गेहूं पर आयात ड्यूटी वृद्धि किसानों के लिए फायदे का कदम : मोटवानी

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आयात ड्यूटी

नागपुर : दि होलसेल ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन के सचिव प्रताप मोटवानी ने केंद्र सरकार द्वारा गेहूं पर आयात ड्यूटी को बढ़ाने का स्वागत किया है. उन्होंने इसे किसानों के फायदे के लिए उठाया गया कदम बताया है.

मोटवानी ने बताया कि केंद्र सरकार ने आयात शुल्क 10 फीसदी की बढ़त की है, जो पिछले साल के 30 फीसदी शुल्क से बढ़कर 40 फीसदी कर किया गया है. उन्होंने कहा कि देश में इस साल गेहूं की रिकॉर्ड तोड़ पैदावार होने की संभावना है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादन करने वाला देश है.

आंकड़ों की बात की जाए तो पिछले साल भी देश में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड तोड़ रहा था, वहीं इस साल भी, कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिल सकता है. इस कारणवश, गेहूं की कीमतों में करीब 11 फीसदी की गिरावट को दर्ज किया गया. मोटवानी के अनुसार गेहूं का सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य 1840 रुपए क्विंटल है. राज्य सरकारें इसके अलावा अपनी तरफ से बोनस किसानों को देती है.

आयात से घरेलू बाजार में विदेशी गेहूं की सप्लाई के बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है, जिसकी वजह से मंडियों में कीमतों में गिरावट भी संभव है. यही वजह है कि सरकार ने आयात शुल्क में बढ़त करने का फैसला लिया.

मोटवानी ने बताया कि कृषि मंत्रालय ने इस साल देश में करीब 9 करोड़ 91 लाख टन गेहूं के उत्पादन का अनुमानम लगाया है. इसी के साथ ये भी बताया जा रहा है कि ये आंकड़ा अब तक का सबसे अधिक उत्पादन वाला आंकड़ा होगा. हालांकि 1 अप्रैल 2019 तक सरकारी गेहूं का स्टॉक करीब 17 मिलियन टन तक का रहा, जो कि पिछले साल के मुकाबले 30 फीसदी कर की बढ़त को दिखाता है.

सरकार ने किसानों से गेहूं खरीदने के लिए इस साल रु 1,840 प्रति क्विंटल का एमएसपी निर्धारित किया है. पूरे रबी मार्केटिंग सीजन में किसानों से 357 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा गया है. बात की जाए 22 अप्रैल तक की तो सरकारी एजेंसियों ने किसानों से करीब 55.17 लाख टन गेहूं की खरीद की है, जिसमें हरियाणा से 28.54 लाख टन, मध्य प्रदेश से 18.89 लाख टन, पंजाब से 2.90 लाख टन, उत्तर प्रदेश से 2.78 लाख टन और राजस्थान से 1.97 लाख शामिल है। बाकी गेहूं की खरीद अन्य राज्यों से हुई है.

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