठता पर अपनी मुहर लगाते जा रहे थे.

कार्यक्रम की विशेषता रफी साहब के शीर्षक गीत थे. इनमें “फिर वही दिल लाया हूं…, चाहे कोई मुझे जंगली कहे…, दिल तेरा दिवाना…” भी रसिकों को तृप्त कर गया. डॉ. सुहास देशपांडे ने कार्यक्रम में प्रस्तुत गीतों के चयन में अपनी अप्रतिम क्षमता का परिचय दिया.

श्वेता शेलगांवकर ने कार्यक्रम के संचालन से कार्यक्रम को एक अलग सी ऊंचाई दे दी. वाद्ययंत्रों के कुशल संचालन से वाद्यवृंद के पवन मानवटकर महेंद्र ढोले, प्रकाश खंडाले, प्रकाश चव्हाण, अरविंद उपाध्ये, अमर शेंडे, अशोक टोकलवार, सुभाष वानखेड़े, दीपक कांबले व श्रीमती उज्ज्वला गोकर्ण ने गीतों को सतरंगी छटा बिखेरने में पूरा-पूरा सहयोग किया. सेन्ट्रल बैंक व समृद्धि को-ऑपरेटिव बैंक के सहयोग से यह स्तरीय और सर्वांगसुंदर कार्यक्रम प्रस्तुत किया जा सका. गायक-वादक कलाकारों के इस अप्रतिम प्रस्तुतिकरण के लिए जितना भी आभार माना जाए काम ही होगा.

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