महाराष्ट्र सरकार पर राज्य चुनाव आयोग ने दायर किया मुकदमा

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स्वायत्त संस्था चुनावों में संवैधानिक अड़चन डालने का आरोप, वानाडोंगरी और बुटीबोरी का मामला

नागपुर : एक अभूतपूर्व फैसला लेते हुए राज्य चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र सरकार पर चुनावों में बाधाएं डालकर आयोग को अपने संवैधानिक दायित्व पूरी करने में व्यावधान निर्माण करने का आरोप लगाते हुए मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में एक याचिका दायर की है.

तकनीकी बाधाएं खड़ी कर रही सरकार
याचिका में आरोप लगाया गया है कि जिला परिषद चुनाव का कार्यक्रम घोषित होने और राज्य सरकार को इसकी पूर्व सूचना देने के बाद भी जानबूझकर सरकार तकनीकी बाधाएं खड़ी कर रही है. आयोग की याचिका पर हाईकोर्ट के जस्टिस भूषण धर्माधिकारी और जस्टिस मुरलीधर गिरटकर ने महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव, नगर विकास सचिव और ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को नोटिस भेजकर कर 9 सितंबर तक जवाब देने को कहा है.

पिछले डेढ़ वर्ष से चल रहा यह खेल
चुनाव आयोग की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार की ओर से पिछले डेढ़ वर्ष से यह खेल चल रहा है. आयोग ने अपनी याचिका में कहा कि जिप का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अधिकतम और कानूनन 6 माह के भीतर नए चुनाव हो जाने चाहिए, लेकिन सरकार की ओर से कुछ न कुछ इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं कि चुनाव को अकारण टालना पड़ रहा है.

पहले वानाडोंगरी फिर बुटीबोरी का मामला
आयोग की ओर से बताया गया कि जब-जब जिप चुनाव घोषणा की तैयारी की जाती है, सरकार कोई न कोई संवैधानिक अड़चन निर्माण करती है. निर्वाचन क्षेत्रों की पुनर्रचना और आरक्षण निर्धारण के तुरंत बाद सरकार ने वानाडोंगरी ग्राम पंचायत को नगर परिषद बनाने का फैसला ले लिया.

इससे आयोग को अचानक ही चुनाव कार्यक्रम रद्द करना पड़ा. उसके कुछ दिनों बाद आयोग ने राज्य सरकार को फिर से सूचना दी कि वह जिला परिषद चुनाव की घोषणा करने जा रहा है और अब उसने ग्राम पंचायत के संदर्भ में कोई भी फैसला लेने से बचना चाहिए.

उसके बाद भी सरकार ने बुटीबोरी ग्राम पंचायत को नगर परिषद बनाने का फैसला कर डाला. जिससे एकबार फिर से आयोग को अपना कार्यक्रम वापस लेना पड़ा. आयोग ने कहा कि किसी स्वायत्त संस्था का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 6 माह के भीतर चुनाव कराना जरूरी है.

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