प्राणियों की सुरक्षा और संरक्षण सभी की जिम्मेदारी – शेषराव पाटिल

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अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर उदघाटन भाषण करते हुए. नीचे के चित्र में डॉ. श्रीमती सोना कुमार की पुस्तक का विमोचन करते हुए अतिथिगण. 

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर महाराष्ट्र बोर्ड और नागपुर मनपा का संयुक्त आयोजन 

नागपुर : प्रत्येक प्राणियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए सभी के योगदान की आवश्यकता है. महाराष्ट्र राज्य जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष शेषराव पाटिल ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से सभी लोगों को इस कार्य में योगदान देना चाहिए. 

वह रेशमबाग में कवि सुरेश भट हॉल में जैव विविधता बोर्ड और नागपुर महानगर पालिका (मनपा) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस (International Biodiversity Day) पर बोल रहे थे. महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ एनिमल एंड फिशरीज साइंसेज (MUAFS) के वाइस चांसलर डॉ. आशीष पाटुरकर, जी.एच. रायसोनी लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सोना कुमार, सचिव, महाराष्ट्र राज्य जैव विविधता बोर्ड और मुख्य वन संरक्षक, प्रवीण श्रीवास्तव; अमित सेठिया, मुख्य वन संरक्षक रंगनाथ नाइकडे, डॉ. विजय शर्मा, संजय पाटिल, शालू कोल्हे, कौस्तुभ पंढरीपड़े, डी.पी. इस समय देशमुख आदि मौजूद थे.

पाटिल ने कहा कि प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में प्राणियों के लिए जैव विविधता के संरक्षण का एक लंबा इतिहास रहा है. अथर्ववेद में इस संबंध में पांच महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं. इसके अलावा कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी इस संबंध में नियम और दंड का उल्लेख किया गया है. प्रकृति के प्राणियों को संरक्षित करना सभी का कर्तव्य है, ताकि 20% भूमि पर वनों की रक्षा करके मानव जाति का अस्तित्व कायम रखा जा सके.
 
उन्होंने कहा कि मधुमक्खियों को मानव जीवन का आधार कहा जाता है. मधुमक्खियां नष्ट हुई तो चार साल में मानव जीवन नष्ट हो जाएगा. जीवों की कई प्रजातियों के विलुप्त होने की दर दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है और प्रकाश को इस पर ध्यान देने की जरूरत है.

पाटिल ने बताया कि रासायनिक उर्वरक कई प्राणियों को मार रहे हैं, जिसके लिए जैविक उर्वरकों के उपयोग को कम करने की आवश्यकता होती है. भारत में तनों के नष्ट होने से देश में विदेशों में जलकुंभी के पौधों की संख्या बढ़ती जा रही है. शहर और गांव में लगा यह पौधे पानी को प्रदूषित कर रहे हैं. इसके प्रति जनता को जागरूक होने की जरूरत है.
 
उन्होंने बताया कि मांगुर एक ऐसी मछली है, जिसे प्रतिबंधित किया गया है. क्योंकि यह उतना ही खतरनाक है, लेकिन यह अभी भी ज्यादा जन जागरूकता नहीं है. कई पशु और पक्षी प्रजातियां विलुप्त हो रही हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए मनुष्य के लिए घास के मैदान बनाना बहुत जरूरी है.

विश्व मधुमक्खी दिवस

MUAFS के कुलपति आशीष पाटुरकर ने कहा कि 22 मई जैव विविधता दिवस है, लेकिन आज ‘विश्व मधुमक्खी दिवस’ है. भारत में दुनिया के केवल 50% जानवर हैं. इसे संरक्षित और पोषित करने में समय लगता है. पर्यावरण, मनुष्यों, प्राणियों और जानवरों के बीच समन्वय करना महत्वपूर्ण है. प्रवासी पक्षियों से भी कई संक्रामक रोग होने की आशंका है. इसलिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि पर्यावरण प्रदूषित न हो. इसके लिए परिवार से जैव विविधता के संरक्षण और संरक्षण की सीख लेनी चाहिए. साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता पैदा करने की जरूरत है.

प्रधानाचार्य डॉ. सोना कुमार ने जैव विविधता के संरक्षण और संरक्षण पर मार्गदर्शन प्रदान किया. उन्होंने इस विषय पर अंग्रेजी में किताब लिखी है. उन्होंने कहा कि जल्द ही हिंदी और मराठी संस्करण जारी किए जाएंगे, ताकि आम जनता को इस संबंध में कानून के बारे में पता चल सके. उनका मत था कि मानव जाति की रक्षा के लिए जैव विविधता अधिनियम को लागू करने की आवश्यकता है. 

मुख्य संरक्षक प्रवीण श्रीवास्तव ने अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि जैव विविधता अधिनियम 2002 में पारित किया गया था और इस अधिनियम के आधार पर जैव विविधता बोर्ड की स्थापना की गई थी. इसके तहत सरकार ने अभिनव पहल को लागू करने का फैसला किया है. राज्य में पुणे और नागपुर में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस का आयोजन किया गया है. इसके तहत संरक्षण और संरक्षण के कार्य प्रमुखता से किए जाएंगे. यह कानून तब तक चलेगा, जब तक मानव जीवन मौजूद है. उन्होंने कहा कि एनजीओ को इस भागीदारी को पंजीकृत करना चाहिए. 

व्यक्तियों और संगठनों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया

विदर्भ के सभी जिलों में जैव विविधता के संरक्षण और संरक्षण के लिए काम करने वाले व्यक्तियों और संगठनों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया. इनमें पौध संरक्षण – अनंत बोए (कटोल), पारंपरिक बीज – एविल बोरकर (भंडारा), अविनाश कालबंधे (उमरखेड़), चावल संरक्षण के अनुकूल खोबरागड़े (नागभीड़), गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में भैंस का संरक्षण – ओमप्रकाश कालोकर (आर.वी.), प्रफुल्ल सावरकर – अमरावती, देवद्र राउत (गोंदिया), नरेश चर्दे और चामू (नागपुर), राधेश्याम वैद्य (सकोली), रमेश और पुष्पराज साकरकर, वसंत फूटाने (अमरावती), धनंजय सायर, मौजीलाल भीलावेकर, दीपक बर्डे, पक्षी प्रजनन – सावन बाहेकर (गोंदिया), अंबरीश घाटटे, होमेश्वर डांगोरे, माया बोरकर, गाय प्रजनन- दादाराव अर्बत, सुरेश बस्तावर, मारुति संगवर गजानन काले शामिल थे. 

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई. इस अवसर पर श्रीमती डॉ. सोना कुमार की पुस्तक का विमोचन किया गया. दो सत्रों में आयोजित इस कार्यक्रम को कई गणमान्य व्यक्तियों द्वारा निर्देशित किया गया. इस दौरान कई जैव विविधता प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विदर्भ के किसान, वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए.

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