प्राणसेतु वेंटिलेटर की प्रस्तुति देखी मंत्री केदार, कलेक्टर ने

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नागपुर : नागपुर में निर्मित, सस्ती, संचालित करने में आसान और ऑक्सीजन-उपयोग-दक्षता विशेषता वाला प्राणसेतु वेंटिलेटर यहां जिला कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत किया गया. इस अवसर पर पशुपालन और डेयरी व्यवसाय विकास मंत्री सुनील केदार, जिला कलेक्टर रवींद्र ठाकरे और मुख्य कार्यकारी अधिकारी योगेश कुंभेजकर उपस्थित थे.

इस वेंटिलेटर का निर्माण ‘आत्मनिर्भर भारत’ की घोषणा के अनुसार किया गया है. इसे नागपुर के युवा डॉक्टरों, इंजीनियरों और उद्यमियों के एक रिसर्च ग्रुप ‘सतेज मेडिनोवा एकेडमी’ ने इस नॉन-इनवेसिव पोर्टेबल वेंटिलेटर को विकसित किया है. जो विशेष रूप से कोविड महामारी के इस कठिन स्थिति में कोविड पीड़ितों के लिए प्राणसेतु ही साबित होने वाला है.

अन्य विदेशी वेंटिलेटर की तुलना में बहुत कम लागत वाला वेंटिलेटर है. नागपुर के साथ इसका उत्पादन पुणे में भी किया जा रहा है. इस वेंटिलेटर की प्रस्तुति में डॉ. वैशाली सेलगांवकर, डॉ. अंजलि गौरव, डॉ. एस.के. देशपांडे, डॉ. वासुदेव भारसाकड़े के साथ एक विशेषज्ञ टीम ने वेंटिलेटर का निरीक्षण किया और फीडबैक दिया.

बताया गया कि सतेज मेडिनोवा ने इस वेंटिलेटर नामकरण भी “प्राणसेतु” ही किया है. सस्ती, संचालित करने में आसान और ऑक्सीजन-उपयोग-दक्षता विशेषताएं हैं इस प्राणसेतु वेंटिलेटर में. यह एक थ्री-इन-वन डिवाइस है, जिसमें लगातार पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (CPAP), बाइलेवल पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (BiPAP) और इंटीग्रेटेड ह्यूमिडिफायर के साथ हाई फ्लो नेज़ल कैनुला (HFNC) होता है.

2.9 लाख रुपए की कम लागत वाले इस वेंटिलेटर को, चिकित्सक और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश देवपुजरी के नेतृत्व में समूह ने विकसित किया है. इन वेंटिलेटरों को अस्पतालों और संस्थानों को दान करने का प्रयास भी जारी है. इसके लिए उन्होंने एक अभियान शुरू किया है.

बताया गया कि यह वेंटिलेटर एक सरल जीवन रक्षक उपकरण है, जो महामारी के इस तांडव में सहज रूप से तत्काल उपयोग में ला कर पीड़ितों की जान बचाता है. इस रोग के रोगियों को श्वसन सहायता की जरूरत होती है और साथ उनके इलाज के लिए कुशल हाथों की भी. बताया गया कि इस वेंटिलेटर के लिए किसी कुशल हाथों या किसी विशेषज्ञ के जरूरत नहीं है. इसे कोई भी आसानी से ऑपरेट कर पीड़ित को ऑक्सीजन उपलब्ध करा सकता है.

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