बुटीबोरी को मिला नगर परिषद का दर्जा, जिला परिषद चुनाव फिर बाधित

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नागपुर : राज्य शासन ने बुटीबोरी ग्रामपंचायत को नगर परिषद का दर्जा प्रदान कर दिया है. पिछले बुधवार, 18 अप्रैल को शासन ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दिया. बुटीबोरी के लिए राज्य शासन की ओर से आपत्तियां मंगाई गई थीं. किन्तु इस संबंध में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं आने पर बुटीबोरी को नगर परिषद का दर्जा प्रदान कर दिया गया. लेकिन, इससे नागपुर जिला परिषद के चुनाव की प्रक्रिया में एक बार फिर से बाधा पहुंचने की संभावना पैदा हो गई है.

हालांकि आरक्षण संबंधी विवाद को लेकर पहले भी नागपुर जिला परिषद का चुनाव पिछले वर्ष टल चुका है. जि.प. के पूर्व सदस्य बाबा आष्टनकर की आरक्षण संबंधी एक याचिका हाईकोर्ट में लंबित है. इस पर फैसला आगामी मंगलवार, 23 अप्रैल को आने की संभावना है. सर्किल आरक्षण को लेकर उत्पन्न विवाद अब जब दूर होने की कगार पर पहुंच चुका है तो बुटीबोरी नगरपरिषद को लेकर सर्किल संरचना को नए सिरे से अधिसूचित करने का मामला सामने आ गया है.

बुटीबोरी को 1958 में ग्रामपंचायत का दर्जा मिला था. 29 हजार की जनसंख्या वाले इस ग्रामपंचायत में बुटीबोरी, रेंगापार, बोरखेड़ी (फाटक) गांवों का समवेश था. अब ग्रामपंचायत से नगर परिषद का दर्जा मिलने से बुटीबोरी के क्षेत्र का और जनसंख्या का भी विस्तार होगा. इसके लिए आसपास के अन्य ग्रामपंचायतों को भी इसमें शामिल किया जाएगा. नागपुर के जिलाधिकारी ने पिछले वर्ष 3 अगस्त को इसके लिए राज्य शासन से सिफारिश किया था.

यद्यपि राज्य चुनाव आयोग की ओर से आरक्षण संबंधी विवाद के मद्देनजर फिर से सर्किल के अनुसार पिछले 3 अप्रैल को ही आरक्षण की घोषणा कर दी गई है, तथापि इसके बाद 18 अप्रैल को बुटीबोरी को नगरपरिषद का दर्जा देने की अधिसूचना जारी कर दिए जाने के कारण एक बार फिर से सर्किलों की आरक्षण को अद्यतन करने की जरूरत होगी. इसमें हालांकि अधिक समय नहीं लगेगा, फिर भी चुनाव प्रक्रिया आरम्भ करने में बाधा तो आएगी ही.

पिछले वर्ष पूरे राज्य में जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव संपन्न हुए. किन्तु नागपुर जिला परिषद और जिले की पंचायत समितियों के चुनाव सर्किल आरक्षण विवाद के अदालत में पहुंच जाने से यह चुनाव टाल दिए गए थे. अब बुटीबोरी को लेकर भी चुनाव प्रक्रिया नए सिरे से आरंभ करनी पड़ेगी.

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