संन्यास नहीं लेंगे, फिर भी धोनी पर बढ़ रहा है दवाब

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धोनी

समीक्षक-
वक्त-वक्त की बात है.
क्रिकेट में महानता की ऊंचाई को छू चुके पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अब अपने ऊपर भी वही दवाब झेल रहे हैं, जैसा कि अपनी कप्तानी के शुरुआती दिनों में दिग्गजों को दिया था.

आज एक ओर वही दिग्गज हैं, जो उनकी तरफदारी करते हुए उन्हें संन्यास नहीं लेने की सलाह दे रहे हैं तो दूसरी ओर अनेक पूर्व खिलाड़ी उन्हें उनके पुराने फैसलों की याद दिलाते हुए उन्हें नए उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए मैदान छोड़ने की सलाह भी दे रहे हैं.

हालांकि संन्यास नहीं ले रहे धोनी
बीसीसीआई के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, “धोनी ने वेस्टइंडीज दौरे के लिए खुद को अनुपलब्ध बताया, क्योंकि वह अगले दो महीने अपने अर्धसैनिक रेजिमेंट के साथ बिताएंगे.” अधिकारी ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि धोनी अभी क्रिकेट से संन्यास नहीं ले रहे हैं.

वेस्टइंडीज दौरे पर नहीं जाएंगे
शीर्ष अधिकारी ने कहा, “हम तीन चीजें कहना चाहते हैं. वह अभी क्रिकेट से संन्यास नहीं ले रहे हैं. वह अपने अर्धसैनिक रेजिमेंट की सेवा के लिए दो महीने का विश्राम ले रहे हैं, जो उन्होंने बहुत पहले तय किया था. हमने कप्तान विराट कोहली और चयन समिति के प्रमुख एम.एस.के. प्रसाद को उनके फैसले से अवगत करा दिया है.”

भूतकाल के फैसले बन रहे फांस
लेकिन अपने शुरुआती दौर में बतौर भारतीय कप्तान उन्होंने कड़े फैसले लेते हुए कई स्टार सीनियर खिलाड़ियों को हटाया था- और अब खुद उम्र और उनका खेल उनके साथ नहीं रहा. उसी का हवाला देते हुए सलाह दी जा रही है कि अब वक्त है कि वह खुद पर और भारतीय क्रिकेट के भविष्य पर कोई फैसला करें.

बताया जाता है कि अपने करियर में दो बार- 2008 और 2012 में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने सीनियर खिलाड़ियों को लेकर कड़े और असहज करने वाले फैसले किए. इनमें देश के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में शामिल, सौरभ गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीरेंदर सहवाग भी शामिल थे.

तब धोनी के दिमाग में आने वाला विश्व कप शामिल था. अब ऐसा नहीं लगता कि महान विकेटकीपर बल्लेबाज धोनी 2023 के विश्व कप का हिस्सा रह सकेंगे. ऐसे में वक्त आ गया है कि वह भी अब दूसरों के लिए रास्ता बनाएं?

गौतम गंभीर दिला रहे हैं उन दिनों की याद!
भारतीय टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर उन लोगों में से हैं, जो ऐसी राय रखते हैं. गंभीर का कहना है कि धोनी जब कप्तान थे, तब उन्होंने भविष्य की योजनाओं का हवाला देते हुए युवा खिलाड़ियों को तैयार किया था. अब समय आ गया है कि भारतीय चयनकर्ता धोनी को लेकर ‘व्यावहारिक फैसला’ लें. एक बार फिर युवा खिलाड़ी इंतजार में हैं.

जब गौतम से धोनी ने की थी बात
गंभीर ने बताया, ‘भविष्य के बारे में विचार करना जरूरी है, और जब धोनी कप्तान थे तो उन्होंने भविष्य में निवेश किया. मुझे याद है कि ऑस्ट्रेलिया में धोनी ने मुझसे कहा था कि मैं, सचिन और सहवाग एक साथ सीबी सीरीज में नहीं खेल सकते, क्योंकि यहां मैदान बहुत बड़े हैं.’

धोनी को व्यावहारिक होने जरूरत
गंभीर ने कहा, ‘वर्ल्ड कप के लिए धोनी ने युवा खिलाड़ियों की मांग की. ऐसे में भावुक होकर सोचने के बजाए व्यावहारिक होने की जरूरत है. यह युवा खिलाड़ियों को तैयार करने का वक्त है. फिर चाहे वह ऋषभ पंत, संजू सैमसन, इशान किशन या कोई अन्य विकेटकीपर हो. जिसमें भी क्षमता दिखाई दे उसे विकेटकीपर बनाया जाना चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘एक युवा विकेटकीपर को एक-डेढ़ साल तक आजमाना चाहिए, अगर वह प्रदर्शन नहीं करता है तो फिर अन्य को मौका दिया जाना चाहिए. तभी आपको पता चल पाएगा कि अगले विश्व कप में आपका विकेटकीपर कौन होगा.’

क्रिकेटर से राजनेता बने गौतम गंभीर धोनी को सर्वश्रेष्ठ भारतीय कप्तानों में से मानते हैं. लेकिन साथ ही उनका कहना है कि “टीम की पूरी कामयाबी का श्रेय उन्हें देना गलत है और नाकामयाबी पर सिर्फ उनकी आलोचना करना भी सही नहीं है.”

सचिन भी इस दौर से गुजर चुके हैं
धोनी को लेकर यह सारी बातें अब उनके प्रदर्शन में लगाता आरही गिरावट के कारण उठनी शुरू हुई हैं. ऐसे हालात सचिन तेंदुलकर को भी झेलना पड़ा है. जब उनका बल्ला धीमा पड़ने लगा तो उनके लिए भी कुछ ऐसी ही बातें उठने लगीं थीं. उन्हें भी आलोचनाओं के ऐसे ही दौर से गुजरना पड़ा है.

महेंद्र सिंह धोनी के बारे में भी जब ऐसी बातें सामने आने लगी हैं तो फैसला भी उन्हें ही लेना है. उनके जैसे अनुभवी और दिग्गज खिलाड़ी की मैदान में उपस्थिति अभी भी दर्शकों में रोमांच पैदा करता है.

धोनी ने कैसे किया सीनियर्स को बाहर
ऑस्ट्रेलिया में त्रिकोणीय सीरीज से पहले धोनी ने एक बोल्ड फैसला लेते हुए चयनकर्ताओं को वनडे फॉर्मेट से सौरभ गांगुली और राहुल द्रविड़ को ड्रॉप करने को कहा था. धोनी का तर्क था कि ये खिलाड़ी अच्छे फील्डर नहीं हैं. भारतीय टीम ने वह टूर्नमेंट जीता और गौतम गंभीर व सुरेश रैना जैसे खिलाड़ियों के साथ विश्व कप 2011 की नींव रखी गई.

2012- रोटेशन पॉलिसी नहीं चली
2012 में सीबी सीरीज में धोनी ने श्री लंका के खिलाफ आखिरी लीग मैच तक सचिन तेंदुलकर, वीरेंदर सहवाग और गौतम गंभीर में से सिर्फ दो खिलाड़ियों को ही मौका दिया. इसके पीछे भी उनके ‘धीमे फील्डर’ होने का तर्क दिया गया. इस खबर के बाद टीम में कलह की बातें सामने आने लगीं. यह दांव उल्टा पड़ा क्योंकि टीम इंडिया फाइनल के लिए क्वॉलिफाइ नहीं कर सकी.

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