महराष्ट्र में सड़कों की टूट-फूट और गड्ढों की सरकार ही कर रही अनदेखी

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विभाग के आदेश की स्वयं सार्वजनिक बांधकाम विभाग भी नहीं करता परवाह

रवि लाखे
वर्धा :
महाराष्ट्र में सड़कों और पुलों के निर्माण के बाद गड्ढे पड़ने अथवा टूट-फूट के लिए सीधे सार्वजनिक निर्माण (बांधकाम) विभाग के संबंधित पर्यवेक्षकीय अधिकारी और ठेकेदार पर सिविल अथवा क्रिमिनल कार्रवाई करने का निर्देश जारी करने के बावजूद इस पर राज्य में अमल नहीं हो रहा है. इस आशय का परिपत्र राज्य शासन के सार्वजनिक निर्माण (बांधकाम) विभाग, मुंबई ने पिछले वर्ष ही जारी कर राज्य के सार्वजनिक निर्माण विभाग के सभी मुख्य अभियंता, अधीक्षक अभियंता और सभी विभागीय एवं जिला परिषदों के भी कार्यकारी अभियंताओं को सूचित कर दिया था.

विगत 27 अप्रैल 2017 को विभाग के उप सचिव (रास्ते) प्रकाश इंगोले द्वारा जारी इस परिपत्र का राज्य में अभी तक प्रभावी अनुपालन नहीं होने पर यहां नागरिकों ने आश्चर्य व्यक्त किया है. विभाग द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार राज्य के डांबरी सड़कों के लिए 15 वर्ष, कांक्रीट सड़कों के लिए 30 वर्ष और पुलों के लिए 100 वर्ष की आयु तय बताई गई है. परिपत्र में स्पष्ट कहा गया है कि इन सड़कों और पुलों के निर्माण के बाद निर्धारित आयु के भीतर गड्ढे पड़ने अथवा टूट-फूट के लिए विभाग के संबंधित पर्यवेक्षकीय अधिकारी और ठेकेदार जिम्मेदार होंगे.

परिपत्र के अनुसार सड़कों और पुलों की निर्धारित आयु के भीतर गड्ढे पड़ने अथवा टूट-फूट होने पर विभाग के संबंधित पर्यवेक्षकीय अधिकारी और ठेकेदार पर अदालती सिविल अथवा क्रिमिनल कार्रवाई की जाएगी. लेकिन इस आदेश के साल भर पूरे होने के बावजूद वर्धा जिला सहित राज्य के किसी भी जिले में अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई होने की खबर नहीं है.

राज्य महामार्गों के साथ ही जिला परिषदों द्वारा निर्मित ग्रामीण सड़कों की दशा बहुत ही खराब है. सडकों पर गड्ढे और टूट-फूट के कारण आए दिन बड़ी-छोटी दुर्घटनाएं हो रही हैं. ऐसी दुर्घटनाओं के बाद कई बार खराब सड़कों को दुरुस्त करा दिया जाता है. लेकिन किसी पर कार्रवाई नहीं होती.

शहरी क्षेत्रों में देखा जाता है कि सड़क बनाने के एक माह के भीतर ही तोड़-फोड़ शुरू कर दी जाती है. यह तोड़-फोड़ नगर परिषद, महापालिका, विद्युत् विभाग, बीएसएनएल, जल प्रदाय विभाग द्वारा किए जाते हैं. कई बार तो ये सरकारी विभाग सार्वजनिक निर्माण विभाग से बिना अनुमति लिए भी तोड़-फोड़ करते हैं और सड़क पर बनाए गड्ढे केवल मिट्टी भर कर छोड़ देते हैं. आश्चर्य की बात तो यह है की ऐसी करतूतों को सार्वजनिक विभाग ही नजरंदाज कर देता है. न तो तोड़ी गई सड़क दुरुस्त करता है और न तोड़-फोड़ करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं करता.
सरकार भी लगातार विभाग की ऐसी आपराधिक लापरवाही को नजरंदाज कर रही है. जनप्रतिनिधियों की ऐसे मामलों पर चुप्पी भी दुर्भाग्यपूर्ण है.

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