कोविड-19 : बाल केंद्रित आपदा जोखिम विषय पर आयोजन

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कोविड-19

भारत समेत 20 देशों के 1000 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया

नागपुर : राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, गृह मंत्रालय, भारत सरकार (नई दिल्ली) एवं दादा रामचंद बाखरू सिंधू महाविद्यालय (नागपुर) के संयुक्त तत्वावधान में कोविड-19 बाल केंद्रित आपदा जोखिम न्यूनीकरण (CCDRR) विषय पर पर 3 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया.

एनआईडीएम के कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल मनोज कुमार बिंदल के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उदघाटन करते हुए सिंधी हिंदी विद्या समिति के अध्यक्ष एच.आर. बाखरू ने कहा कि कोविड-19 महामारी का भारत सहित दुनिया भर की शैक्षिक प्रणाली पर बहुत ज्यादा विपरीत प्रभाव पड़ा है. पाठशालाओं को बहुत लंबे समय के लिए स्थगित कर दिया गया है, जिसकी वजह से बच्चों के स्कूल छोड़ने का प्रमाण भी बढ़ा है. इसीलिए वर्तमान परिदृश्य में पूरी दुनिया में सीसीडीआरआर विषय बहुत प्रासंगिक है. 

एनआईडीएम के जीआईडीआरआर विभाग प्रमुख प्रो. संतोष कुमार ने अपने आरंभिक उद्बोधन में कहा कि बच्चों की अपनी विशिष्ट जरूरतें और चुनौतियाँ होती हैं. उन्हें भी बोलने का अवसर दिया जाना चाहिए कि कोविड-19 जैसी आपदा के समय वे क्या चाहते हैं, उन्हें खुद को व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए. बच्चे किसी जोखिम को खुद होकर कैसे कम कर सकते हैं. इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. 
सिंधी हिंदी विद्या समिति के चेयरमैन डॉ. विंकी रूघवानी ने कोविड-19 के बाद बच्चों की मानसिक स्थिति पर होनेवाले विपरीत प्रभावों को उदाहरण के माध्यम से समझाया. सिंधी हिंदी विद्या समिति के महासचिव डॉ. आई.पी. केसवानी ने कहा कि रोकथाम इलाज से बेहतर है. इसलिए भविष्य में आनेवाली आपदाओं की रोकथाम के लिए क्या उपाय किए जा सकते है, इस विषय पर कार्य करना जरूरी है.

प्रास्ताविक भाषण एनआईडीएम कार्यक्रम समन्वयक रंजन कुमार ने दिया. डी.आर.बी. सिंधू महाविद्यालय के कार्यकारी प्राचार्य डॉ. संतोष वी. कसबेकर एवं एनआईडीएम के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. कुमार राका प्रमुख रूप से उपस्थित थे.
कोविड-19  से सम्बद्ध बाल केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्वयक तथा दादा रामचंद बाखरू सिंधू महाविद्यालय के रजिस्ट्रार नवीन महेशकुमार अग्रवाल ने बताया कि जूम प्लेटफॉर्म पर 100 प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिनिधियों की गरिमामय उपस्थिति तथा लाइव यूट्यूब स्ट्रीमिंग पर 1000 से अधिक प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में सहभाग लेकर आयोजन को सफल बनाया. भारत के लगभग सभी राज्यों से प्रतिनिधियों के साथ-साथ फिलीपींस, श्रीलंका, उज्बेकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, पाकिस्तान, नाइजीरिया, मलेशिया, म्यांमार, इराक़, इजिप्त, हॉंगकॉंग, इथियोपिया, कम्बोडिया, रवांडा, मोजाम्बिक, सऊदी अरब, गाम्बिया, मोरक्को आदि 20 देश के प्रतिनिधियों ने सहभाग लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का स्वरूप प्रदान किया.

तीन दिन चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 6 तकनिकी सेशन हुए, जिसमें विषय विशेषज्ञ वक्ताओं एनआईडीएम के रंजन कुमार एवं डॉ. आई. बालु तथा मनोवैज्ञानिक सलाहकार कु. नम्रता शर्मा ने “कोविड -19 में क्या करें और क्या न करें”, आपदा जोखिम प्रबंधन की मूल अवधारणा, सीसीडीआरआर का परिचय, आपदा के समय में बच्चोंका मानसिक स्वास्थ्य, COVID-19 को ध्यान में रखते हुए होम टू होम स्कूल सेफ्टी, आपदा प्रभाव और बच्चों का जीवन चक्र, आपदा में बाल अधिकारों की रक्षा करना, बच्चों पर आपदा प्रभाव: क्षेत्रीय अवलोकन, सीसीडीआरआर के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं, आपदा जोखिम न्यूनीकरण में बच्चों की भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन किया.

कार्यक्रम का संचालन डीआरबी सिंधू महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. जयंत वाल्के ने तथा आभार प्रदर्शन कार्यक्रम समन्वयक एवं महाविद्यालय के रजिस्ट्रार नवीन महेशकुमार अग्रवाल ने किया.

कार्यक्रम की सफलता हेतु आयोजन समिति के डॉ. एस.वी. तेवानी, डॉ. ए.जी. थदानी, वी.बी. पाटिल, डॉ. वी.एम. पेंडसे, डॉ. अनुराधा पोद्दार, डॉ. संगीता रूघवानी, अजय मूंदड़ा, डॉ. ए.ए. कुरैशी, डॉ. जी.जी. रूघवानी, डॉ. एम.एम. शिन्खेडे, डॉ. वाई.वी. भूते, डॉ. आर.आर. खापेकर, डॉ. रत्ना सरकार, डॉ. सुजाता मानकर, डॉ. लीना चंदानी, डॉ. आरएल मेश्राम, डॉ. एम.एच. कौशिक, डॉ. एस.एल. दहीरे, डॉ. एम. एल. वंजारी, डॉ. सुधांशु खरकटे, डॉ. सपना तिवारी, डॉ. सुमन केसवानी, डॉ. जीनत कश्मीरी, डॉ. पिंकी सोनारघरे, डॉ. भारती अनेराव, ज्ञान ऐलानी, डॉ. एम.बी. ठाकरे, डॉ. के.एस. गुप्ता, डॉ. एस.पी. डांगे, डॉ. एस.जी. हाते, डॉ. जी. रामचंद्र राव, डॉ. रीमा कमलानी, डॉ. अनीता चांडक, डॉ. प्राची लाम्बट, डॉ. ए.एस. नानवानी, डॉ. भावना चौधरी, डॉ. ऋचा कल्याणी, डॉ. पूजा मोहोबे, डॉ. आरती गोल्हार, डॉ. दामिनी मोटवानी, श्रीमती जे.वी. महात्मे, डॉ. शारदा भागचंदानी, डॉ. राकेश गेडाम, प्रणय वानखेड़े, प्रवीण कामठे, श्रीमती सुनीता हिवरकर, श्रीमती शीतल बोकड़े, डॉ. उपेंद्र वर्मा, अमित चौधरी, एच.एन. कोहले, श्याम शेंडे, राजू गेहानी, राम तेजवानी, राजेश थारवानी, मूलचंद मोहाड़ीकर, शैलेन्द्र हनवते, कपिल कुकरेजा, संदीप पमनानी, विकास अग्रवाल, महेश आसुदानी, जय केसवानी, पीयूष केसवानी, पंकज दवंडे, श्रीमती ज्योति जेसवानी, श्रीमती भावना काकड़े, हर्षद भैसारे, राजेश जयसिंघानी, नरेश धोसेवान, रमेश मदनानी, दिलीप नानकानी, राजू मनकानी, अशोक शर्मा, दीपक परदेसी, विक्की दातरे, सुमित चेलानी, पंकज खाडे, अनिल मडके, अमित रामतानी, आशीष धनवानी, श्रीमती दीप्ति बेलानी, श्रीमती देवी मेठवानी, कु. मेघा कोर्डे, कु. जया हिंगोरानी आदि ने प्रयास किया.

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