झारखंड की इज्‍जत नीलाम हो रही है दिल्‍ली के बाजार में

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झारखंड
APN न्यूज डॉट कॉम ने सितंबर 2015 में यूट्यूब के माध्यम से लड़कियों की तस्करी और उन्हें दिल्ली में बेचे जाने की खबर प्रसारित की थी.

हर दिन यहां 30 बेटियों की लगाई जाती है बोली

रांची : गरीबी और बेरोजगारी की मार झेल रहे झारखंड से प्रति वर्ष करीब 10 हजार लड़कियां व महिलाएं आज भी बिक रही है. पता चला है कि इनमें से अधिकतर मानव तस्करी की शिकार होती हैं. इन्हें बहला-फुसलाकर अच्छे वेतन पर काम दिलाने का झांसा देकर बड़े शहरों में दलाल बेच देते हैं.

बताया जाता है कि दिल्ली, झारखंड की इन महिलाओं की खरीद-बिक्री की सबसे बड़ी मंडी बनी हुई है. साथ ही मुंबई, यूपी, पंजाब, पश्चिम बंगाल आदि प्रदेशों में भी झारखंड की बेटियों की बोली लग रही है.

देश के अलावा नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका तथा पाकिस्तान स्थित अपने कार्यालयों से 47 सहयोगी संस्थाओं के साथ कार्यरत गैर सरकारी संगठन एक्शन अगेंस्ट ट्रैफिकिंग एंड सेक्सुअल एक्सप्लायटेशन (AATSA) ने पिछले कुछ वर्षों से यह तथ्य जुटा रहा है.  

आदिवासी इलाकों पर दलालों की खास नजर
AATSA के अनुसार झारखंड के सुदूर आदिवासी बहुल इलाकों में मानव तस्कर कहीं अधिक सक्रिय हैं. सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, रांची, पाकुड़, साहेबगंज, दुमका, गोड्डा तथा गिरिडीह जैसे आदिवासी बहुल इलाकों से यह धंधा अन्य क्षेत्रों से कहीं अधिक होता है.  

बहकावे, दबाव व झांसे में आकर फंस रहीं हैं महिलाएं
AATSA के आंकड़ों से पता चलता है कि ऐसे दलालों के जाल में फंसने वाली झारखंड की लड़कियों और महिलाएं बिचौलियों के बहकावे में, पारिवारिक दबाव में, सहेलियों के साथ और अधिकांश परिवार के अन्य सदस्यों के साथ चली जाती हैं. इनमें कुछ 20 वर्ष से कम आयु वर्ग की होती हैैं, जबकि कुछ 20 से 25 आयु वर्ग की तथा कुछ 25 से अधिक आयु वर्ग की होती हैं.  

10 फीसद महिलाएं लौटकर नहीं आतीं
 AATSA  के आंकड़ों के अनुसार विभिन्न माध्यमों से दूसरे प्रदेशों के लिए पलायन करने वाली तकरीबन 10 फीसद महिलाएं लौट कर आ भी नहीं पातीं. उनका कुछ अता-पता भी नहीं चलता. शेष महिलाएं किसी न किसी रूप में शारीरिक व मानसिक शोषण की शिकार होती हैं. नौकरी की तलाश में जाने वाली हजारों महिलाएं इज्जत लुटा कर ही लौट पाती हैं.

सरकार और राजनीतिक दल बने हुए हैं अनजान
यह सिलसिला काफी पुराना है. राज्य की सभी पिछली सरकारों और राजनीतिक दलों को भी इस बात की जानकारी रही है. लेकिन इसे रोकने अथवा जागरूक करने के लिए गंभीरता से किसी ने विशेष कुछ नहीं किया. राज्य की नई हेमंत सोरेन सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाती है, यह देखना है. राजनीतिक दल भी आवाज उठाते हैं या नहीं, यह भी आने वाला समय बताएगा. सरकार के लिए सबसे जरूरी है कि वह जल्द से जल्द राज्य में रोजगार के अवसर पैदा करे, ताकि आजीविका के लिए महिलाएं और लड़कियों को ऐसे झांसे में आने से बच सके.

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