बिहार के वर्तमान मुख्य सचिव चारा घोटाले के आरोपी

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सीबीआई की विशेष अदालत ने बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, पूर्व मुख्य सचिव विजय शंकर दुबे, पूर्व डीजीपी डी.पी. ओझा सहित सात लोगों को चारा घोटाले में आरोपित किया है.

पूर्व मुख्य सचिव वी.एस. दुबे, पूर्व डीजीपी ओझा सहित सात लोग शामिल थे चारा घोटाले में

रांची (झारखंड) : सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने बिहार के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, पूर्व मुख्य सचिव विजय शंकर दुबे, पूर्व डीजीपी डी.पी. ओझा सहित सात लोगों को चारा घोटाले में आरोपित किया है.

अदालत ने सीआरपीसी की धारा 319 के तहत इन सात लोगों के खिलाफ सुनवाई के लिए उनके रिकॉर्ड को अलग कर दिया है. साथ ही कोर्ट ने इन्हें समन जारी करते हुए 28 मार्च को अदालत में हाजिर होकर अपना-अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है.

वर्तमान मुख्य सचिव दुमका के तत्कालीन उपायुक्त थे

दुमका कोषागार से अवैध निकासी से संबंधित चारा घोटाले के मामले में अदालत ने बिहार के वर्त्तमान मुख्य सचिव व दुमका के तत्कालीन उपायुक्त अंजनी कुमार सिंह, पूर्व मुख्य सचिव व तत्कालीन वित्त सचिव विजय शंकर दुबे, पूर्व डीजीपी व निगरानी के तत्कालीन एडीजी डी.पी. ओझा, सीबीआई के तत्कालीन इंस्पेक्टर व वर्तमान एएसपी और मामले के अनुसंधान पदाधिकारी ए.के. झा, सीबीआई के गवाह सह आपूर्तिकर्ता दीपेश चंडोक, शिव कुमार पटवारी व फूल झा को आरोपित किया है.

सीबीआई ने इन्हें बचाने का कार्य किया

अदालत ने कहा है कि सीबीआई ने इन्हें बचाने का कार्य किया है, जबकि घोटाले में इनकी भी संलिप्तता है. अंजनी कुमार दुमका में उस समय उपायुक्त के पद पर कार्यरत थे. उपायुक्त कोषागार का रक्षक होता है. कोषागार से प्रत्येक निकासी की सूचना उन्हें दी जाती है, लेकिन अवैध निकासी पर संज्ञान नहीं लिया. इसकी अनदेखी की और अवैध निकासी को रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की. वहीं डी.पी. ओझा ने एडीजी विजिलेंस होते हुए भी कोई कार्रवाई नहीं की.

तत्कालीन वित्त सचिव विजय शंकर दुबे ने भी कोई कार्रवाई नहीं की

तत्कालीन वित्त सचिव विजय शंकर दुबे ने भी कोई कार्रवाई नहीं की. अदालत ने कहा है कि अवैध निकासी की सूचना सभी को थी। सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई होती तो बड़े पैमाने पर राशि की निकासी नहीं होती. जानकार अधिवक्ताओं के अनुसार सीआरपीसी की धारा 319 के तहत कोर्ट को यह अधिकार है कि किसी मामले की सुनवाई के दौरान केस के आरोपितों के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ साक्ष्य आया है तो उसे मामले में आरोपित कर उसे हाजिर होने के लिए नोटिस जारी किया जा सकता है.

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