महाराष्ट्र विधान मंडल का मानसून सत्र 4 जुलाई से नागपुर में

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चौथी बार संतरानगरी में होगा मानसून सत्र, विदर्भ के कृषि क्षेत्र को लाभ की है आशा

मुंबई : महाराष्ट्र विधान मंडल का मानसून अधिवेशन आगामी 4 जुलाई को मुंबई में नहीं होकर नागपुर में होगा. राज्यपाल विद्यासागर राव ने शुक्रवार को इस आशय की अधिसूचना जारी कर दी है. एक महीने तक चलने वाले इस अधिवेशन को लेकर संशय बना हुआ था. हालांकि पिछले बजट सत्र में ही सरकार ने मानसून सत्र नागपुर में कराने की घोषणा कर दी थी.

नागपुर करार के अंतर्गत विधान मंडल का साल में एक अधिवेशन नागपुर में होना तय है. अतः प्रत्येक वर्ष शीतकालीन अधिवेशन नागपुर में ही हुआ करता है. लेकिन पूर्व में तीन बार नागपुर में मानसून अधिवेशन भी हो चुके हैं. इस बार यह चौथा मानसून अधिवेशन नागपुर में होने जा रहा है. लेकिन इसके साथ विदर्भ में यह आशंका जताई जा रही है कि शीतकालीन अधिवेशन की कीमत पर तो कहीं यह मानसून सत्र नागपुर में नहीं हो रहा.

नागपुर में पहला मानसून अधिवेशन 1961 में 14 जुलाई से 30 अगस्त तक, दूसरा 1966 में 29 अगस्त से 30 सितंबर तक और तीसरा मानसून अधिवेशन 1971 में 6 सितंबर से 11 अक्टूबर तक चला था.

मानसून अधिवेशन मुख्यतः राज्य में कृषि और फसलों को ही समर्पित रहता है. नागपुर में मानसून सत्र होने से संभावना है की इस बार सत्र में चर्चा विदर्भ के कृषि क्षेत्र पर केंद्रित रहेगी. विदर्भ का कृषि क्षेत्र उपेक्षित होने का ही परिणाम रहा है कि किसान आत्महत्या भी विदर्भ में ही अधिक हो रहे हैं.

विदर्भ में सिंचाई क्षेत्र भी पूर्ण विकसित नहीं हो पाया है. सिंचाई का बैकलॉग अमीषा से चर्चा का विषय रहा है. पिछले वर्ष कीटनाशकों के कारण किसानों की जान जाने की बात सामने आने से भारी हंगामा मचा था. किसानों के कर्ज माफी का मसाला भी बना हुआ है. छोटे किसानों के आत्महत्या के हाल के मामले बैंकों के कर्ज को लेकर ही सामने आए हैं. विदर्भ के छोटे किसानों को सरकार द्वारा कर्ज माफ़ करने के लिए प्रत्येक जिले के बैंकों को सैकड़ों करोड़ रुपए चुकाने भी उसका लाभ कर्ज फसल के बोझ से लदे किसानों को नहीं मिल पाना चिंता की बात है.

विधान मंडल का अगला नागपुर का मानसून अधिवेशन विदर्भ के किसानों के लिए कितना लाभकारी सिद्ध होता है, यह सरकार के साथ विदर्भ के विधायकों पर भी निर्भर करेगा.

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