संप्रग का नेतृत्व सोनिया की जगह पवार को सौंपने पर मंथन

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नई दिल्ली : अ.भा. कांग्रेस कमिटी के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग, UPA) के समक्ष नेतृत्व का संकट उभर रहा है. बताया जाता है कि मौजूदा संप्रग अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर यह स्थिति पैदा हुई है. सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ समय से संप्रग के सहयोगी दलों में इस मुद्दे पर जारी मंथन अब जोर पकड़ रहा है. सूत्रों के अनुसार सहयोगी दल संप्रग के भावी अध्यक्ष के रूप में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता शरद पवार की ओर देखने लगे हैं. लेकिन कांग्रेस इसे अपनी ही पार्टी के ‘चिट्ठी बम गिरोह’ की चाल समझ रही है.

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पिछले 9 दिसंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलाने गए विपक्ष और संप्रग प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते शरद पवार. 

सहयोगी दलों में जोर पकड़ रहा मंथन
हाल ही में किसान आंदोलन और नए कृषि कानूनों को लेकर विपक्ष और संप्रग का प्रतिनिधिमंडल पवार के नेतृत्व में राष्ट्रपति से मिलने गया था. स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण श्रीमती गांधी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नहीं कर सकीं थीं. कृषि कानूनों और किसान आंदोलन को लेकर राकांपा प्रमुख शरद पवार द्वारा राष्टपति के समक्ष प्रस्तुत किए गए पक्ष के बाद सभी की नजरें शरद पवार पर जा टिकी हैं. सहयोगी दलों के नेताओं को लगने लगा है कि श्रीमती सोनिया गांधी के उत्तराधिकारी के रूप में पवार ही संप्रग को सशक्त नेतृत्व दे सकते हैं. प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, भाकपा नेता डी. राजा, माकपा नेता सीताराम येचुरी और एडीएमके नेता टीकेएस एलंगोवन शामिल थे. 

‘चिट्ठी बम गिरोह’ की चाल समझ रही कांग्रेस
हालांकि कांग्रेस पार्टी ने इस ओर से इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है और पार्टी में समझा जा रहा है कि सोनिया गांधी को दरकिनार करने के इस मुहीम के पीछे कांग्रेस के ‘चिट्ठी बम गिरोह’ का हाथ है. इस संबंध में हाल ही में कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि संप्रग का नेतृत्व किसी और को सौंपने की स्थिति तभी आएगी, जब श्रीमती गांधी नेतृत्व छोड़ना चाहेंगी.

सबसे अधिक सूझबूझ वाले ताकतवर नेता हैं
यद्यपि शीघ्र ही पवार 80 वर्ष की आयु पूरी करने वाले है. तथापि संप्रग में सबसे अधिक सूझबूझ वाले ताकतवर नेता हैं. उनकी सक्रियता और उनके अनुभवों के कारण सहयोगी दलों का उनके प्रति विश्वास बढ़ा है. सहयोगी दलों के साथ उनके मधुर संबंध भी उनके प्रति भरोसे को बढ़ाया है. वे दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, केंद्र में रक्षा मंत्री और दस सालों तक केंद्रीय कृषि मंत्री रह चुके हैं. इसके साथ ही महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी का गठन कर शिवसेना के नेतृत्व में संप्रग को सरकार में शामिल करने में पवार की भूमिका ने भी उनके नेतृत्व के प्रति भरोसे को पुष्ट किया है.

राकांपा ने किया खंडन 
वैसे, ऐसी चर्चा के बीच शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी बयान जारी कर खंडन किया है. बयान में कहा गया है कि ऐसी शरारतपूर्ण बातें किसान आंदोलन से देश का ध्यान भटकाने के लिए की जा रही हैं. संप्रग के सहयोगी दलों से हमारी ऐसी कोई चर्चा कभी हुई ही नहीं है. अतः राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार द्वारा संप्रग प्रमुख का पद स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता.

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