शरद पवार की राजनीति का चक्रव्यूह कलह के भंवर में

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एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और उनका बंगला "सिल्वर ओक", जो इन दिनों महाराष्ट्र की राजनीति में अब "मातोश्री" का स्थान ले चुका है.  

*कल्याण कुमार सिन्हा,
आलेख
: पार्थ को लेकर पवार परिवार में तनातनी का माहौल थमा नहीं है. राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित दादा पवार के पुत्र पार्थ आगे क्या करने वाले हैं, अजित पवार का रुख क्या होगा और एनसीपी एवं पवार परिवार के सुप्रीमो शरद पवार उत्पन्न विवाद को कैसे सुलझाते हैं, इस ओर एनसीपी सहित सभी संबंधित पक्ष के लोगों की उत्सुकता अब मुखर होने लगी है. पौत्र पार्थ की राजनीति की दिशा में आड़े आ रही पार्टी की राजनीति उन्हें संभवतः रास नहीं आ रही. पिता अजित  के रवैये से भी साफ़ झलक मिल रही है कि पुत्र की राजनीतिक उड़ान में बाधा उन्हें पसंद नहीं आ रहा. फिलहाल कोई पैचअप हो भी जाए, लेकिन जानकारों के अनुसार परिवार और पार्टी में विद्रोह नहीं तो “मनभेद” तो दिखाए देने ही लगा है.  

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अजित पवार अपने पुत्र पार्थ पवार के साथ. 

शरद पवार की नाराजगी से पिता-पुत्र आहात
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब अजित पवार के पुत्र पार्थ ने सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले की सीबीआई जांच की मांग कर डाली. उन्होंने गृह मंत्री अनिल देशमुख को बकायदा पत्र देकर निवेदन किया था कि देश के युवाओं की मांग पर राज्य सरकार इस मामले की सीबीआई जांच कराए. लेकिन बुधवार को शरद पवार ने पार्थ की मांग पर कडा रुख अख्तियार कर लिया. वे पार्थ से पहले से ही नाराज थे. पार्थ ने इससे पूर्व राम मंदिर निर्माण का समर्थन करते हुए सार्वजनिक रूप से बधाई दे डाली थी. अब पार्थ की एक और पार्टी लाइन से अलग हट कर उठाई गई मांग ने उनकी नाराजगी और बढ़ा दी है. उन्होंने कहा कि “पार्थ पवार अभी बच्चा है, अनुभवहीन है. पार्थ की मांग का मैं कौड़ी भर कीमत नहीं देता…”.  शरद पवार के इस बयान से पिता-पुत्र (अजित-पार्थ) दोनों ही आहात हो गए हैं. शरद पवार की बेटी सांसद सुप्रिया सुले द्वारा बीच-बचाव की कोशिशों को संभवतः, कोई विशेष महत्त्व नहीं मिला.
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अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की सीबीआई से जांच की मांग का पत्र गृह मंत्री अनिल देशमुख को सौंपते हुए पार्थ पवार.

इसके बाद से ही पवार परिवार में कलह की स्थिति बन गई है. गुरुवार को उप मुख्यमंत्री अजित पवार अपने चाचा शरद पवार के मुंबई स्थित आवास “सिल्वर ओक” पहुंचे. उनके साथ एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री जयंत पाटिल भी थे. उन्होंने काफी देर तक पवार के साथ चर्चा की. उसके बाद अजित पवार ने वहां से निकलने के बाद अपना फोन उठाना बंद कर दिया. समझा जा रहा है कि अजित पवार शरद पवार के बयान से दुखी हैं.

शनिवार को स्वतंत्रता दिवस पर पुणे में ध्वजारोहण के उपरांत अजित पवार बारामती चले गए. आज रविवार से वे वहां विकास कार्यों की समीक्षा में जुट गए हैं. उनसे पहले शनिवार को ही पार्थ बारामती पहुंच गए थे. वे वहां अपने चाचा श्रीनिवास पवार से उनके बंगले ‘अनंतारा’ पर दोपहर को चर्चा करने भी गए थे. वहां सभी के साथ उन्होंने भोजन भी किया. श्रीनिवास पवार परवार के सूत्रों ने हालांकि स्थिति ठीक होने का दावा किया किया है. लेकिन पता चला कि शरद पवार सपत्नीक बारामती से पुणे रवाना हो गए.

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शिवसेना सांसद संजय राऊत.

शिवसेना के संजय राऊत ने मीडिया को ही कलह की वजह बना दिया
शिवसेना सांसद संजय राऊत ने तो पहले-पहल मीडिया को ही कलह की वजह बनाते हुए कहा था कि मीडिया पवार परिवार में कलह पैदा न करे… राऊत ने कहा कि पार्थ ने राजनीतिक बयान दिया था. इसलिए पवार ने पार्थ को राजनीतिक जवाब दिया होगा. राऊत ने कहा कि कई बार दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी हमारे कान ऐंठे थे. पार्टी का जो प्रमुख होता है वह कई बार अपने नेता और कार्यकर्ताओं की गलती पर कान ऐंठता है. राऊत ने कहा कि पार्थ राकांपा के प्रवक्ता नहीं हैं. इस मामले में पवार परिवार के वरिष्ठ सदस्य अजित पवार, सुप्रिया सुले और राकांपा प्रदेश अध्यक्ष व जल संसाधन मंत्री जंयत पाटिल कुछ नहीं बोल रहे हैं तो मीडिया को भी नहीं बोलना चाहिए.

विवाद में सक्रीय एनसीपी, भाजपा भी छौंक लगा रही
संभवतः शिवसेना नेता को लगा था कि विवाद पर यह बयान देकर वे मामले को ठंडा कर दिया है. लेकिन अब तो यह विवाद ‘जंगल की आग’ का शक्ल लेता नजर आने लगा है. एनसीपी के छोटे बड़े नेता और कार्यकर्ता भी सोशल मीडिया पर पवार परवार में तथाकथित टकराव को लेकर सक्रीय हो गए हैं. उनकी सक्रियता इधर और बड़ी है, जब मौके का फायदा उठाते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी सोशल मीडिया पर मजे लेने शुरू कर दिए और टिप्पणियां करने लगे… जवाबी हमले के चलते मामला तूल पकड़ता जा रहा है.

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एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे. 

भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तो इसे पवार परिवार का आतंरिक मामला बता कर इस विवाद पर कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. उधर एनसीपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने भी मुद्दे को महत्वहीन बताते हुए इस पर पानी डालने की कोशिश की है. लेकिन राज्य मंत्रिमंडल में अजित पवार के सहयोगी एवं एनसीपी के वरिष्ठ नेता स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने पार्थ को अपना “नजदीकी दोस्त” बताते हुए एक ओर कहा कि पवार परिवार एकजुट है तो साथ में यह भी जोड़ा कि शरद पवार, अजित पवार और पार्थ पवार एक साथ बैठें तो यह विवाद मिनटों में समाप्त हो सकता है.

फिलहाल यह मामला परिवार तक ही सीमित है. लेकिन पार्टी तक विवाद की आंच पहुंचाने लगी है. शरद पवार एक तपे हुए राजनीतिज्ञ हैं. महाराष्ट्र में महाविकास मोर्चे की सरकार के वे नियंता हैं. लेकिन अब उनकी राजनीति का चक्रव्यूह कलह के भवंर में फंस गया है. पार्थ की अपनी कोई अलग राजनीतिक दिशा भी हो सकती है. जिसे उनके पिता अजित पवार का भी मौन समर्थन हो सकता है. ऐसे में इसकी भनक से शरद पवार अनभिज्ञ कैसे रह सकते हैं? उनकी नाराजगी यूं ही नहीं हो सकती. लेकिन उनके लिए पार्टी को एकजुट बनाए रखने के साथ ही महाराष्ट्र में अपनी बनाई सरकार को बचाए रखने की भी चुनौती है. सुप्रीमो परिवार के आतंरिक राजनीतिक कलह को कैसे दूर करते हैं, यह भविष्य ही बताएगा. क्योंकि उन्हें भी इस बात की अनुभूति हो गई होगी कि पार्टी में परिवार के लिए जो स्तम्भ उन्होंने खड़ा किया है, उसमें उनकी राजनीतिक सोच और अधिक दिनों तक कायम रह पाना असंभव सा है.  

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