टैक्स बचाएं, पर बचें ऐसी गलती करने से

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इनकम टैक्स वालों द्वारा पकड़े जाने पर भरना पड़ेगा डबल जुर्माना

नई दिल्ली : वित्तीय वर्ष के अंत में सभी को अपने टैक्स रिटर्न भरने की पड़ी रहती है. टैक्स कैसे बचाएं, इसकी चिंता में कई बार लोग वही गलती कर जाते हैं, जिसपर इनकम टैक्स वालों की नजर रहती है. ऐसी गलती होती है फर्जी बिल जमा कर टैक्स बचाने की चालाकी.

फर्जी बिल का चक्कर बना देता है घनचक्कर

लोग आयकर छूट की मद में फर्जी बिल जमा कर दिया करते हैं. लेकिन इससे बच निकलना बहुत आसान नहीं होता. फर्जी बिल दिखा कर फिलहाल तो आप निकल जाएंगे, लेकिन यह आशंका आप की रातों की नींद हराम करती रहेगी कि कहीं इनकम टैक्स वालों की नजर में न आ जाए आपकी चालाकी. अगर आ गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे.

संदेह हुआ तो पकड़े गए

वैसे सालाना 10 लाख से ऊपर के लेन-देन पर इनकम टैक्स वालों की नजर होती है. लेकिन इससे काम राशि वाले लेनदेन में भी संदेह हुआ तो उनकी छानबीन और पूछताछ शुरू हो सकती है. जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो फिर खैर नहीं. पैनकार्ड की लिमिट के हिसाब से ज्यादा लेनदेन भी नजरों में आता है. इस कारण व्यावसायियों के लिए जरूरी है कि टैक्स बचाने के लिए ऐसे अनुचित कदम न उठाएं.

नौकरी-पेशा लोगों के लिए भी यह तरीका उचित नहीं

ऐसा करना नौकरी-पेशा लोगों के लिए भी यह तरीका उचित नहीं है. उन्हें तो कई तरह के भत्तों में टैक्स छूट मिलाती है. उन्हें वेतन के साथ कई तरह के भत्ते और प्रतिपूर्ति या अदायगियां (रीइम्बर्समेंट) भी दिए जाते हैं, ये एक सीमा तक आयकर मुक्त होते हैं. मेडिकल बिल्स, ट्रांसपोर्ट अलाउंस (टीए), मकान भाड़ा भाता (एचआरए), लीव ट्रैवल अलाउंस (एलटीए) सब रीइम्बर्समेंट और छूट में ही आते हैं. 15 हजार रुपए तक के मेडिकल बिल पर इनकम टैक्स से छूट मिलती है. ऐसे में रीइम्बर्समेंट क्लेम करने के चक्कर में कर्मचारी फर्जी बिल बनावाकर जमा करवा देते हैं.

कैसे पकड़े जा सकते हैं फर्जी बिल देने पर

आयकर सलाहकार बताते हैं कि तीन वजहों से फर्जी बिल देनेवाला इनकम टैक्स विभाग की गिरफ्त में आ सकता है। ये हैं –
1. यदि आप के आईटीआर फॉर्म को स्क्रूटनी के लिए इनकम टैक्स विभाग वालों ने उठा लिया, फिर मांगे जाने पर आप सबूत न दे पाए तो हो सकती है कठिनाई.
2. यदि आप से टीडीस और बिल से जुड़े सबूत मांगे गए और दोनों का आपस में मिलान नहीं हुआ तो निश्चय ही आप पकड़े जा सकते हैं.
3. यदि आपके किसी शुभचिंतक ने विभाग को गड़बड़ी से जुड़ा कोई सबूत या सुराग दे दिया तो पकड़ा जाना तय समझिए.

फर्जी बिल पाए जाने पर डबल तक होगा जुर्माना

यदि आप फर्जी बिल जमा करवाए जाने का दोषी पाया जाता है तो उसपर 50 प्रतिशत से 200 प्रतिशत के बीच जुर्माना लगाया जा सकता है. यह जुर्माना आयकर की धारा 234A, 234B and 234C के तहत लगाया जाता है.

कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि दावा सही है, लेकिन वह नगद में हुआ है तो इसे साबित करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में जरूरी है कि हर बिल को संभालकर रखा जाए.

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