नहीं रहे जन नेता भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी

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हारे एम्स के चिकित्सक, उनका कोई इलाज काम नहीं कर सका

नई दिल्ली : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में पिछले 9 हफ्ते से भर्ती पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार को निधन हो गया. एम्‍स द्वारा जारी मेडिकल बुलेटिन में यह जानकारी दी गई. वाजपेयी 11 जून को किडनी, नली में संक्रमण, सीने में जकड़न और पेशाब की नली में संक्रमण होने के चलते एम्स में भर्ती कराए गए थे.

उनका पार्थिव उनके निवास 6ए कृष्ण मेनन मार्ग ले जाया है. उनके अंतिम दर्शन के लिए वहां तैयारियां जारी है. रात भर उनका पार्थिव वहीं रहेगा. देशभर से नेतागण पहुंच रहे हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी की तबियत बुधवार, 15 अगस्त को ज्‍यादा बिगड़ गई थी. एम्‍स की तरफ से बुधवार रात को जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया था कि पिछले 24 घंटों में पूर्व प्रधानमंत्री की तबियत ज्‍यादा बिगड़ गई थी और उन्‍हें लाइफ सपोर्ट सिस्‍टम पर रखा गया था. उनकी यूरिन इंफेक्‍शन और सांस लेने में तकलीफ की समस्‍या बढ़ गई थी.

पीएम नरेंद्र मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर गहरा शोक जताया. उन्‍होंने ट्विटर पर लिखा, ‘मैं नि:शब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है. हम सभी के श्रद्धेय अटल जी हमारे बीच नहीं रहे. अपने जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था. उनका जाना, एक युग का अंत है.’

भारत रत्न से सम्मानित वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे, पहली बार 1996 में 13 दिनों के लिए, फिर 1998 से 1999 और आखिरी बार 1999 से 2004 तक. 1962 से 1967 और 1986 में वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे. वाजपेयी दस बार लोकसभा के लिए चुने गए. वे दूसरी लोकसभा से चौदहवीं लोकसभा तक सांसद रहे. बीच में कुछ लोकसभाओं से उनकी अनुपस्थिति रही. ख़ासतौर से वर्ष 1984 में जब वो ग्वालियर में कांग्रेस के माधवराव सिंधिया के हाथों पराजित हुए थे.

वे वर्ष 1962 से 1967 और 1986 में राज्यसभा के सदस्य भी रहे. 16 मई 1996 को अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार प्रधानमंत्री बने. लेकिन लोकसभा में बहुमत साबित न कर पाने की वजह से 31 मई 1996 को उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा. इसके बाद वर्ष 1998 तक लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे.

वर्ष 1998 के आमचुनावों में सहयोगी पार्टियों के साथ उन्होंने लोकसभा में अपने गठबंधन का बहुमत साबित किया और इस तरह एक बार फिर प्रधानमंत्री बने. लेकिन एआईएडीएमके द्वारा गठबंधन से समर्थन वापस लेने के बाद उनकी सरकार गिर गई और एक बार फिर आम चुनाव हुए.वर्ष 1999 में हुए चुनाव राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साझा घोषणापत्र पर लड़े गए और इन चुनावों में वाजपेयी के नेतृत्व को एक प्रमुख मुद्दा बनाया गया था, तब गठबंधन को बहुमत हासिल हुआ और वाजपेयी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली थी.

देश के प्रधानमंत्री के साथ ही अटल बिहारी वाजपेयी एक सर्वप्रिय कवि, वक्ता और समावेशी राजनीति के पर्याय थे.

एक स्कूल टीचर के घर में पैदा हुए वाजपेयी के लिए शुरुआती सफ़र आसान नहीं था. 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर के एक निम्न मध्यमवर्ग परिवार में जन्मे वाजपेयी की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा ग्वालियर के ही विक्टोरिया (अब लक्ष्मीबाई) कॉलेज और कानपुर के डीएवी कॉलेज में हुई थी.

उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर के बाद पत्रकारिता में अपना करियर शुरू किया. उन्होंने राष्ट्र धर्म, पांचजन्य और वीर अर्जुन का संपादन किया.

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