कर्नाटक : ‘मोदी की तकदीर खराब रही, तभी कांग्रेस के लिए चमत्कार की उम्मीद’

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मतगणना आज, कांग्रेस पर्यवेक्षकों को ही भाजपा के लिए पूर्ण बहुमत मिलने की आशंका

विशेष संवाददाता
नई दिल्ली :
कर्नाटक में मंगलवार, 15 मई को राज्य विधानसभा चुनावों के लिए मतों की गणना होगी. सुविज्ञ सूत्रों का अनुमान है कि कर्नाटक विधानसभा चुनावों के अप्रत्याशित परिणाम आएंगे. हालांकि राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस की मुख्य परिद्वन्द्वी भाजपा ही रही. लेकिन परिणामों को लेकर विभिन्न न्यूज चैनलों के एग्जिट पोल ने जो त्रिशंकु विधानसभा की भविष्यवाणी कर दी है, लेकिन परिणाम उससे बिलकुल अलग ही आने के संकेत मिलाने लगे हैं.

कांग्रेस द्वारा राज्य में भेजे गए चुनाव पर्यवेक्षकों का ही मानना है कि कर्नाटक में भाजपा भारी नहीं तो पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने वाली है. कांग्रेस की स्थिति से निराश कर्नाटक से लौटे एक कांग्रेस पर्यवेक्षक का तो यहां तक कहना था कि “नरेंद्र मोदी की तकदीर बहुत खराब रही तभी कांग्रेस के पक्ष में चमत्कार की उम्मीद की जा सकती है.”

गुजरात से बदतर स्थिति है कर्नाटक में कांग्रेस की
उन्होंने “विदर्भ आपला” से अपना नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि राज्य में पार्टी संगठन की हालत बहुत ही नाजुक होना हमारे दुर्भाग्य का केवल एक कारण नहीं है. उन्होंने कहा कि गुजरात में भी पार्टी संगठन कमजोर था. वहां भी कांग्रेस नेताओं में कोई आपसी तालमेल नहीं था. फिर भी वहां नोटबंदी और पाटीदार आंदोलन समेत अनेक ऐसे फैक्टर थे, अनेक निर्वाचन क्षेत्रों में पाटीदारों का सक्रिय सहयोग था, जिससे कांग्रेस को उम्मीद से अधिक सफलता मिल पाई. लेकिन कर्नाटक में कांग्रेस की स्थिति बदतर है.

कांग्रेस नेता भाजपा की गोद में ही नजर आए
उन्होंने बताया कि राज्य में कांग्रेस सरकार के भीतर और बाहर बहुत पहले से ही “पारम्परिक” गुटबाजीऔर नेताओं में आपसी मतभेद चल रहे थे. पार्टी के लगभग सभी नेता और अनेक मंत्री मानो भाजपा की गोद में ही बैठे हुए नजर आए. कार्यकर्ताओं की कहीं कोई पूछ नहीं थी. उन्होंने बताया कि जिला से लेकर ग्राम इकाई तक का पार्टी संगठन भाजपा के मुकाबले शून्य कहा जा सकता है. जहां भाजपा के चार हजार वर्कर कार्य कर रहे थे, वहां कांग्रेस के 40 से 50 कार्यकर्ता ही जूझते दिखाई दे रहे थे.

दिल्ली कांग्रेस में बैठे नेताओं ने पार्टी को दुरुस्त करने के लिए कुछ नहीं किया
कांग्रेस पर्यवेक्षक ने कहा कि दिल्ली में बैठे हमारे नेताओं को भी इस स्थिति की जानकारी नहीं थी, ऐसा बिलकुल नहीं था. लेकिन पहले से स्थिति को सुधारने की दिशा में कोई विशेष प्रयास नहीं होना राज्य में पार्टी की इस दुर्गति का बड़ा कारण कहा जा सकता है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्दरमैया की पकड़ न तो सरकार में और न पार्टी संगठन में ऐसी रही कि अपने स्तर से वे राज्य में पार्टी संगठन को ताकत दे सकते.

दलित के लिए, तब छोड़ेंगे कुर्सी जब…
यह पूछे जाने पर कि मुख्यमंत्री सिद्दरमैया यह कहने का कि ‘पार्टी चाहेगी तो वे मुख्यमंत्री पद दलित के लिए छोड़ देंगे,’ का क्या मतलब हो सकता है, कांग्रेस पर्यवेक्षक ने कहा कि यह मात्र परिणाम आने तक भ्रम बनाए रखने की बात है. उन्होंने कहा कि जब कर्नाटक में कांग्रेस मुकाबले में ही नहीं है तो सवाल ही कहां पैदा होता है कि

अमित शाह का अनुमान सही होने जा रहा
224 सदस्यीय विधानसभा की 222 सीटों पर शनिवार को मतदान हुआ था. मुख्य मुकाबला भाजपा और राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस के बीच रहा. मतदान के बाद हालांकि विभिन्न चैनलों पर प्रसारित एग्जिट पोल में त्रिशंकु विधानसभा की संभावना व्यक्त की गई है, लेकिन मिल रहे संकेतों से यह साफ़ पता चल रहा है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की भविष्यवाणी कर्नाटक में सच साबित होने जा रही है.

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