तुवर, उड़द, सफेद बटाना और मूंग के आयात पर अगली सूचना तक पूरी तरह से रोक

चने को अतिशीघ्र वायदा मुक्त करना जरूरी हो गया है. अन्यथा चने का पूरा व्यापार सटोरिये बर्बाद कर देंगे. चने का खुले बाजारों में भाव 3600 है, जब कि समर्थन मूल्य 4400 है. उसी तरह तुअर का समर्थन मूल्य 5450 है. खुले बाजारों में तुअर के भाव 4200/4250 तक है. सरकार निरंतर प्रयास कर रही है कि किसानों को समर्थन मूल्यों में माल बिके, लेकिन सभी प्रयास असफल हो रहे हैं. इस साल जो दलहनों की दुर्गति हुई है, कभी आज तक नहीं हुई. सबसे ज्यादा इस साल किसान और व्यापारी प्रताड़ित हुए हैं.

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दाल-दलहन का आयात कोटा सरकारी खरीद पर लागू नहीं होगा, जो संधियों के अन्तर्गत की जा सकती है

प्रताप मोटवानी
नागपुर :
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी अधिसचूना के अनुसार अरहर, उड़द तथा मूंग के साबूत या फिर दली हुई दालों के आयात पर अगले आदेश तक पूर्ण रोक रहेगी. हालांकि केंद्र ने इस बात को स्पष्ट किया है कि पिछले साल तय सीमा इस साल 2018-19 भी लागू रहेगी. पर जब तक केंद्र द्वारा अगली सूचना नहीं दी जाएगी, तब तक कोई भी व्यापारी, ट्रेडर या आयातक इनका आयात नहीं कर सकेगा. इतना ही है केंद्र सरकार ने अरहर, उड़द और मूंग के साबूत या फिर प्रोसेसिंग की हुई दालों के आयात पर भी रोक लगा दी है.

मूंग एवं उड़द के आयात कोटा में साबुत दलहन के साथ
केंद्र सरकार ने मूंग एवं उड़द के आयात के लिए 3 लाख टन वार्षिक कोटे की समय सीमा बढ़ाते हुए अब इसमें साबूत दलहन के साथ-साथ इसकी दली (मिलिंग) दालों एवं अन्य सभी स्वरूपों को भी शामिल कर दिया था. मालूम हो कि 21 अगस्त 2017 को जब पहली बार इसका आयात कोटा जारी किया गया था, तब उसमें स्थिति स्पष्ट नहीं की गई थी.

विदेश व्यापार महानिदेशालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब आयातक कुल मिलाकर 3 लाख टन मूंग एवं उड़द का आयात कर सकेंगे, भले ही वह किसी भी रूप में हो. पिछली बार जब अधिसूचना जारी हुई थी और स्थिति स्पष्ट नहीं की गई थी, तब भारतीय व्यापारी दली दालों का आयात निर्बाध ढंग से करते रहे. क्योकि सरकारी अधिसूचना से यह संकेत मिल रहा था कि केवल साबुत मूंग एवं उड़द के लिए ही आयात कोटा जारी किया गया है.

सरकारी खरीद पर लागू नहीं
अधिसूचना के अनुसार दाल-दलहन के आयात कोटे का यह नियम सरकारी खरीद पर लागू नहीं होगा, जो द्विपक्षीय व क्षेत्रीय संधियों के अन्तर्गत की जा सकती है. उड़द एवं मूंग के साबूत एवं विभक्त रूप में कुल वार्षिक आयात 1.50-1.50 लाख टन से अधिक नहीं होना चाहिए. पहले इस आयात कोटे से बाहत मूंग एवं उड़द दाल का भी आयात हो रहा था.

सरकार ने मटर आयात किया बंद : कीमतों में जोरदार उछाल
सरकार ने गत सप्ताह के दौरान मटर का आयात पर 30 जून 2018 तक प्रतिबंध लगा दिया है. सरकारी नियमानुसार 1 अप्रैल से 30 जून 2018 तक देश में 1 लाख टन मटर का आयात होगा, जिसमें अब तक के हुए सौदे भी शामिल होंगे. सरकार आयात मात्रा में कोई रियायत नहीं करेगी. चाहे वे एडवांस पेयमेंट हो गई हो. सरकार के इस फैसले ने मटर मिलर्स में खलबली मचा दी है. क्योंकि अब तक देश में 40 हजार मीट्रिक टन मटर का आयात हो चुका है. जबकि 4 जहाज रास्ते में हैं. देसी मटर की आवक भी मंडियों में हो चुकी है. मटर पर सरकार पहले ही 50 फीसदी का भारी भरकम आयात शुल्क लगया चुकी है. मटर में भविष्य में और तेजी के संकेत मिल रहे हैं.

मटर में औसतन 100/125 रुपए की तेजी दिखी
सरकार द्वारा आयात रोकने से मटर की कीमतों में 100/125 रुपए का उछाल दर्ज किया गया. इस उछाल के साथ भाव कोलकाता 3200 रुपए, मुंबई 3250/3311 रुपए, कनाडा 3150 रुपए रशिया पहुंच गए. इसी प्रकार उपरोक्त तेजी के साथ भाव मूंदड़ा 3150 रुपए व हाजिरा पोर्ट 3225 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गए.

फ़िलहाल भाव मजबूत रहने का अनुमान है
पोर्ट पर मटर तेज रहने का असर मंडियों में मटर की कमतों पर देखा गया. कानपुर में मटर की कीमतें 125 रुपए तेज हो गई है. इस तेजी के साथ भाव 3375/3450 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच ललितपुर मंडी में 200 बोरी के आस पास बनी रही. मांग होने से भाव 200 रुपए तेज होकर 3050 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गए. झांसी में मटर का भाव 200 रुपए की मजबूती के साथ 3000/3050 रुपए पर पहुंच गया. उरई में भाव 3125 रुपए रहा. अन्य मंडियों में भी बढ़े भावों पर व्यापार हुए.

मटर दाल 200 रुपए तेज
मटर दाल में चालू सप्ताह के दौरान लिवाली होने से भाव 200 रुपए तेज हो गए. इस तेजी के साथ भाव इंदौर 3800 रुपए व कानपुर 3450/3500 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गए. फिलहाल तेजी की संभावना है. सचिव प्रताप मोटवानी ने सरकार से मांग की है कि चने को अतिशीघ्र वायदा मुक्त करे, अन्यथा चने का पूरा व्यापार सटोरिये बर्बाद कर देंगे. चने का खुले बाजारों में भाव 3600 है, जब कि समर्थन मूल्य 4400 है. उसी तरह तुअर का समर्थन मूल्य 5450 है. खुले बाजारों में तुअर के भाव 4200/4250 तक है. सरकार निरंतर प्रयास कर रही है कि किसानों को समर्थन मूल्यों में माल बिके, लेकिन सभी प्रयास असफल हो रहे हैं. इस साल जो दलहनों की दुर्गति हुई है, कभी आज तक नहीं हुई. सबसे ज्यादा इस साल किसान और व्यापारी प्रताड़ित हुए हैं.

भारत में दलहन आयात पर नियंत्रण के खिलाफ निर्यातक देश लामबंद
भारत सरकार द्वारा विभिन्न दलहनों पर आयात शुल्क बढ़ाने तथा खास-खास दलहन के लिए आयात कोटा निर्धारित किए जाने से कनाडा, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया तथा यूरोपीय संघ की बेचैनी काफी बढ़ गई है. इन देशों ने भारत सरकार के इन उपायों के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन में सवाल उठाना शुरू कर दिया है. इसमें एक नाम जापान का भी जुड़ गया है.

उल्लेखनीय है कि पिछले साल अगस्त में केंद्र सरकार ने कुछ दलहनों के लिए आयात कोटा नियत किया था. इसके तहत मुंग एवं उड़द के लिए 3 लाख टन तथा अरहर (तुवर) के लिए 2 लाख टन का आयात कोटा निर्धारित हुआ था. घरेलू बाजार में आपूर्ति तथा उपलब्धता काफी बढ़ जाने तथा कीमतों में भारी गिरावट आने के कारण इन दलहनों के आयात पर अंकुश लगाना जरुरी हो गया था.

विश्व व्यापार संगठन के मंच पर
निर्यातक देशों ने विश्व व्यापार संगठन के मंच पर 20 अप्रैल को यह मामला उठाते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा दलहन के आयत पर नियंत्रण लगाए जाने से वैश्विक कारोबार प्रभावित हो रहा है और अनेक निर्यातक देशों के किसानों पर दबाव काफी बढ़ गया है. इन किसानों का भविष्य अनिश्चित हो गया है. भारत संसार का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक देश है. लेकिन साथ ही साथ यह परंपरागत रूप से इसका सबसे प्रमुख आयातक भी रहा है. लोगों को प्रोटीन से समृद्ध दाल-दलहन की समुचित उपलब्धता सुनिश्चित करवाने के लिए भारत में विशाल मात्रा में विदेशों से दलहन का आयात होता रहा है.

भारतीय प्रतिनिधि ने दिया करारा जवाब
भारतीय प्रतिनिधि ने विश्व व्यापार संगठन के मंच पर निर्यातक देशों के तमाम आरोपों तथा तर्कों का करारा जबाब देते हुए कहा कि सरकार का निर्णय विश्व वयापार संगठन के नियमों-प्रावधानों के अनुकूल है और इस पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए. लेकिन प्रतिनिधि ने अन्य देशों के फायदे के लिए इतना वादा अवश्य किया कि वर्ष 2018 तथा 2019 के लिए कोटा आवंटन तथा प्रक्रिया को शीघ्र ही अधिसूिचत किया जा सकता है.

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने दलहन का उत्पादन 2016-17 के 230 लाख टन से बढ़कर 2017-18 में 240 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है. हालांकि विश्व व्यापार संगठन के प्रावधानों के तहत आयत एवं निर्यात से सम्बंधित सभी तरह का मात्रात्मक नियंत्रण हटाया जाना चाहिए, मगर इसके कुछ अपवाद भी रखे गए हैं और भारत ने इसका उपयोग किया है.

(प्रताप मोटवानी, दि होलसेल ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन, नागपुर के सचिव हैं)

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