वृद्धावस्था में जीवन प्रबंधन के साथ उद्यम प्रबंधन की उपयोगिता  

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वृद्धावस्था

प्रस्तुति : डॉ. ए.के. सेनगुप्ता, ‘माई रिटायर्ड लाइफ फाउंडेशन’ (MRLF) के सह-संस्थापक और मुख्य ट्रस्टी हैं. वे सम्प्रति, एसपी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, मुंबई के निदेशक हैं. उनका मत है कि ‘जीवन प्रबंधन’ का सिद्धांत किसी भी इंसान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. वृद्धावस्था में जीवन की यात्रा को आरंभ करने के लिए इन्हें समझना आवश्यक है. ये सिद्धांत किसी भी “उद्यम प्रबंधन” नियमों के समान हैं. इनमें संचालन, बिक्री और विपणन, वित्त प्रबंधन जैसे कुछ आवश्यक स्तंभों का प्रबंधन ‘मानव प्रबंधन’ के लिए भी आवश्यक हैं. विशेष कर वृद्धावस्था के लिए भी. ये सभी मुख्य आधार जीवन प्रबंधन को समझने और चलाने के लिए समान रूप से लागू होते हैं.

डॉ. सेनगुप्ता के अनुसार हमारी बढ़ती उम्र के साथ सभी संसाधनों के दुर्लभ होते जा रहे हैं, अतः ये सिद्धांत वृद्धावस्था के लिए और भी महत्वपूर्ण होते जाते हैं. यह एक उद्यम की तरह है, जो अपनी मूल्य श्रृंखला के अंत तक पहुंचता है और अपने जीवन चक्र उत्तरार्द्ध में नीचे खिसकना शुरू कर देता है. इसलिए, उद्यम प्रबंधन के सिद्धांत महत्वपूर्ण हो जाते हैं, क्योंकि हमें सीमित संसाधनों के साथ अपने जीवन का प्रबंधन जारी रखना होता है, जिसमें जीवन की बाधाएं बढ़ रही होती हैं.

संचालन प्रबंधन (Operations Management)

डॉ. सेनगुप्ता बताते हैं कि संचालन प्रबंध का मतलब है- वस्तुओं/सेवाओं की गुणवत्ता के उत्पादन को सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य रूप से संचालन को स्थिर और अद्यतन रखना. संचालन किसी भी व्यवसाय के मूल में होता है, क्योंकि यह उन वस्तुओं/सेवाओं को बनाने में मदद करता है, जो इसके निर्वाह की ओर ले जाती हैं.

जीवन में, संचालन का अर्थ है- जीवन की गतिविधियों को व्यवस्थित और संगठित तरीके से चलाना ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हम एक सुखी और संतुष्ट जीवन जी रहे हैं. जीवन में आगे बढ़ने के लिए यह न्यूनतम शर्त है.

संचालन प्रबंधन की अवधारणा वृद्धावस्था में अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है. शरीर और दिमाग दोनों के बूढ़े हो जाने और काफी कमजोर होने के साथ, खुद को सक्रिय और क्रियाशील रखना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है. शरीर को अच्छी स्थिति में रखने के लिए शारीरिक व्यायाम महत्वपूर्ण हो जाता है; इसी तरह, मानसिक व्यायाम को और मानसिक चपलता को बरकरार रखने को विशेष महत्व दिया जाता है. इसलिए, संचालन प्रबंधन के ठोस सिद्धांत जीवन को चालू रखने के लिए यह शुरुआती बिंदु (point) हैं.

विपणन प्रबंधन (Marketing Management)

डॉ. सेनगुप्ता बताते हैं- एक उद्यम (enterprise)  सामान (goods) बना सकता है, लेकिन उसके प्रदर्शन या निष्पादन (performance) की स्थिरता इस बात पर निर्भर करती है कि वह जो उत्पादन करता है, उसे बेच सकता है या नहीं. एक उद्यम के अस्तित्व के लिए बिक्री और विपणन प्रबंधन महत्वपूर्ण है.

इसी तरह, जीवन में भी किसी को उस कार्य के लिए मान्यता या सराहना नहीं मिलने पर संतुष्टि नहीं मिल सकती है, जिसे वह कर रहा है. इसलिए, डॉ.सेनगुप्ता कहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने आप को बिक्री योग्य और दूसरों को प्रदर्शित करने योग्य बनाने के लिए एक व्यक्तिगत ब्रांड बनाने का प्रयास करना चाहिए. आज की अत्यधिक प्रतिस्पर्धी दुनिया में यह महत्वपूर्ण है.

वे बताते हैं कि जैसे-जैसे कोई बूढ़ा होता है, तब यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. सक्रिय पेशेवर जीवन से सेवानिवृत्त होने के बाद, व्यक्ति सभी संपर्कों से अलग हो जाता है और इसलिए, अनेक  वरिष्ठ नागरिक किसी भी मान्यता से रहित होने पर अकेलापन महसूस करते हैं. यहां विभिन्न रणनीतियों के माध्यम से अपनी नई पहचान विकसित करने का महत्व सामने आता है.

उदाहरण के लिए, कोई एक नई गतिविधि सीख सकता है और अपने जैसे लोगों के क्लब का सदस्य बन सकता है. या कोई वरिष्ठ नागरिक क्लब का सक्रिय हिस्सा हो सकता है, ताकि वह अपने को दृश्यमान बना सके. या कोई अन्य लोगों के साथ सक्रिय संपर्क में रखने के लिए किसी सामाजिक कार्य में सक्रिय रूप से शामिल हो सकता है. दृश्यमान बने रहने के लिए व्यक्ति को अपनी ही ‘बिक्री और विपणन’ की चुनौतियों का पता लगा कर रणनीति बनाने की आवश्यकता होती है.

वित्तीय प्रबंधन (Financial Management)

डॉ. सेनगुप्ता बताते हैं कि उम्र के इस दौर में वित्तीय प्रबंध का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है. क्योंकि यह किसी भी व्यवसाय प्रबंधन अथवा अपने जीवन को सुचारू रूप से चलाने में एक उपकरण के रूप में यह महत्वपूर्ण पहलू है. वित्तीय प्रबंध, अर्थात- धन जुटाना और बेहतर संचालन सुनिश्चित करने के लिए इसे बेहतर ढंग से प्रबंधित करना शामिल है ताकि इसका उपयोग अपने व्यवसाय (जीवन) संचालन के लिए ठीक से किया जा सके.

इसी तरह, जीवन में वृद्धावस्था के लिए परिवार के खर्चों का प्रबंधन उस धन से करना चाहिए, जो उसके पास है. यह सिद्धांत भी इस अर्थ में समान है कि वित्तीय प्रबंधन में जीवन के वित्त को बेहतर ढंग से प्रबंधित करता है.

डॉ. सेनगुप्ता बताते हैं कि वृद्धावस्था में, यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि नियमित आय के अभाव में संसाधन कम हो जाते हैं. इसलिए, वित्तीय प्रबंधन में अधिक विवेकपूर्ण बनना होगा. यह सुनिश्चित करने के लिए है कि खर्चों को दी गई आय के भीतर प्रबंधित करना है और यह भी कि कुल संसाधन (कॉर्पस फंड) जीवन के अंत तक अंतर्वाह देने के लिए पर्याप्त बने रहें.

मानव प्रबंधन (Man Management)

डॉ. सेनगुप्ता ‘मानव प्रबंधन’ (man management) को भी महत्वपूर्ण बताते हैं. क्योंकि, उनके अनुसार, यह किसी भी व्यावसायिक इकाई के अस्तित्व का मूल है. वे मानते हैं कि वृद्धावस्था में व्यक्ति के लिए मजबूत संरचना, मूल्य प्रणाली, अच्छा माहौल, खुले संचार चैनल, सहयोग की भावना, शीर्ष पर सहायक नेतृत्व जीवन में एक व्यावसायिक उद्यम की तरह अच्छे मानव प्रबंधन प्रथाओं के लिए आवश्यक हैं.

वे इन सभी को जीवन में भी समान रूप से सत्य मानते हैं. क्योंकि हमारे जीवन के मूल में हमारा परिवार है और मानव प्रबंधन सिद्धांतों के संदर्भ में एक परिवार को “व्यावसायिक उद्यम” माना जाना चाहिए. परिवार तब फलता-फूलता है, जब सभी सदस्य ऊपर बताए गए लक्षणों के अनुसार ठोस मानव प्रबंधन सिद्धांतों के साथ एकजुट रहते हैं.

वृद्धावस्था में, यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि परिवार में पीढ़ियों के बीच हमेशा टकराव होता है. ऐसे में इस टकराव को सहयोग, टीम भावना और संचार के खुले चैनलों के संदर्भ में मजबूत प्रबंधन सिद्धांतों का पालन करके कम किया जा सकता है.

आगे बढ़ने का रास्ता (Way Forward)

डॉ. सेनगुप्ता उपरोक्त चर्चाओं को व्यावसायिक उद्यम चलाने और जीवन से निपटने के लिए प्रबंधन सिद्धांत कमोबेश समान मानते हैं. क्योंकि हमें एक उद्यम के प्रबंधन के कौशल हासिल करने के लिए नियमित ज्ञान और शैक्षिक योग्यता की आवश्यकता हो सकती है, हमें जीवन को प्रबंधित करने के लिए एक समझदार दिमाग और उपयुक्त दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है. इसके साथ ही जरूरत है सहानुभूति की, सही भावना और मदद के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण की. जीवन में कई समस्याओं को सही दृष्टिकोण से प्रबंधित किया जा सकता है. बुजुर्ग व्यक्ति के रूप में, यह अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि परिवार में बुद्धिमान लोग सही प्रबंधन सिद्धांतों के माध्यम से जीवन के मुद्दों को दूर करने के लिए हम पर निर्भर करते हैं. अंत में वे बताते हैं कि हम जितने समझदार बनेंगे, जीवन का प्रबंधन उतना ही बेहतर होगा!!

डॉ. ए.के. सेनगुप्ता :
वृद्धावस्थापरिचय : डॉ. ए.के. सेनगुप्ता का इस आशय का एक लेख 16 अप्रैल 2022 को फ्री प्रेस जर्नल (एफपीजे) में प्रकाशित हुआ है. डॉ. सेनगुप्ता एसपी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, मुंबई के निदेशक और एसआईईएस कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नवी मुंबई में निदेशक और सलाहकार रहे हैं. वह विश्व बैंक सलाहकार भी रहे हैं. वे घाना, अफ्रीका में नेशनल बैंकिंग कॉलेज की स्थापना में सहायक और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैंक मैनेजमेंट, पुणे में प्रोफेसर भी रह चुके हैं.  

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