पृथक विदर्भ राज्य ही अब एकमात्र विकल्प 

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राज्यपाल को विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने सौंपा मांग का ज्ञापन

 
नागपुर : विदर्भ राज्य आंदोलन समिति के एक प्रतिनिधि मंडल ने यहां महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से राजभवन में मिल कर उन्हें पृथक विदर्भ राज्य के गठन की मांग का ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में समिति ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि हमें विदर्भ विकास मंडल की जरूरत नहीं है. विदर्भ के विकास के लिए अब विदर्भ वासियों को पृथक विदर्भ राज्य ही एकमात्र विकल्प है, और अब हमें केवल पृथक विदर्भ चाहिए. 


राज्यपाल से सोमवार को मिलने गए समिति के प्रतिनिधि मंडल में विदर्भ राज्य आंदोलन समिति के अध्यक्ष अधि. वामनराव चटप, मुख्य संयोजक राम नेवले, समिति की महिला मोर्चा की अध्यक्ष रंजना मामर्डे, युवा मोर्चा के अध्यक्ष मुकेश मासुरकर और नागपुर जिला अध्यक्ष अरुण केदार शामिल थे.
 
समिति ने राज्यपाल महोदय को बताया कि 28 सितंबर 1953 को हुए नागपुर करार का पालन नहीं कर विदर्भ के लोगों को धोखा ही दिया गया है. इसके साथ 1 मई 1960 को विदर्भ को उस करार के अनुसार महाराष्ट्र में शामिल तो कर लिया गया, लेकिन उसके बाद भी महाराष्ट्र की सरकार ने विदर्भ के विकास के साथ लगातार अन्याय ही करती आई है. करार के अनुसार विदर्भ को उसकी 23 प्रतिशत देनदारी को भी पूरा नहीं किया गया है.

राज्य स्वयं दिवालिया होने की कगार पर 
समिति की ओर से राज्यपाल को बताया गया कि इस कोरोना महामारी के मद्देनजर महाराष्ट्र शासन ने अपने बजट में 67 प्रतिशत की कटौती कर चुकी है. इससे राज्य स्वयं 5 लाख 20 हजार करोड़ रुपए के कर्ज में डूब चुका है. राज्य स्वयं आर्थिक रूप से दिवालिया होने की कगार पर है. ऐसी स्थिति में वैधानिक विकास मंडल को पुनर्जीवित करने के बाद भी विदर्भ का अनुशेष पूरा करने में वह सक्षम नहीं हो सकता. ऐसे में अब विदर्भ को वैधानिक विकास मंडल की नहीं, विकास के लिए पृथक विदर्भ राज्य की ही जरूरत है. समिति ने मांग की कि अब जल्द से जल्द पृथक विदर्भ राज्य की हमारी मांग पूरी की जाए.
 
पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम करें 
विदर्भ राज्य आंदोलन समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय पेट्रोलियम एवं रसायन मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अलग-अलग पत्र लिख कर उनसे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल कमी करने की मांग की है. 

पत्र में उन्होंने कहा है कि पिछले सवा साल से देश में कोरोना महामारी से बचाव के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण रोजगार, व्यापार-कारोबार सब चौपट हो चुका है. उद्योगों और काम-धंधे बंद हो जाने से देश में भयंकर बेरोजगारी बढ़ी है. इसके साथ ही लगातार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से यातायात खर्च भी अत्यधिक बढ़ा है. परिणाम स्वरूप जीवनावश्यक वस्तुओं की कीमतें भी आसमान छूने लगी हैं. इससे आम लोगों का जीवन और भी कष्टप्रद हो गया है.
 
समिति ने प्रधानमंत्री और पेट्रोलियम मंत्री से मांग की है कि जल्द से जल्द पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी करने साथ ही जीवनावश्यक वस्तुओं की बड़ी हुई कीमतों पर भी लगाम लगाई जाए, 

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