मर्दों को फुटबॉल खेलते देखने से मुस्लिम महिलाओं पर रोक : देवबंद का फतवा

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लखनऊ : दारुल उलूम देवबंद ने एक फतवा जारी कर मुस्लिम महिलाओं पर मर्दों को फुटबॉल खेलते देखने पर पाबंदी लगा दी है. मुफ्ती अतहर कासमी ने फतवे में कहा कि मुस्लिम महिलाओं का फुटबॉल देखना इस्लाम के खिलाफ है.

कासमी ने कहा, “हाफ पैंट (शॉर्टस) में खुले घुटनों के साथ पुरुषों को फुटबॉल खेलते देखना इस्लाम के नियमों के खिलाफ है.” यह फतवा सऊदी अरब के उस फैसले के उलट है, जिसमें हाल ही में महिलाओं को फुटबॉल मैच देखने की इजाजत दी गई है.

मर्दों को देखना ही महिलाओं के लिए नाजायज- मुफ्ती कासमी

मुफ्ती अतहर कासमी ने कहा है कि “मुस्लिम महिलाओं को फुटबॉल नहीं देखना चाहिए, क्‍योंकि उसमें पुरुष खिलाड़ी के घुटने खुले होते हैं. महिलाओं के लिए तो मर्दों को देखना ही जायज नहीं है, फिर घुटने को देखना तो बिल्‍कुल नाजायज और हराम है.”

पहले डिजाइनर बुर्का, चुस्त लिबास पहनना गुनाह और नाजायज ठहराया गया था

मुस्लिम महिलाओं का पर्दे के नाम पर इस्तेमाल किया जा रहा डिजाइनर बुर्का, चुस्त लिबास पहनना दारुल उलूम देवबंद ने हाल ही में सख्त गुनाह और नाजायज ठहरा चुका है. ऐसा बुर्का या लिबास पहनकर महिलाओं का घर से बाहर निकलना जायज नहीं है, जिसकी वजह से मर्दों की निगाहें उसकी तरफ आकर्षित हों.’

नए साल का जश्न नहीं मानाने का फरमान भी देवबंद ने जारी किया था. मौलाना मुफ्ती तारिक कासमी ने कहा था, “नए साल की जश्न मनाना इस्लाम में जायज नहीं है, इसके साथ ही कहा गया है कि केक काटना भी इस्लाम में जायज नहीं है.’

महिलाओं को मैच देखने की इजाजत दी गई है सऊदी अरब में

सऊदी अरब में महिलाओं के फुटबॉल मैच देखने से लगी रोक हटा ली गई है. इसके बाद 12 जनवरी को यहां बुर्के में जेद्दाह के पर्ल स्टेडियम में बड़ी संख्या में महिलाएं फुटबॉल मैच देखने गईं. यह मैच अल अहली और अल बाटिन के बीच खेला गया था. सऊदी में महिलाओं की ड्राइविंग से भी पाबंदी हटा ली गई है और यहां सिनेमा भी दोबारा खोले जा रहे हैं.

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