मंडी शुल्क : मप्र के बाद अब उबल रहे महाराष्ट्र के व्यापारी

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मंडी शुल्क

नागपुर : महाराष्ट्र में कृषि उत्पन्न बाजार समिति में अधिक मंडी शुल्क का नागपुर समेत पूरे महाराष्ट्र के मंडी व्यापारियों में भारी नाराजगी देखी जाने लगी है. ख़ास कर पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में सरकार द्वारा आधे से भी ज्यादा मंडी शुल्क में कमी करने का प्रभाव भी महाराष्ट्र समेत नागपुर के मंडी व्यापारियों में बढ़ाते आक्रोश के रूप में देखा जा रहा है.

महाराष्ट्र में मंडी शुल्क घटाने की मांग पर ध्यान नहीं
दि होलसेल ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोशिएशन के महासचिव प्रताप मोटवानी ने बताया कि महाराष्ट्र के मंडी व्यापारियों की मंडी शुल्क घटा कर .50% करने की मांग बहुत पुरानी है. नागपुर के भी मंडी व्यापारियों ने अनेक बार महाराष्ट्र सरकार का ध्यान मंडी शुल्क अधिक होने के कारण व्यापारियों और किसानों को होने वाली दिक्कतों की ओर दिलाया है. लेकिन राज्य की शिवसेना नीत महाविकास आघाडी सरकार ने इस मांग की ओर ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी. अब पड़ोसी राज्य ने भी मंडी शुल्क घटा कर आधे से कम कर दिया है. ऐसे में अब राज्य के मंडी व्यापारियों की नाराजगी बढ़ी है.

उन्होंने कहा कि अब शीघ्र ही राज्य के व्यापारी फेडरेशन इस पर उचित निर्णय लेगा. मोटवानी ने बताया कि कर्नाटक सरकार ने भी अपने राज्य में मंडी शुल्क 35 पैसा सैकड़ा कर राहत प्रदान की है. इसी प्रकार अन्य राज्य सरकारों ने भी मंडी व्यापारियों को मंडी शुल्क में राहत दी हैं.

मप्र में मंडी शुल्क घटाया गया
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य में मंडी शुल्क में भारी कटौती कर मंडी व्यापारियों को बड़ी राहत दे दी है. मध्यप्रदेश में सभी मंडियां अनिश्चितकालीन बंद थीं, किसानों और व्यापारियों की एकता के आगे अंततः सरकार को झुकना पड़ा. मध्यप्रदेश में पहले मंडी शुल्क 1.70% था. 6 अक्टूबर को मप्र सरकार ने इसे घटा कर 0.50% करने की घोषणा की है. घटा हुआ यह दर आज 7 अक्टूबर 2020 से लागू हो गया है. इसके साथ ही राज्य के मंडी व्यापारियों की 19 दिन से चल रही हड़ताल समाप्त हो गई है.

मोटवानी ने बताया कि मंडी शुल्क अधिक होने का ही परिणाम है कि उपभोक्ताओं को अनाज महंगा मिलता है और महंगाई बढ़ती है. इसके कारण किसान भी मंडी सेस से प्रभावित हो रहे हैं.

सुविधा के नाम पर शुल्क, लेकिन सुविधाएं नदारद
दि होलसेल ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन के अनुसार कृषि उत्पन्न बाजार समिति मंडी शुल्क वसूल कर करोड़ों रुपयों की एफडी जमा कर रही है. जब कि यह शुल्क मार्केट यार्ड में सुविधाओं के नाम लिया जाता है. लेकिन सुविधाएं तो कोसो दूर, मंडी यार्ड में व्यापारी और किसान के साथ आम उपभोक्ता बुरी तरह प्रताड़ित हैं.

नागपुर मार्केट यार्ड में भारी अव्यवस्था, सड़कें बदहाल, चोरियां बढ़ीं
मोटवानी ने बताया नागपुर कृषि उत्पन्न बाजार समिति में इतनी दुर्दशा है कि सड़कों की हालत बुरी तरह खराब है. सिक्युरिटी कम होने से चोरियां हो रही हैं. व्यापारियों को नए लायसेंस नहीं दिए जा रहे हैं. रिन्यूवल में भारी समस्या है. दुकानों का मालिकाना ट्रांसफर नहीं हो रहा है. न्यू ग्रेन मार्किट में गेट खोलने का मुद्दा गत 5/6 सालों से पेंडिंग है. इसके  पिछले साल अक्टूबर में ही मंडी व्यापारियों को आंदोलन भी करना पड़ा था.  

यार्ड में यातायात की समस्या विकट होती जा रही  
उन्होंने बताया कि मार्केट के अधिकतर गेट बंद होने से यार्ड में यातायात की समस्या विकट होती जा रही है. बिजली के बिल कृषि उत्पन्न बाजार समिति ले रही है. दुकानों पर मनपा टेक्स ले रही है, पर सुविधा नगण्य है. ऐसी परिस्थितियों में व्यापारी यहां भगवान भरोसे काम कर रहा है. मोटवानी ने बताया कि होलसेल अनाज मार्केट में दुकानें कई साल से बनकर तैयार हैं पर व्यापारियों को नहीं दी हां रहीं. ये दुकानें अब खंडहर बनती जा रही हैं.

मोटवानी ने बताया कि उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धवजी ठाकरे और कृषि मंत्री सहकार मंत्री को ट्वीटर के माध्यम से उपरोक्त समस्यों की जानकारी देकर मंडी शुल्क 35 पैसा सैकड़ा करने की मांग की है. अन्यथा मध्यप्रदेश के समान महाराष्ट्र में हड़ताल की तैयारी की जाएगी

MP में मण्डी टैक्स 0.50%. हुआ
एक खुशी की बात और है कि निराश्रीत शुल्कको भी 20 पैसे हटाया गया.
अब मात्र 0.50 पैसा मंडी के अंदर व्यापार पर. नया मंडी टैक्स 7 अक्टूबर से लागू.

 

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