ताहिर हुसैन ने माना, दिल्ली दंगे में शामिल था

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गिरफ्त में ताहिर हुसैन और उसका दिल्ली स्थित मकान, जहां से उसने अपने लोगों के साथ एसिड, पेट्रोल, डीजल और पत्थर (अपने मकान के छत से) बरसाए.    

खालिद सैफी और PFI की मदद से दिया अंजाम, और बड़ा करना था

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन ने दिल्ली दंगों में शामिल होने की बात मानी है. दिल्ली पुलिस की पूछताछ में उसे अपनी भूमिका को स्वीकार किया है. दिल्ली पुलिस की आईआर (Investigation Report) के अनुसार, निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन ने यह स्वीकार किया है कि ‘फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के लिए लोगों को भड़काने में उसका हाथ था.’

आईबी अफसर अंकित की हत्या में मुख्य आरोपी है ताहिर
दिल्ली पुलिस की चार्जशीट (Delhi Riots Chargesheet) के मुताबिक, हुसैन IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का मुख्य आरोपियों में शामिल है. उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान शर्मा का शव चांद बाग के नाले से 26 फरवरी को बरामद किया गया था.  

दिल्ली से प्रकाशित ‘द टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ अंग्रेजी समाचार पत्र ने लिखा है, ”ताहिर हुसैन ने पुलिस को बताया है कि वह 8 जनवरी को जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद से शाहीन बाग स्थित पॉपुलर फ़्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के ऑफिस में मिले थे.”

खालिद सैफी और PFI ने मदद की
दिल्ली पुलिस के अनुसार, दंगे के लिए कांच की बोतलें, पेट्रोल, तेजाब, पत्थर समेत कुछ अन्य सामग्री जमा करने के काम ताहिर हुसैन को सौंपा गया था, जो उन्होंने अपने घर की छत पर जमा किए. पुलिस का दावा है कि ‘सरकारी कबूलनामे में ताहिर हुसैन ने यह बात भी मानी है कि खालिद सैफी और PFI ने इस हिंसा को अंजाम देने में उनकी मदद की.’

पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान ताहिर हुसैन ने बताया, “खालिद सैफी ने अपनी एक दोस्त, इशरत जहां के साथ मिलकर पहले धरना शुरू किया. इसकी शुरूआत खुरेजी इलाके में हुई. इसे हम शाहीन बाग प्रदर्शन जैसा करना चाहते थे. फिर 4 फरवरी को, दिल्ली के अबु फजल एनक्लेव में मेरी मुलाकात खालिद सैफी से हुई, जहां दंगे का प्लानिंग की गई.”

ट्रंप दौरे के समय कुछ बड़ा करना था
हुसैन ने कहा, “4 फरवरी को यह तय हुआ कि सीएए विरोधी प्रदर्शन में आने के लिए लोगों को भड़काना होगा. खालिद सैफी का काम लोगों को भड़का कर सड़कों पर उतारने का था. खालिद सैफी ने कहा था कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौरे (17 फरवरी 2020) के समय कुछ तो बड़ा करना होगा, ताकि मौजूदा सरकार को झुकने के लिए मजबूर किया जा सके.”

 

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