घुलनशील उर्वरक के प्रमाणीकरण में सामने आया NRCG 

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ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के उपरान्त दोनों संगठनों के प्रमुख NRCG के निदेशक डॉ. कौशिक बनर्जी और SFIA के अध्यक्ष राजीब चक्रवर्ती. इस अवसर पर उपस्थित NRCG के प्रिंसिपल वैज्ञानिक डॉ. एस.डी. रामटेके और SFIA महाराष्ट्र के बालासाहेब थोंबरे.

SFIA साथ परीक्षण और अनुसंधान में साझेदारी से किसानों में बढ़ेगा भरोसा 

नागपुर : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से सम्बद्ध राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र (NRCG), पुणे अंगूर समेत तमाम फलोत्पादन में घुलनशील उर्वरक के उपयोग पर अनुसंधान करने जा रहा है. इसके लिए उसने घुलनशील उर्वरक उद्योग संघ (SFIA) के साथ साझेदारी समझौता (MOU) किया है. इस उर्वरक के सरकारी संस्थान द्वारा परिक्षण समझौते के परिणाम से अधिक से अधिक संख्या में किसान पूरी प्रमाणिकता के साथ फसलों के लिए इसका उपयोग कर पाएंगे. 

यह जानकारी SFIA के अध्यक्ष राजीब चक्रवर्ती ने यहां ‘विदर्भ आपला’ को दी. उन्होंने बताया कि घुलनशील उर्वरक उद्योग संघ और ICAR से सम्बद्ध राष्ट्रीय संस्थान NRCG सब्सिडी वाले पारंपरिक उर्वरकों के मुकाबले घुलनशील (SOMS) उर्वरकों के लाभ और स्थिरता पर एक अग्रणी अनुसंधान में प्रवेश किया. यह परिक्षण घुलनशील उर्वरक का प्रमाणीकरण साबित होगा. 
चक्रवर्ती ने विश्वास व्यक्त किया कि इस महत्वपूर्ण परीक्षण से निकट भविष्य में घुलनशील (एसओएमएस) उर्वरकों के लिए संभावित रूप से सब्सिडी वाले उर्वरकों की जगह लेने का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा, जो फिलहाल किसानों के लिए अधिक टिकाऊ और संभावित रूप से प्रभावी समाधान पेश करता रहा है. उन्होंने कहाकि हम पहले से इसके पोजेटिव परिणाम आने के लिए आश्वस्त हैं. 

वर्षों से इस उर्वरक का उपयोग कर रहे किसान 

उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश सहित अनेक राज्यों के किसान फलोत्पादन समेत अन्य परंपरागत फसलों में घुलनशील उर्वरक का उपयोग कर रहे हैं. धान और गेहूं के फसलों में भी इसके बेहतर परिणाम रहे हैं. इसके उपयोग से किसानों को बहुत लाभ हो रहा है. एक प्रश्न के उत्तर में चक्रवर्ती ने बताया कि हाल में सामने आया नैनो यूरिया भी एक घुलनशील यूरिया ही है. जो हमारे घुलनशील उर्वरक की तरह ही प्रभावी है. 

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह में दोनों संगठनों के प्रमुख व्यक्तियों, NRCG के निदेशक डॉ. कौशिक बनर्जी, SFIA के अध्यक्ष राजीब चक्रवर्ती समझौता ज्ञापन में हताक्षर किए. इस अवसर पर NRCG के प्रिंसिपल वैज्ञानिक डॉ. एस.डी. रामटेके और SFIA महाराष्ट्र के बालासाहेब थोंबरे भी उपस्थित थे. 

राजीब चक्रवर्ती ने कहा, “हमारा मानना है कि सरकारी स्तर पर यह सहयोग कृषि उद्योग पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा. हम अनुसंधान के परिणाम देखने के लिए उत्साहित हैं.” उन्होंने कहा कि एसएफआईए और आईसीएआर एनआरसीजी के बीच यह सहयोग एसओएमएस उर्वरकों के साथ संभावित रूप से अधिक टिकाऊ और प्रभावी सब्सिडी समाधान की खोज, कृषि उद्योग के लिए बेहतर विकास का वादा है.

4 एवं 5 जुलाई 2024 को पुणे में उर्वरक सम्मेलन और एक्सपो

उन्होंने कृषि उद्योग जगत के नेताओं जोड़ने और उर्वरक व्यापारियों को अपना  नेटवर्क का विस्तार करने के लिए 4 एवं 5 जुलाई 2024 को पुणे में उर्वरक सम्मेलन और एक्सपो का आयोजन किया जाएगा. उन्होंने कृषि उद्यमियों और उर्वरक व्यवसायियों से इस आयोजन में शामिल होने के लिए अपने-अपने संस्थान का पंजीकरण कराने के लिए निम्नलिखित लिंक जारी किए हैं. 

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