…और 100 रुपए की थेरेपी में कैंसर छू-मंतर!

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कैंसर

कलपक्कम स्थित इंदिरा गांधी सेंटर ऑफ एटोमिक रिसर्च के शोधार्थियों का दावा

हिसार, [हरियाणा] : बस, महज 100 रुपए में एक बार की थेरेपी और बिना किसी नुकसान के कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हो जाएगी हमेशा के लिए गायब. यह दावा है तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित इंदिरा गांधी सेंटर ऑफ एटोमिक रिसर्च (IGCAR) के शोधार्थियों का.

मैग्नेटिक फ्लुअड हाइपर थर्मिया तकनीक का होगा इस्तेमाल
यहां गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में भाभा परमाणु केंद्र की ओर से आयोजित 63वें डीएई सॉलिड स्टेट फिजिक्स सिम्पोजियम में भाग लेने पहुंचे शोधार्थी बीबी लाहिरी और उनके सुपरवाइजर डाॅ. जॉन फिलिप ने बताया कि कैंसर के इलाज को सस्ता और सुलभ बनाने के लिए अब मैग्नेटिक फ्लुअड हाइपर थर्मिया तकनीक का इस्तेमाल होगा. यह तकनीक वर्तमान रेडिएशन थेरेपी की बजाय कई गुणा सस्ती होगी. महज 100 रुपए में एक बार की थेरेपी करवाई जा सकेगी.
कैंसर
उन्होंने दावा किया कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी काे हराने की दिशा में बड़ी कामयाबी मिली है. अब कैंसर रोगियों को बहुत सस्‍ता इलाज मिल सकेगा. अब देश के विभिन्न हिस्सों में महामारी का रूप ले चुकी कैंसर के इलाज को सस्ता और सुलभ बनाने के लिए अब मैग्नेटिक फ्लुअड हाइपर थर्मिया तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. उन्होंने बताया कि इससे रेडिएशन थेरेपी जैसा नुकसान भी नहीं होगा.

IGCAR के शोधार्थियों ने की है इस तकनीक की खोज
शोधार्थी बीबी लाहिरी और उनके सुपरवाइजर डाॅ. जॉन फिलिप ने बताया कि इस तकनीक से न केवल कैंसर सैल्स को सीधे खत्म किया जा सकेगा, बल्कि आसपास के सैल्स भी सुरक्षित रहेंगे. वे यहां 63वें डीएई सॉलिड स्टेट फिजिक्स सिम्पोजियम में भाग लेने पहुंचे थे.

कैंसर सेल पर ऐसे काम करेगी तकनीक
बी.बी. लाहिरी के अनुसार इस तकनीक में पानी में कुछ नैनो पार्टिकल को चीनी की तरह घोल दिया जाता है. इसके बाद इसका इंजेक्शन सीधे कैंसर प्रभावित जगह पर दिया जाता है. इसके बाद रेडियो फ्रिक्वेंसी एसी मैग्नेटिक फ्लुअड द्वारा 126 किलोहार्टज की फिक्वेंसी के माध्यम से कैंसर सेल पर हीट छोड़ी जाती है. यह हीट उस सैल को खत्म कर देती है, जिसमें फ्लुअड का इंजेक्शन लगाया गया था. इस तकनीक से शरीर के किसी अन्य अंग को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा.

रेडिएशन थेरेपी और मैग्नेटिक फ्लुअड हाइपर थर्मिया में अंतर
– रेडियएशन थेरेपी के तहत एक बार थेरेपी करवाने पर तीन से 25 हजार तक खर्च होते हैं, जबकि मैग्नेटिक फ्लुअड हाइपर थर्मिया से एक बार की थेरेपी में केवल 100 रुपए लगेंगे.

– रेडिएशन थेरेपी हमारे डीएनए को डेमेज करती है, जबकि मैग्नेटिक फ्लुअड हाइपर थर्मिया से ऐसा नहीं होगा.

– रेडिएशन थेरेपी से कैंसर ग्रस्त सैल के साथ आसपास के स्वस्थ सैल भी खत्म हो जाते हैं, जबकि मैग्नेटिक फ्लुअड हाइपर थर्मिया तकनीक से केवल कैंसरग्रस्त सैल खत्म होगा.

– अब तक मरीज को रेडिएशन थेरेपी कई दिनों तक करवानी पड़ती है, जिससे इलाज में देरी होती है, जबकि मैग्नेटिक फ्लुअड हाइपर थर्मिया के तहत जरूरत अनुसार थेरेपी ली जा सकेगी.

– रेडिएशन थेरेपी का गर्भवती और कमजोर लोगों पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जब कि नई तकनीक से इन लोगों को कोई खतरा नहीं होगा.

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