‘त्वरित न्याय’ के लिए ‘इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम’ आरंभ होगा

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‘त्वरित न्याय’ के लिए ‘इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम’ आरंभ होगा

महाराष्ट्र गृह विभाग ने केंद्र पोषित सिस्टम के लिए 47 करोड़ का प्रस्ताव पेश किया

मुंबई : महाराष्ट्र शासन के गृह मंत्रालय ने केंद्र सरकार द्वारा निधि पोषित एक ऐसी ‘इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम’ (आईसीजेएस) आरंभ करने का निर्णय किया है, जो ‘त्वरित न्याय’ (स्पीडी जस्टिस) के लिए अपराध से संबंधित एकीकृत सूचनाएं विभिन्न एजेंसियां आपस में बांट सकें.

इसके लिए केंद्र की ओर से आवश्यक निधि दी जा रही है. इससे आपराधिक मामलों के अन्वेषण में महत्वपूर्ण सूचनाओं का बेहतर डिजिटल समन्वय करने में सरकार को मदद मिलेगी साथ ही इसमें पारदर्शिता भी बनी रहेगी.

राज्य के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने हाल ही में राज्य के बजट से संबंधित मामलों सहित आईसीजेएस की भी समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की थी. इसमें गृह विभाग ने इस सिस्टम के सफल कार्यान्वयन के लिए 47 करोड़ रुपए का प्रस्ताव पेश किया है. इसके अंतर्गत पुलिस, फॉरेंसिक लैब और कोर्ट के बीच एकीकृत सूचनाएं संबंधित केस के अनुसंधान के साथ ही कोर्ट की सुनवाई और कार्यवाही में तत्काल प्राप्त हो जाएं.

गृह मंत्रालय की ओर से बैठक में बताया गया कि इस प्रक्रिया से संबंधित आपराधिक मामलों के पुलिस अनुसंधान से लेकर इसमें कोर्ट के फैसले तक में पूरी पारदर्शिता बरतने में मदद मिलेगी और न्याय प्रक्रिया में तेजी आ सकेगी.

ज्ञातव्य है कि महाराष्ट्र में राज्य शासन ने ‘सीसीटीएनएस’ सिस्टम पहले से बहाल कर रखा है. इससे अपराध और आपराधिक गतिविधियों के लिए ट्रैकिंग नेटवर्क के जरिए पूरे राज्य में पुलिस आवश्यक सूचना पता कर लेती है. आईसीजेइस के साथ इसे लिंक करने से उसे और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी.

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