मुखबिरी : गिरफ्तार पुलिस अधिकारी का सुको से सुरक्षा की गुहार

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मुखबिरी
गैंगस्टर विकास दुबे के लिए मुखबिरी करने आरोप में गिरफ्तार एएसआई कृष्ण कुमार शर्मा और वरिष्ठ स्टेशन अधिकारी विनय तिवारी (इनसेट में). . 

गैंगस्टर विकास दुबे के लिए मुखबिरी करने के आरोप में हुई है गिरफ्तारी

 
नई दिल्ली : कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे के लिए मुखबिरी करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए पुलिस अधिकारियों में से एक पुलिस अधिकारी ने यूपी पुलिस से अपनी जान की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट (सुको) के समक्ष गुहार लगाया है.

पांच पुलिस अधिकारियों में शामिल उप-निरीक्षक कृष्ण कुमार शर्मा, जिन्हें ड्यूटी के लिए निलंबित किया गया था और उन पर आरोप है कि वे दुबे के लिए मुखबिरी कर रहे थे, ने अदालत से मामले को सीबीआई में स्थानांतरित करने या निष्पक्ष, उचित और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए एक एसआईटी का गठन करने का भी आग्रह किया है. सुप्रीम कोर्ट चौबेपुर पुलिस स्टेशन में तैनात शर्मा और चार अन्य पुलिस अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने 3 जुलाई को पुलिस की छापेमारी के संबंध में दुबे और उसके सहयोगियों को खबर दी, जिसके कारण कानपुर के पास बिकरू गांव में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई.

मुखबिरी
यू.पी. पुलिस के उन आठशहीद  सीओ बिल्हौर, एसओ शिवराजपुर, दो दारोगा और चार सिपाही
के शव, जिन्हें मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे ने अपने विकरू गांव स्थित अपने किलेनुमा घर में घेर कर पिछले 3 जुलाई को हत्या कर दी थी.

अनभिज्ञ होने का दावा  
मुखबिरी के आरोपों से इनकार करते हुए शर्मा ने प्रस्तुत किया कि उन्हें उनके वरिष्ठ स्टेशन अधिकारी विनय तिवारी द्वारा निर्देशित किया गया था कि पुलिस टीम “कुछ अपराधी” को गिरफ्तार करने जा रही है और उसे जीटी क्रॉसिंग रोड पर क्रॉस चेकिंग करने का आदेश दिया गया था. शर्मा ने पुलिस के छापे से अनभिज्ञ होने का दावा किया है. गौरतलब है कि गैंगस्टर को सूचना लीक करने और मुठभेड़ स्थल से भागने के आरोप में विनय तिवारी भी निलंबित हो गए हैं.

गिरफ्तार करते ही मार रहे हैं, जेल के बाहर ले जाने से रोकें  
शर्मा ने बताया है कि पुलिस ने कानून को अपने हाथों में ले लिया है और ऐसे आरोपी व्यक्तियों को गिरफ्तार करते ही मार रहे हैं. उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि वह उत्तरदाताओं को उन्हें जेल के बाहर ले जाने से रोकें, जहां उसे वर्तमान में किसी भी पूछताछ के लिए रखा गया है. उन्होंने अदालत को यह भी सूचित किया है कि उन्हें, या अन्य पुलिस अधिकारियों को, जिन्हें निलंबित कर दिया गया है, का नाम उस एफआईआर में नहीं है, जो तीन जुलाई की रात की आठ पुलिस कर्मियों की शहादत के संबंध में दर्ज की गई थी.

विशेष जांच दल का गठन, 31 तक रिपोर्ट देगा  
याचिका को वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार शर्मा और अधिवक्ता क्षितिज मुदगल द्वारा तैयार किया गया है. शनिवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. जिसे मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे द्वारा की गई आपराधिक गतिविधियों और अधिकारियों द्वारा उस पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए उठाए गए कदमों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस SIT का नेतृत्व एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय भुसरेड्डी को सौंपा गया है. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक हरिराम शर्मा और डीआईजी रवींद्र गौड़ भी इस SIT में शामिल किया गया है और इसे 31 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है.

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