अंतर्राष्ट्र्रीय सम्मान के लिए केंद्रीय मंत्री निशंक को PRSI की बधाई

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को साहित्यिक क्षेत्र में उनके योगदान के लिए लंदन की 'वातायन' संस्था की ओर से वर्चुअल माध्यम से आयोजित समारोह में केंद्रीय हिंदी परिषद, आगरा के उपाध्यक्ष एवं कवि अनिल शर्मा ने उन्हें यह पुरस्कार दिया. 

उल्लेखनीय साहित्यिक योगदान के लिए लंदन में मिला ‘वातायन’ पुरस्कार

नागपुर : भारत की जनसम्पर्क सोसायटी (PRSI) ने केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल को अंतर्राष्ट्र्रीय ‘वातायन’ सम्मान मिलने पर उनका अभिनन्दन किया है. लन्दन की प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्र्रीय संस्था ‘वातायन’ और ‘वैश्विक हिन्दी परिवार’ की ओर से वर्चुअल माध्यम से आयोजित समारोह में केंद्रीय हिंदी परिषद, आगरा के उपाध्यक्ष एवं कवि अनिल शर्मा ने उन्हें यह पुरस्कार दिया. 

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में देश को क्रांतिकारी शिक्षा नीति देने वाले डॉ. पोखरियाल की साहित्यिक कृतियों में अभी तक हिन्दी में 70 पुस्तकें शामिल हैं. जिनका भारत की अनेक भाषाओं में अनुवाद भी प्रकाशित हो चुका है. अपने ऐसे उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें दुनिया के 15 देशों में सम्मानित किया जा चुका है. देश और हिन्दी भाषा को साहित्य के क्षेत्र में अपनी कृतियों से उन्होंने अंतराष्ट्रीय सम्मान दिलाया है.

जनसम्पर्क एवं संचार पेशेवरों की राष्ट्र्रीय संस्था PRSI ने डॉ. पोखरियाल की इस उपलब्धि को देश का गौरव बताया है. संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजित पाठक ने कहा कि उत्तराखंड के पहाड़ों (पुरी गढ़वाल) के एक गरीब परिवार में जन्में डॉ. पोखरियाल ने अपनी शिक्षा बचपन में 9 किमी पैदल स्कूल जाकर प्राप्त की और इस कठिन परिस्थितियों में भी साहित्य के बड़े साधक बने. डॉ. पोखरियाल हरिद्वार क्षेत्र से लोकसभा सदस्य हैं और लोकसभा आश्वासन समिति के अध्यक्ष भी. केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में उन्होंने जो क्रांतिकारी नई शिक्षा नीति देश को दी है, वह पूरी तरह गरीब विद्यार्थियों के शिक्षा प्राप्ति में होने वाले दर्द को ध्यान में रख तैयार की गई है.

डॉ. पोखरियाल ने अपना यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मान देश के युवाओं के नाम समर्पित किया है. देश के प्रति अपनी निष्ठा का परिचय देते हुए उन्होंने अंतर्राष्ट्र्रीय सम्मान का उत्तर देते हुए कहा कि मेरी हमेशा से यही इच्छा रही है कि मैं भारत को फिर से ‘विश्व नेता’ के रूप में देख सकूं. उन्होंने अपनी नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे प्रस्तुत करते हुए मेरा यही उद्देश्य है कि देश के सभी युवा स्त्री-पुरुषों को सार्थक रोजगार के अवसर प्राप्त हों.

डॉ. पाठक ने बताया कि छह दशकों से सेवारत PRSI ने जुलाई 2020 में “विजयी भारत अभियान” शुरू किया है. ताकि आर्थिक विकास में देश के समृद्ध परम्परागत अभिज्ञान के साथ देश की प्रगति में नवोपचार और रचनात्मकता का भी समुचित योगदान हो. भारत के दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर ले जाने के इन्हीं लक्ष्यों के साथ पिछले दिनों ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ आन्दोलनों का डॉ. पोखरियाल ने भी श्रीगणेश किया था.

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