देश के सबसे बड़े वन्य प्राणी उद्यान का उद्घाटन करेंगे सीएम ठाकरे  

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गोरेवाड़ा इंटरनेशनल जूलॉजिकल पार्क को बालासाहेब ठाकरे का नाम देने का विरोध

 
नागपुर : देश के सबसे बड़े जूलॉजिकल पार्क का नामकरण महाराष्ट्र सरकार ने गोरेवाड़ा इंटरनेशनल जूलॉजिकल पार्क से बदल कर बालासाहेब ठाकरे गोरेवाड़ा इंटरनेशनल जूलॉजिकल पार्क कर दिया है. इस पार्क का उदघाटन मंगलवार को गणतंत्र दिवस की संध्या को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे करेंगे. पहले चरण में पार्क के 115 हेक्टर भूभाग के इंडियन सफारी के लिए खोला जाएगा.
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नामकरण को लेकर नाराजगी
देश के सबसे बड़े जूलॉजिकल पार्क के नामकरण को लेकर कुछ पक्षों की ओर से नाराजगी भी जताई जा रही है. गोंड आदिवासियों ने पार्क का नाम जहां गोंडवाना गोरेवाड़ा इंटरनेशनल जूलॉजिकल पार्क करने की मांग की है, वहीं विदर्भ आंदोलन समिति ने गोंड आदिवासियों की मांग का समर्थन करते हुए पार्क को बालासाहेब ठाकरे का नाम दिए जाने पर घोर आपत्ति की है.


गोंडवाना नाम की मांग का समर्थन
समिति ने कहा है कि उन्हें सरकार द्वारा नाम बदले जाने पर घोर आपत्ति है. समिति ने कहा कि विदर्भ के किसी भी स्थल का नामकरण विदर्भ की विभूतियों पर ही किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि गोंड विदर्भ के मूल निवासी हैं और इस वन्य प्राणी उद्यान का नाम गोंडवाना गोरेवाड़ा इंटरनेशनल जूलॉजिकल पार्क ही होना चाहिए. इसे बालासाहेब ठाकरे का नाम देना उचित नहीं है.

विदर्भ आंदोलन समिति ने ट्विट कर कहा है, “गोंडवाना आंतरराष्ट्रीय प्राणी संग्रहालय गोरेवाड़ा नागपुर का नाम बदल कर बाळासाहेब ठाकरे किया गया है. गोंडवाना व्यतिरिक्त हमें कोई भी अन्य नाम हमारे गोरेवाड़ा को हम स्वीकार ही नहीं करते हैं.”

समिति ने उदघाटन के समय नाम बदले जाने का विरोध करने का निर्णय किया है. समिति ने विरोध प्रकट करने के लिए अधिकाधिक लोगों से गोंडवाना आंतरराष्ट्रीय प्राणी संग्रहालय गोरेवाड़ा में उपस्थित रहने का आह्वान किया है.  
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वन मंत्री राठौड़ आपत्तियों को किया दरकिनार
इन आपत्तियों को दरकिनार करते हुए राज्य के वन मंत्री संजय राठौर ने कहा कि देश के सबसे बड़े इस प्राणी उद्यान के शेष भागों का नामकरण गोंडवाना पर किया जाएगा. उन्होंने कहा कि फिलहाल पार्क का 20% एरिया ही खोला गया है. अभी इसे विकसित करने के लिए अनेक प्रकल्पों का क्रियान्वन किया जाना है. हमारी योजना है कि भविष्य में गोंडवाना थीम पर आधारित आदिवासी संस्कृति, परम्पराओं और आदिवासियों के रहन-सहन को ध्यान में रख कर बाकी के भाग को विकसित किया जाएगा. इसके लिए मुख्यमंत्री के समक्ष उनकी स्वीकृति के लिए प्रकल्पों का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा.

बालासाहेब ठाकरे निसर्ग प्रेमी थे  
वन मंत्री राठौर ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे निसर्ग प्रेमी थे. उन्हें वन्य प्राणियों और वन्य जीवन से बहुत प्यार था. साथ ही पूरा ठाकरे परिवार भी निसर्ग प्रेमी है, उन्हें आदिवासियों के विकास और कल्याण का हमेशा खयाल रहा है. इस कारण पार्क का नामकरण बालासाहेब के नाम पर किया गया है.

27 जनवरी से पार्क का भ्रमण कर सकेंगे पर्यटक
1,914 हेक्टर में फैले गोरेवाड़ा के 564 हेक्टर में इस वन्य प्राणी उद्यान को विकसित किया जा रहा है. 115 हेक्टर के प्रथम चरण के सफारी में 6 शहद प्रेमी रीछ, 7 तेंदुए, 2 बाघ और अन्य शाकाहारी वन्यप्राणियों में विभिन्न प्रजाति में 4 चीतल और 18 नीलगाय आदि नजर आएंगे. यह सफारी चार भाग में विभाजित है. इन चारों भाग का सफर 12 किलोमीटर के भ्रमण से पूरा होगा. इसके लिए फिलहाल 40 सीटर वातानुकूलित बसों की व्यवस्था की जा रही है. पर्यटक बुधवार, 27 जनवरी से पार्क का भ्रमण कर सकेंगे. पार्क में घूमने के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग की व्यवस्था भी की गई है.

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