सूखे की चपेट में महाराष्ट्र, हुआ बदहाल

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मुंबई : महाराष्ट्र के विदर्भ समेत अन्य इलाके 1972 के बाद से अब तक के सबसे भीषण सूखे की चपेट में हैं. सूख गए नदी-तालाबों से लोग कीचड़ से निचोड़ कर गंदे पानी को कपड़े से छानकर पीने को मजबूर हैं. उधर, चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र को आदर्श आचार संहिता से राहत देते हुए सूखा राहत से संबंधित कार्यों के लिए मंजूरी दे दी है.
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महाराष्ट्र के 26 जिलों में सूखा
राज्य के 26 जिलों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं, इनमें मराठवाड़ा के औरंगाबाद, परभणी, बीड, हिंगोली, जालना, नांदेड़, लातूर, खानदेश के नासिक, अहमदनगर, धुले, जलगांव, नंदूरबार, विदर्भ के अकोला, अमरावती, बुलढाणा, यवतमाल, वाशिम, वर्धा, चंद्रपुर, नागपुर और पश्चिम महाराष्ट्र के पुणे, सांगली, सातारा, सोलापुर और पालघर शामिल हैं.

राज्य की 358 तहसीलों में से 151 तहसील सूखा प्रभावित घोषित की जा चुकी हैं. 13 हजार से ज्यादा गांव-बस्तियों में जल संकट गंभीर हो गया है. बुलढाणा जिले के अनेक गांवों के लोग सारे जल स्रोत सूख जाने के कारण पलायन कर रहे हैं. हालात इतने खराब हैं कि लोग अपने मवेशियों तक को आने-पौने दामों में बेचना चाहते हैं, लेकिन कोई खरीददार नहीं है.
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सेन्ट्रल वाटर कमीशन की चेतावनी
सेन्ट्रल वाटर कमीशन के चेयरमैन एस. मसूद हुसैन ने कहा कि महाराष्ट्र में हालात चिंताजनक हैं. मसूद हुसैन ने कहा, “हमने महाराष्ट्र सरकार से कहा है कि उनके बड़े जलाशयों में पानी का स्तर काफी नीचे गिर चुका है. ऐसे में उन्हें जलाशयों में बचे पानी का इस्तेमाल काफी सोच-समझकर करना होगा. प्राथमिकता पीने के पानी को देना होगी. इसके बाद ही सिंचाई के लिए पानी जारी करना उचित होगा.

प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के जलाशयों में 14% पानी ही बचा है. 18 मई तक की खबर के मुताबिक़ राज्य के 26 बांधों में पानी का स्तर शून्य पर पहुंच चुका है. अब यह भी इमरजेंसी स्तर पर पहुंच रहे हैं.

कर्नाटक से पानी की मांग
पिछले साल इस समय यह जलाशयों में पानी का आंकड़ा 26% था. महाराष्ट्र ने सूखा प्रभावित जिलों के लिए कर्नाटक से तीन टीएमसी फीट पानी की मांग की है. चारा छावनियों में प्रति जानवर 100 रु. का अनुदान प्रतिदिन देने की घोषणा की है. साथ ही 2011 की जनगणना के आंकड़ों के बजाय 2018 की आबादी के आंकड़ों को आधार बनाकर टैंकर्स के जरिए जलापूर्ति की जा रही है.
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टैंकरों से जलापूर्ति
शासकीय विज्ञप्ति के अनुसार महाराष्ट्र के 4,331 गांव और 9,470 बस्तियों में 5,493 टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है. 67 लाख किसानों को नुकसान की भरपाई के तौर पर 4,412 करोड़ रुपए वितरित किए गए हैं. लोगों को अपना रोजगार छोड़कर पानी जुटाने के लिए दिन-दिनभर कई किलोमीटर की मशक्कत करनी पड़ रही है.

विदर्भ में भी स्थिति बदतर
विदर्भ के यवतमाल जिले मे पानी की किल्लत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि कई गांवों में लोगों को पानी के लिए कुओं तक में उतरना पड़ रहा है. यवतमाल जिले के कई किसानों ने अब अपने पशुओं को आधे दामों में बेच दिया है. जिसके चलते अब किसानों को दूध से मिलने वाली कमाई भी पूरी तरह बंद हो चुकी है. प्रशासन की अनदेखी के चलते आजंति गांव के निवासी लगातार प्रशासन पर आरोप लगा रहे है.

अकोला जिले के वरखेड देवधरी गांव का है. गांव की आबादी करीब 850 है. गांव में काफी घरों पर ताले लटके हुए हैं. दरअसल गांव के काफी लोग पलायन करके मुंबई, पुणे और गुजरात की तरफ निकल गए हैं. गांव में पानी का स्तर बहुत नीचे चला गया है. गांव में सिर्फ एक हैंडपंप काम कर रहा है. उसमें घंटों मशक्कत करने के बाद एक बाल्टी पानी आता है.

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