महाराष्ट्र सरकार के फैसले के विरोध में व्यापारियों ने फसलों की खरीद रोकी

0
498

एमएसपी से नीचे की दर पर कृषि उपज की खरीदी पर व्यापारियों को भरना पड़ेगा भारी जुर्माना

नागपुर : महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में निर्णय लिया है कि मंडियों में व्यापारी को किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे की दर पर किसी भी कृषि उपज की खरीदी नहीं करने देंगे. यदि ऐसा हुआ तो व्यापारी पर 50,000 रुपए का जुर्माना और एक वर्ष की जेल हो सकती है.

सभी कृषि उपज की बाजार दर फिलहाल एमएसपी से नीचे चल रहा
राज्य सरकार के इस निर्णय से व्यापारी अत्यधिक खफा हैं, क्योंकि वर्तमान में लगभग सभी कृषि जिंसों की कीमतें एमएसपी से नीचे चल रही हैं. जैसे मूंग का सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य 6,960 रुपए है, लेकिन खुले बाजार में 5,000 से 5,500, तुअर का एमएसपी 5450रुपए, लेकिन खुले बाजार में 3900-4000 रुपए, आयातित 3,300 मुम्बई से, चना 4,450, खुले बाजार में 3,600-3,900, इसी तरह उरद का एमएसपी 5,600 रुपए है, लेकिन खुले बाजार में यह 3,500-4,500 रुपए है, जवारी का एमएसपी 2,300 है, पर खुले बाजार में 1,600-1,850 है, मक्का का एमएसपी 1,750 है, पर खुले बाजार में 1,400-1,600 रुपए तक भाव है.

व्यापारियों ने नहीं खरीदा तो सरकार बिलकुल ही नहीं खरीदेगी
अतः खुले बाजार में इतने भाव कम होने से व्यापारी एमएसपी पर ऊंचे भाव में कैसे खरीदी करेगा. फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन ऑफ ट्रेडर्स (महाराष्ट्र) के उपाध्यक्ष प्रताप मोटवानी के अनुसार इससे सबसे ज्यादा नुकसान किसानों का होगा. उनकी कृषि उपज बिकेगी बिकेगा नहीं और सरकार उनसे समर्थन मूल्यों में माल निश्चित ही नहीं खरीद सकती है. उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय किसान, व्यापारी और आम जनता के हित में तो बिलकुल नहीं है.

महाराष्ट्र की अधिकांश मंडियों में ट्रेडर्स कमीशन एजेंट्स और व्यापारियों ने किसानों से उनकी फसल खरीदना बन्द कर दिया है. दिलचस्प यह है कि किसानों के प्रतिनिधि भी सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. उसका प्रमुख कारण यह है कि इससे किसानों को ही भारी परेशानी हो सकती है.

मंडी एसोसिएशन का कहना है कि हम जब तक खरीद नहीं करेंगे, तब तक राज्य स्तर पर कोई सही निर्णय नहीं लिया जाता. व्यापारी संगठनों का कहना है कि एक तरफ राज्य सरकार मंडियों में एमएसपी पर फसलों की खरीद करा रही है.

कमोडिटी एक्सचेंज में कृषि जिंसों के भाव एमएसपी से नी
दूसरी ओर कमोडिटी एक्सचेंज में कृषि जिंसों के भाव एमएसपी से नीचे चल रहे हैं. उस पर सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती. एक्सचेंज में भाव एमएसपी से ऊपर होंगे तो हाजिर बाजार में कुछ भी करने की जरुरत नहीं पड़ेगी. भाव खुद ही एमएसपी से ऊपर चले जाएंगे. उसके अलावा सरकार को स्वयं अपने द्वारा एमएसपी से कम भावों पर दलहनों की की जा रही बिक्री भी रोकनी होगी. तभी सरकार का यह कदम सफल हो पाएगा.

यदि व्यापारियों ने ज्यादा आना-कानी की तो सरकार इसमें बदलाव करके यह नियम लगा सकती है कि यदि कोई व्यापारी एमएसपी पर फसलों की खरीद करने से मना करता है तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जायेगा। यह नियम एपीएमसी एक्ट में है. फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र ट्रेड के अध्यक्ष वालचंद संचेती और उपाध्यश प्रताप मोटवानी ने महाराष्ट्र सरकार से यह कानून वापिस लेने का आग्रह किया है. संचेती ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस को पत्र लिख अतिशीघ्र इसे हटाने की मांग की है.

NO COMMENTS