प्याज निर्यात बंदी का विरोध : शेतकरी संघटना की ‘राख-रांगोली’

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प्याज निर्यात
सांसद रामदास तड़स को विरोध में प्याज की राख-रांगोली भेंट करते शेतकरी संघटना, वर्धा के किसान. 

सांसद रामदास तड़स को जिम्मेदार माना, भेंट किया प्याज की “राख-रांगोली”

*आश्विन शाह,
वर्धा :
महाराष्ट्र शेतकरी संघटना की वर्धा जिला शाखा ने यहां द्वारा सांसद रामदास तड़स के निवास के सामने प्याज निर्यात बंदी का कड़ा विरोध जताया. केंद्र सरकार के इस निर्णय के विरोध में सरकार के आदेश की होली जला कर प्याज की राख-रांगोली आंदोलन किया गया.
प्याज निर्यात
किसानों का बड़ा आर्थिक नुकसान 
बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा संसद में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पारित तीन कृषि विधेयकों के विरोध में विरोधी दल एकजुट हो रहे हैं. उनका आरोप है कि सरकार ने ये 3 विधेयक पर लोकसभा व राज्यसभा में विस्तृत चर्चा का विपक्ष को अवसर नही दिया. दूसरी ओर प्याज उत्पादक किसानों को मुश्किल से अभी उचित कीमत मिलना शुरू हुआ ही था कि सरकार ने प्याज की निर्यात पर बंदी लागू कर दी. इससे प्याज उत्पादक किसानों का बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है.

सांसद भी किसानों के नुकसान में दोषी 
किसानों का मानना है कि इसका किसी भी सांसद ने विरोध नहीं करके किसानों का नुकसान करने में बराबर की भागीदारी निभाई है, इसलिए वे भी दोषी हैं. शेतकरी संघटना उनके विरोध स्वरूप उनके घरों के समक्ष आंदोलन कर रही है. इसी सिलसिले में वर्धा जिले के किसानों ने भी सांसद रामदास तड़स के निवास पर प्रदर्शन किया, विरोधी नारे लगाए और उन्हें प्याज और प्याज की राख भेंट कर विरोध जताया.

केंद्र सरकार ने पिछले 14 सितंबर को प्याज की सभी किस्मों के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी  है. सरकार ने यह फैसला देश में प्याज की उपलब्धता को बढ़ाने और घरेलू बाजार में इसकी लगातार बढ़ती कीमत को नियंत्रित करने के लिए लिया है.

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की ओर से 14 सितंबर को जारी एक अधिसूचना में कहा गया, ‘प्याज की सभी किस्मों के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाता है.’ डीजीएफटी वाणिज्य मंत्रालय का अंग है, जो आयात-निर्यात संबंधी मामलों को देखता है.

बता दें कि दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश के चलते इस बार प्याज की फसल को खासा नुकसान हुआ था. इसके चलते घरेलू बाजार में प्याज की कीमतें भी काफी बढ़ रही थीं. थोक मंडियों में आठ अगस्त के बाद से प्याज की कीमत बढ़ रही थी.

पिछले साल भी लगाया था प्रतिबंध
इससे पहले सरकार ने सितंबर 2019 में भी प्याज के निर्यात पर रोक लगाई थी. उस समय मांग और आपूर्ति में बहुत ज्यादा अंतर आ जाने की वजह से प्याज की कीमतें आसमान छूने लगी थीं. महाराष्ट्र जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में बारिश और बाढ़ के चलते प्याज की फसल को भारी नुकसान पहुंचा था.

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