विश्वसनीयता का संकट : शरद पवार से एनसीपी में भी असंतोष, कांग्रेस नाराज

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महंगा पड़ रहा विपक्षी एकता के साथ भाजपा से संतुलन बनाने की राह पर चलना

मुंबई : एनसीपी प्रमुख शरद पवार की ‌विश्वसनीयता अपनी पार्टी में ही संदिग्ध हो चली है. एक ओर विपक्ष की एकता और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी से संतुलन बनाने की शरद पवार की दोहरी नीति के कारण उनकी ‌विश्वसनीयता को अब उनकी पार्टी एनसीपी में ही शक की नजर से देखा जा रहा है.

तारिक अनवर के बाद मुनाफ हकीम ने भी पार्टी छोड़ी
एनसीपी की स्थापना के समय से पवार के साथ रहे तारिक अनवर के इस्तीफे के बाद महाराष्ट्र में पार्टी के नेता और राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष मुनाफ हकीम ने भी पार्टी के सभी पदों के साथ साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है. माना जा रहा है कि यह तो अभी शुरुआत है. आने वाले दिनों में एनसीपी में साइड लाइन किए जा चुके कई अन्य नेता भी एनसीपी छोड़ सकते हैं.

कांग्रेस में भी शक और नाराजगी
शरद पवार को लेकर कांग्रेस को भी लगने लगा है कि आगामी चुनाव में कहीं शरद पवार और एनसीपी उनकी पार्टी के लिए ही बोझ न बन जाए. कांग्रेस के एक बड़े नेता ने कहा कि शरद पवार ने राफेल पर मोदी के पक्ष में बयान देकर मोदी के खिलाफ साझा विपक्ष की कोशिशों को खराब करने का काम किया है. लेकिन शरद पवार बिना सोचे-समझे कुछ नहीं कहते. इससे यह शक तो पैदा होता ही है कि कहीं शरद पवार ने विपक्षी एकता की कोशिशों को खराब करने की सुपारी तो नहीं ले ली है.

राहुल की लोकप्रियता से डर तो नहीं लगने लगा…!
महाराष्ट्र कांग्रेस में मंत्री रहे एक नेता ने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर आकर शरद पवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की लोकप्रियता से डर लगने लगा है. जब राहुल ने खुद को पीएम का उम्मीदवार बताया था, तब भी सबसे पहले शरद पवार अप्रत्यक्ष रूप से विरोध में सामने आए थे. तब पवार ने बयान दिया था कि प्रधानमंत्री कौन होगा, यह इस बात से तय होगा कि किसे कितनी सीटें मिलेंगी.

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