प्रवीण महाजन को ‘जल भूषण पुरस्कार’ से सम्मानित करेंगे सीएम

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प्रवीण महाजन

*एस.डी. वानखड़े :
आलेख :
महाराष्ट्र सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री शंकरराव चव्हाण की स्मृति में नागपुर के सामाजिक कार्यकर्ता और जल शोधकर्ता प्रवीण महाजन को ‘जल भूषण पुरस्कार’ देने की घोषणा की है. यह पुरस्कार उन व्यक्तियों को दिया जाता है, जिन्होंने जल संसाधन, मिट्टी और जल संरक्षण के साथ-साथ जल आपूर्ति और स्वच्छता के क्षेत्र में मूल स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है.

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. शंकरराव चव्हाण के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर 13 जुलाई को यह पुरस्कार मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा प्रदान किया जाएगा. कार्यक्रम पीडब्ल्यूडी मंत्री अशोक चव्हाण, जल संसाधन मंत्री जयंत पाटिल, जल संसाधन राज्य मंत्री बच्चू कडू, मुख्य सचिव सीताराम कुंटे, जल संसाधन सचिव लक्षवी अजय कोहिरकर एवं जल संसाधन सचिव परियोजना समन्वयक टी. एन. मुंडे की मौजूदगी में होगा.

यह पुरस्कार निश्चित रूप से समाज में जल के महत्व और कार्य को गति प्रदान करेगा. तीसरे पुरस्कार में 2 लाख रुपए का नकद पुरस्कार, प्रशंसापत्र और एक स्मृति चिन्ह शामिल है. प्रवीण महाजन पिछले 28-30 सालों से पानी के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. जगला की भूमिका से उनके कई काम जारी हैं.

नागपुर का बड़ा इलाका ‘डेंजर जोन’ में
प्रवीण महाजन ने पिछले ही वर्ष नागपुर शहर में स्थित अंबाझरी लेक की दुरावस्था का मामला उठाया था. ‘विदर्भ आपला’ ने 30 अक्टूबर, 2020 को उनके इस महत्वपूर्ण कार्य पर यह रिपोर्ट भी प्रकाशित की थी- “संतरा नगरी के नाम से प्रसिद्ध नागपुर शहर के मध्य में स्थित 150 वर्ष का अंबाझरी लेक अब नागपुर की 10 लाख से अधिक की आबादी के लिए खतरा बन चुका है. लेक नागपुर महानगर पालिका के अधीन है. इसके रखरखाव के प्रति लापरवाही के कारण इसकी स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि जलाशय का पानी कभी भी स्पिलवे और तटबंध तोड़ कर शहर के बड़े इलाके में जलप्रलय मचा सकता है. इसके स्पिलवे में पड़े अनेक दरारें और उनसे रिसता पानी हमेशा ही दिखाए देता है. शहर का एक बड़ा इलाका ‘डेंजर जोन’ में है.”

प्रवीण महाजन
नागपुर के अंबाझरी लेक की तत्कालीन दुरावस्था की प्रवीण महाजन द्वारा ‘विदर्भ आपला’ को भेजी गई तस्वीरें.

प्रवीण महाजन का पत्र बना जनहित याचिका
महाराष्ट्र जलसंपदा नियामक प्राधिकरण (Maharashtra Water Resources Regulatory Authority) ने प्रवीण महाजन के ऐसे ही एक पत्र को आधार बनाकर जनहित याचिका के रूप में उन्हें वादी बनाते हुए स्वतः संज्ञान लिया. इसके साथ ही प्राधिकरण ने 28 अक्टूबर 2020 को कार्यकारी संचालक, विदर्भ पाटबंधारे (सिंचाई) विकास महामंडल, नागपुर, आयुक्त, नागपुर महानगरपालिका, नागपुर और जिलाधिकारी नागपुर को नोटिस जारी करते हुए उन्हें इस सन्दर्भ में आगामी 23 नवंबर, 2020 तक अपना पक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया था.

जन संवाद, जन शिक्षा और जनभागीदारी के माध्यम से जल जागरूकता
प्रवीण महाजन लगातार वाटरवर्क लेखन करते रहे हैं. उन्होंने किसानों के बांधों में पानी पहुंचाने, भविष्य में पानी की उपलब्धता और पानी के उपयोग के लिए किए जा रहे कार्यों में अंतराल को भरने के लिए वैनगंगा नलगंगा नदी संगम परियोजना की मांग और अनुमोदन पर अनुवर्ती कार्रवाई, कीचड़ खेती और कीचड़ मुक्त बांध की अवधारणा के माध्यम से काम करने और गोसीखुर्द के सुप्रामा की अनुचित नींव को बंद करके नियमित आधार पर सुप्रामा को स्वीकृत कराने के अपने प्रयास जारी रखे.  

यह सभी प्रवीण महाजन के काम के एक उदाहरण हैं, जो बाद में महाराष्ट्र राज्य में सरकार द्वारा अनुमोदित असंख्य रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए आए. हाल ही में चाहे 14,000 करोड़ रुपए का रेत का टेंडर हो या जिंगांव का टेंडर, प्रवीण महाजन ने जहां अनियमितताएं होती हैं, उन्हें उजागर कर सरकार को 15,000-20,000 करोड़ रुपए से अधिक बचाने में मदद करने का अच्छा काम किया है. यह उनके काम करने के तरीके को दिखाता है.

विभाग द्वारा सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली अपनाने की उनकी दर आज कुछ परियोजनाओं के संदर्भ में देखने को मिली है. यदि हम उपलब्ध जल से अच्छी खेती करना चाहते हैं तो हमारे पास फसल पैटर्न बदलने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. जब पीने के पानी की कमी है, सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं करा सकते हैं तो अगले कुछ वर्षों में जो स्थिति उत्पन्न होगी, वह होगी गंभीर.

जल जागरण एवं निवारण पर कार्य, बोरवेल एवं खुले कुओं को रिचार्ज कर जल स्तर बढ़ाने पर जागरूकता के कार्य और महाराष्ट्र राज्य में सभी सरकारी कार्यालय परिसरों में वर्षा जल संचयन योजना के प्रयास के क्षेत्र में भी वे सक्रिय हैं. जल उपयोग संगठनों के नेटवर्क का और विस्तार करते हुए सहकारी तरीके से जल उपयोग पर कार्यशालाओं की पहल और योजना बनाना, अपशिष्ट जल प्रबंधन के लिए जल विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान आयोजित करने की उनकी पहल बहुत ही उपयोगी रही है.

“पानी की एक बूंद” एक जल सूचना पत्रक है, जल संसाधन कल, आज और कल, नागपुर में अंबाझरी झीलों के सुदृढ़ीकरण और सौंदर्यीकरण की लड़ाई, ऐसी कई पहलों के माध्यम से, उन्होंने पानी के बुद्धिमानी से उपयोग, पानी बचाओ के संदेश देने के साथ बहुत काम किया है. आज महाराष्ट्र सरकार ने उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘जल भूषण पुरस्कार’ देने की घोषणा की है.

-एस.डी. वानखड़े
अध्यक्ष, आईडब्ल्यूआरएस, नागपुर केंद्र.
कार्यपालक अभियंता (सेवानिवृत्त).

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